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Sunday, October 25, 2026
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सीएम विष्णुदेव साय आज करेंगे हेल्पलाइन 1076 की समीक्षा, 33 जिलों के कलेक्टरों से लेंगे रिपोर्ट

 छत्तीसगढ़:  आम लोगों की शिकायतों के समाधान की प्रगति पर राज्य सरकार की नजर है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सीएम हेल्पलाइन 1076 के कामकाज की समीक्षा करेंगे। दोपहर 3 बजे प्रस्तावित इस बैठक में प्रदेश के सभी 33 जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे। बैठक में शिकायतों के निपटारे, समाधान की गुणवत्ता और शिकायतकर्ताओं की संतुष्टि से जुड़े पहलुओं पर चर्चा होगी।

करीब दो लाख शिकायतों के निपटारे की होगी समीक्षा

सीएम हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत 9 जून 2026 को की गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुरुआती चार महीनों में इस माध्यम से करीब दो लाख शिकायतें दर्ज की गई हैं। मुख्यमंत्री अधिकारियों से इन शिकायतों की मौजूदा स्थिति की जानकारी लेंगे।समीक्षा के दौरान यह देखा जाएगा कि कितनी शिकायतों का समाधान हो चुका है, कितने मामले अभी लंबित हैं और शिकायतों के निराकरण से आवेदक कितने संतुष्ट हैं। इसके साथ ही जिलावार प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि समस्याओं के समाधान में आ रही बाधाओं की पहचान की जा सके।

कलेक्टरों को मिल सकते हैं जरूरी निर्देश

बैठक में मुख्यमंत्री शिकायतों के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे सकते हैं। जिलों के प्रदर्शन और लंबित मामलों की स्थिति के आधार पर संबंधित अधिकारियों से जवाब भी मांगा जा सकता है।शिकायतों के निपटारे में देरी, बार-बार सामने आने वाली समस्याओं और आवेदकों की असंतुष्टि जैसे मुद्दे भी समीक्षा का हिस्सा हो सकते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए जिला प्रशासन की जवाबदेही और शिकायत निवारण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर जोर दिए जाने की संभावना है।

क्या है सीएम हेल्पलाइन 1076?

सीएम हेल्पलाइन 1076 छत्तीसगढ़ सरकार की शिकायत निवारण पहल है। इसका उद्देश्य आम नागरिकों को अपनी समस्याएं दर्ज कराने के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराना और संबंधित विभागों के माध्यम से उनका निर्धारित समय में समाधान सुनिश्चित करना है।इस व्यवस्था के तहत नागरिक फोन के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद शिकायत संबंधित विभाग को भेजी जाती है, जहां उसके निराकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। आज की समीक्षा बैठक में इस व्यवस्था के तहत दर्ज मामलों की प्रगति और शिकायतकर्ताओं को मिल रही राहत की स्थिति पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है।

शाह का बड़ा दावा: अब तक 8,526 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, खुशहाल बस्तर बनाने का संकल्प

रायपुर- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि माओवादी हिंसा से मिले घावों पर मरहम लगाकर हर पीड़ित को सम्मानपूर्ण जीवन देना सरकार का संकल्प है। माओवादियों की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हंसता-खेलता और खुशहाल बनाया जाएगा।

हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।

शाह ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा में आयोजित निश्शुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ किया।

768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण दिए

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल हुए। शाह ने बताया कि दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय शिविर के पहले चरण में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण दिए गए। इससे पहले जगदलपुर शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे।

पंचांग: नवरात्रि का छठा दिन, मां कात्यायनी की पूजा, जानिए अमृतकाल और राहुकाल का समय

Aaj Ka Panchang: हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है. कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है. पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है. 16 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि सुबह 5:54 बजे तक रहेगी. इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू हो जाएगी. शुक्रवार को सुबह 6:28 बजे सूर्योदय और शाम 5:56 बजे सूर्यास्त होगा. वहीं, सुबह 11:24 बजे चंद्रोदय और रात 10:01 बजे चंद्रास्त होगा.

आज का पंचांग

16 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) को शारदीय नवरात्र का छठा दिन है. इस दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी. महर्षि कात्यायन की तपस्या और उनके यहां पुत्री के रूप में मां के प्रकट होने के कारण ‘कात्यायनी’ नाम पड़ा. देवी सिंह (शेर) पर सवारी करती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी कात्यायनी मानव शरीर के आज्ञा चक्र की अधिष्ठात्री हैं. इनकी उपासना से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है. विवाह में आ रही बाधाएं भी इनकी कृपा से दूर होती हैं.

