डिजिटल मीडिया | 07/01/2026
भारतीय रेलवे हरित ऊर्जा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन बनकर पूरी तरह तैयार हो चुकी है और इसे पटरी पर उतारने से पहले अंतिम तकनीकी व सुरक्षा परीक्षण किए जा रहे हैं। यह अत्याधुनिक ट्रेन हरियाणा के जींद पहुंच चुकी है, जहां रेलवे के अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO), लखनऊ की विशेषज्ञ टीम इसकी बारीकी से जांच कर रही है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, परीक्षण का मुख्य उद्देश्य ट्रेन की सुरक्षा, स्थिरता और संचालन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परखना है। टेस्टिंग के दौरान पावर कार, हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम, कंट्रोल यूनिट और सेफ्टी उपकरणों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्पीड सेंसर और कंट्रोल सिस्टम को अलग-अलग गति पर चलाकर रिकॉर्ड किया गया, ताकि किसी भी तकनीकी खामी की पहचान की जा सके। इसके साथ ही कोचों के पायदान, दरवाजों और ऊंचाई मानकों की भी जांच की गई।
यह हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद–सोनीपत रूट पर चलाई जाएगी। इसके लिए जींद में स्थापित हाइड्रोजन प्लांट को अंतिम कमीशनिंग चरण में लाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि प्लांट के निर्बाध संचालन के लिए 11 केवी की स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, ताकि ईंधन उत्पादन और भंडारण में किसी प्रकार की रुकावट न आए।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की निगरानी राज्य स्तर पर भी की जा रही है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बिजली वितरण निगम के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए कि हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना में किसी भी स्तर पर बाधा स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने नियमित समीक्षा, मजबूत बैकअप व्यवस्था और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए।


