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Friday, October 30, 2026
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बगीचे का अंतिम प्रसन्न पेड़: जिंदगी कोई दौड़ या होड़ नहीं है?

पर्व विशेष/28 अगस्त 2026

जब आप दूसरों से तुलना करना छोड़ देते हैं, तभी से आपका असली जीवन शुरू होता है।क्योंकि तुलना से छोटा या बड़ा का भाव आता है जिससे स्वयं का प्रभाव कम होते दिखता है।

— बात छोटी है, लेकिन इसका उद्देश्य और दिशा विशाल है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई किसी न किसी को हराने में लगा है। लेकिन क्या दूसरों को हराने के लिए जीतना वाकई हमारी आवश्यकता है? या यह सिर्फ एक मानसिक होड़ है? इस बात को समझने के लिए एक छोटी सी कथा हमें जीवन का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाती है।

कहानी: उजड़ा बगीचा और मुस्कुराता बांस बहुत वर्षों बाद एक राजा अपने प्रिय बगीचे में लौटा। उसने यह बगीचा बड़े प्रेम और शौक से लगवाया था, लेकिन आज वहाँ सब कुछ उदास और उजड़ा-उजड़ा था।

ओक का पेड़ रोते हुए बोला: “मैं देवदार जैसा विशाल होकर आकाश नहीं छू सकता, इसलिए मेरे जीने का क्या लाभ?”

देवदार उदास होकर बोला: “मैं अंगूर की तरह मीठे फल नहीं दे सकता, मेरा इतना ऊँचा होने का क्या फायदा?”

अंगूर की लता शिकायत करते हुए बोली: “मैं गुलाब की तरह मंदिरों में पूजी नहीं जाती, मेरा अस्तित्व ही व्यर्थ है।”

राजा बेहद उदास होकर आगे बढ़ा। तभी बगीचे के एक कोने में उसकी नज़र एक छोटे से बांस के झुरमुट पर पड़ी। वह हवा के साथ झूम रहा था, एकदम हरा-भरा और आनंद से भरा हुआ।

राजा ने अचरज से पूछा— “यह पूरा बगीचा अपने अधूरेपन के दुख में डूबा है, तुम इतने प्रसन्न कैसे हो?”

बांस ने मुस्कुरा कर जवाब दिया—
“महाराज! जब आपने मुझे यहाँ रोपा था, तब मैं समझ गया था कि आपको इस जगह पर ओक या गुलाब नहीं, बल्कि एक बांस चाहिए था। यदि आपको ओक चाहिए होता, तो आप ओक लगाते। आपने मुझे चुना, इसका अर्थ है कि मेरी भी इस दुनिया में कोई खास आवश्यकता है। इसीलिए मैंने दूसरों जैसा बनने की दौड़ छोड़ दी।

मैं बस वही बनने लगा जो मैं हो सकता हूँ—एक बेहतर बांस। क्योंकि मेरे इसी बांस से आपकी वह बांसुरी बनेगी, जिसकी मधुर तान पर पूरा महल झूमेगा।”

राजा की आँखें खुल गईं और उन्हें अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया।

जीवन का बोध और मूल सीख हमारा जीवन भी इस बगीचे की तरह है। हम अक्सर समाज के ‘देवदारों’ और ‘गुलाबों’ को देखकर खुद को छोटा समझ लेते हैं और अपनी उपयोगिता भूल जाते हैं।

अद्वितीय अस्तित्व: इस सृष्टि के रचयिता ने आपको किसी और की नकल बनाने के लिए नहीं रचा है। आपकी तुलना किसी से नहीं हो सकती, क्योंकि आप इस ब्रह्मांड में अद्वितीय युनिक हैं।

बस अपनी मौलिकता बनाए रखे !?

