पीएम उषा फंड (PM-USHA) में वित्तीय अनियमितता पर छत्तीसगढ़ शासन की बड़ी कार्यवाही
रायपुर, 13 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए एक बड़ी प्रशासनिक कार्यवाही की है। विभाग ने नारायणपुर स्थित शासकीय आदर्श महिला महाविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में प्राचार्य समेत पांच प्राध्यापकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
पूरा मामला और कार्यवाही
यह पूरी कार्यवाही पीएम-उषा (PM-USHA) मद के तहत आवंटित राशि के उपयोग में की गई गड़बड़ी से जुड़ी है। जांच में पाया गया कि महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा सामग्री क्रय (Purchasing) के दौरान छत्तीसगढ़ वित्तीय नियम संहिता 2002 (संशोधित 2025) का उल्लंघन किया गया। बिना किसी निविदा (Tender) प्रक्रिया के बड़ी राशि की सामग्री खरीदी गई और प्रक्रियागत नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया।
निलंबन आदेश के तहत निम्नलिखित अधिकारियों को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9(1)(क) के अंतर्गत सस्पेंड किया गया है: डॉ. योगेंद्र पटेल (प्राचार्य)श्री भूषण जय गोयल (सहायक प्राध्यापक) श्री किशोर कुमार कोठारी (सहायक प्राध्यापक) श्री हरीश चंद बैद (सहायक प्राध्यापक) श्री नोहर राम (सहायक प्राध्यापक)आदेश के अनुसार, सभी निलंबित अधिकारियों का मुख्यालय क्षेत्रीय अपर संचालक, कार्यालय जगदलपुर (बस्तर) निर्धारित किया गया है। निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रथम दृष्टया दोष सिद्ध होने पर यह कार्यवाही की गई है। इस पूरे प्रकरण की अब विभागीय जांच (Departmental Inquiry) पृथक से की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध बर्खास्तगी जैसी और भी कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जा सकती है।
शासन ने कड़ा संदेश दिया है कि सरकारी योजनाओं के फंड में किसी भी तरह की पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


