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Sunday, November 1, 2026
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धर्म और राजनीति का द्वंद्व — धर्म बनाम कानून (एक चर्चा)

धर्म, राजनीति और कानून — न्याय की कसौटी पर आस्था है या राजनीति का जलवा!?यह एक जनता के लिए यक्ष प्रश्न है।

डिजिटल डेस्क, रविवारीय विशेष_ 22/02/2026

जन चौपाल’ 36 की ताजा कड़ी में ज्योतिपति और ज्वाला के बीच हुई चर्चा इसी कश्मकश को उजागर करती है।वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में धर्म और सत्ता के बीच का संघर्ष एक नए मोड़ पर खड़ा है। जहाँ एक ओर आस्था का प्रश्न है तो दूसरी ओर कानून और राजनीति की बिसात।

राजनीति का ‘चूल्हा’ और धर्म का ‘बवंडर’ किसकी आंच होगी तेज।

चर्चा की शुरुआत करते हुए ज्वाला ने राजनीति और धर्म की तुलना बड़े ही सटीक रूपकों से की। ज्वाला का मानना है कि राजनीति वह ‘गर्म चूल्हा‘ है जिस पर हर कोई अपने स्वार्थ की रोटियां सेंक रहा है और ‘भ्रष्टाचार के घी’ लगा लगा कर खा रहा है।यह विसंगतियों की ओर इशारा करता है जो व्यवस्था को भीतर से खोखला कर रही हैं।

दूसरी ओर, ज्योतिपति ने स्पष्ट किया कि धर्म एक ऐसा ‘बवंडर’ है जो इस राजनीतिक आग को शांत भी कर सकता है और भड़का भी। उनका तर्क है कि धर्म जन्म से जुड़ा संस्कार है, जबकि राजनीति वयस्क होने (18 वर्ष) के बाद का चुनाव। इस अंतर के कारण ही धर्म का प्रभाव राजसत्ता से कहीं अधिक गहरा और व्यक्तिगत होता है।

असली बनाम नकली: पहचान का संकट
संवाद में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का भी उल्लेख हुआ जिसमें उन्होंने भारत के सभी नागरिकों को सांस्कृतिक रूप से ‘हिंदू’ बताया था।

ज्योतिपति और ज्वाला के बीच इस बात पर सहमति दिखी कि आज के सूचना क्रांति और विज्ञापनों के युग में असली और नकली की पहचान करना कठिन हो गया है। सूचनाओं की बाढ़ में सत्य अक्सर कहीं दब जाता है।

ज्योतिपति का कहना है कि,
“राजसत्ता से बड़ी धर्म सत्ता है और धर्म सत्ता से बड़ी ईश्वरीय सत्ता, लेकिन अंततः दोनों ही ईश्वरीय सत्ता न्याय के अधीन हैं।” —

न्यायिक प्रक्रिया और वर्तमान विवाद
चर्चा का मुख्य केंद्र ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरुद्ध हालिया अदालती आदेश रहा। विदित हो कि जिला अदालत (एडीजे पॉक्सो एक्ट) ने उनके और उनके शिष्य के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

ज्वाला का तर्क: उन्होंने इस कार्रवाई के ‘समय’ पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि मामला पुराना है, तो अब सक्रियता दिखाना राजनीतिक प्रतिशोध जैसा प्रतीत हो सकता है। उन्होंने शंकराचार्य के उस पक्ष को भी रखा जिसमें शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए गए हैं।

ज्योतिपति का रुख: उन्होंने तटस्थता बरतते हुए कहा कि न्यायालय साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर चलता है। जो सत्य होगा, वह कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सामने आएगा ही।

लेकिन,
बटुकों के साथ दुर्व्यवहार: एक अनुत्तरित प्रश्न
संवाद के अंत में ज्वाला ने एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दे को उठाया—मेला क्षेत्र में बटुकों (बालकों) और बुजुर्गों के साथ कथित दुर्व्यवहार चोटी पकड़ घसीटना।

ज्वाला ने प्रश्न किया कि जब सनातन परंपरा के वाहक छोटे बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार होता है, तो वह व्यवस्था और समाज की चुप्पी पर सवाल खड़े करता है। क्या कानून का तराजू सबके लिए बराबर है? क्या धर्म की रक्षा की बात करने वाले इन मासूमों के अधिकारों पर मौन रहेंगे?