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में रहेंगे. ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं या इस नक्षत्र में स्थित होते हैं, तो इसके विशेष और गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं. चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जिन्हें सूर्य का मित्र माना जाता है. सूर्य और मंगल के इस मेल से व्यक्ति के भीतर गजब का आत्मविश्वास, साहस, पराक्रम और ऊर्जा बढ़ती है. नौकरीपेशा लोगों के काम की उच्च अधिकारियों द्वारा सराहना होती है. प्रशासन, उच्च पदों या प्रबंधन से जुड़े लोगों को विशेष लाभ, नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकते हैं.

शुक्रवार रात 10:05 बजे तक शोभन योग रहेगा. ज्योतिष के अनुसार, शोभन योग को 27 नित्य योगों में से 5वां योग माना जाता है. ‘शोभन’ शब्द का अर्थ सुंदर, शुभ, सुहावना या कल्याणकारी होता है. इस योग के स्वामी बृहस्पति (गुरु) हैं, जो ज्ञान, समृद्धि और शुभता के कारक माने जाते हैं. इस योग को अधिकांश मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए बहुत श्रेष्ठ माना जाता है. नए वस्त्र धारण करना, आभूषण खरीदना, विवाह, सगाई, सौंदर्य उपचार और विशेष रूप से यात्रा शुरू करने के लिए यह योग अत्यंत मंगलकारी माना गया है.

अभिजीत मुहूर्त

इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा. यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है. आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है. माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं. जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है.

अमृतकाल

शुक्रवार को रात 2:39 से 4:27 बजे तक अमृतकाल रहेगा. ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है. इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है. इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है. यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है.

राहुकाल

इस दिन राहुकाल रात 10:46 बजे से 12:12 बजे तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है. स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है. इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है.

गुलिक काल

शुक्रवार को गुलिक काल सुबह 7:54 से 9:20 बजे तक रहेगा. गुलिक काल को ‘विषैला समय’ भी कहा जाता है. यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है. माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं. इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है. जो काम बार-बार करने हों, वे इस काल में किए जा सकते हैं. बैंक में पैसे जमा करना, दान देना, या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है.

यमगंड काल

इस दिन यमगंड काल दोपहर 3:04 से 4:30 बजे तक रहेगा. यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है. इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु, या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए. इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए.

Aaj Ka Rashifal: नवरात्रि का छठा दिन, मेष, वृषभ और कर्क को मिलेगा घन का लाभ, जानिए आज का राशिफल

Aaj Ka Rashifal: आज 16 अक्टूबर और दिन शुक्रवार है. नवरात्र का छठा दिन है और इस दिन मां कात्यायनी का पूजा की जाती है. आज का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर, जिम्मेदारियां और महत्वपूर्ण फैसले लेकर आ सकता है. चंद्रमा के गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों के जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों पर पड़ेगा. आज के दिन किसी को धन का लाभ मिलेगा, तो किसी को प्यार, परिवार, रोजगार में शुभ संकेत मिलेगा. जानिए मेष से लेकर मीन तक, आज का राशिफल.

मेष राशि

मेष राशि वाले जातकों के लिए आज का दिन उन्नति व्रत समाचार से मन खुश होगा. पढ़ाई में अत्यधिक मन लगेगा. नए कार्य की रूपरेखा तैयार होगी. सामाजिक सम्मान बढ़ेगा. घर गृहस्ती में चहल-पहल बढ़ेगी. कानूनी विवाद का समाधान पूर्ण रूप से हो जाएगा. यात्रा के शुभ योग बन रहे हैं. प्रॉपर्टी में आपके नाम हो जाएगी.

वृषभ राशि

वृषभ राशि वाले जातकों के लिए आज का समय मित्र सहयोग से योजना पूरी होगी. मित्रों के साथ मित्रता में बहुत मिठास व्याप्त होगा. शत्रु षड्यंत्र लोको पवार से बचे रहें. दूर समीप की यात्रा का विचार बनेगा. देव पूजन का लाभ होगा. नए कार्य का शुभारंभ कर सकते हैं. जमीन जायदाद वाहन आदि का सुख मिलेगा.