तुलना ही दुख का कारण है: प्रेरणा आपको आगे बढ़ाती है, लेकिन तुलना हमेशा दुख को जन्म देती है।

सच्चा आनंद तब मिलता है जब आप खुद से यह नहीं पूछते कि “मैं उसके जैसा कैसे बनूँ?”, बल्कि यह पूछते हैं कि “मैं जैसा हूँ, उसमें सबसे बेहतरीन कैसे बनूँ?”

क्या आप भी खुद की तुलना दूसरों से करते हैं? कमेंट में अपनी राय दें।

निष्कर्ष _दूसरों से प्रतिस्पर्धा करने की दौड़ छोड़िए। अपने स्वधर्म और अपनी विशिष्टता को पहचानना ही सबसे बड़ी आध्यात्मिकता और सफलता है। आप जो हैं, उसी में अपना सर्वश्रेष्ठ दीजिए—क्या पता आपकी ही खूबियों से किसी के जीवन में संगीत घुलने वाला हो!

बिजली कनेक्शन पर आधार की अनिवार्यता: सुविधा या नई उलझन?

रायपुर न्यूज/ 27 अगस्त 2026

विभाग का तर्क है कि इससे फर्जी कनेक्शनों पर रोक लगेगी, सब्सिडी का सही लाभ वास्तविक हितग्राही तक पहुंचेगा और उपभोक्ताओं का डेटा बेस ज्यादा पारदर्शी होगा।

छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं के लिए 1 सितंबर से एक बड़ी व्यवस्था बदलने जा रही है। राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए आधार ई-केवाईसी अनिवार्य कर दी है। यानी अब आपका बिजली कनेक्शन सीधे आपकी पहचान से जुड़ेगा।

यह नियम सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। इसमें घरेलू के साथ-साथ गैर-घरेलू, कृषि, औद्योगिक, सड़क बत्ती और नल-जल योजना सहित सभी प्रकार के कनेक्शन शामिल किए गए हैं।

प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कंपनी ने दो विकल्प दिए हैं। पहला, उपभोक्ता मोर बिजली ऐप के माध्यम से घर बैठे ही अपना आधार प्रमाणीकरण कर सकेंगे।

इसके लिए बिजली दफ्तर के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। दूसरा, यदि ऑनलाइन प्रक्रिया में कोई तकनीकी परेशानी आती है तो उपभोक्ता अपने संबंधित वितरण केंद्र या जोन कार्यालय जाकर सत्यापन करा सकते हैं, जहां अधिकृत कर्मचारी प्रकाश ऐप के ई-केवाईसी पोर्टल से यह काम करेंगे।

मीटर रीडरों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे घर-घर जाकर उपभोक्ताओं को इस प्रक्रिया में सहयोग करें।

लेकिन इस सुविधा के साथ सबसे बड़ी अड़चन नाम के मिलान की है। ई-केवाईसी तभी सफल होगी जब बिजली कनेक्शन के अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में शत-प्रतिशत समानता हो। वर्तनी की छोटी सी गलती, उपनाम या पिता के नाम का अंतर भी प्रक्रिया को रोक देगा।

ऐसी स्थिति में उपभोक्ता को पहले बिजली कार्यालय में आवेदन देकर नाम में सुधार या नामांतरण कराना होगा, उसके बाद ही ई-केवाईसी हो पाएगी।

कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे 1 सितंबर से पहले ही अपने दस्तावेजों की जांच कर लें, ताकि अंतिम समय में कनेक्शन कटने या बिल संबंधी परेशानियों से बचा जा सके।

डिब्बी में शक्कर, डाक से वार – महंगाई पर कांग्रेस का मीठा प्रहार

न्यूज डेस्क- देश/प्रदेश – 27 अगस्त 2026

शक्कर पर हुई सियासत-कांग्रेस ने महंगाई की मिठास पर कड़वा विरोध जताया।
चीनी का लंगर और बिना चीनी की चाय – महंगाई पर विपक्ष का नया दांव।
त्योहार से पहले कड़वी हुई चीनी, सड़कों पर उतरी सियासत।

