21.1 C
Raipur
Sunday, October 25, 2026
Home Blog Page 32

Shardiya Navratri 2026: 11 अक्टूबर से नवरात्रि या 10 दिन का पर्व? जानें घटस्थापना का मुहूर्त और पूजा विधि

0

 शारदीय नवरात्रि को लेकर भक्तों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और घरों से लेकर मंदिरों तक विशेष आयोजन होते हैं। इस बार नवरात्रि की तारीखों और पर्व की अवधि को लेकर खास चर्चा है। ऐसे में जानना जरूरी है कि नवरात्रि कब शुरू होगी, कलश स्थापना के लिए कौन से मुहूर्त बताए गए हैं और पहले दिन पूजा कैसे करें।

कब शुरू होगी शारदीय नवरात्रि 2026?

दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से होगी। पर्व का समापन 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी के साथ बताया गया है। पहले दिन घटस्थापना कर मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।

क्या इस बार नवरात्रि 10 दिनों की होगी?

आमतौर पर नवरात्रि नौ दिनों तक मनाई जाती है। दिए गए विवरण में तिथियों के क्रम में बदलाव के कारण इस बार पर्व 10 दिनों का होने की बात कही गई है। हालांकि, नवरात्रि की वास्तविक अवधि और तिथियों की पुष्टि के लिए स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय धार्मिक कैलेंडर देखना उचित होगा।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

11 अक्टूबर 2026 के लिए उपलब्ध जानकारी में कलश स्थापना के ये समय दिए गए हैं:

  • प्रातःकालीन मुहूर्त: सुबह 6:31 से 10:27 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 से दोपहर 12:37 बजे तक
  • लाभ और अमृत चौघड़िया: सुबह 10:04 से दोपहर 12:15 बजे तक

प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात करीब 9:30 बजे तक रहने का उल्लेख है। मुहूर्त में क्षेत्र और पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए पूजा से पहले स्थानीय समय की पुष्टि कर लें।

नवरात्रि के पहले दिन ऐसे करें पूजा

पहले दिन श्रद्धालु घर में पूजा स्थल को साफ कर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर सकते हैं। इसके बाद विधि के अनुसार कलश स्थापना कर पूजा की जाती है।

पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें।

पूजा स्थल की सफाई कर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर रखें।

मां को लाल फूल, फल, मिठाई, मेवे, इत्र और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।

मिट्टी के पात्र या कलश में जल भरकर उसे स्थापित करें। परंपरा के अनुसार कलश पर नारियल और लाल चुनरी रखी जाती है।

मां शैलपुत्री की पूजा करें और आरती उतारें।

दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले सख्ती, CJP को अनुमति नहीं, मेट्रो और ट्रेनों पर पाबंदियों का दावा

0

दिल्ली :  10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, आयोजकों ने तय समय से काफी देर से सूचना दी और प्रस्तावित कार्यक्रम पर लागू नियमों को ध्यान में रखते हुए अनुमति नहीं दी गई।

पुलिस ने क्यों रोका प्रदर्शन?

पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद के अनुसार, CJP के सह-संयोजक सौरव दास की ओर से 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की जवाबदेही को लेकर प्रदर्शन करने संबंधी आवेदन मिला था। पुलिस ने आवेदन की समीक्षा के बाद कहा कि सूचना बहुत कम समय पहले दी गई थी, जबकि निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत नियोजित प्रदर्शन की जानकारी कम से कम 10 दिन पहले देना जरूरी है।

पुलिस ने यह भी कहा कि पहले इस संगठन को प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन उस दौरान कानूनी निर्देशों और आयोजकों की ओर से किए गए वादों का पालन नहीं हुआ था।

BNSS की धारा 163 का हवाला

पुलिस के मुताबिक, नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है। इसका इस्तेमाल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और संभावित अव्यवस्था रोकने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने में किया जाता है। पुलिस ने इसी प्रावधान और देर से मिली सूचना को अनुमति नहीं देने की वजह बताया है।

57 मेट्रो स्टेशन बंद होने की जानकारी

प्रदर्शन से पहले दिल्ली के 57 मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने का दावा भी किया गया है। सामने आए पत्र के अनुसार, कुछ मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रखने की व्यवस्था की जा सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रभावित सभी स्टेशनों की सूची और बंदी की सटीक समय-सीमा स्पष्ट नहीं है।