मिथुन राशि

मिथुन राशि वाले जातक वाणी पर विशेष नियंत्रण बनाए रखें. कानूनी विवाद नया मोड़ ले सकता है. योजना पूर्ति में किसी मित्र का सहयोग अपेक्षित रहेगा. पार्टनरशिप व्यापार में कार्य करने की योजना बनेगी. ग्रह चल का प्रभाव मध्यम रहेगा. अपने कर्तव्य का सही ढंग से पालन करें.

कर्क राशि

कर्क राशि वाले जातकों के लिए अभी का समय बहुत ही चंचल युक्त रहेगा. मन बहुत सारे कार्यों में बढ़ता रहेगा. इसलिए सर्वप्रथम मां को स्थिर रखें और नयापन न आने दें. राजनीति में सफलता मिलेगी. घर गृहस्ती में हास्य रस बढ़ेगा. मित्र सहयोग से नया रास्ता खुलेगा. रुका हुआ धन आपको प्राप्त हो जाएगा. विरोधी षड्यंत्र रच सकता है.

सिंह राशि

सिंह राशि वाले जातकों के लिए यह समय बहुत उत्तम है. सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखें. आलस से प्रमाण शारीरिक समस्याओं से बचाव रखें. इष्ट मित्र समागम होगा. अचानक द्रव्य लाभ होगा. परस्पर नोकझोंक के योग बन रहे हैं. वाणी एवं अपनी क्रियाकलापों पर नियंत्रण बनाए रखें. दांपत्य सुख मिलेगा, किसी दूसरे के विवाद में ना पड़े.

कन्या राशि

कन्या राशि वाले जातकों के आज का समय व्यर्थ की भागदौड़ से बचें. मित्र मदद करेंगे. नए कानूनी विवाद का सामना करना पड़ेगा और सफलता के मध्य सफलता मिलेगी. गृह कार्य में व्यस्तता बनी रहेगी. भूमि वाहन की खरीद कर सकते हैं. परिवार में खुशियां प्राप्त होगी. आत्म शक्ति का विकास होगा. कार्य व्यवसाय में परिजनों के सहयोग से लाभ होगा.

तुला राशि

तुला राशि वाले जातकों के लिए घर गृहस्ती की खुशी होगी. पुरानी निराशा आशा में बदल जाएगी. पुराने मित्र से मिलन संभव है. इच्छित वस्तु का लाभ मिलेगा. तीव्र लाभ के जिज्ञासा प्रबल होगी. कारोबार की नई रूपरेखा सामने आएगी. व्यापार के लिए नई योजना में आप कार्य करेंगे. नौकरी में अच्छे प्रमोशन के योग बन रहे हैं.

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वाले जातकों का आज का दिन घूमने फिरने का अवसर मिलेगा. मां आध्यात्मिक सुख अनुभव करेगा. विरोधियों से मधुर संबंध बनेंगे. आपके सामाजिक सम्मान मिलेगा. भौतिक विकास को बल प्राप्त होगा. नया समझौता आपके फायदे में उन्नति परत रहेगा. राजनीतिक संपर्कों से लाभ मिलेगा. मित्रों के साथ सुंदर धर्म की चर्चा होगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा.

धनु राशि

धनु राशि वाले जातकों का आज का दिन बाद ही अध्यात्म युक्त रहने वाला है. व्यापार में अच्छा खासा लाभ प्राप्ति के बहुत सुंदर योग हैं. पार्टनरशिप में आप एक नया व्यापार करने की योजना बना रहे हैं. वह योजना आपका पक्का होगा. राजनीतिक संपर्क से लाभ होगा. दांपत्य सुख मिलेगा. बच्चों का परिणाम सर्वश्रेष्ठ रहेगा. सामाजिक एवं आध्यात्मिक उन्नति होगी. पड़ोसियों द्वारा अमर्यादित व्यवहार से बचें.

मकर राशि

मकर राशि वाले जातकों का आज का दिन विवाद युक्त रहने वाला है. व्यवसाय में सोच विचार से काम लें. अनजान से दोस्ती ना करें. अनजान व्यक्ति नुकसान पहुंचाने का पूरा प्रयास करेगा. मित्र मिलन मांगलिक अवसर पर शुभ का अनुभव होगा और सफलता के मध्य आपको पूर्ण सफलता प्राप्त होगी. शत्रु षड्यंत्र में व्यस्त रहेगा. कानूनी विवाद में आपका पूर्ण रूप से विजय होगी. समय बहुत सोच समझ कर चलने वाला है.

