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Saturday, March 7, 2026

खास चर्चा: ‘करोड़पति चूहों’ की दावत और गिरती गाज!

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वे ‘खास चूहे’ जिन्हें न पिंजरे का डर है, न बिल्ली का… बस 7 करोड़ के धान का शौक है!”जन चौपाल 36 चौपाल से चौपाटी तक

कवर्धा/कबीरधाम_05/02/2026

ज्योतिपति: चश्मा ठीक करते हुए, गंभीर और दार्शनिक मुद्रा में।
ज्वाला: बेबाक, तेवर वाली और सिस्टम को आइना दिखाने वाला युवा_तुर्क दोनों चौपाल में बैठे चर्चा करने लगे।

ज्योतिपति: (लंबी सांस लेते हुए) ज्वाला, कलयुग अपनी चरम सीमा पर है। विज्ञान कहता है कि चूहा छोटा सा जीव है, लेकिन कवर्धा के जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा जी के ज्ञान ने जीव विज्ञान की परिभाषा ही बदल दी। 7 करोड़ का धान… और आरोप लगा दिया बेचारे छोटे से मूक प्राणी पर!
ज्वाला: (तंज कसते हुए) अरे ज्योतिपति जी, आप भी किन मासूमों की बात कर रहे हैं? ये कवर्धा के चूहे हैं, कोई आम चूहे नहीं! इन्हें धान की बोरी और तिजोरी के बीच का फर्क बखूबी पता है। 26 हजार क्विंटल धान डकार गए और डकार तक नहीं ली। लेकिन अफसोस, मिश्रा जी की ये ‘चूहा-थ्योरी’ रायपुर में बैठे साहबों को हजम नहीं हुई और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।

ज्योतिपति: बिल्कुल, निलंबन का आदेश तो जारी हो गया। लेकिन ज्वाला, सोचने वाली बात ये है कि जब 7 जनवरी को उन्होंने यह बयान दिया कि “मौसम की मार, दीमक और चूहों ने खेल किया है”, तो क्या उन्हें लगा था कि जनता इसे सच मान लेगी? 2026 में हम चांद पर बसने की सोच रहे हैं और यहां साहब चूहों को ‘करोड़पति’ बनाने पर तुले हैं।
ज्वाला: ज्योतिपति जी, असल खेल तो ‘चारभाठा’ संग्रहण केंद्र के पीछे छिपा है। वहां सीसीटीवी कैमरों के साथ जो छेड़छाड़ हुई, वो क्या चूहों ने की थी? या दीमक ने तारों को कुतर दिया था? प्रितेश पांडेय तो पहले ही नप चुके हैं, अब मिश्रा जी पर गाज गिरी है क्योंकि उन्होंने मीडिया में ‘भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना’ ज्ञान बांटा था।

ज्योतिपति: (कागज पलटते हुए) सही कहा। 3 फरवरी को जो निलंबन की कार्रवाई हुई, उसने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है। विपक्षी दल—चाहे कांग्रेस हो या जोगी कांग्रेस—सब सड़कों पर हैं। वे पूछ रहे हैं कि इन ‘दो पैरों वाले चूहों’ की तलाश कब होगी जो सिस्टम को भीतर ही भीतर खोखला कर रहे हैं?
ज्वाला: सीधी बात है ज्योतिपति, जब फाइलों में अनाज ज्यादा और गोदामों में कम होता है, तो अक्सर ‘चूहे’ ही काम आते हैं। पर इस बार चूहे भारी पड़ गए! मिश्रा जी घर बैठ गए हैं और फाइलें अब उनकी जगह बोल रही हैं। जनता देख रही है कि ये 7 करोड़ की कमी आखिर किसकी जेब की शोभा बनी है।

ज्योतिपति: खैर, प्रशासन ने जांच समिति तो बिठा दी है। अब देखना यह है कि जांच में ‘चूहे’ मिलते हैं या ‘चेहरे’।
ज्वाला: चेहरे ही मिलेंगे ज्योतिपति, बस चश्मा उतार कर देखने की जरूरत है!

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