बिजली कनेक्शन पर आधार की अनिवार्यता: सुविधा या नई उलझन?
रायपुर न्यूज/ 27 अगस्त 2026
विभाग का तर्क है कि इससे फर्जी कनेक्शनों पर रोक लगेगी, सब्सिडी का सही लाभ वास्तविक हितग्राही तक पहुंचेगा और उपभोक्ताओं का डेटा बेस ज्यादा पारदर्शी होगा।
छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं के लिए 1 सितंबर से एक बड़ी व्यवस्था बदलने जा रही है। राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए आधार ई-केवाईसी अनिवार्य कर दी है। यानी अब आपका बिजली कनेक्शन सीधे आपकी पहचान से जुड़ेगा।
यह नियम सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। इसमें घरेलू के साथ-साथ गैर-घरेलू, कृषि, औद्योगिक, सड़क बत्ती और नल-जल योजना सहित सभी प्रकार के कनेक्शन शामिल किए गए हैं।
प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कंपनी ने दो विकल्प दिए हैं। पहला, उपभोक्ता मोर बिजली ऐप के माध्यम से घर बैठे ही अपना आधार प्रमाणीकरण कर सकेंगे।
इसके लिए बिजली दफ्तर के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। दूसरा, यदि ऑनलाइन प्रक्रिया में कोई तकनीकी परेशानी आती है तो उपभोक्ता अपने संबंधित वितरण केंद्र या जोन कार्यालय जाकर सत्यापन करा सकते हैं, जहां अधिकृत कर्मचारी प्रकाश ऐप के ई-केवाईसी पोर्टल से यह काम करेंगे।
मीटर रीडरों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे घर-घर जाकर उपभोक्ताओं को इस प्रक्रिया में सहयोग करें।
लेकिन इस सुविधा के साथ सबसे बड़ी अड़चन नाम के मिलान की है। ई-केवाईसी तभी सफल होगी जब बिजली कनेक्शन के अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में शत-प्रतिशत समानता हो। वर्तनी की छोटी सी गलती, उपनाम या पिता के नाम का अंतर भी प्रक्रिया को रोक देगा।
ऐसी स्थिति में उपभोक्ता को पहले बिजली कार्यालय में आवेदन देकर नाम में सुधार या नामांतरण कराना होगा, उसके बाद ही ई-केवाईसी हो पाएगी।
कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे 1 सितंबर से पहले ही अपने दस्तावेजों की जांच कर लें, ताकि अंतिम समय में कनेक्शन कटने या बिल संबंधी परेशानियों से बचा जा सके।
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