चर्चा का अंतिम निष्कर्ष
धर्म और राजनीति का यह युद्ध नया नहीं है, लेकिन 78 वर्षों की संवैधानिक यात्रा के बाद भी हम वहीं खड़े हैं जहाँ आस्था और कानून के बीच की लकीर धुंधली पड़ जाती है। देश का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि राजसत्ता और धर्म सत्ता अपने अंतर्विरोधों को सुलझाकर लोक-कल्याण के मार्ग पर कैसे साथ चलती हैं।

न्याय की प्रतीक्षा सबको है, क्योंकि अंततः ‘सत्यमेव जयते’ ही हमारा राष्ट्रीय आदर्श है।



स्टेट हाईवे जाम कर जन्मदिन मनाना पड़ा भारी, पुलिस ने निकाला जुलूस

छत्तीसगढ़ में अब नया चलन हो गया कि कोई रसूखदार शख्सियत वाला आदमी सड़क जाम कर केक काट आतिशबाजी करते जन्मदिन मनाए।

सूरजपुर, छत्तीसगढ़ _ 21 फरवरी 2026

जन्मदिन मनाने का अनोखा और गैरजिम्मेदाराना तरीका अपनाना सूरजपुर जिले के सात युवकों को भारी पड़ गया। अंबिकापुर-बनारस स्टेट हाईवे पर वाहन खड़े कर केक काटना और आतिशबाजी करना इन रईसजादों को सीधे हथकड़ी तक ले गया।

क्या था पूरा मामला?
16 फरवरी की रात लटोरी पुलिस चौकी क्षेत्र के सोनवाही के पास कुछ युवकों के एक समूह ने अपनी गाड़ियाँ हाईवे पर आड़ी-तिरछी खड़ी कर दीं और बीच सड़क पर जन्मदिन का जश्न शुरू कर दिया। कार की बोनट पर बैठकर केक काटा गया, जमकर आतिशबाजी हुई और करीब एक किलोमीटर लंबा जाम लग गया। घंटों तक वाहन फंसे रहे और इसी भीड़ में एक एम्बुलेंस भी जाम में जकड़ी रही।

वायरल वीडियो बना गिरफ्तारी की वजह
जश्न का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई। 20 फरवरी को सूरजपुर पुलिस ने दो विशेष टीमें गठित कीं और कार्रवाई करते हुए 6 युवकों को अंबिकापुर से तथा एक को लटोरी से गिरफ्तार किया। साथ ही दो वाहन भी जब्त किए गए।

थाने से कोर्ट तक पैदल जुलूस
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों को कोतवाली थाने लाया और वहाँ से पैदल जुलूस निकालते हुए सूरजपुर कोर्ट तक ले गई। कुछ देर पहले तक अकड़ दिखाने वाले इन युवकों के सिर कोर्ट परिसर तक पहुँचते-पहुँचते झुके हुए थे। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक मार्ग बाधित करने और यातायात में व्यवधान डालने के आरोप में इन सभी के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यूजीसी नियम के विरोध में जगद्गुरु रामभद्राचार्य का बयान:गृहयुद्ध से बचना है तो वापस लें कानून’

लखनऊ में सवर्ण मोर्चा के प्रदर्शन के बाद अब आध्यात्मिक जगत के संत रामभद्राचार्य उतरे बयान में।(खबर सूत्रों पर)

बस्ती/लखनऊ _21 फरवरी, 2026

घटनाक्रम में एक नया मोड़ ले आया है। इतने बड़े व्यक्तित्व का विरोध सरकार के लिए बड़ी चुनौती खड़ा कर सकता है।बस्ती में आयोजित राम कथा के दौरान प्रखर आध्यात्मिक गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने ‘यूजीसी समता विनियम 2026’ पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार को यह कानून हर हाल में वापस लेना होगा। जगद्गुरु ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “मेरे धर्माचार्य रहते यह कानून लागू नहीं हो सकता। सरकार को सोचना चाहिए कि यूजीसी के इस नए नियम की क्या आवश्यकता थी? समाज में इस तरह भेदभाव क्यों पैदा किया जा रहा है?”