छत्तीसगढ़ में चीनी के दाम 70 रुपये किलो के पार पहुंचते ही सियासत गरमा गई है। त्योहारी सीजन से ठीक पहले शक्कर की कीमतों में आई इस अप्रत्याशित तेजी ने आम आदमी के रसोई बजट को बिगाड़ दिया है, और विपक्ष को सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा दे दिया है।

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर दोहरी रणनीति अपनाई है – प्रदेश में आक्रामक प्रदर्शन और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतीकात्मक विरोध। रायपुर में पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने अनोखा तरीका अपनाया।

उन्होंने शक्कर को छोटी-छोटी डिब्बियों में भरकर भाजपा के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को स्पीड पोस्ट से भेजा। उनका तर्क था कि जब जनता तक शक्कर पहुंच ही नहीं रही, तो सत्ता में बैठे लोगों को इसका अहसास डाक से ही कराया जाए।

इसी कड़ी में रायपुर में कांग्रेस खाद्य विभाग विंग के अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन के नेतृत्व में खाद्य विभाग के कार्यालय का घेराव किया गया। कार्यकर्ताओं ने कालाबाजारी और जमाखोरी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

इस विरोध को सियासी धार तब मिली जब कांकेर से भाजपा सांसद के ‘बारिश रोकने के लिए नींबू काटने’ वाले बयान पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने तंज कसा कि अगर नींबू काटने से सब ठीक होता है, तो सांसद जी को महंगाई और शक्कर के दाम घटाने के लिए भी नींबू काटना चाहिए।

छत्तीसगढ़ की आग चंडीगढ़ तक पहुंची। वहां कांग्रेस ने ‘चीनी का लंगर’ लगाकर विरोध जताया। चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एच.एस. लकी के नेतृत्व में सेक्टर-35 स्थित कांग्रेस भवन के बाहर गरीबों को मुफ्त चीनी के पैकेट बांटे गए।

वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बिना चीनी की चाय बनाकर और पिलाकर केंद्र सरकार की नीतियों पर कटाक्ष किया।

कांग्रेस का आरोप है कि जो चीनी कुछ महीने पहले तक 30-45 रुपये किलो मिलती थी, वह आज 70-75 रुपये तक पहुंच गई है।

इसके लिए पार्टी केंद्र की नीतियों – अंधाधुंध चीनी निर्यात, E20 इथेनॉल कार्यक्रम के लिए गन्ने का डायवर्जन और आयात नीति में विफलता को जिम्मेदार बता रही है। सवाल सिर्फ शक्कर का नहीं, बल्कि त्योहारों पर आम घरों की मिठास का है।


चीन सीमा से आई भीषण बाढ़ से नेपाल(रसुवा) में भारी नुकसान, 7 की मौत, दर्जनों लापता

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डिजिटल_डेस्क /26 – अगस्त 2026

हालात की गंभीरता को देखते हुए 5 जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। पीएम बालेन शाह के निर्देश पर सेना ने मोर्चा संभाल लिया है और हेलीकॉप्टर्स के जरिए उफनते पानी के बीच फंसी जिंदगियों को बचाने के लिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

प्रशासन का अलर्ट और रेस्क्यू
नेपाल सरकार ने सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को 14 हेलीकॉप्टरों के साथ तैनात किया है। पीएम बालेंद्र शाह ने समन्वित रेस्क्यू के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने हाई अलर्ट जारी किया है:
रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, चितवन और त्रिशूली नदी बेसिन में निचली बस्तियों में रहने वाले लोगों को नदी किनारे से दूर सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने काठमांडू के वीर अस्पताल में 100 बेड रिजर्व किए हैं और WHO 1000 लोगों के लिए दवाएं और टेंट भेज रहा है।

