पुनौरा धाम, सीतामढ़ी (बिहार) को लेकर लंबे समय से मांग रही है कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर उसी महत्व के साथ स्थापित किया जाए, जैसे अयोध्या को किया गया है। यह प्रयास उसी दिशा की एक ठोस पहल है।
जनचौपाल 36 | विशेष रिपोर्ट
क्या भारत अब राम युग की ओर अग्रसर है? क्या देश में रामराज्य की कल्पना सचमुच साकार होने जा रही है?
पांच सदियों की लंबी प्रतीक्षा और संघर्ष के बाद अयोध्या में श्रीराम मंदिर का भव्य निर्माण और उद्घाटन हुआ। 22 जनवरी 2024 को श्रीराम लला की प्रतिमा को उसके मूल स्थान पर स्थापित कर दिया गया। यह युगांतरकारी क्षण भारत के सांस्कृतिक इतिहास में अमिट हो गया।
अब बारी है उस शक्ति की, जिन्होंने राम को राम बनाया — माता सीता की।
उनकी जन्मस्थली पुनौरा धाम, सीतामढ़ी में भी अब
“भव्य जानकी मंदिर“
बनने जा रहा है, जो ना केवल श्रद्धा का केंद्र होगा, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा।
8 अगस्त को हुआ शिलान्यास, अमित शाह और नीतीश कुमार रहे साक्षी
इस ऐतिहासिक मंदिर निर्माण का शिलान्यास 8 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
जानकारी के अनुसार यह मंदिर परिसर सीतामढ़ी शहर से भी बड़ा और सुव्यवस्थित होगा। इसके लिए ₹882.87 करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई है। इसके अंतर्गत 50 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जा रही है, जिससे मंदिर का कुल क्षेत्रफल 67 एकड़ तक हो जाएगा।
पुनौरा धाम — सीतामढ़ी से बड़ा धार्मिक नगर बनने की दिशा में
पुनौरा धाम, जहां माता सीता का प्राकट्य हुआ माना जाता है, अब केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त विश्वस्तरीय धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन, रुकने, भोजन, ध्यान-योग, और सांस्कृतिक आयोजनों की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
यह रामायण की सांस्कृतिक धारा को पूर्णता देगा: राम मंदिर के बाद जानकी मंदिर का निर्माण रामकथा को संतुलन और श्रद्धा की पूर्णता देगा।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया केंद्र: अयोध्या की भांति यह स्थल भी देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
मिथिला क्षेत्र का सांस्कृतिक गौरव पुनः प्रतिष्ठित होगा।


