26 लाख दीपों से जगमगाएगी अयोध्या: भक्ति, परंपरा और आधुनिकता का संगम बनेगा दीपोत्सव 2025
अयोध्या/ उत्तरप्रदेश/ 17/10/2025
अयोध्या में दीपोत्सव 2025 सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है। 26 लाख से अधिक दीपों की ज्योति जब सरयू तट पर एक साथ दमकती है, तो यह दृश्य केवल अंधकार पर प्रकाश की जीत नहीं दर्शाता, बल्कि यह भी बताता है कि परंपरा और तकनीक मिलकर नए भारत की सांस्कृतिक पहचान गढ़ रही हैं। 33 लाख से अधिक स्वयंसेवकों की सहभागिता इस आयोजन को विश्व के सबसे बड़े जन-उत्सवों में से एक बना देती है।
अयोध्या प्रशासन इस वर्ष के दीपोत्सव को पहले से भी ज्यादा आकर्षक और व्यवस्थित बनाने में जुटा है। घाटों की पेंटिंग, नई लाइटिंग व्यवस्था और ड्रोन शो जैसी तकनीकी प्रस्तुतियां इस आयोजन को आधुनिक स्पर्श देंगी। हर विभाग की ओर से ग्राउंड लेवल पर समीक्षा चल रही है ताकि कोई कमी न रहे। यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके माध्यम से पर्यटन और स्थानीय रोजगार का एक नया दौर भी शुरू होता है।
21 झांकियों के साथ होने वाला भरत मिलाप, पुष्पक विमान से उतरते भगवान राम और सरयू आरती की भव्यता—ये सभी दृश्य अयोध्या को दिव्यता और उत्साह से भर देंगे। देशभर से आ रहे कलाकार अपनी लोक-संस्कृतियों का संगम प्रस्तुत करेंगे, जिससे दीपोत्सव एक अखिल भारतीय सांस्कृतिक उत्सव बन जाएगा। इस आयोजन के जरिए न केवल रामनगरी की आध्यात्मिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि भारत के विविध सांस्कृतिक रंग भी जगमगाएंगे।
दीपोत्सव 2025, भक्ति, परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम बनकर उभरने जा रहा है। सुरक्षा से लेकर पर्यावरण तक हर पहलू पर सूक्ष्म तैयारी यह संदेश देती है कि अयोध्या अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि “ग्लोबल स्पिरिचुअल हब” बनने की दिशा में अग्रसर है। इस दीपोत्सव की हर लौ में नयी आशा, संस्कृति की स्थिरता और एकजुट भारत का उजियारा समाया है।


