असर बेअसर: मानसून की खबर –शुरूआती बारिश गायब!क्या आने वाले महीनों में होगा जल संकट?
मौसम डेस्क – 16 जून 2026
मानसून इतना डरा क्यों रहा है और इतना कमजोर क्यों दिख रहा है इसे मौसम विभाग के अनुसार और मानसून का असर खबर पर देखें।जून का महीना आधा बीत चुका है, लेकिन इस बार मानसून का मिजाज कुछ अजीब है। जो बादल जून की शुरुआत में उम्मीद जगाकर आए थे, वे अचानक गायब हो गए। खेत सूखे पड़े हैं, किसान आसमान की तरफ ताक रहे हैं और मौसम वैज्ञानिक उन हवाओं का पीछा कर रहे हैं जो मानसून को “ब्रेक” लगा रही हैं।
आंकड़े जो डराते हैं
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 4 जून से 15 जून के बीच पूरे देश में केवल 19.2 मिमी** बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्यतः 53.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी।
यानी देश इस समय 64% के भारी बारिश घाटे का सामना कर रहा है।
IMD के रेनफॉल मैप में मध्य, दक्षिणी और पूर्वी भारत के विशाल हिस्से पीले और लाल रंगों में रंगे हैं — जो सूखे जैसे गंभीर हालात की चेतावनी देते हैं।
अंतरिक्ष से भी दिखा खतरा
15 जून को भारत के INSAT-3DS सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों ने स्थिति की गंभीरता को और उजागर कर दिया। आमतौर पर इस मौसम में भारत का नक्शा बादलों की घनी सफेद चादर से ढका रहता है, लेकिन इस बार प्रायद्वीपीय और मध्य भारत बिल्कुल साफ और सूखा नजर आ रहा है। बादलों का वह पारंपरिक रूप इस बार कहीं दिखाई नहीं दे रहा।
आखिर मानसून हांफ क्यों रहा है?
सबसे बड़ा सवाल यही है — जब मानसून ने कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में सही समय पर दस्तक दी थी, तो अचानक यह कमजोर कैसे पड़ गया?
जवाब समुद्र में नहीं, आसमान में छुपा है।
हवाओं की आपसी जंग
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार ऊपरी वायुमंडल में दो हवाओं के बीच टकराव मानसून की रफ्तार को रोक रहा है —
ईस्टरली जेट स्ट्रीम(पूर्वी हवाएं) — यही मानसून का असली इंजन है। यह हवा भारत के ऊपर हवा को ऊपर खींचती है, जिससे घने बादल बनते हैं और देशभर में बारिश होती है।
वेस्टरली जेट स्ट्रीम (पश्चिमी हवाएं) — इस बार यह अपनी सामान्य जगह से बहुत अधिक दक्षिण की ओर खिसक आई है और ईस्टरली जेट के रास्ते में रुकावट बन गई है।
नतीजा यह है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में नमी से भरे बादल मौजूद हैं, लेकिन वे भारत की मुख्य भूमि पर बरस नहीं पा रहे।
क्या आगे होगा जल संकट?
यदि जुलाई में भी यही स्थिति रही, तो चिंताएं कई मोर्चों पर गहरा सकती हैं —
खरीफ फसलों की बुआई — धान, मक्का, सोयाबीन जैसी फसलों की बुआई का सही समय निकलता जा रहा है
जलाशयों का स्तर — देश के प्रमुख बांध और जलाशय अभी से कम भराव पर हैं
पीने के पानी का संकट — शहरों और गांवों में गर्मियों से पहले से चल रही पानी की किल्लत और बढ़ सकती है
बिजली उत्पादन— जलविद्युत परियोजनाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है
राहत की उम्मीद कब?
मौसम विभाग के अनुसार यह स्थिति स्थायी नहीं है। जैसे ही ऊपरी वायुमंडल में हवाओं का यह असंतुलन ठीक होगा, मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है। लेकिन जून में हुई देरी की भरपाई अगले महीनों में कितनी हो पाएगी — यह सबसे बड़ा सवाल है।
मौसम पर नजर रखें: IMD अगले 48-72 घंटों में मानसून की स्थिति को लेकर नया अपडेट जारी कर सकता है। किसान भाई अभी बुआई के निर्णय में जल्दबाजी न करें।
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