कुंभ राशि

कुंभ राशि वाले जातकों का आज का दिन सोची समझी योजना को परिपूर्ण कर पाएंगे. घर गृहस्थी का विचार पूरा हो जाएगा. प्रदेश से सुखद समाचार आपको प्राप्त होगा. सरकारी कार्य आपका पूर्ण हो जाएगा. वाहन खरीद सकते हैं. भौतिक सुख उपयोग के साधन सुलभ होंगे. कम बिगड़ने की संभावना ज्यादा है.

मीन राशि

मीन राशि वाले जातकों का आज का दिन ग्रह चल के प्रभाव से लाभदायक रहेगा. रुके हुए कार्य आपके बन जाएंगे. दीर्घकालीन विवाद सुलझ जाएगा. लंबी यात्रा संभव है. देव दर्शन सामाजिक कार्य में आपका समय व्यतीत होगा. लाभ और खर्च समान रहेगा. किसी के विवाद में दखल अंदाज ही ना करें. सोची समझी योजना कारगर रहेगी. नए मेहमान के आने से घर में खुशी का माहौल बनेगा. यात्रा छोटी मगर लाभप्रद रहेगी.

राज्यपाल डेका से छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस समिति के अध्यक्ष ने की सौजन्य भेंट

 रायपुर, / छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष श्री तोमन साहू ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान उन्होंने राज्य के 13 जिलों में जिला रेड क्रॉस समितियों की समीक्षा बैठक आयोजित किए जाने की जानकारी दी और इसका प्रतिवेदन राज्यपाल को सौंपा।

श्री साहू ने राज्यपाल को जिलों में रेड क्रॉस की गतिविधियों और संचालित कार्यक्रमों के बारे में भी अवगत कराया। साथ ही, उन्होंने छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राज्यपाल को आमंत्रित किया।

राज्यपाल श्री डेका ने शेष जिलों में भी जिला रेड क्रॉस समितियों की समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने रेड क्रॉस की गतिविधियों का विस्तार करने पर जोर दिया, ताकि जरूरतमंद लोगों तक सेवाओं का लाभ पहुंचाया जा सके। इस अवसर पर रेड क्रॉस सोसाइटी के सदस्य श्री युगल सिन्हा उपस्थित थे।

स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और सहज उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की*

*भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार की दीर्घकालिक कार्ययोजना : मुख्यमंत्री*

*जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक चिकित्सक, दवाइयां और जांच सुविधाएं रहें उपलब्ध*

*सुरक्षित संस्थागत प्रसव, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पर विशेष जोर*

*दुर्गम क्षेत्रों में एम्बुलेंस नहीं पहुंच सके तो स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करें वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था*

*प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का तेजी से विस्तार, 6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत; नर्सिंग और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या भी बढ़ी*

*त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की सघन जांच के निर्देश, मुख्यमंत्री ने कहा – नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं*

रायपुर /स्वास्थ्य सेवाएं सीधे आम नागरिकों के जीवन और परिवार की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय हैं। प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को आवश्यकता पड़ने पर समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार, आवश्यक दवाइयां, जांच और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध हों, यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ सेवाओं की गुणवत्ता और अंतिम व्यक्ति तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने पर समान रूप से ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस दौरान संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, संचालनालय चिकित्सा शिक्षा, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन, संचालनालय आयुष एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन तथा खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अंतर्गत संचालित योजनाओं, उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना का लगातार विस्तार हुआ है। अनेक अच्छे अस्पताल और चिकित्सा संस्थान विकसित हुए हैं। अब जहां चिकित्सकों, विशेषज्ञों, स्वास्थ्य कर्मियों, चिकित्सा उपकरणों अथवा जांच सुविधाओं की कमी है, उन्हें चिन्हित कर प्राथमिकता के साथ दूर किया जाए। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो और उनका अधिकतम लाभ मरीजों तक पहुंचे।

*भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बने स्वास्थ्य अधोसंरचना की दीर्घकालिक कार्ययोजना*

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश की बढ़ती आबादी और भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में वर्तमान स्वास्थ्य सुविधाओं, जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की जरूरतों का आकलन किया जाए। इसी आधार पर स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार और आवश्यक सुविधाओं के विकास की स्पष्ट कार्ययोजना बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में आवश्यकता के अनुरूप बिस्तरों की संख्या बढ़ाने, विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार करने और नवगठित जिलों में जरूरी चिकित्सा सुविधाओं को प्राथमिकता से विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास में केवल भवन निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों, उपकरणों, दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता को भी समग्र रूप से सुनिश्चित किया जाए।

