स्वास्थ्य मंत्रालय :-दवाओं पर अब क्यूआर कोड से होगी निगरानी, नकली दवाओं पर लगेगी लगाम
नई दिल्ली 25 जून 2026
केंद्र सरकार ने दवा उद्योग जगत को तैयारी का समय देते हुए इन नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है। टीकों, कैंसर रोधी तथा मादक एवं मनोरोग संबंधी दवाओं के लिए यह व्यवस्था 1 जुलाई 2027 से लागू होगी, जबकि एंटीबायोटिक दवाओं पर क्यूआर कोड अनिवार्यता 1 जुलाई 2028 से प्रभावी होगी।
केंद्र सरकार ने दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन करते हुए कई महत्वपूर्ण दवाओं को क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग व्यवस्था के दायरे में शामिल किया है। इसके तहत अब टीके, एंटीबायोटिक (रोगाणुरोधी), कैंसर रोधी दवाएं तथा मादक एवं मनोरोग संबंधी दवाओं पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य होगा।
नई व्यवस्था के अनुसार दवा निर्माताओं को दवा की पैकेजिंग पर बारकोड या क्यूआर कोड अंकित करना होगा। मोबाइल या अन्य सॉफ्टवेयर की मदद से इस क्यूआर कोड को स्कैन कर दवा की वास्तविकता और उसके निर्माण संबंधी जानकारी की जांच की जा सकेगी।
क्यूआर कोड में दवा का नाम, निर्माता का नाम-पता, बैच नंबर, निर्माण और समाप्ति तिथि, लाइसेंस नंबर सहित अन्य आवश्यक जानकारियां उपलब्ध रहेंगी।
सरकार का कहना है कि इस कदम से दवाओं की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी और नकली या घटिया दवाओं की पहचान आसान होगी। इससे मरीजों को सुरक्षित और प्रमाणित दवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग और जीवाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) जैसी बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में भी सहायता मिलेगी।
गौरतलब है कि अभी तक यह व्यवस्था केवल देश के शीर्ष 300 दवा ब्रांडों तक सीमित थी, लेकिन नए संशोधन के बाद इसका दायरा काफी बढ़ा दिया गया है।
सरकार को उम्मीद है कि इससे बाजार में नकली दवाओं की बिक्री पर प्रभावी रोक लगेगी और मादक दवाओं की निगरानी भी मजबूत होगी, जिससे “नशा मुक्त भारत” अभियान को बल मिलेगा।
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