रेल सेवाओं पर भी असर पड़ने की खबर

प्रदर्शन के मद्देनजर रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ाए जाने और कुछ ट्रेनों को रद्द किए जाने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक ट्रेनों के रद्द रहने का उल्लेख है। इनमें कुछ राजधानी एक्सप्रेस समेत प्रमुख ट्रेनें शामिल होने का दावा किया गया है। यात्रियों को रवाना होने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति रेलवे के आधिकारिक माध्यमों से जांच लेनी चाहिए।

शराब की दुकानों पर बंदी, प्रवेश मार्गों पर निगरानी

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में खुदरा शराब की दुकानों को 9 और 10 अक्टूबर को बंद रखने का आदेश दिया गया है। राजधानी में प्रवेश करने वाले मार्गों पर भी पुलिस की निगरानी बढ़ाए जाने की बात कही गई है। बाहर से आने वाले लोगों और वाहनों की जांच की जा सकती है।

Cancer Medicine Price: कैंसर की दवाएं होंगी सस्ती! सरकार ने तय किया 30% मार्जिन, मरीजों को सालाना 2,500 करोड़ की बचत का अनुमान

0

 नई दिल्ली: कैंसर के इलाज पर होने वाले भारी खर्च से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं की बिक्री पर व्यापारिक मार्जिन सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के तहत इन दवाओं पर अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी का 30 प्रतिशत तक व्यापारिक मार्जिन रखने का प्रावधान किया गया है।

सरकार का अनुमान है कि इस फैसले से कई कैंसर दवाओं की कीमतों में 70 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इससे मरीजों को हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक राहत संबंधित दवाओं की कीमत, निर्धारित सूची और नई व्यवस्था लागू होने के बाद सामने आएगी।

किन कैंसर दवाओं पर लागू होगा नया नियम?

फिलहाल आवश्यक दवाओं की अनुसूचित सूची में शामिल कैंसर रोधी दवाओं की कीमतों पर सरकार का सीधा नियंत्रण है। लेकिन कई ऐसी दवाएं भी बाजार में उपलब्ध हैं, जो इस सूची का हिस्सा नहीं हैं। इनके मूल्य निर्धारण पर पहले जैसी सीधी सीमा लागू नहीं थी।

नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसी गैर-अनुसूचित दवाओं की सप्लाई चेन में जुड़ने वाले अत्यधिक व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करना है। इससे निर्माता से लेकर मरीज तक पहुंचने के दौरान दवाओं की कीमत में होने वाली अनावश्यक बढ़ोतरी पर अंकुश लगाने की कोशिश की जाएगी।

विशेषज्ञ समिति तय करेगी दवाओं की सूची

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अंतर्गत गठित विशेषज्ञ समिति उन कैंसर रोधी दवाओं की पहचान करेगी, जिन्हें नई व्यवस्था में शामिल किया जाना है।इसके बाद राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी एनपीपीए अंतिम अधिसूचना जारी करेगा। इसी प्रक्रिया के जरिए तय होगा कि किन दवाओं पर नई मूल्य सीमा लागू होगी।

दवाओं की कीमतें कई गुना बढ़ने का मामला आया सामने

एनपीपीए के विश्लेषण में गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर औसतन 170 प्रतिशत तक मूल्य वृद्धि का उल्लेख किया गया है। कुछ मामलों में यह बढ़ोतरी 700 प्रतिशत से भी अधिक पाई गई। इसका अर्थ है कि दवा की शुरुआती कीमत और मरीज से वसूली जाने वाली कीमत के बीच काफी अंतर हो सकता है।इसके अलावा, एक ही दवा के दाम मेडिकल स्टोर, अस्पताल की फार्मेसी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग पाए गए। कई राज्यों के अधिकारियों, मरीज संगठनों और सामाजिक समूहों ने भी कैंसर के इलाज में लगने वाली ऊंची लागत पर चिंता जताई थी।

सरकार का मानना है कि व्यापारिक मार्जिन की सीमा तय होने से दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों को अधिक उचित दरों पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

2019 में भी सरकार ने उठाया था ऐसा कदम

केंद्र सरकार ने कैंसर की दवाओं को किफायती बनाने के लिए फरवरी 2019 में भी इसी तरह की पहल की थी। उस समय एनपीपीए ने 42 गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन सीमित किया था।

सरकार के मुताबिक, उस फैसले के बाद कुछ दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य में 91 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई थी। इससे 526 ब्रांडों पर सालाना करीब 984 करोड़ रुपये की बचत का अनुमान सामने आया था।

अब इसी मॉडल को अधिक व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी है, ताकि पहले से मूल्य नियंत्रण के दायरे से बाहर रहने वाली कैंसर दवाओं के मामले में भी मरीजों को राहत मिल सके।