विशेष :_ सोशल मीडिया पर 1000 लोगों के बहने की खबर वायरल है, जो अभी तक किसी भी आधिकारिक एजेंसी ने पुष्ट नहीं की है। पोर्टल पर प्रकाशन में केवल सत्यापित सरकारी आंकड़ों का ही उपयोग करें ताकि अफवाह न फैले।

क्या हुआ?
आज 26 अगस्त की सुबह करीब 9:15 बजे बिना किसी स्थानीय भारी बारिश और बिना पूर्व चेतावनी के भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में अचानक प्रचंड सैलाब आ गया। जल विज्ञान विभाग के मुताबिक रसुवा में पिछले 24 घंटे में 7 मिमी से भी कम बारिश हुई थी, जिससे साफ है कि बाढ़ का कारण स्थानीय बारिश नहीं है।

विशेषज्ञ ग्लेशियर झील फटने (GLOF) और तिब्बत में भूस्खलन से नदी के अस्थायी रूप से अवरुद्ध होकर फटने की आशंका जता रहे हैं। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग को अनौपचारिक जानकारी मिली है कि तिब्बत में भूस्खलन से नदी रुकी थी और फिर अचानक फट गई। कारण अभी जांच के अधीन है।
कहां-कहां तबाही? सबसे ज्यादा असर रसुवा जिले के टिमुरे बाजार और स्याब्रुबेसी इलाके में – यहाँ पूरा बाजार, कई मकान, वाहन और सुरक्षा चौकियां बह गईं। नुवाकोट के त्रिशूली बाजार के पास करीब 60 घर बह गए और दो मोटरेबल पुल ध्वस्त हो गए।

रायपुर के जिला कार्यालयों के लिए 100 सहायक ग्रेड-3 पदों पर भर्ती को मंजूरी

रायपुर – 26 अगस्त 2026

युवाओं को मिलेंगे नए अवसर, प्रशासनिक कामकाज में आएगी तेजी – राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा

छत्तीसगढ़ सरकार ने युवाओं को रोजगार देने और जिला स्तरीय प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य के विभिन्न जिलों में सहायक ग्रेड-3 के 100 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की स्वीकृति प्रदान कर दी है। विभाग ने इस संबंध में सभी संबंधित जिला कलेक्टरों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश जारी कर दिए हैं।

इस निर्णय पर खुशी जताते हुए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार युवाओं को शासकीय सेवाओं से जोड़ने और आम जनता को पारदर्शी व त्वरित सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि जिला प्रशासनों में इन पदों की भर्ती से जहाँ एक ओर युवाओं के लिए शासकीय सेवा के नए द्वार खुलेंगे, वहीं दूसरी ओर जिला कार्यालयों के कामकाज में और अधिक कसावट व गतिशीलता आएगी।
विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह भर्ती प्रक्रिया सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों और प्रचलित सेवा भर्ती नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए संपन्न की जाएगी। इस प्रस्ताव को वित्त विभाग से भी वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। शासन ने सभी कलेक्टरों को निर्धारित आरक्षण एवं नियमानुसार शीघ्र भर्ती कार्यवाही पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

किस जिले में कितने पद स्वीकृत –

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही – 8 पद
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी – 7 पद
खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई – 7 पद
मुंगेली – 7 पद
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – 7 पद
बलौदाबाजार-भाटापारा – 5 पद
गरियाबंद – 5 पद
बेमेतरा – 5 पद
बिलासपुर – 5 पद
कोरबा – 5 पद
सक्ती – 5 पद
दुर्ग – 4 पद
बालोद – 4 पद
राजनांदगांव – 4 पद
कबीरधाम – 3 पद
जांजगीर-चांपा – 3 पद
रायगढ़ – 3 पद
धमतरी – 2 पद
सारंगढ़-बिलाईगढ़ – 2 पद
बलरामपुर-रामानुजगंज – 2 पद
सूरजपुर – 2 पद
सुकमा – 2 पद
बीजापुर – 2 पद
जशपुर – 1 पद

