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Saturday, March 7, 2026

अपराध: नौकरी का झांसा देकर पीड़िता का शोषण

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ज्योतिपति ने अपनी पोटली समेटते हुए कहा, “ज्वाला, यह मामला सिर्फ एक युवती के साथ हुए अन्याय का नहीं है, बल्कि उस भरोसे के कत्ल का है जो आम जनता सरकारी तंत्र पर करती है। जब शासकीय आवासों का इस्तेमाल शोषण के अड्डों के रूप में होने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि समाज का नैतिक पतन चरम पर है।”जन चौपाल 36 चौपाल से चौपाटी तक

भिलाई छत्तीसगढ़ _03/02/2026

चौपाल की चर्चा: ज्योतिपति की व्यथा और ज्वाला का क्रोध
(ज्योतिपति ने हाथ में अखबार मरोड़ते हुए एक गहरी सांस ली। उनकी आंखों में गहरी निराशा और व्यवस्था के प्रति क्षोभ था। तभी ज्वाला अपनी चिर-परिचित आक्रामकता के साथ वहां पहुंचता है।)

ज्वाला: “क्यों ज्योतिपति? फिर ये माथा पकड़ के क्यों बैठे हो? क्या देख लिया इस कागज के टुकड़े में जो इतने गुमसुम हो? बताओ मुझे, नाम लो उस समस्या का… मैं अन्याय को जला राख कर दूंगा ऐसी व्यवस्था को जो तुम्हें परेशान करे!”

ज्योतिपति: (ठंडी आह भरकर) “ज्वाला, ये आग बाहर लगाने से कुछ नहीं होगा। यह आग तो भीतर लगनी चाहिए, उन हुक्मरानों के जमीर में जो रक्षक बनकर भक्षक बन गए हैं। देख रहे हो भिलाई की ये खबर? जिसे व्यवस्था का पहिया घुमाने के लिए ‘टाइम कीपर’ रखा गया था, उसी राजू कश्यप ने वक्त की गरिमा को ही कलंकित कर दिया।”

ज्योतिपति का विश्लेषण: रक्षक ही जब भक्षक बन जाए
ज्योतिपति ने अखबार के पन्नों पर उंगली रखते हुए ज्वाला को इस घृणित खेल के बारे में बताया:
नौकरी का झांसा, अस्मत का सौदा: पीडब्ल्यूडी का टाइम कीपर राजू कश्यप उर्फ कृपा शंकर, इस पूरे काले खेल का मास्टरमाइंड निकला। उसने एक मासूम युवती को सरकारी नौकरी का सपना दिखाया और उस सपने की आड़ में उसका शारीरिक शोषण शुरू किया। यह सिर्फ एक व्यक्ति का अपराध नहीं है ज्वाला, यह एक पूरा गिरोह है। राजू ने खुद शोषण करने के बाद पीड़िता को मत्स्य विभाग के रिटायर्ड कर्मी भीम नारायण पांडेय के पास धकेल दिया। इसके बाद ठेकेदार संजय पंडित ने उसे ‘नौकरी से निकालने’ का डर दिखाकर अपनी हवस का शिकार बनाया।

व्यवस्था की खामियों का फायदा: हैरानी की बात तो यह है कि राजू कश्यप विभाग में रसूख इस कदर रखता है कि अपने परिवार के नाम पर ठेकेदारी भी चला रहा है और अपने भाई को सरकारी आवास पर अवैध कब्जा भी दिला रखा है।
ज्योतिपति की टिप्पणी: “जब विभाग के भीतर ही भ्रष्ट तंत्र की जड़ें इतनी गहरी हों, तो न्याय की गुहार किसके पास लगाई जाए? बड़े अधिकारियों की चुप्पी भी अब संदेह के घेरे में है।”

ज्वाला का आक्रोश और वर्तमान स्थिति
ज्वाला: (गुस्से में लाल होकर) “तो क्या ये दरिंदे अब भी खुले घूम रहे हैं? पुलिस क्या कर रही है?”
ज्योतिपति: “पुलिस हाथ-पांव तो मार रही है ज्वाला। गोविंद सिंह नागवंशी जैसे कुछ लोग गिरफ्त में आए हैं, लेकिन मुख्य आरोपी राजू कश्यप, बीएन पांडेय और संजय पंडित अभी भी फरार हैं। विभाग में खलबली मची है, क्योंकि सबको डर है कि अगर जांच की आंच ऊपर तक पहुंची, तो कई सफेदपोश चेहरे बेनकाब हो जाएंगे।”

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