जगद्गुरु ने आगे सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि देश को गृहयुद्ध जैसी स्थिति से बचाना है, तो इस विवादित कानून को तत्काल निरस्त करना होगा। उनके इस बयान ने लखनऊ में चल रहे सवर्ण मोर्चा के आंदोलन को वैचारिक मजबूती दे दी है।

मैदान में सवर्ण मोर्चा, पुलिस से तीखी झड़प
वहीं दूसरी ओर, लखनऊ के परिवर्तन चौक पर अभिनव त्रिपाठी और हाल ही में इस्तीफा देने वाले पूर्व सरकारी अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के नेतृत्व में सवर्ण समाज ने भारी हुंकार भरी। प्रदर्शनकारियों ने जब बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर इको गार्डन शिफ्ट किया गया है।

क्या है विवादित ‘समता विनियम 2026’?
यूजीसी का यह नया नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी, ओबीसी और दिव्यांगों के लिए ‘इक्विटी स्क्वॉड’ और ‘समता समिति’ अनिवार्य बनाता है। सवर्ण समाज और अब जगद्गुरु रामभद्राचार्य का मानना है कि संस्थानों में इस तरह की विशेष समितियों का गठन समाज को और अधिक विभाजित कर सकता है, जबकि यूजीसी का तर्क है कि यह भेदभाव रोकने के लिए जरूरी कदम है।

लखनऊ में सवर्ण मोर्चा का हल्लाबोल, यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जमकर हंगामा

सवर्ण मोर्चा एक तरफा कड़े प्रावधानों और प्रतिनिधित्व के ढांचे को लेकर विरोध जता रहा है।

लखनऊ | 21 फरवरी, 2026

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के परिवर्तन चौक पर शनिवार को यूजीसी के नए नियमों के विरोध में सवर्ण मोर्चा ने जोरदार प्रदर्शन किया। अभिनव त्रिपाठी की अगुवाई में बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग सड़कों पर उतरे और आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि ‘यूजीसी समता विनियम 2026‘ के कुछ प्रावधान उनके हितों को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रदर्शन में हाल ही में सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर चर्चा में आए अलंकार अग्निहोत्री भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने जब परिवर्तन चौक से मार्च निकालने की कोशिश की, तो पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इस दौरान उत्तेजित कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोक_झोंक हुई। माहौल तनावपूर्ण होता देख पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और बसों के जरिए इको गार्डन भेज दिया।

क्या है विवाद की जड़: यूजीसी समता विनियम 2026
यूजीसी ने 13 जनवरी को उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव खत्म करने के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं। इसके तहत हर संस्थान में ‘समान अवसर केंद्र‘ और ‘समता समिति‘ का गठन अनिवार्य होगा। इस समिति में एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांगों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। साथ ही, संस्थानों में एक ‘समता समूह’ (इक्विटी स्क्वॉड) बनाया जाएगा, जो कैंपस में किसी भी प्रकार के भेदभाव की निगरानी करेगा।

नियमों के अनुसार, दाखिले के समय छात्रों को भेदभाव न करने का शपथ-पत्र देना होगा। यूजीसी ने कड़े निर्देश दिए हैं कि छात्रावास, कक्षा या मेंटरशिप के स्तर पर वंचित समूहों के साथ कोई पक्षपात नहीं होना चाहिए। यदि कोई विश्वविद्यालय इन नियमों का पालन करने में विफल रहता है, तो यूजीसी उसकी अनुदान सहायता रोक सकता है।

“MBBS” डिग्री का झांसा देने वाला फर्जी गिरोह पकड़ाया, 52 से लूटे 2.34 करोड़

ठगी के शिकार युवाओं को पैसे मिलेंगे या नहीं.?जब्ती खबरों में नकदी या संपत्ति जब्त होने का स्पष्ट उल्लेख नहीं,जांच जारी है।

रायपुर, 21 फरवरी 2026

राजधानी रायपुर के विधानसभा इलाके में फर्जी ऑफिस चला कर सरकारी नौकरी व MBBS डिग्री का झांसा देने वाले गिरोह का सिविल लाइन पुलिस ने भंडाफोड़ किया। मास्टरमाइंड नरेश मनहर—खुद दसवीं पास—ने 52 लोगों से 2 करोड़ 34 लाख रुपये ठगे।