*जिला अस्पताल से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक मरीजों को मिलें आवश्यक दवाइयां और जांच सुविधाएं*

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला अस्पतालों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहनी चाहिए। मरीजों को सामान्य जांच और उपचार के लिए अनावश्यक परेशानी या भटकाव का सामना न करना पड़े।

उन्होंने चिकित्सा उपकरणों के नियमित रखरखाव और प्रभावी उपयोग पर भी विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल में उपलब्ध कोई भी महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण रखरखाव अथवा मरम्मत के अभाव में लंबे समय तक बंद नहीं रहना चाहिए। इसके लिए प्रभावी निगरानी और समयबद्ध मरम्मत व्यवस्था विकसित की जाए।

बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की वित्तीय प्रगति, मानव संसाधन की उपलब्धता तथा रिक्त पदों पर भर्ती की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि रिक्त पदों पर भर्ती के प्रयास किए जा रहे हैं और सेवा भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया भी प्रचलन में है। मुख्यमंत्री ने भर्ती संबंधी प्रक्रियाओं को गति देने के निर्देश देते हुए कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता सेवाओं की गुणवत्ता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं। डायलिसिस, ट्रॉमा केयर, ब्लड बैंक, आईसीयू और सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 33 स्थानों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है और 25 नए डायलिसिस केंद्र प्रारंभ किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के साथ स्वास्थ्य संस्थानों के गुणवत्ता मानकों, ई-हॉस्पिटल तथा आभा जैसी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की और तकनीक का उपयोग मरीजों की सुविधा तथा सेवाओं की दक्षता बढ़ाने के लिए करने के निर्देश दिए।

*हर प्रसव सुरक्षित हो, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें : मुख्यमंत्री*

मुख्यमंत्री श्री साय ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में बताते हुए कहा कि गर्भवती माताओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक पोषण एवं चिकित्सा देखभाल और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जाए। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें और प्रसूता महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा तथा सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए।

उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि प्रत्येक प्रसव सुरक्षित हो और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में कमी आई है, लेकिन इस दिशा में और बेहतर परिणाम हासिल करने की आवश्यकता है। उन्होंने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत के करीब लाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए।

बैठक में संस्थागत प्रसव, पूर्ण टीकाकरण, विशेष पिछड़ी जनजातियों (पीवीटीजी) में टीकाकरण की स्थिति, मलेरिया की रोकथाम, कुष्ठ रोग निवारण और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जाए, जिससे बीमारियों की समय पर पहचान हो और मरीजों को प्रारंभिक स्तर पर ही उपचार मिल सके।

*दुर्गम अंचलों के लिए विकसित हो वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था*

मुख्यमंत्री श्री साय ने 108 संजीवनी एक्सप्रेस और 102 महतारी एक्सप्रेस की सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि आपात स्थिति में मरीज तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचना अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूरस्थ, वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को केवल भौगोलिक कठिनाइयों के कारण उपचार से वंचित नहीं होना चाहिए।

उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में सड़क अथवा भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एम्बुलेंस का पहुंचना संभव नहीं है, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जाए। मरीज को गांव से एम्बुलेंस प्वाइंट अथवा निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक सुरक्षित और समय पर पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 108 संजीवनी एक्सप्रेस के अंतर्गत 375 एम्बुलेंस तथा 102 महतारी एक्सप्रेस के अंतर्गत 380 वाहन उपलब्ध हैं। जनवरी से अगस्त 2026 तक महतारी एक्सप्रेस सेवा से 2 लाख 19 हजार से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने एम्बुलेंस सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

*दुख की घड़ी में शव वाहन के लिए परेशान न हों परिजन*

मुख्यमंत्री श्री साय ने शव वाहन सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी परिजन को खोना परिवार के लिए जीवन के सबसे कठिन और पीड़ादायक क्षणों में से एक होता है। ऐसे समय में परिवार को शव वाहन जैसी बुनियादी व्यवस्था के लिए परेशान होना उचित नहीं है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अस्पताल में मृत्यु होने की स्थिति में शव वाहन की सुविधा परिजनों को सहजता और समय पर उपलब्ध हो। स्वास्थ्य विभाग ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करे, जिनमें मरीज और उसके परिवार की गरिमा तथा संवेदनाओं का पूरा सम्मान हो।

