रायपुर-15 जून 2026
बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान को सुकमा जिले में प्रशासन की सक्रिय पहल से दो बड़ी सफलताएं मिली हैं, जहाँ महिला एवं बाल विकास विभाग और यूनिसेफ द्वारा चलाया जा रहा यह राज्यव्यापी जन-जागरूकता कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन ने कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन में दो नाबालिग बालिकाओं का बाल विवाह रुकवाकर उनके सुरक्षित और बेहतर भfuture की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
पहला मामला धुरगुड़ा-पोगाभेज्जी गांव का है, जहां स्थानीय परंपरा के अनुसार 17 वर्षीय बालिका का विवाह तय किया जा रहा था, लेकिन सूचना मिलने पर महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और अधिकारियों ने परिजनों को बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने पर समझाइश के बाद दोनों पक्ष विवाह स्थगित करने के लिए सहमत हो गए।
दूसरा मामला सिरसेट्टी के पांडुरूपारा का है, जहां 15 जून को एक बाल विवाह आयोजित होना था और विवाह की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं, लेकिन प्रशासनिक टीम ने परिजनों से संवाद कर बालिका के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी देने पर परिवार ने सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए विवाह को स्थगित करने का निर्णय लिया।
दोनों मामलों में संबंधित परिवारों से घोषणा-पत्र एवं पंचनामा तैयार कराया गया तथा उन्हें बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों से अवगत कराया गया, जिसमें अधिकारियों ने बताया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इससे बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा तथा विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
इन मामलों ने साबित किया है कि जनजागरूकता, संवेदनशील संवाद और प्रशासनिक प्रतिबद्धता के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है, और जिला प्रशासन के प्रयासों से दो बेटियों को अपने सपनों को पूरा करने, शिक्षा जारी रखने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने में सहयोग करें तथा ऐसी किसी भी जानकारी की सूचना तत्काल संबंधित विभाग को दें, क्योंकि प्रशासन का उद्देश्य प्रत्येक बालिका को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है।