गिरोह का फर्जी दस्तावेज जब्त
आरोपी फर्जी नियुक्ति पत्र स्पीड पोस्ट से भेजता, दिल्ली पोस्ट ऑफिस डायरेक्टर बन पोस्टमास्टर-पोस्टमैन नौकरी का लालच देता। MBBS डिग्री (‘डॉ. डीवाई पाटिल यूनिवर्सिटी’) प्रति 50 लाख में बेचता। पुलिस ने छापे में लैपटॉप, फर्जी सील व नोट गिनती मशीन बरामद की।छत्‍तीसगढ़ पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. इनसे ठगी में प्रयोग में लाए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए हैं।

केस में चार आरोपी गिरफ्तार
नरेश मनहर, भुनेश्वर बंजारे, हीरा दिवाकर व राकेश रात्रे को भारतीय न्याय संहिता के तहत गिरफ्तार किया गया। जांच जारी, अन्य सदस्यों की तलाश।भुनेश्वर का काम आवेदकों से पैसे वसूलना और फर्जी कॉल करना था, जबकि हीरा और राकेश दस्तावेजों की छंटाई और बैंक खातों के संचालन में मदद करते थे।

जनता से पुलिस की अपील
युवा सतर्क रहें—सरकारी नौकरी या डिग्री के नाम पर बिना सत्यापन पैसे न दें। संदिग्ध जानकारी तुरंत पुलिस को सूचित करें।

माओवादी उन्मूलन की दिशा में बड़ी सफलता: सुरक्षाबलों ने ध्वस्त किए 4 अवैध नक्सली स्मारक

यह बस्तर में माओवादी उन्मूलन अभियान का हिस्सा है, जहां हाल ही में कई स्मारक ध्वस्त हो चुके हैं। नक्सल मुक्त भारत की समय सीमा 31 मार्च 2026।

बीजापुर, 21 फरवरी 2026

पूरे देश के 80 प्रतिशत नक्सली साया छत्तीसगढ़ को माना जाता है। जहां माओवाद समाप्त कर राज्य को विकास की दिशा में ले जाना केंद्र सरकार और राज्य सरकार का संयुक्त मुहिम बना हुआ है।बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान को तेज करते हुए 20 फरवरी को दोपहर बाद थाना फरसेगढ़ और थाना तर्रेम क्षेत्रों में संयुक्त कार्रवाई की। इस दौरान कुल चार अवैध माओवादी स्मारकों को ध्वस्त कर दिया गया, जो नक्सल हिंसा के प्रतीक थे।

फरसेगढ़ में 15 फीट ऊंचा स्मारक ढहाया
थाना फरसेगढ़ के अंतर्गत FOB पील्लूर और केरिपु 214वीं वाहिनी के जवानों ने नीलमड़गु के जंगलों में निर्मित लगभग 15 फीट ऊंचे अवैध माओवादी स्मारक को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। अभियान के दौरान पूरे क्षेत्र में सघन सर्चिंग भी की गई, जिससे कोई नक्सली घटना नहीं हुई।

जंगलों के बीच तीन स्मारकों का सफाया
इसी क्रम में थाना तर्रेम क्षेत्र के पेद्दागेलुर और कोत्तागुड़ा जंगलों में केरिपु 153वीं वाहिनी के सुरक्षाबलों ने तीन अन्य अवैध स्मारकों को गिरा दिया। ये स्मारक नक्सली अपने मृत साथियों की स्मृति में बनाते थे, जो भय का माहौल बनाए रखने का माध्यम थे।

बस्तर से माओवाद मुक्त संकल्प: अभियान जारी
सुरक्षा बलों का स्पष्ट कहना है कि माओवाद के पूर्ण उन्मूलन, क्षेत्र में शांति-सुरक्षा तथा विकास की स्थापना के लिए ऐसी कार्रवाइयां लगातार जारी रहेंगी। बस्तर अंचल में बढ़ती सक्रियता से नक्सली गतिविधियां कमजोर पड़ रही हैं, और स्थानीय ग्रामीणों में विश्वास बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में और सशक्त अभियान की योजना है।


वीर शिवाजी चौक का भव्य उद्घाटन: कवर्धा में गूंजा हिंदवी स्वराज्य का नाद!