ब्रांडेड और जेनेरिक दवाएं भी होंगी दायरे में

सरकार की योजना के मुताबिक, नई व्यवस्था में ब्रांडेड और जेनेरिक दोनों तरह की कैंसर दवाओं को शामिल किया जा सकेगा। इसके अलावा घरेलू और आयातित, पेटेंट और गैर-पेटेंट दवाओं को भी निर्धारित नियमों के तहत इसके दायरे में लाया जा सकता है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कीमतों पर नियंत्रण के साथ दवाओं की उपलब्धता बनाए रखना जरूरी होगा। संबंधित कंपनियों को उत्पादन जारी रखने और बाजार में आपूर्ति बनाए रखने से जुड़े निर्देशों का पालन करना होगा।

कैंसर मरीजों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

कैंसर के इलाज में दवाओं पर लंबे समय तक खर्च करना पड़ सकता है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी आने से मरीजों और उनके परिवारों के बजट पर पड़ने वाला दबाव कम हो सकता है।

हालांकि, 2,500 करोड़ रुपये की सालाना बचत फिलहाल सरकार का अनुमान है। मरीजों को वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम सूची में कौन-कौन सी दवाएं शामिल होती हैं और नई मूल्य सीमा किस तारीख से प्रभावी होती है।

पतंजलि गाय के घी पर खाद्य विभाग का बड़ा एक्शन, इस बैच की बिक्री पर रोक

 भोपाल: मध्य प्रदेश में पतंजलि के 200 एमएल पैक वाले गाय के घी के एक बैच को खाद्य जांच में असुरक्षित घोषित किया गया है। मामला सामने आने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने संबंधित बैच की बिक्री और सप्लाई पर पूरे प्रदेश में रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। बाजार में पहले से मौजूद उत्पादों को भी वापस मंगाया जा रहा है। विभाग ने साफ किया है कि प्रतिबंधित बैच का घी बिक्री के लिए उपलब्ध मिलने पर उसे जब्त किया जाएगा।

छिंदवाड़ा से शुरू हुई जांच, लैब रिपोर्ट में खुलासा

यह मामला बैच नंबर FAWB260017 से जुड़ा है। इस उत्पाद की निर्माण तिथि अप्रैल 2026 बताई गई है। छिंदवाड़ा में खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने घी का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा था। जांच रिपोर्ट में नमूने को असुरक्षित बताया गया।रिपोर्ट मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर संबंधित बैच को बाजार से वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई। अब प्रदेशभर में इस बैच की उपलब्धता की पहचान कर उसकी बिक्री और आपूर्ति रोकने के कदम उठाए जा रहे हैं।

दुकानदारों और वितरकों को स्टॉक लौटाने के निर्देश

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने डिस्ट्रीब्यूटर, थोक कारोबारियों और खुदरा दुकानदारों को संबंधित बैच का पूरा स्टॉक अलग करने और वापस करने को कहा है। इस उत्पाद का वितरण और बिक्री तत्काल बंद करनी होगी।वापस लिए गए घी को अन्य खाद्य पदार्थों से अलग सुरक्षित रखना होगा। साथ ही पैकेट या स्टॉक पर ‘फूड रिकॉल- बिक्री के लिए नहीं’ का स्पष्ट निशान लगाना अनिवार्य होगा, ताकि इसकी दोबारा बिक्री न हो सके।

ग्राहकों को भी देनी होगी रिकॉल की सूचना

पतंजलि फूड्स लिमिटेड को अपने वितरकों, थोक विक्रेताओं, खुदरा कारोबारियों और अन्य संबंधित पक्षों तक रिकॉल की जानकारी तत्काल पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। जिन उपभोक्ताओं ने संबंधित बैच का घी खरीदा है, उन्हें भी इसकी जानकारी देना जरूरी होगा।इसके लिए कंपनी ई-मेल, फोन, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और दूसरे उपलब्ध संचार माध्यमों का इस्तेमाल कर सकती है। इसका उद्देश्य बाजार में पहुंच चुके उत्पादों की पहचान करना और उन्हें उपभोक्ताओं से वापस मंगाना है।

बाजार में मिला तो होगी जब्ती और कानूनी कार्रवाई

विभाग ने स्पष्ट किया है कि FAWB260017 बैच का घी बाजार में बिक्री के लिए मिला तो उसे तत्काल जब्त किया जाएगा। इसके अलावा निर्माता और संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत सक्षम न्यायालय में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