कुल – 100 पद।

DRDO की मिसाइल तकनीक अब भारतीय रक्षा उद्योग को होगी हस्तांतरित, घरेलू उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

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नई दिल्ली 26 अगस्त 2026

मंत्रालय के अनुसार, इससे देश में विनिर्माण क्षमता बढ़ेगी, रक्षा औद्योगिक आधार मजबूत होगा और घरेलू स्तर पर मूल्य संवर्द्धन को बढ़ावा मिलेगा।

केंद्र सरकार ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की प्रौद्योगिकी भारतीय रक्षा उद्योग को हस्तांतरित करने को मंजूरी दे दी है।

इस फैसले के बाद पात्र भारतीय रक्षा कंपनियां इन तकनीकों का इस्तेमाल कर देश में ही मिसाइल प्रणालियों का उत्पादन कर सकेंगी।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस पहल के तहत DRDO पात्र रक्षा कंपनियों को संबंधित मिसाइल तकनीक उपलब्ध कराएगा। मंत्रालय ने इसे रक्षा क्षेत्र में घरेलू उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

विकास से उत्पादन तक पहुंचेगी मिसाइल तकनीक

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह प्रावधान मिसाइल प्रणालियों को अनुसंधान एवं विकास के चरण से आगे बढ़ाकर औद्योगिक उत्पादन तक पहुंचाने में मदद करेगा। साथ ही, उन्नत रक्षा प्रणालियों के विकास और निर्माण में भारतीय उद्योग की क्षमताओं का प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

मंत्रालय ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस नई व्यवस्था के तहत किन-किन मिसाइल प्रणालियों के उत्पादन की अनुमति निजी क्षेत्र को दी जाएगी।

आकाश, अस्त्र और नाग जैसे सिस्टम पर नजर

हालांकि, माना जा रहा है कि भारतीय निजी रक्षा उद्योग को आकाश वायु रक्षा मिसाइल, अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल और नाग टैंक रोधी गाइडेड मिसाइल जैसी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों के निर्माण का अवसर मिल सकता है।

इन प्रणालियों के उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

MSME को भी मिलेगा अवसर

सरकार का लक्ष्य केवल बड़े रक्षा उद्योगों तक सीमित नहीं है। इस पहल के जरिए भारतीय MSME और अन्य तकनीकी साझेदारों को भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में शामिल होने के अवसर मिलेंगे।

आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश

सरकार का मानना है कि मिसाइल तकनीक को घरेलू उद्योग तक पहुंचाने से भारत की अभियानगत क्षमता मजबूत होगी और रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार को भी गति मिलने की उम्मीद है।

1.78 लाख करोड़ रुपये पहुंचा घरेलू रक्षा उत्पादन

सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि वर्ष 2014 में यह करीब 46,000 करोड़ रुपये था।

इसी अवधि में भारत का रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार की इस नई पहल को रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत-चीन -सीमा पर 25वें दौर की वार्ता, अजीत डोभाल ने शांति और राजनीतिक समाधान पर दिया जोर

डिजिटल न्यूज़– 26 अगस्त 2026

भारत चीन वार्ता पर दोनों देशों ने अपने व्यापक और दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा प्रश्न का राजनीतिक समाधान तलाशने के लिए बातचीत और प्रयास जारी रखने पर सहमति जताई।भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की वार्ता मंगलवार को बीजिंग में हुई।

भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधि अजीत डोभाल ने वार्ता की सह-अध्यक्षता की।

चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी विशेष प्रतिनिधि के तौर पर बातचीत में शामिल हुए।

24 और 25 अगस्त को बीजिंग दौरे पर रहे अजीत डोभाल ने बातचीत के दौरान भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने को द्विपक्षीय संबंधों की आगे की प्रगति के लिए अहम बताया।

दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने सीमा विवाद सहित द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।