*सिकल सेल उन्मूलन के लिए जांच, परामर्श और जनजागरूकता का हो विस्तार*

मुख्यमंत्री श्री साय ने सिकल सेल रोग की रोकथाम, जांच और उपचार के लिए संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सिकल सेल एक आनुवंशिक बीमारी है और इसके प्रति व्यापक जनजागरूकता अत्यंत आवश्यक है। जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाओं का विस्तार करने के साथ विवाह पूर्व स्वैच्छिक जांच एवं आनुवंशिक परामर्श के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जाए।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में योजनाबद्ध और प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। विशेषकर प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ करने पर उन्होंने जोर दिया।

*मानसिक स्वास्थ्य भी समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा*

मुख्यमंत्री श्री साय ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, परामर्श सेवाओं और उपचार व्यवस्थाओं की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाई जाए, जिससे जरूरतमंद व्यक्ति समय रहते सहायता प्राप्त कर सके।

बैठक में आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मोबाइल हेल्थ सेवाओं तथा मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत एक लाख लोगों को उपचार का लाभ मिला है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पात्र मरीजों को आयुष्मान भारत योजना का पूरा लाभ मिले। विशेष रूप से दूरस्थ अंचलों में योजनाओं की जानकारी और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और सुदृढ़ किया जाए।

*चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ गुणवत्ता पर भी समान जोर*

मुख्यमंत्री श्री साय ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा की सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, पर्याप्त फैकल्टी, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 15 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक एम्स और 6 निजी मेडिकल कॉलेज सहित कुल 22 चिकित्सा संस्थान हैं। इसके अतिरिक्त 6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन शासकीय मेडिकल कॉलेजों की प्रगति, नए कॉलेजों की स्थापना तथा संचालित मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्यों तथा अन्य व्यवस्थाओं में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का समयबद्ध निराकरण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज केवल चिकित्सा शिक्षा के संस्थान नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा केंद्र भी हैं। इसलिए वहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर उपचार सुविधाएं विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी, आईपीडी और विभिन्न जांच सुविधाओं की स्थिति की भी समीक्षा की।

*नर्सिंग, फिजियोथेरेपी और एलाइड हेल्थ एजुकेशन का भी विस्तार*

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 8 से बढ़कर 17 तथा फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या एक से बढ़कर 7 हो गई है। छत्तीसगढ़ में पहली बार एलाइड हेल्थ से जुड़े 11 पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत 10 मेडिकल कॉलेजों में 640 सीटों की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पहली बार रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में डीएम कार्डियोलॉजी की दो सीटें भी प्रारंभ की गई हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के विस्तार से प्रदेश में प्रशिक्षित चिकित्सकों, नर्सिंग कर्मियों, फिजियोथेरेपिस्ट तथा अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ेगी। इसका सीधा लाभ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा।

*दवाइयों की उपलब्धता और उपकरणों के रखरखाव में लापरवाही नहीं*

मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के कार्यों की समीक्षा करते हुए दवाइयों की खरीदी, आपूर्ति, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि दवाइयों की आपूर्ति ऐसी हो कि किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में आवश्यक दवाइयों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी न हो।

उन्होंने चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और समय पर मरम्मत के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संसाधनों के प्रबंधन में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने संचालनालय आयुष एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत संचालित संस्थाओं, मानव संसाधन, उपचार सुविधाओं और योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने आयुष चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के निर्देश दिए।

*त्योहारी सीजन में मिलावट के विरुद्ध चलाएं सघन जांच अभियान*

मुख्यमंत्री श्री साय ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की समीक्षा के दौरान आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन में मिठाई, दुग्ध उत्पाद एवं अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ती है। ऐसे समय में खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और विक्रय स्थलों की नियमित जांच की जाए। अमानक अथवा मिलावटी खाद्य पदार्थ पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारी पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी से कार्य करें।

*अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचना ही योजनाओं की वास्तविक सफलता*

मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और सेवाओं की वास्तविक सफलता का पैमाना यह है कि जरूरत के समय उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितनी सहजता और समयबद्धता से पहुंचता है। जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित समीक्षा हो और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कमियों की पहचान कर उनका त्वरित निराकरण किया जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, संवेदनशील और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक, चाहे वह बड़े शहर में रहता हो या सुदूर वनांचल में, आवश्यकता पड़ने पर उसे समय पर बेहतर उपचार मिले। चिकित्सा सुविधा के अभाव में किसी भी परिवार को कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसी लक्ष्य के साथ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत कर रही है।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, संचालक स्वास्थ्य श्री संजीव कुमार झा, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री रितेश अग्रवाल, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव श्री प्रभात मलिक सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 से पहले अखिलेश यादव की कार्यकर्ताओं को सख्त हिदायत, बोले- अनुशासन बनाए रखें और बूथ स्तर पर रहें सक्रिय