कवर्धा को मिली करोड़ों की बड़ी सौगात! डिप्टी सीएम के ऐलान से बदलेगा शहर का भविष्य।छत्रपति शिवाजी महाराज के दिव्य/भव्य प्रतिमा का लोकार्पण कार्यक्रम में विजय शर्मा।

कवर्धा, 19 फरवरी 2026।

साजि चतुरंग बीररंग में तुरंग चढ़ि, सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत है! कवि भूषण के इन ओजस्वी पंक्तियों से डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने गुरुवार की शाम शिवाजी चौक के अनावरण की शुरुआत की। गायत्री मंदिर, जनपद ऑफिस, पार्क और सिग्नल चौक के निकट यह भव्य स्थल अब छत्रपति शिवाजी महाराज की विशाल मूर्ति से सुशोभित है।

वीर भाषा में जनता को संबोधित
डिप्टी सीएम ने कहा, “शिवाजी जब युद्धभूमि में उतरते थे, कवि भूषण उनके संग रहा करते थे। आज भी ये पंक्तियां नौजवानों में जोश भरती हैं!” उन्होंने कवर्धा की जनता को ओजस्वी शब्दों में ललकारा—यह मूर्ति नौजवानों की प्रेरणा बनेगी, आत_तायियों को भगाने का संकल्प लेगी। विजय शर्मा ने विवेकानंद, सहस्त्रबाहु, बजरंगबली की मूर्तियां स्थापित करने का वचन दोहराया—संत कबीर चौक (20 लाख स्वीकृत), गाडगे बाबा चौक, करपात्री जी चौक के फंड तय। सियान सदन और चौपाटी का निर्माण शीघ्र!

शिवाजी की गाथा गाई: टैंक की मांग!
शिवाजी को कुशल योद्धा, गणराज्य उद्घोषक बताते हुए शर्मा ने कहा, “गौ-हत्या करने वाले अफजल खान हों या औरंगजेब—सभी उनके नाम से कांपते थे!” आर्मी को पत्र लिखा—शिवाजी प्रतिमा के सामने वास्तविक युद्धक टैंक लगेगा। विलंब पर माफी मांगते हुए बोले, “गांवों में शिकायतें सुनता रहा, अंतिम कागज तक खड़ा रहा!”

अतिथियों का वीर अभिनंदन
दुर्ग विधायक ललित चंद्राकर ने कहा, “शिवाजी ने आक्रांताओं को जूतों से मसला, हिंदवी स्वराज्य की नींव रखी। सनातन धर्म की पावन धरा कवर्धा में यह जयंती ऐतिहासिक!” नगर पालिका अध्यक्ष चंद्र प्रकाश चंद्रवंशी, राजेंद्र चंद्रवंशी, सुरेश चंद्रवंशी सहित भाजपा पदाधिकारी उपस्थित। यह चौक भविष्य का गवाह बनेगा—वीर शिवाजी अमर रहे कवर्धा धर्म नगरी अमर रहे!


मुफ्त की योजनाओं पर तमिलनाडु सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने किया सवाल

मुफ्त बिजली-खाना बांटने पर CJI सूर्यकांत ने तमिलनाडु से पूछा: ‘किस कल्चर का निर्माण?

नई दिल्ली _20/02/2026

कोर्ट ने घाटे में चल रहे राज्यों द्वारा मुफ्त बिजली, खाना और साइकिल जैसी योजनाओं पर सवाल उठाए, कहा कि इससे आर्थिक विकास रुकता है और काम करने की संस्कृति खराब होती है। CJI ने रोजगार सृजन पर जोर दिया तथा पूछा कि टैक्सपेयर्स का पैसा कहां से आएगा। बेंच ने सभी दलों से इस पर पुनर्विचार की सलाह दी, अभी कोई रोक या आदेश नहीं दिया है।

मामले का संदर्भ में यह टिप्पणी तमिलनाडु विद्युत वितरण निगम बनाम केंद्र की सुनवाई में आई, जहां राज्य ने सभी को मुफ्त बिजली का प्रस्ताव रखा। कोर्ट ने पूछा कि चुनाव से पहले ऐसी घोषणाएं क्यों, और बड़े जमींदारों को भी फायदा पहुंचाने का औचित्य क्या है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया है।

यह नोटिस तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी हुआ, जहां राज्य सरकार द्वारा सभी को मुफ्त बिजली देने की योजना को चुनौती दी गई। कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार और प्रभावित पक्षकारों से जवाब मांगा है।

कोर्ट ने इस मामले में तमिलनाडु सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें पूछा गया है कि सरकार फ्री बिजली के अपने वादे को पूरा करने के लिए पैसा कहां से ला रही है?