कंपनी को देना होगा उत्पादन से रिकॉल तक का पूरा ब्यौरा

रिकॉल प्रक्रिया पूरी करने के लिए कंपनी को संबंधित बैच के उत्पादन, वितरण और बाजार में भेजी गई कुल मात्रा का रिकॉर्ड तैयार करना होगा। इसके साथ ही वापस मिले उत्पादों की संख्या और उनके निस्तारण का विवरण भी देना होगा।वापस आए घी को नष्ट करने या नियमों के तहत दोबारा प्रसंस्करण करने की प्रक्रिया निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पूरी करनी होगी। रिकॉल की कार्रवाई समाप्त होने के बाद कंपनी को इसकी पूरी रिपोर्ट और जरूरी दस्तावेज खाद्य विभाग के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।

बस्तर दशहरा में शामिल होंगे CM साय? समिति ने मुलाकात कर दिया न्योता, जानिए क्यों खास है यह पर्व

 रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। बस्तर दशहरा समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। इस अवसर पर समिति के सदस्यों ने पारंपरिक पागा पहनाकर मुख्यमंत्री का सम्मान भी किया।मुख्यमंत्री साय ने आमंत्रण के लिए समिति के सदस्यों का आभार जताया। बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और जनजातीय विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। अपनी अनूठी परंपराओं के कारण इस पर्व की पहचान देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी है।

75 दिनों तक चलता है बस्तर दशहरा का उत्सव

बस्तर दशहरा देश के सबसे लंबे समय तक चलने वाले पर्वों में शामिल है। करीब 75 दिनों तक आयोजित होने वाले इस उत्सव की शुरुआत सावन महीने में होती है और समापन आश्विन मास में होता है। इस दौरान कई पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं, जिनमें स्थानीय देवी-देवताओं के प्रति आस्था और जनजातीय रीति-रिवाजों की झलक देखने को मिलती है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी दिया गया निमंत्रण

बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी आमंत्रित किया गया है। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति से मुलाकात कर उन्हें इस विशिष्ट सांस्कृतिक आयोजन में शामिल होने का न्योता दिया। यह पर्व बस्तर की समृद्ध परंपराओं और आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करता है।

रावण दहन नहीं, मां दंतेश्वरी की आराधना है मुख्य परंपरा

बस्तर दशहरा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता। देश के दूसरे हिस्सों में दशहरा भगवान राम की रावण पर विजय के रूप में मनाया जाता है, जबकि बस्तर में यह उत्सव आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा और स्थानीय जनजातीय परंपराओं को समर्पित है।जगदलपुर में आयोजित होने वाले इस पर्व के दौरान सदियों पुरानी रस्मों का निर्वहन किया जाता है। इसकी शुरुआत हरियाली अमावस्या से होती है और अलग-अलग धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के साथ यह उत्सव आगे बढ़ता है।

15वीं शताब्दी से जुड़ा है पर्व का इतिहास

बस्तर दशहरा की परंपरा का इतिहास 15वीं शताब्दी से जुड़ा माना जाता है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, काकतीय वंश के राजा पुरुषोत्तम देव के शासनकाल में इस आयोजन को विशेष स्वरूप मिला। समय के साथ यह पर्व बस्तर की सांस्कृतिक पहचान बन गया और आज भी स्थानीय समाज इसे पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाता है।बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की एकजुटता, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को सहेजने वाला उत्सव भी है।

रायपुर में गरबा आयोजकों पर पुलिस की सख्ती, नियम टूटे तो रद्द होगी अनुमति

 रायपुर। नवरात्रि के दौरान राजधानी रायपुर में होने वाले गरबा आयोजनों को लेकर पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की तैयारी शुरू कर दी है। शहर में बड़े स्तर पर गरबा आयोजित करने वाले आयोजकों के साथ बैठक कर सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और कानून व्यवस्था से जुड़े निर्देश दिए गए हैं। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुमति की शर्तों का उल्लंघन करने वाले आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आयोजन की अनुमति भी रद्द कर दी जाएगी।डीसीपी सेंट्रल तारकेश्वर पटेल ने गरबा आयोजकों के साथ बैठक में सभी नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करने को कहा। प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का उद्देश्य आयोजन स्थलों पर सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना है।

CCTV से लेकर निजी सुरक्षाकर्मियों तक की व्यवस्था जरूरी

पुलिस ने सभी गरबा पंडालों में पर्याप्त संख्या में CCTV कैमरे लगाने और उनकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। आयोजकों को पुरुष और महिला वालंटियर के साथ निजी सुरक्षा गार्ड भी तैनात करने होंगे।सुरक्षा व्यवस्था में लगाए जाने वाले कर्मचारियों और वालंटियर की सूची संबंधित थाने में जमा करना भी अनिवार्य होगा। इससे आयोजन के दौरान सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से तय किया जा सकेगा।

