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Saturday, March 7, 2026

कवर्धा पत्रकार पर हमला: पत्रकारों के विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, फैक्ट्री संचालक गिरफ्तार

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पत्रकार यदि कवरेज नहीं करेंगे तो जनता तक सच्चाई कैसे पहुंचेगी? क्या यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने और खत्म करने का प्रयास नहीं है? यह मामला सिर्फ एक पत्रकार का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आवाज को कुचलने का गंभीर प्रयास है।

कवर्धा/छत्तीसगढ़ | 22 सितम्बर 2025_
दीपक पाण्डेय/जन_चौपाल 36

घटना का पृष्ठभूमि
कवर्धा जिले में पत्रकार संजय यादव पर हुए हमले ने पूरे मीडिया जगत को झकझोर कर रख दिया। बताया जा रहा है कि छीरपानी बॉटलिंग यूनिट में कवरेज के दौरान रिपोर्टर और कैमरामैन पर जानलेवा हमला किया गया। मारपीट और लूटपाट की इस घटना से पत्रकार साथी किसी तरह जान बचाकर भागे।

आरोप फैक्ट्री संचालक पर
हमले के पीछे एसजीएम फैक्ट्री संचालक संदीप गुप्ता और उनके सहयोगी गणेश गुप्ता पर दबंगई और गुंडागर्दी के आरोप लगे। पत्रकारों का कहना है कि फैक्ट्री मालिकों ने कवरेज रोकने और डराने-धमकाने की मंशा से हमला करवाया।

पुलिस की भूमिका पर सवाल
सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की और एफआईआर दर्ज करने में 6 घंटे लगा दिए। इससे पत्रकारों का गुस्सा और भड़क गया।

पत्रकारों का विरोध और दबाव
घटना के अगले दिन जिलेभर के पत्रकार शहीद स्मारक उद्यान में धरने पर बैठ गए। प्रशासन को पत्रकारों की मांगों पर प्रतिक्रिया देने में पूरे 5 घंटे लग गए, जबकि धरना स्थल जिला मुख्यालय से केवल 1 किमी दूर था। पत्रकारों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सोमवार दोपहर 1 बजे तक गिरफ्तारी नहीं हुई तो प्रदेशभर के पत्रकार कवर्धा में इकट्ठा होकर अनिश्चितकालीन आंदोलन और राष्ट्रीय राजमार्ग चक्का जाम करेंगे।

पुलिस की कार्रवाई
बढ़ते दबाव और जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर सिटी कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री संचालक संदीप गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया।

पत्रकार संघ की मांग
पत्रकार संजय यादव पर दर्ज फर्जी एफआईआर तत्काल रद्द हो।
छीरपानी बॉटलिंग यूनिट और जी.एस. मसाला कंपनी की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
संदीप गुप्ता और गणेश गुप्ता को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाए।
यदि संजय यादव या उनके परिवार को कोई नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी आरोपियों की होगी।

बड़ा सवाल
पत्रकार यदि कवरेज नहीं करेंगे तो जनता तक सच्चाई कैसे पहुंचेगी? क्या यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने और खत्म करने का प्रयास नहीं है? यह मामला सिर्फ एक पत्रकार का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आवाज को कुचलने का गंभीर प्रयास है।




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