नई दिल्ली, 11 जनवरी 2026:
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने शुक्रवार को युवाओं से इतिहास के बलिदानों से प्रेरणा लेते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। ‘विकसित भारत युवा नेता संवाद’ के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता महंगे दामों पर मिली है और अब समय है कि हम अतीत के अपमानों का ‘प्रतिशोध’ लें।
डोभाल ने ऐतिहासिक कष्टों का जिक्र करते हुए कहा, “हमारे पूर्वजों ने घोर अपमान सहा। गांव जलाए गए, मंदिर लूटे गए और लाखों को फांसी दी गई। हम मूक दर्शक बने रहे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘प्रतिशोध’ शब्द आदर्श नहीं लगता, लेकिन यह एक शक्तिशाली ऊर्जा है। हमें अपने अधिकारों, मूल्यों और विश्वासों पर आधारित एक महान भारत का निर्माण करना होगा।
भारत की प्राचीन सभ्यता को उन्नत व शांतिपूर्ण बताते हुए डोभाल ने चेतावनी दी कि सुरक्षा खतरों की अनदेखी ने कड़े सबक सिखाए हैं। “हमने कभी किसी के मंदिर नहीं तोड़े या लूटपाट नहीं की, लेकिन खतरों को नजरअंदाज किया। क्या हमने सबक सीखा? आने वाली पीढ़ियां यदि भूल गईं, तो यह देश की सबसे बड़ी त्रासदी होगी।”
उन्होंने भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का उदाहरण दिया। यह संवाद नई दिल्ली के भारत मंडपम में 11 से 12 जनवरी तक चल रहा है। इसका पहला संस्करण जनवरी 2025 में आयोजित हुआ था।
कार्यक्रम का संदर्भ: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हालिया हमलों के बीच डोभाल का यह बयान चर्चा में है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव पर केंद्रित है।