प्रवेश और निकास के रास्तों पर रहेगी नजर

गरबा स्थलों पर आने-जाने के रास्ते स्पष्ट होने चाहिए। आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए इमरजेंसी गेट की व्यवस्था भी जरूरी होगी। पुलिस ने आयोजकों को निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों को प्रवेश नहीं देने के निर्देश दिए हैं।इसके अलावा पार्किंग की उचित व्यवस्था करनी होगी, ताकि आयोजन के कारण सड़कों पर जाम की स्थिति न बने और आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

DJ और साउंड सिस्टम के लिए तय नियमों का पालन

गरबा आयोजन निर्धारित स्थान और समय के भीतर ही करना होगा। DJ और साउंड सिस्टम के इस्तेमाल में अनुमति पत्र में दर्ज समय सीमा तथा ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी रहेगा।पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आयोजन की अनुमति में तय शर्तों से अलग जाकर कार्यक्रम संचालित नहीं किया जा सकेगा।

हथियार, शराब और नशीले पदार्थों पर पूरी तरह रोक

गरबा पंडाल में हथियार, ज्वलनशील पदार्थ, शराब और अन्य नशीली चीजें ले जाने की अनुमति नहीं होगी। सुरक्षा के लिहाज से आयोजकों को इन प्रतिबंधों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा।इसके साथ ही प्रत्येक पंडाल में अग्निशमन यंत्र और प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड बॉक्स रखना अनिवार्य किया गया है। आयोजन के दौरान कम से कम दो जिम्मेदार पदाधिकारियों की मौजूदगी भी सुनिश्चित करनी होगी।

अश्लील या सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाली प्रस्तुति पर रोक

पुलिस ने आयोजकों को चेतावनी दी है कि गरबा कार्यक्रमों में अश्लील, भड़काऊ या सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाली प्रस्तुतियां नहीं होनी चाहिए। किसी भी आपात स्थिति या सुरक्षा संबंधी समस्या की जानकारी तत्काल पुलिस को देनी होगी।

नियम तोड़ने पर आयोजकों के खिलाफ होगी कार्रवाई

डीसीपी सेंट्रल तारकेश्वर पटेल ने साफ किया कि गरबा आयोजन की अनुमति में दर्ज शर्तों का पालन करना सभी आयोजकों की जिम्मेदारी है। नियमों का उल्लंघन होने पर अनुमति निरस्त करने के साथ वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकती है।नवरात्रि के दौरान राजधानी में गरबा आयोजनों की संख्या बढ़ने के मद्देनजर पुलिस का जोर सुरक्षा, अनुशासन और भीड़ प्रबंधन पर रहेगा। आयोजकों को कार्यक्रम शुरू करने से पहले सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव निकले स्कूटी पर, शहर भ्रमण कर सफाई और निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण

 सफाई व्यवस्था बेहतर करने और नियमित मॉनिटरिंग के दिए निर्देश

साफ-सफाई की व्यवस्था और एसएलआरएम सेंटर का लिया जायजा

पीएम आवास पहुंचकर हितग्राहियों से मिले, जानी समस्याएं

रायपुर.  उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने आज खुद स्कूटी चलाकर अम्बिकापुर शहर का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था और डीसी रोड स्थित एसएलआरएम सेंटर का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बने आवासों के हितग्राहियों से बातचीत की और अधिकारियों को नागरिक सुविधाएं बेहतर बनाने तथा सड़क निर्माण एवं मरम्मत के काम जल्द शुरू करने के निर्देश दिए।

केरसु तालाब में सफाई व्यवस्था तत्काल सुधारने के निर्देश

शहर भ्रमण के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री साव ने विभिन्न क्षेत्रों में साफ-सफाई एवं नागरिक सुविधाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। केरसु तालाब में सफाई की आवश्यकता पाए जाने पर उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने सार्वजनिक स्थलों एवं आवासीय क्षेत्रों में नियमित सफाई के साथ स्वच्छता व्यवस्था की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था बेहतर करने एवं नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों से मिले

