बेमेतरा, 22 अप्रैल 2026
कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं ने जिला कार्यालय के दिशा भवन सभाकक्ष में महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक लेकर विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन और जमीनी स्थिति की समीक्षा की।
स्वास्थ्य सेवाओं में सजगता और सतर्कता के निर्देश
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि महिलाएं और बच्चे समाज के अभिन्न अंग हैं। उनके स्वास्थ्य, पोषण और टीकाकरण पर विशेष ध्यान देते हुए समन्वय के साथ कार्य करना आवश्यक है, ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सके। उन्होंने दोनों विभागों को जमीनी स्तर पर बेहतर तालमेल स्थापित कर सेवाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में कुपोषण मुक्ति अभियान पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री सुपोषण योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। गंभीर कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कर उनके स्वास्थ्य में सुधार की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में रेडी-टू-ईट एवं गर्म भोजन की गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने, शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने और गर्भवती महिलाओं व बच्चों के नियमित टीकाकरण पर विशेष ध्यान देने को कहा। हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और जांच सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना एवं महतारी वंदन योजना की समीक्षा करते हुए पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ दिलाने और लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए गए। साथ ही डीबीटी के माध्यम से भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
कलेक्टर ने एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत किशोरी बालिकाओं एवं महिलाओं में आयरन-फॉलिक एसिड की गोलियों के नियमित वितरण के निर्देश दिए। फील्ड में कार्यरत एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समन्वय के साथ कार्य करने तथा पोषण ट्रैकर सहित ऑनलाइन पोर्टलों पर डेटा की शुद्ध और समय पर एंट्री सुनिश्चित करने को कहा गया।
आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि विभागीय समन्वय से शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। ‘वजन त्यौहार’ के आंकड़ों की भी समीक्षा कर कुपोषित बच्चों के चिन्हांकन पर चर्चा की गई।
कलेक्टर ने कार्यप्रणाली में अनुशासन और जवाबदेही पर जोर देते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए। उपस्थिति दर्ज नहीं करने और ड्यूटी में लापरवाही पाए जाने पर वेतन आहरण रोकने के निर्देश भी दिए गए।


