34.4 C
Raipur
Saturday, March 7, 2026

रायपुर का नाम कभी हाटकपुर रहा इसलिए हाटकेश्वर शिव जी खारुन तट पर स्थित हैं

Must read

सोमवार विशेष:_JANCHOUPAL36.COM
रायपुर, छत्तीसगढ़ की राजधानी, न केवल आधुनिक विकास के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसका एक समृद्ध ऐतिहासिक विरासत भी है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस ऐतिहासिक नगर का नाम पहले
“कनकपुर”, “हाटकपुर” और “कंचनपुर” हुआ करता था। इन नामों से ही स्पष्ट है कि यह क्षेत्र कभी सोने (कनक/हाटक/कंचन) की धरती के रूप में प्रसिद्ध रहा होगा
प्राचीन इतिहास
“यहां खारून नदी के तट पर स्थित हाटकेश्वर महादेव का एक प्राचीन मंदिर भी है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का विकास कलचुरी वंश के शासनकाल में हुआ था, जो लगभग 500 से 600 वर्ष पूर्व का समय माना जाता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, संभवतः उसी समय इस क्षेत्र का नाम ‘हाटकपुर’ रहा होगा, जो बाद में ‘रायपुर’ के रूप में जाना गया। इस मंदिर से जुड़ी कुछ लोक कथाएँ और धार्मिक मान्यताएँ भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि यह मंदिर त्रेता युग में लक्ष्मण जी द्वारा स्थापित किया गया था। एक कथा के अनुसार, हनुमान जी ने शिवजी को अपने कंधे पर बिठाकर यहां लाया था और इसी स्थान पर उनकी स्थापना की गई थी।”
इतिहास में रायपुर
इतिहासकारों के अनुसार, वर्ष 1402 ईस्वी में राजा ब्रह्मदेव राय ने इस शहर की पुनः स्थापना की और अपने नाम पर इसका नाम “रायपुर” रखा। राजा ब्रह्मदेव राय, रतनपुर के कलचुरी वंश के शक्तिशाली शासकों में से एक थे, और उनके कार्यकाल में इस क्षेत्र को नई दिशा और पहचान मिली।
आज रायपुर सिर्फ छत्तीसगढ़ की राजधानी ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। लेकिन इस आधुनिक शहर की नींव एक ऐतिहासिक विरासत पर रखी गई थी, जिसे जानना और सहेजना हमारे लिए गर्व का विषय है।
धार्मिक महत्व छत्तीसगढ़ का काशी
“छत्तीसगढ़ न केवल अनेक नदियों का उद्गम स्थल है, बल्कि यहाँ कई महत्वपूर्ण संगम स्थल भी हैं। जैसे राजिम में महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का संगम होता है, जिसे ‘त्रिवेणी संगम’ कहा जाता है। इसी कारण राजिम को ‘छत्तीसगढ़ का प्रयाग’ कहा जाता है। उसी प्रकार, रायपुर के निकट खारून नदी तट पर स्थित महादेव घाट में शिवजी की उपस्थिति के कारण इस स्थान को ‘छत्तीसगढ़ का काशी’ कहना उपयुक्त प्रतीत होता है,क्योंकि यहां अंतिम संस्कार के अलावा पूर्वजों का पिंडदान भी किया जाता है। यहाँ प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर एक भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसकी परंपरा आज भी निरंतर जारी है।”
कल्चुरी शासन काल में
राजा ब्रह्मदेव राय छत्तीसगढ़ के रतनपुर के कलचुरी वंश के एक प्रमुख शासक थे। वे 15वीं शताब्दी की शुरुआत में शासन करते थे और उन्हें रायपुर नगर की स्थापना का श्रेय दिया जाता है। माना जाता है कि उन्होंने वर्ष 1402 ईस्वी में रायपुर को बसाया और अपने नाम से इसका नाम “रायपुर” रखा।
वे एक शक्तिशाली, दूरदर्शी और संगठनकर्ता राजा थे, जिन्होंने प्रशासनिक दृष्टि से रायपुर क्षेत्र को संगठित किया और इसे एक सशक्त नगर के रूप में विकसित किया। उनके समय में कला, संस्कृति और बुनियादी संरचना का भी विकास हुआ।
संक्षेप में, राजा ब्रह्मदेव राय रायपुर के संस्थापक माने जाते हैं और छत्तीसगढ़ के इतिहास में उनका स्थान गौरवपूर्ण है।

डिस्क्लेमर:यह लेख केवल सामान्य जानकारी एवं लोक मान्यताओं के आधार पर संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य किसी प्रकार की धार्मिक, ऐतिहासिक या सांस्कृतिक मान्यताओं पर विवाद खड़ा करना नहीं है। यदि कहीं कोई तथ्य किसी व्यक्ति या समुदाय की भावना को अनजाने में आहत करता हो, तो उसके लिए खेद प्रकट किया जाता है। यह सामग्री केवल जानकारी हेतु है।कृपया दावे प्रतिदावे से इसे दूर रखें।


- Advertisement -spot_img

More articles

- Advertisement -spot_img

Latest article