डिजिटल खबर – 7 मई 2026
108 सीटें जीतीं, सबसे बड़ी पार्टी बने — फिर भी CM की कुर्सी ‘दावे’ की शुरुआत ।
तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार की शाम एक ऐसा दृश्य बना जो इतिहास की किताबों में दर्ज होगा — एक फिल्म स्टार, जिसने महज तीन साल पहले पार्टी बनाई, राज्यपाल के दरवाजे पर सरकार बनाने का दावा लेकर खड़ा था। लेकिन राजभवन के भीतर से आ रहे संकेत बता रहे हैं कि ‘थलापति’ का असली इम्तिहान अभी शुरू हुआ है — पर्दे पर नहीं, विधायकों की गिनती में।
बहुमत का गणित — जीत बड़ी, बहुमत अधूरा
234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए चाहिए 118 सीटें। TVK के पास हैं 108— यानी 10 का फासला।यह फासला छोटा लगता है, लेकिन तमिलनाडु की जातीय, क्षेत्रीय और वैचारिक राजनीति में हर एक विधायक एक अलग समीकरण है।TVK (विजय) 108 सबसे बड़ी पार्टी, दावेदार |
कांग्रेस ने समर्थन का “संकेत” दिया है — लेकिन शर्तों के साथ। वे शर्तें क्या हैं, यह अभी सार्वजनिक नहीं है। राजनीति में शर्तें अक्सर मंत्रालय, नीति या वैचारिक समझौते की भाषा में बोली जाती हैं।
राज्यपाल की चुप्पी — संवैधानिक सतर्कता या राजनीतिक संदेश?
विजय ने राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर बहुमत साबित करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा है।
खबर चैनल /सूत्रों के अनुसार राज्यपाल अभी संतुष्ट नहीं हैं कि TVK पर्याप्त संख्याबल जुटाने में सक्षम है।यहां एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठता है —क्या राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका देने से इनकार कर सकते हैं?
तमिलनाडु का सिनेमाई राजनीति का इतिहास — और उसका असली सबक “तमिलनाडु में नेता पैदा नहीं होते, बनाए जाते हैं — और यह काम सिनेमा करता है।एमजीआर ने 1977 में AIADMK बनाई और पहले ही चुनाव में सत्ता पाई।जयललिता को वर्षों संघर्ष करना पड़ा। रजनीकांत राजनीति की दहलीज तक आए और पीछे हट गए।
विजय की कहानी इन सबसे अलग है — उन्होंने पार्टी बनाने के तीन साल के भीतर 108 सीटें जीती हैं। यह निस्संदेह असाधारण है।लेकिन एमजीआर को भी पहले चुनाव में बहुमत मिला था — विजय को नहीं मिला। यही फर्क है जीत और सत्ता के बीच।
अगले दो हफ्ते में चलेगी असली परीक्षा
Tvk नेता विजय के सामने तीन रास्ते हैं:
— कांग्रेस और वामपंथी दलों को मिलाकर 118 का जादुई आंकड़ा छू लें। इसके लिए कांग्रेस की शर्तें माननी होंगी।
— किसी निर्दलीय या छोटे दल के विधायक को साथ लाएं। तमिलनाडु में यह प्रक्रिया अक्सर विवादास्पद हो जाती है।
— अगर बहुमत न जुटा सके तो राज्यपाल किसी दूसरे गठबंधन को मौका दे सकते हैं — और उस स्थिति में DMK एक बार फिर प्रासंगिक हो जाती है।
खबर सार: पर्दे पर हीरो, असल में अभी नायक बनना बाकी
थलापति विजय ने तमिलनाडु की राजनीति को हिला दिया है — यह सच है। 108 सीटें कोई छोटी उपलब्धि नहीं। लेकिन तमिलनाडु की सत्ता का दरवाजा हमेशा सिर्फ जनादेश से नहीं खुलता — यहां गठबंधन, समझौते और संख्याबल की तिजोरी का ताला अलग होता है।गुरुवार का शपथ समारोह होना है?
थलापति की जीत, पर ताज अभी दूर — 10 सीटों का फासला और राजनीति का पूरा खेल