कजान और तियानजिन की सहमति पर हुई समीक्षा

वार्ता में अक्टूबर 2024 में कजान और अगस्त 2025 में तियानजिन में भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमतियों को लागू करने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने इन सहमतियों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक में सीमा क्षेत्रों में गतिविधियों और दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने लोगों के बीच संपर्क और सीमा-पार आदान-प्रदान के दोबारा शुरू होने पर संतोष जताया।

कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा व्यापार का मुद्दा

भारत और चीन के बीच फिर से शुरू हुए संपर्कों में कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी अहम माना गया। इसके अलावा निर्धारित तीन सीमा व्यापार मार्गों के जरिए सीमा व्यापार की बहाली पर भी दोनों पक्षों ने सकारात्मक रुख जताया।

सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान पर सहमति

विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रणनीतिक मार्गदर्शन में दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने भारत-चीन सीमा प्रश्न पर स्पष्ट और गहन विचारों का आदान-प्रदान किया।


भारतीय पक्ष ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी रहना दोनों देशों के संबंधों को लगातार आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है।

चीनी उपराष्ट्रपति से भी मिले डोभाल
बीजिंग यात्रा के दौरान NSA अजीत डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों से जुड़े आपसी हित के मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन पिछले कुछ समय से सीमा क्षेत्रों में तनाव कम करने और द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य दिशा में आगे बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं।

वार्ता में शांति, स्थिरता और संवाद के जरिए सीमा प्रश्न के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर रहा।

कांवड़ यात्रा में पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा के साथ उमड़ा आस्था का जनसैलाब

बेमेतरा – 25 अगस्त 2026

बेमेतरा पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा की 9वीं भव्य यात्रा संपन्न।
कांवड़ यात्रा भगवान शिव के भक्तों द्वारा श्रावण मास में की जाने वाली पवित्र वार्षिक तीर्थयात्रा है। पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था, और उस विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं व भक्तों ने उन पर गंगाजल अर्पित किया था। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए यह यात्रा प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है।

इसी कड़ी में जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा के नेतृत्व में नर्मदा धाम भेड़नी से महाकाल मंदिर देवरबीजा तक 9वीं वर्ष की भव्य कांवड़ यात्रा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

यात्रा में बड़ी संख्या में शिवभक्तों एवं श्रद्धालुओं ने शामिल होकर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष के साथ क्षेत्र को शिवमय कर दिया। श्रद्धालुओं ने नर्मदा मैया के पवित्र जल को कांवड़ में लेकर पैदल यात्रा की और देवरबीजा स्थित महाकाल मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया।

यात्रा मार्ग में जगह-जगह ग्रामीणों, सेवा दलों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा कांवड़ यात्रियों के स्वागत, जलपान, फलाहार और विश्राम की भव्य व्यवस्था की गई थी, जिससे पूरे मार्ग में भक्तिमय और उत्साहपूर्ण वातावरण बना रहा।

इस अवसर पर पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा ने कहा, “कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता, सेवा और भाईचारे का भी प्रतीक है। पिछले नौ वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही यह यात्रा हमारी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को मजबूत करने का कार्य कर रही है।”

उन्होंने यात्रा को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी कांवड़ यात्रियों, श्रद्धालुओं, आयोजन समिति, सेवा दल के सदस्यों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

हर-हर महादेव के जयघोष के साथ 9वें वर्ष की कांवड़ यात्रा ऐतिहासिक भव्यता और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई।

लंबित मांगो को लेकर राज्य कर्मचारी संघ (राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ) की प्रदेश कार्यसमिति बैठक

रायपुर — 25 अगस्त 2026

भारतीय मजदूर संघ के सहयोगी संगठन और राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ से सम्बद्ध राज्य कर्मचारी संघ, छत्तीसगढ़ की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक आज रायपुर कलेक्ट्रेट स्थित सभा कक्ष (टाउन हल) में सम्पन्न हुई।