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने सुभाष नगर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के एएचपी घटक के तहत बने 493 आवासीय इकाईयों का निरीक्षण किया। उन्होंने हितग्राहियों से मुलाकात कर वहां में मिल रही सुविधाओं और उनकी समस्याओं के बारे में पूछा। साथ ही पक्का मकान मिलने के बाद उनके जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली। हितग्राहियों ने आवास मिलने पर खुशी जताई और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
श्री साव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन हितग्राहियों को आवास आबंटित किए गए हैं, उनका वहां निवास सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने आवासीय परिसर में साफ-सफाई, जरूरी सुविधाओं और शेष निर्माण कार्यों जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए।

स्वच्छता दीदियों के काम की सराहना की

उप मुख्यमंत्री ने डीसी रोड स्थित एसएलआरएम सेंटर पहुंचकर कचरा संग्रहण, पृथक्करण और प्रसंस्करण की व्यवस्था देखी। उन्होंने अम्बिकापुर के कचरा प्रबंधन मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि शहर में लगभग 480 स्वच्छता दीदियां घर-घर से कचरा एकत्र करने और उसके प्रबंधन का महत्वपूर्ण काम कर रही हैं। उनके प्रयासों से शहर में स्वच्छता की बेहतर व्यवस्था बनी है।

उप मुख्यमंत्री श्री साव द्वारा स्कूटी से अंबिकापुर शहर के भ्रमण के दौरान महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, नगर निगम के सभापति श्री हरमिंदर सिंह टिन्नी, कलेक्टर श्री अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री राजेश अग्रवाल, जिला पंचायत की सीईओ सुश्री रोमा श्रीवास्तव और नगर निगम के आयुक्त श्री विनय कुमार अग्रवाल सहित पार्षदगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, संबंधित विभागों के अधिकारी तथा अभियंतागण भी उनके साथ थे।

रेलवे को हाईकोर्ट से झटका, 14 कर्मचारियों के अतिरिक्त भत्ते पर आया बड़ा फैसला

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एसी कोच में काम करने वाले रेलवे कर्मचारियों के अतिरिक्त कार्य भत्ते के मामले में केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की ओर से दिए गए आदेश को बरकरार रखा है। इस फैसले से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के दुर्ग और रायपुर मंडल में कार्यरत 14 एसी कोच तकनीशियनों और सहायकों को अतिरिक्त कार्य भत्ता मिलने का रास्ता साफ हो गया है।मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह निर्णय सुनाया।

कैट के आदेश को चुनौती देना रेलवे को पड़ा भारी

अतिरिक्त कार्य भत्ते की मांग को लेकर संबंधित कर्मचारियों ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की जबलपुर पीठ में आवेदन किया था। अधिकरण ने 25 सितंबर 2025 को कर्मचारियों के पक्ष में आदेश देते हुए रेलवे प्रशासन को भत्ता देने का निर्देश दिया था।

रेलवे और केंद्र सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, युगलपीठ ने उनकी याचिका खारिज करते हुए अधिकरण के आदेश को कायम रखा।

रेलवे ने 1985 के परिपत्र का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से उप सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने पक्ष रखते हुए कहा कि अधिकरण ने रेल मंत्रालय के 27 जून 1985 के परिपत्र में निर्धारित प्रावधानों पर पर्याप्त विचार नहीं किया।

उन्होंने दलील दी कि इस परिपत्र में एसी कोच कर्मचारियों के कार्य घंटे और अतिरिक्त कार्य भत्ते की गणना के लिए व्यवस्था निर्धारित की गई है। साथ ही, इस परिपत्र को पहले के मामलों में चुनौती नहीं दी गई थी। ऐसे में पुराने फैसलों के आधार पर कर्मचारियों को भत्ता देने का आदेश उचित नहीं है।

कर्मचारियों की ओर से क्या दलील दी गई?

कर्मचारियों के अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि एसी कोच में काम करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य भत्ता दिए जाने का कानूनी सिद्धांत पहले ही निर्धारित किया जा चुका है। इसी आधार पर कर्मचारियों ने अपने पक्ष में राहत की मांग की।

फैसले से 14 रेलकर्मियों को मिलेगी राहत

हाईकोर्ट द्वारा रेलवे और केंद्र सरकार की याचिका खारिज किए जाने के बाद कैट का आदेश बरकरार रहेगा। इससे दुर्ग और रायपुर मंडल के 14 एसी कोच तकनीशियनों और सहायकों के अतिरिक्त कार्य भत्ते का दावा मजबूत हुआ है। अब इस फैसले के तहत कर्मचारियों को भत्ता देने का रास्ता साफ हो गया है।

छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई तेज, रायपुर में फिर बढ़ी गर्मी , जानिए कैसा रहेगा मौसम

