कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने UPI पर 0.4% MDR लागू किए जाने को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
विकास उपाध्याय का तंज— “जिस UPI को मोदी सरकार ने Digital India की सफलता बताया, अब उसी UPI के बड़े व्यापारी लेन-देन पर नई लागत लगाने की तैयारी है।”
₹2,000 से ऊपर के UPI Transactions पर 0.4% MDR। 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के पात्र Merchant UPI Transactions पर 0.4% MDR लागू होगा। सामान्य श्रेणी में प्रति transaction ₹300 की सीमा निर्धारित है।
विकास उपाध्याय ने कहा— “सरकार कह रही है कि ग्राहक से सीधे शुल्क नहीं लिया जाएगा। लेकिन व्यापारी के transaction की लागत तो बढ़ेगी ना? आखिर इसका बोझ कौन उठाएगा?”
“पहले Digital India, अब व्यापारी पर नई लागत क्यों?” उपाध्याय ने कहा कि ₹2,000 से अधिक के UPI transactions संख्या में करीब 4% हैं, लेकिन transaction value के हिसाब से इनका हिस्सा लगभग दो-तिहाई है। यानी संख्या कम है, लेकिन बड़े मूल्य वाले transactions का हिस्सा बहुत बड़ा है।
चाय वाले से लेकर किराना दुकानदार तक से पूछेंगे सवाल विकास उपाध्याय ने कहा— “किसी चाय वाले, पोहा वाले या किराना दुकानदार से पूछिए—भैया, आपका रोज कितना UPI payment आता है? ₹2,000 से ऊपर के कितने transaction होते हैं? फिर उसी के सामने बैठकर हिसाब लगाइए कि MDR का असर कितना होगा।”
उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारी की कमाई में हर अतिरिक्त लागत मायने रखती है। “UPI सफल हुआ तो उसकी कीमत व्यापारी क्यों चुकाए?”
उपाध्याय ने कहा— “जब UPI को देश में बढ़ावा देना था, तब zero-MDR model के जरिए इसे आगे बढ़ाया गया। आज जब UPI करोड़ों लोगों और व्यापारियों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है, तो बड़े merchant transactions पर नई लागत क्यों?”
उन्होंने स्पष्ट किया कि MDR सीधे सरकार द्वारा लगाया गया टैक्स नहीं है, लेकिन merchant transactions पर नई transaction cost की व्यवस्था की गई है।
विकास उपाध्याय का सीधा सवाल
“UPI को मजबूत करना है तो व्यापारी की लागत क्यों बढ़ाई जा रही है? सरकार को बताना होगा कि इस नई MDR व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ी और इसका आर्थिक बोझ आखिर किस पर पड़ेगा।”»
“UPI देश की डिजिटल ताकत है—इसे व्यापारी पर बोझ मत बनाइए।”
विकास उपाध्याय ने केंद्र सरकार से ₹2,000 से अधिक के पात्र Merchant UPI Transactions पर 0.4% MDR व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की।