साइबर सुरक्षा/ विशेष रिपोर्ट – 30 मई 2026
देश में ऑनलाइन नौकरी की तलाश करने वाले लाखों युवाओं के लिए एक नया और खतरनाक साइबर खतरा तेजी से सामने आ रहा है। गृह मंत्रालय (MHA) के तहत कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की विशेष इकाई ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि साइबर अपराधी अब नकली नौकरी इंटरव्यू और फर्जी भर्ती प्रक्रियाओं के जरिए लोगों की बायोमेट्रिक पहचान चुराने की कोशिश कर रहे हैं।
नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (NCTAU) ने कहा है कि अपराधी आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर जाल बिछा रहे हैं। यह प्रक्रिया देखने में पूरी तरह असली भर्ती प्रक्रिया जैसी लगती है। इनका मकसद नौकरी तलाश रहे लोगों से उनकी निजी और संवेदनशील जानकारी हासिल करना है।
फर्जी भर्ती प्रक्रिया की पहचान कैसे करें?
गृह मंत्रालय की साइबर विंग ने कुछ महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत (Red Flags) बताए हैं, जिन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है:
संदिग्ध ईमेल और डोमेन:
अगर भर्ती से जुड़ा ईमेल किसी सामान्य Gmail या Yahoo अकाउंट से भेजा गया है, तो सावधान हो जाएं। प्रतिष्ठित कंपनियां हमेशा आधिकारिक डोमेन का उपयोग करती हैं।
जरूरत से ज्यादा जानकारी मांगना:
अगर इंटरव्यू के शुरुआती चरण में ही आधार, बैंक डिटेल्स या बायोमेट्रिक डेटा मांगा जा रहा है, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है।
अत्यधिक दबाव बनाना:
फर्जी भर्ती करने वाले लोग उम्मीदवारों को सोचने का समय नहीं देते। वे जल्दी निर्णय लेने के लिए दबाव डालते हैं।
कंपनी की जानकारी अस्पष्ट होना:
अगर कंपनी की वेबसाइट अधूरी है, सोशल मीडिया उपस्थिति नहीं है या संपर्क जानकारी संदिग्ध लग रही है, तो सावधान रहें।
वीडियो वेरिफिकेशन पर जोर:
अनावश्यक फेसियल स्कैनिंग या आंखों की पहचान की मांग साइबर जाल का हिस्सा हो सकती है।
डीपफेक तकनीक बन रही है नया हथियार
AI आधारित डीपफेक तकनीक साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बनती जा रही है। इस तकनीक से किसी व्यक्ति का नकली वीडियो या ऑडियो तैयार किया जा सकता है। अगर अपराधियों के पास किसी व्यक्ति की पर्याप्त वीडियो फुटेज और आवाज मौजूद हो, तो वे उसके नाम से फर्जी कॉल, वीडियो संदेश या वित्तीय अनुरोध कर सकते हैं।
दुनिया भर में ऐसे मामले बढ़ रहे हैं जहां डीपफेक का इस्तेमाल कर लोगों के बैंक खातों से पैसे निकाले गए या रिश्तेदारों को ठगा गया। भारत में भी इस तरह के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और MHA की साइबर इकाइयां इसे बड़ी चुनौती के रूप में देख रही हैं।


