“असमान वन वितरण के बावजूद, राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में डेजर्ट नेशनल पार्क जैव विविधता का अनोखा उदाहरण है।”
लेख:
राजस्थान के थार मरुस्थल को लेकर एक महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली भविष्यवाणी सामने आई है, जो देश के पर्यावरणीय संतुलन को गहराई से प्रभावित कर सकती है। यह चेतावनी भारत की प्रमुख भूवैज्ञानिक संस्था जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) के महानिदेशक (DG) असित साहा ने दी है। उनके अनुसार, जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसमी पैटर्न के कारण आने वाले वर्षों में भारत के रेगिस्तानी और वन क्षेत्रों में अद्वितीय और अप्रत्याशित बदलाव हो सकते हैं।
क्या बदल जाएगा राजस्थान का चेहरा?
डीजी असित साहा ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि वर्तमान बारिश का पैटर्न इसी तरह जारी रहा, तो राजस्थान के मरुस्थलीय इलाके हरियाली में बदल सकते हैं और देश के अन्य घने वन क्षेत्र सूखकर बंजर हो सकते हैं। उनका यह दावा पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में लगातार औसत से अधिक हो रही बारिश के आधार पर किया गया है।उन्होंने बताया, “हम देख रहे हैं कि जिन इलाकों में पहले ज्यादा वर्षा होती थी, जैसे चेरापूंजी, अब वहां अपेक्षाकृत कम बारिश हो रही है। वहीं, राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्र अब ज्यादा बारिश दर्ज कर रहे हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि मौसम का चक्र बदल रहा है।”
क्यों हो रहा है ये बदलाव?
असित साहा ने इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए:
जलवायु परिवर्तन (Climate Change): वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे तापमान और बदलती जलवायु न केवल मानसून के स्वरूप को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) को भी बदल रहे हैं।
मानवजनित गतिविधियां (Human Activities): खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बादल फटने की घटनाओं के पीछे साहा ने अनियंत्रित विकास, टूरिज्म और निर्माण गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि “तेजी से बढ़ रही developmental activities से स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे आपदाएं और ज्यादा विनाशकारी हो रही हैं।”
पर्यावरणीय प्रभाव और संभावित खतरे
इस तरह के मौसमी बदलाव न केवल क्षेत्रीय भूगोल को बदल सकते हैं, बल्कि कृषि, जल संसाधन, वन्यजीव और मानव बसावट पर भी गंभीर असर डाल सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
यदि राजस्थान में हरियाली बढ़ती है, तो यह एक सकारात्मक परिवर्तन हो सकता है, बशर्ते इसे टिकाऊ तरीके से प्रबंधित किया जाए।
दूसरी ओर, यदि जंगल सूखने लगते हैं, तो यह जैव विविधता और जल सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
निष्कर्ष
राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्र में हरियाली का सपना अच्छा तो लगता है, लेकिन इसके पीछे जो वैज्ञानिक कारण और पर्यावरणीय जोखिम छिपे हैं, वे चिंताजनक हैं। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की यह चेतावनी इस बात का संकेत है कि अब समय आ गया है जब मौसम और पर्यावरण को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
आवश्यक है कि सरकारें, संस्थान और आम जनता मिलकर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण को संतुलित और सुरक्षित रखा जा सके।
सूत्र: जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, असित साहा का बयान, मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़े।
दीपक पाण्डेय जनचौपाल36
तारीख: 5 सितंबर 2025।