विधायकों का फोन नहीं उठाना अब अफसरों को पड़ेगा भारी:यूपी विधानसभा

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना द्वारा विधायकों के फोन न उठाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्ती का ऐलान किया गया है।

उत्तर प्रदेश _20 फरवरी 2026

नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय की शिकायत पर सदन में मुद्दा उठा।स्पीकर महाना ने संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना को पूर्व शासन के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा। अधिकारियों को विधायकों को समय व सम्मान देना होगा, अन्यथा सेवा नियमावली के तहत दंड। उन्होंने चेतावनी दी कि यह संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन है।

प्रभाव व संभावनाएं एवं विश्लेषण: शक्ति संतुलन
यह कदम कार्यपालिका-विधायिका तनाव को दर्शाता है।स्पीकर महाना ने कार्यपालिका, न्यायपालिका व विधायिका के पूरक संबंध पर जोर दिया—किसी अंग का हस्तक्षेप अराजकता न्योता देता है। पूर्व मामलों में दोषी अधिकारियों को दंडित कर चुके हैं, अब ‘सख्त संदेश’ की मांग। यह विधायिका की सर्वोच्चता बहाल करने का प्रयास है, जो लोकतंत्र की जड़ मजबूत करेगा।

संवाद सेतु ऐप
अधिकारियों को सजग बनाएगा, जनहित मुद्दों पर त्वरित सहयोग बढ़ेगा। योगी सरकार ‘संवाद सेतु’ ऐप ला रही—10 मिनट में कॉल बैक न करने पर अलर्ट। सरकार की ओर से विधायिका को मजबूत करने की पहल की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारियों को अधिक सजग होकर नियमों का अनुपालन/क्रियान्वयन चुनौती।

छत्तीसगढ़ का स्टॉल आकर्षण का केंद्र बना भारत मंडपम दिल्ली में: एआई इम्पैक्ट समिट

देश के पहले एआई डाटा सेंटर पार्क की दी जा रही जानकारी।नवा रायपुर में देश के पहले एआई डाटा सेंटर पार्क से डिजिटल नवाचार को नई गति – मुख्यमंत्री श्री साय।

रायपुर, 20 फरवरी 2026

भारत मंडपम, नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में छत्तीसगढ़ का “छत्तीसगढ़ ड्रिवन बाय इंटेलिजेंस” स्टॉल निवेशकों व विशेषज्ञों का केंद्र बना। स्टॉल पर नवा रायपुर के पहले एआई डाटा सेंटर पार्क (1000 करोड़ निवेश, 1 लाख जीपीयू क्षमता) की जानकारी प्रमुखता से दी जा रही है।

एआई डाटा सेंटर पार्क के रोजगार सृजन और स्थानीय प्रभाव पर केंद्रित रोजगार सृजन में नया आयाम।

यह पार्क 500 प्रत्यक्ष व 1500 अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेगा, स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता। जीपीयू कंप्यूटिंग, एआई प्रोसेसिंग व एनालिटिक्स सेवाएं उपलब्ध होंगी, जो हेल्थटेक, फिनटेक व स्मार्ट एग्रीकल्चर को बढ़ावा देंगी। इससे ब्रेन ड्रेन रुकेगा व राज्य टेक हब बनेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, “यह परियोजना डिजिटल नवाचार व उच्च तकनीकी निवेश को गति देगी तथा युवाओं के सपनों को उड़ान।” औद्योगिक नीति 2024-30 के प्रोत्साहनों, स्मार्ट सिटी व कनेक्टिविटी को भी प्रदर्शित किया गया।

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने निवेश रुचि दिखाई, राज्य को टेक हब बनाने में सहायक।