बैठक में चतुर्थ श्रेणी से प्रथम श्रेणी तक के कर्मचारी-अधिकारियों की समस्याओं और मांगों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। पूर्व प्रदेश पदाधिकारियों का सम्मान श्रीफल, भगवा गमछा, गुलाब पुष्प और मोमेंटो से किया गया।

उद्घाटन सत्र में योगेश दत्त मिश्रा (अध्यक्ष, श्रम कल्याण बोर्ड, छ. ग.; राज्य मंत्री दर्जा), गौरव कुमार सोनी (अखिल भारतीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ), आर. के. श्रीवास्तव (अखिल भारतीय महामंत्री, राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ), विपन कुमार डोंगरा (प्रभारी, छ. ग.), ध्वनि सिंह बनाफर (प्रदेश महामंत्री, भारतीय मजदूर संघ, छ. ग.), अश्वनी कुमार चेलक (प्रदेश अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संघ, छ. ग.) सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

मंच का संचालन प्रदेश महामंत्री बोधी राम निषाद ने किया। बैठक में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, संभाग अध्यक्ष, सचिव, जिला संयोजक, सह‑संयोजक तथा प्रकोष्ठ प्रमुख उपस्थित रहे।

बैठक में लिए गए मुख्य निर्णय और प्रस्ताव:
आगामी छह माह की कार्ययोजना स्वीकृत की गई; अगले प्रस्तावित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक धमतरी में आयोजित होगी।

अखिल भारतीय अभ्यास वर्ग का आयोजन निश्चित किया गया।

भारतीय मजदूर संघ द्वारा 1 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन/आक्रोश रैली में प्रदेश के समस्त विभागों के कर्मचारी‑अधिकारियों की हजारों की संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय हुआ।

संगठन विस्तार हेतु अगले तीन माह में जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्यकारिणी एवं इकाईयों का गठन पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया।

एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री से सौजन्य भेंट करेगा और लंबित मांगों के निवारण हेतु चर्चा करेगा; प्रमुख मांगें: केंद्र के समान दो प्रतिशत महंगाई भत्ता लागू करना, छत्तीसगढ़ में मध्य प्रदेश की तरह चतुर्थ समयमान वेतनमान लागू करना, विभिन्न विभागों में लंबित पदोन्नति का लाभ सुनिश्चित करना, शिक्षा विभाग में सेवा‑गणना नियुक्ति तिथि से लागू करना और 2010 से पूर्व नियोजित शिक्षकों के लिए टीईटी‑जैसी पात्रता अनिवार्यता समाप्त करने सहित अन्य मांगें।

पंचायत विभाग के पंचायत सचिवों का सरकारीकरण और महिला व बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षकों की वेतन‑विसंगति दूर करने के प्रस्ताव पारित हुए।

बैठक में उपस्थित वरिष्ठ पदाधिकारी और संचालक: ओ. पी. पाल (प्रदेश वित्त मंत्री, भारतीय मजदूर संघ, छ. ग.), अमोद श्रीवास्तव, मनी राम कौशिक, डॉ. विनोद वर्मा, एल. एन. वर्मा, मनोहर चंदेल, खुमान सिंह, तार सिंह बोस, लच्छु राम निषाद, लोचन साव, विजय केवर्त, मोहम्मद अंसारी, वीरेंद्र देवांगन, प्रकाश सिंह, श्रीमती सरोज खोबरागड़े, श्रीमती रंजीता मिश्रा, श्रीमती कशीश मानिकपुरी, सुश्री प्रियंका सिंह सेंगर, डॉ. शशिभूषण शर्मा, वीरेंद्र देशलहरा, वीरेंद्र यदु, चन्द्रिका पाण्डेय, पुष्पराज चंदेल, नागेंद्र सिंह सहित सैकड़ों कर्मचारी‑अधिकारियों ने भाग लिया।