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी जारी है। प्रदेश के कुछ और हिस्सों से मानसून लौट चुका है। बारिश की गतिविधियां कम होने के साथ ही राजधानी रायपुर में दिन के समय गर्मी का असर बढ़ने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को रायपुर में आसमान साफ रहने और अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। वहीं, प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है।

रायपुर में 34 डिग्री तक पहुंच सकता है पारा

बारिश थमने के बाद राजधानी में लोगों को दिन के समय गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 9 अक्टूबर को रायपुर का आसमान मुख्य रूप से साफ रह सकता है। इस दौरान अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।

आने वाले दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने के आसार हैं। हालांकि, कुछ इलाकों में हल्की बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

राजनांदगांव रहा प्रदेश में सबसे गर्म

गुरुवार को छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक तापमान राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जहां पारा 34.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। अलग-अलग शहरों में दर्ज तापमान इस प्रकार रहा।

  • राजनांदगांव: 34.5 डिग्री सेल्सियस
  • रायपुर के माना एयरपोर्ट पर: 33.4 डिग्री सेल्सियस
  • जगदलपुर: 33.6 डिग्री सेल्सियस
  • पेंड्रारोड: 32.6 डिग्री सेल्सियस
  • दुर्ग: 32.2 डिग्री सेल्सियस
  • अंबिकापुर: 31.1 डिग्री सेल्सियस

इन इलाकों में हुई बारिश

पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तरी और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश दर्ज की गई। कुसमी में सर्वाधिक 5 सेंटीमीटर बारिश हुई। चांदो में 3 सेंटीमीटर, जबकि लाभांडी, रामचंद्रपुर, बेलतरा और दुर्ग में 2-2 सेंटीमीटर पानी गिरा। केशकाल और मैनपाट में 1-1 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई।

8 अक्टूबर को कई राज्यों से लौटा मानसून

मौसम विभाग के अनुसार, 8 अक्टूबर को महाराष्ट्र के शेष हिस्सों, गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा के कुछ इलाकों के साथ झारखंड तथा छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों से भी दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी हुई है।

इन मौसमी सिस्टम का दिख रहा असर

मौसम विभाग के मुताबिक, बिहार के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण से तेलंगाना तक झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के रास्ते एक द्रोणिका बनी हुई है। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर भी चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इन मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदेश के कुछ स्थानों पर बादल छाने और हल्की बारिश होने की संभावना बनी हुई है।

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में मानसून की वापसी के साथ मौसम धीरे-धीरे शुष्क होने की ओर बढ़ रहा है। राजधानी रायपुर में फिलहाल दिन के समय गर्मी बनी रह सकती है, जबकि प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की बारिश देखने को मिल सकती है।

छोटे गांव से मुख्यमंत्री तक का सफर, विष्णुदेव साय ने युवाओं को बताया सफलता का मंत्र

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने युवाओं से अपनी रुचि को पहचानकर जीवन का लक्ष्य तय करने और उसे हासिल करने के लिए पूरी लगन से जुटने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत है। इसी सामर्थ्य के बल पर विकसित और सशक्त भारत का सपना साकार किया जा सकता है। सफलता के लिए समय का सही उपयोग, लगातार मेहनत और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है।

मुख्यमंत्री शुक्रवार शाम राजधानी रायपुर के सड्डू में आयोजित ‘यंग माइंड्स, मीनिंगफुल कन्वर्सेशंस’ कार्यक्रम में जेन-जी और जेन-अल्फा के विद्यार्थियों से रूबरू हुए। इस दौरान छात्रों ने उनके निजी जीवन, राजनीति में प्रवेश, शिक्षा व्यवस्था, राज्य की अर्थव्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और जल संरक्षण जैसे विषयों पर सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए सहज अंदाज में विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वैश्विक मंच पर भारत की पहचान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूरे किए हैं। इस अवसर पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान आयोजित किया जा रहा है।

उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि शुरुआत में स्वच्छता अभियान को लेकर सवाल उठाए गए थे, लेकिन आज यह लोगों की दिनचर्या और सामाजिक व्यवहार का अहम हिस्सा बन गया है। घरों में शौचालय निर्माण से महिलाओं के सम्मान और स्वास्थ्य को लाभ मिला है। साथ ही गांवों में खुले में शौच की समस्या को कम करने में मदद मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों ने भारत की सामरिक क्षमता और दृढ़ इच्छाशक्ति को प्रदर्शित किया है। आर्थिक क्षेत्र में भी देश ने प्रगति की है। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है।

