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Saturday, March 7, 2026

तांत्रिक ने की पैसों की बारिश!!या दिखाया हमारी कमजोरी का विज्ञापन

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यह संवाद इस बात पर चोट करता है कि कैसे अंधविश्वास और नशे की लत समाज को खोखला कर रही है। रातों-रात बाजी पलटने का लालच ही ठगी का सबसे बड़ा कारण बनता है। हमें ‘चमत्कार’ नहीं, ‘जागरूकता’ की आवश्यकता है। जन चौपाल 36/चौपाल से चौपाटी तक।

बरगद के पेड़ के नीचे गांव की चौपाल पर ज्योतिपति बैठा अखबार पढ़ रहा है और तांत्रिक ने कैसे ललचा दिया युवक को उस खबर पर खोया हुआ।

ज्वाला: (गुस्से में मोबाइल फोन बेंच पर पटकते हुए) ज्योतिपति भैया, ये सब क्या हो रहा है हमारे राज्य में? एक तरफ हम मंगल ग्रह पर जाने की बात करते हैं और दूसरी तरफ ये तांत्रिक सरेआम ढाई लाख को ढाई करोड़ करने का दावा कर रहे हैं! मेरा खून खौलता है यह देखकर कि लोग कितने भोले हैं और मूर्ख भी आज भी लोग चमत्कार पर विश्वास करते है।

ज्योतिपति: ज्वाला, गुस्सा समाधान नहीं है। यह तंत्र-मंत्र का कारोबार तुम्हारी इसी ‘जल्दबाजी’ और ‘कम समय में बहुत कुछ पा लेने’ की भूख पर टिका है।
ज्वाला: (तमतमाते हुए) भूख क्यों न हो भैया? देखिए न, सरकारें शराब की दुकानें खोलकर युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही हैं, कमाई के चक्कर में घरों को उजाड़ रही हैं। जब चारों तरफ अंधेरा दिखता है, तो इंसान ऐसे ही किसी ‘चमत्कार’ की तलाश करता है। वो तांत्रिक वीडियो दिखा रहा था, नोटों की बारिश हो रही थी। मुझे लगा अगर एक बार बाजी मेरे हाथ आ गई तो, मेरा और मेरे गांव का भविष्य सुधर जाएगा।

ज्योतिपति: वही तो धोखा है! बिलासपुर के रतनपुर और बिल्हा की उस घटना को देखो। पाँच ठगों ने पंडित और तांत्रिक बनकर लोगों को फंसाया। उन्होंने ढाई लाख रुपये ठग लिए और जब पीड़ित को अहसास हुआ, तो बात मारपीट और लूटपाट तक पहुँच गई। आज वो तांत्रिक और उसे लूटने वाले, दोनों सलाखों के पीछे हैं। क्या बाजी पलटी? नहीं, बस तबाही हुई।

ज्वाला: (चिढ़कर) तो क्या हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें? पढ़े-लिखे अधिकारी और नेता भी तो इन्हीं तांत्रिकों के पास जाते हैं बुलाकर अपना घर दफ्तर और पार्टी कार्यालय बंधवाते है। जब सिस्टम ही ढोंग और आडम्बर पर चल रहा हो, तो एक आम युवा क्या करे?

ज्योतिपति: तंत्र-मंत्र कोई समाधान नहीं, बल्कि एक मानसिक गुलामी है। ये ढोंगी तांत्रिक जानते हैं कि हम छत्तीसगढ़िया लोग सीधे हैं। वे इसी का फायदा उठाते हैं। समाज की कुरीतियां—चाहे वो अंधविश्वास हो या शराब का बढ़ता चलन—तभी खत्म होंगी जब तुम जैसे युवा अपनी ऊर्जा ‘शॉर्टकट’ खोजने में नहीं, बल्कि सही दिशा में सवाल पूछने में लगाएंगे।
ज्वाला: (कुछ शांत होते हुए) आप सही कह रहे हैं भैया। ये जो ‘पैसों की बारिश’ का वीडियो है, ये दरअसल हमारी कमजोरी का विज्ञापन है। हमें इस तांत्रिक कारोबार की जड़ों पर प्रहार करना होगा।

ज्योतिपति: बिल्कुल! जब तक लालच जिंदा है, ये तांत्रिक फलते-फूलते रहेंगे। असली चमत्कार मेहनत और तर्क में है, किसी तांत्रिक के झोले में नहीं। छत्तीसगढ़ को इस ढोंग से बाहर निकालना अब तुम युवाओं की जिम्मेदारी है।

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