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उत्तर प्रदेश:  2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को अभी से चुनावी तैयारियों में जुटने का संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी से जुड़े लोग अनुशासन बनाए रखें और ऐसा कोई काम न करें, जिससे संगठन की छवि खराब हो या पार्टी को नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का लक्ष्य 2027 में प्रदेश की सत्ता में वापसी करना है और इसके लिए अभी से लगातार मेहनत करनी होगी।

कार्यकर्ताओं को अनुशासन बनाए रखने की सलाह

अखिलेश यादव ने पार्टी के कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों से अपील की कि वे जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि चुनाव में अब अधिक समय नहीं बचा है, इसलिए सभी को गंभीरता से संगठन के काम में जुटना चाहिए। किसी भी ऐसी गतिविधि से बचना होगा, जिससे विरोधियों को शिकायत करने का अवसर मिले।उन्होंने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रिय रहने और पार्टी संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देने की सलाह दी। उनके मुताबिक, आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए जमीनी स्तर पर तैयारी करना जरूरी है।

भाजपा पर मतदाता सूची में गड़बड़ी करने का आरोप

सपा प्रमुख ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गड़बड़ी की जाती है और समाजवादी पार्टी के समर्थकों के वोट कटवाने की कोशिश होती है। उन्होंने कहा कि मताधिकार की रक्षा आगामी विधानसभा चुनाव का एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा।अखिलेश यादव ने जोर दिया कि प्रदेश की जनता के हितों और वोट देने के अधिकार की सुरक्षा के लिए 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनना जरूरी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मतदाता सूची पर नजर रखने और मतदान केंद्रों पर सतर्कता बरतने का आह्वान किया।

बुलडोजर की राजनीति को लेकर भाजपा पर हमला

अखिलेश यादव ने कहा कि यदि भाजपा दोबारा सत्ता में आती है, तो बुलडोजर की राजनीति जारी रह सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में बेईमानी करने वाली पार्टियां फर्जी वोटों को अपनी ताकत मानने लगती हैं। उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मतदान केंद्रों पर पूरी सतर्कता रखें और चुनावी तैयारियों में किसी तरह की ढिलाई न बरतें।

2027 के चुनाव के लिए गठबंधन की संभावनाओं पर नजर

अखिलेश यादव के ताजा संदेश से साफ है कि समाजवादी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय करने पर जोर देना शुरू कर दिया है। पार्टी के सामने बूथ स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की चुनौती होगी।वहीं, कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। यदि दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ते हैं, तो सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति पर होने वाले फैसले उत्तर प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित दलों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

धर्म परिवर्तन कर बदली जाति तो नहीं मिलेगा आरक्षण? सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी आदेश किया खारिज

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Caste Reservation After Conversion: धर्म परिवर्तन और उसके बाद मिलने वाले लाभ को लेकर लंबे समय से बहस चली आ रही है. ऐसा मांग की जा रही थी कि जब लोग धर्म परिवर्तन कर ही लेते हैं तो उनको आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए. अब इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है.

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल धर्म बदल लेने से किसी व्यक्ति को किसी दूसरी अधिसूचित पिछड़ा वर्ग की जाति या समुदाय का सदस्य नहीं माना जा सकता है. ऐसा करने के लिए कई जरूरी और कानूनी शर्तों को हर हाल में ही पूरा करना पड़ेगा. यह मामला तमिलनाडु सरकार के उस आदेश से जुड़ा था,जिसमें इस्लाम अपनाने वाले कुछ वर्गों के लोगों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी में प्रमाणपत्र देने का प्रावधान किया गया था. जिसे कोर्ट ने खारिज कर द‍िया है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि  सिर्फ इस्लाम अपनाने से व्यक्ति स्वतः पिछड़ा वर्ग मुस्लिम (BC Muslim) श्रेणी का सदस्य नहीं बन जाएगा.

कोर्ट के अनुसार, हिंदू सामाजिक व्यवस्था में पिछड़े वर्ग, अति पिछड़े वर्ग, विमुक्त समुदाय या अनुसूचित जाति से आने वाले व्यक्ति का पूर्व समुदाय का दर्जा धर्म परिवर्तन के बाद स्वतः नई आरक्षित श्रेणी में स्थानांतरित नहीं होता है. निजी धार्मिक संस्था को भी BC मुस्लिम का दर्जा तय करने का अधिकार नहीं है.