अपने हालिया सिंगापुर दौरे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वहां कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से उनकी चर्चा हुई। इस दौरान भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और नेतृत्व को लेकर भी बातचीत हुई।

बचपन की मुश्किलों से बदली जिंदगी, शिक्षा के अवसरों में आया बड़ा बदलाव

विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने स्कूल के दिनों की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि जशपुर जिले के बगिया गांव में प्राथमिक शिक्षा के दौरान उनके स्कूल में पांचवीं की बोर्ड परीक्षा आयोजित करने की व्यवस्था नहीं थी। परीक्षा देने के लिए उन्हें दूसरे गांव जाना पड़ता था और वहां कई दिनों तक ठहरना पड़ता था। उस दौर में स्कूलों के कच्चे भवनों की छतों से बारिश का पानी टपकता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समय के साथ छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में काफी विस्तार हुआ है। उच्च शिक्षा के संस्थानों की संख्या बढ़ी है और चिकित्सा शिक्षा के अवसर भी पहले की तुलना में अधिक हुए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में पहले एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि अब इनकी संख्या 15 हो गई है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं का पूरा लाभ उठाएं और अपने भविष्य को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास करें।

पिता को खोने के बाद परिवार की जिम्मेदारी, फिर सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने का मौका

बीबीए के छात्र अश्मित शिंदे ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने की प्रेरणा कहां से मिली। जवाब में साय ने अपने जीवन के संघर्षों का जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि जब वह करीब 10 वर्ष के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। परिवार में सबसे बड़े बेटे होने के कारण मां, दादी और छोटे भाइयों की जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई। पढ़ाई के साथ उन्होंने खेती-बाड़ी का काम भी संभाला और अपने भाइयों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह गांव के सरपंच बनेंगे। लेकिन सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ते हुए उन्हें सरपंच, विधायक, सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में काम करने का अवसर मिला। इसके बाद वह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने।

उन्होंने युवाओं से कहा कि जीवन में मिली प्रत्येक जिम्मेदारी को ईमानदारी और पूरी निष्ठा से निभाना चाहिए। उनका मानना है कि अच्छे उद्देश्य के साथ लगातार प्रयास करने से आगे बढ़ने के रास्ते खुलते हैं। उन्होंने ‘कर्म ही पूजा है’ के सिद्धांत को अपने जीवन का आधार बताया।

समय का सही इस्तेमाल ही भविष्य की मजबूत नींव

छात्र करण भोसले ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन का मूल मंत्र पूछा। इस पर साय ने कहा कि समय की कीमत समझना हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। विद्यार्थियों के लिए वर्तमान समय पढ़ाई करने, अपनी क्षमताओं को विकसित करने और भविष्य की तैयारी का है।

उन्होंने कहा कि सपने व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। युवाओं को अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप लक्ष्य चुनना चाहिए। इसके बाद उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अनुशासन, मेहनत और समर्पण के साथ काम करना चाहिए।

जल संरक्षण में विद्यार्थी भी निभा सकते हैं अहम भूमिका

कक्षा नौवीं के छात्र आदित्य राज तिवारी ने पूछा कि स्कूली विद्यार्थी जल संरक्षण के लिए क्या कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी का गिरता स्तर पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में जल संरक्षण को जनभागीदारी से जुड़ा अभियान बनाना जरूरी है।

उन्होंने ‘जल संचय-जनभागीदारी’ अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि कोरिया जिले में पांच प्रतिशत मॉडल के माध्यम से जल संरक्षण के प्रयास किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इसका उल्लेख कर चुके हैं। राजनांदगांव में भी सोक पिट बनाने की दिशा में काम हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से अपने घरों, स्कूलों और आसपास के क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि पानी बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है।

2047 तक छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने की तैयारी

छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल की कक्षा 11वीं के छात्र मितांश सिंह ने प्रदेश के आर्थिक विकास को लेकर सवाल किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य ने वर्ष 2047 को ध्यान में रखकर अपना विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। इन संसाधनों का बेहतर उपयोग, प्रभावी प्रबंधन और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करके राज्य की आय बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री के साथ इस संवाद का मुख्य संदेश यही रहा कि युवाओं को अवसरों का लाभ उठाते हुए अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना चाहिए। स्पष्ट लक्ष्य, समय का सदुपयोग और निरंतर मेहनत व्यक्तिगत प्रगति के साथ देश और प्रदेश के विकास में भी योगदान दे सकते हैं।