स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव ने निगरानी बढ़ाने राज्यों से संशोधित जीएमपी मानदंडों को सख्ती से लागू करने का आग्रह किया।
नई दिल्ली/भारत/पीआईबी_06102025
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई बैठक
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में कुछ राज्यों में बच्चों की मौत के मामलों को देखते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।
बैठक में मुख्य रूप से कफ सिरप की गुणवत्ता की सख्त जांच, संशोधित शेड्यूल एम के अनुपालन, और दोषी दवा कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया।
साथ ही सभी राज्यों को बच्चों में कफ सिरप के तर्क संगत इस्तेमाल (रैशनल यूज) को बढ़ावा देने को कहा गया, क्योंकि अक्सर बच्चों की खांसी बिना दवा के अपने आप ठीक हो जाती है।
बैठक के प्रमुख बिंदु:
दवा निर्माण इकाइयों की कड़ी निगरानी और गुणवत्ता मानकों का पालन अनिवार्य।
अतार्किक फार्मूलेशन और ओवरडोज से बचने के लिए डॉक्टर-फार्मासिस्ट-जनता में जागरूकता।
बच्चों के लिए खांसी की दवाओं का सीमित व सुरक्षित उपयोग जरुरी।
मौत की जांच में पाया गया कि कोल्डरिफ सिरप के कुछ सैम्पल में हानिकारक डाईएथिलीन ग्लाइकोल पाया गया, जिस पर नियामक कार्रवाई शुरू हुई।
नई गाइडलाइन, सख्त मॉनिटरिंग और त्वरित रिपोर्टिंग पर बल।
स्वास्थ्य सचिव ने सभी राज्यों से निगरानी बढ़ाने, रिपोर्टिंग प्रक्रिया मजबूत करने और जल्द एक्शन लेने का निर्देश दिया है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
यह कदम बच्चों की सुरक्षा, औषधि गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अहम माना जा रहा है।