“हम अपने साथियों के न्याय के लिए लड़ते रहेंगे”भारतीय मजदूर संघ पंडरिया

पंडरिया- 25 अगस्त 2026

श्रमिकों के साथ मनमानी बर्दाश्त नहीं, 31 श्रमिकों को बाहर करने और 3 श्रमिकों को वापस नहीं लेने के निर्णय से आक्रोश।

भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट किया है कि वह अपने सदस्यों के साथ दृढ़ता से खड़ा है और जब तक न्याय नहीं मिलता, शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगा। संगठन ने एमडी और कारखाना प्रबंधन से अपील की है कि वे स्थिति को गंभीरता से लें और तत्काल प्रभाव से विवाद का समाधान करें।

संघ का रुख
— भारतीय मजदूर संघ ने पंडरिया स्थित लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना में श्रमिकों के साथ कथित मनमाने और भेदभावपूर्ण व्यवहार के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। संगठन ने कहा है कि श्रमिकों के साथ अन्याय किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

मामले का परिचय
5 अगस्त को इकाई महामंत्री ने कारखाना प्रबंधन के समक्ष 7 माह के लंबित वेतन और पिछले आंदोलन के दौरान हुए समझौते को लागू किए जाने का मामला उठाया था। संगठन के अनुसार, एमडी ने इसका जवाब “नेतागिरी करते हो” कहते हुए इकाई महामंत्री की आईडी डिलीट कर उन्हें काम से रोक दिया।

आंदोलन और समझौता
इसके विरोध में 11 अगस्त से “ललित चन्द्रवंशी को काम पर वापस लो” की मांग को लेकर धरना, प्रदर्शन और टूल डाउन आंदोलन शुरू किया गया। लगातार आंदोलन के परिणामस्वरूप 21 अगस्त को प्रबंधन के साथ समझौता हुआ और ललित चन्द्रवंशी को कार्यस्थल पर बहाल कर दिया गया।

नया विवाद और संगठन की चिंता
संगठन ने आरोप लगाया कि समझौते के तुरंत बाद 31 श्रमिकों को अचानक नौकरी से हटा दिया गया, जबकि ये कर्मचारी लगभग 9 वर्षों से लगातार सेवा में थे और उनका ज्वाइनिंग भी पूरा हो चुका था। बाद में प्रबंधन ने 31 में से 28 श्रमिकों को लौटाने की घोषणा की, पर तीन श्रमिकों को वापस नहीं लेने की बात कही। संगठन के अनुसार उन तीनों से कहा गया था कि “काम पर आते समय हड़ताल में शामिल नहीं होना”, और इसका पालन न करने को कारण बताकर उन्हें बहाल नहीं किया जा रहा है।

संघ का प्रश्न और मांग
भारतीय मजदूर संघ ने सवाल उठाया है कि यदि 31 श्रमिकों का ज्वाइनिंग पूरा था और वे वर्षों से लगातार काम कर रहे थे, तो उन्हें अगले ही दिन काम से हटाने का वैध आधार क्या था? यदि 28 श्रमिकों को बहाल किया जा सकता है, तो समान परिस्थितियों में बाकी तीन के साथ अलग व्यवहार क्यों? संगठन ने कहा कि यह सिर्फ तीन लोगों का मुद्दा नहीं है — आज तीन की, तो कल किसी भी श्रमिक की आईडी बंद की जा सकती है।

संगठन की मांगें
तीनों श्रमिकों को तुरंत और बिना शर्त काम पर बहाल किया जाए।
31 श्रमिकों को बाहर किए जाने के फैसले की निष्पक्ष पड़ताल और पुनर्विचार किया जाए।
भविष्य में किसी भी कर्मचारी के साथ मनमाने निर्णय से पहले यूनियन से समन्वय और परामर्श किया जाए।
टकराव बढ़ाने के बजाय प्रबंधन बातचीत और न्यायपूर्ण समाधान का मार्ग अपनाए।