तमिलनाडु सरकार के किस आदेश पर क्या था विवाद?

तमिलनाडु सरकार ने मार्च 2024 में एक आदेश जारी किया था. जिसमें कहा गया था कि पिछड़ा वर्ग (BC), अति पिछड़ा वर्ग (MBC), विमुक्त समुदाय और अनुसूचित जाति (SC) से आने वाले कुछ लोगों को इस्लाम अपनाने के बाद पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी में प्रमाणपत्र देने की व्यवस्था की गई थी. सरकार का तर्क था कि धर्म परिवर्तन के कारण सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं होना चाहिए.

हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट ने सरकार के इस आदेश को पहले ही रद्द कर दिया था. इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा है. इसके साथ सरकार को इस तरह के आदेश और फैसले के लिए फटकार लगाई है.

स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और सहज उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की

भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार की दीर्घकालिक कार्ययोजना : मुख्यमंत्री

जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक चिकित्सक, दवाइयां और जांच सुविधाएं रहें उपलब्ध

सुरक्षित संस्थागत प्रसव, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पर विशेष जोर

दुर्गम क्षेत्रों में एम्बुलेंस नहीं पहुंच सके तो स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करें वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था

प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का तेजी से विस्तार, 6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत; नर्सिंग और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या भी बढ़ी

त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की सघन जांच के निर्देश, मुख्यमंत्री ने कहा – नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं

रायपुर– स्वास्थ्य सेवाएं सीधे आम नागरिकों के जीवन और परिवार की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय हैं। प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को आवश्यकता पड़ने पर समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार, आवश्यक दवाइयां, जांच और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध हों, यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ सेवाओं की गुणवत्ता और अंतिम व्यक्ति तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने पर समान रूप से ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस दौरान संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, संचालनालय चिकित्सा शिक्षा, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन, संचालनालय आयुष एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन तथा खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अंतर्गत संचालित योजनाओं, उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना का लगातार विस्तार हुआ है। अनेक अच्छे अस्पताल और चिकित्सा संस्थान विकसित हुए हैं। अब जहां चिकित्सकों, विशेषज्ञों, स्वास्थ्य कर्मियों, चिकित्सा उपकरणों अथवा जांच सुविधाओं की कमी है, उन्हें चिन्हित कर प्राथमिकता के साथ दूर किया जाए। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो और उनका अधिकतम लाभ मरीजों तक पहुंचे।

भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बने स्वास्थ्य अधोसंरचना की दीर्घकालिक कार्ययोजना

मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश की बढ़ती आबादी और भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में वर्तमान स्वास्थ्य सुविधाओं, जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की जरूरतों का आकलन किया जाए। इसी आधार पर स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार और आवश्यक सुविधाओं के विकास की स्पष्ट कार्ययोजना बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में आवश्यकता के अनुरूप बिस्तरों की संख्या बढ़ाने, विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार करने और नवगठित जिलों में जरूरी चिकित्सा सुविधाओं को प्राथमिकता से विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास में केवल भवन निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों, उपकरणों, दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता को भी समग्र रूप से सुनिश्चित किया जाए।

जिला अस्पताल से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक मरीजों को मिलें आवश्यक दवाइयां और जांच सुविधाएं

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला अस्पतालों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहनी चाहिए। मरीजों को सामान्य जांच और उपचार के लिए अनावश्यक परेशानी या भटकाव का सामना न करना पड़े।

उन्होंने चिकित्सा उपकरणों के नियमित रखरखाव और प्रभावी उपयोग पर भी विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल में उपलब्ध कोई भी महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण रखरखाव अथवा मरम्मत के अभाव में लंबे समय तक बंद नहीं रहना चाहिए। इसके लिए प्रभावी निगरानी और समयबद्ध मरम्मत व्यवस्था विकसित की जाए।

बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की वित्तीय प्रगति, मानव संसाधन की उपलब्धता तथा रिक्त पदों पर भर्ती की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि रिक्त पदों पर भर्ती के प्रयास किए जा रहे हैं और सेवा भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया भी प्रचलन में है। मुख्यमंत्री ने भर्ती संबंधी प्रक्रियाओं को गति देने के निर्देश देते हुए कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता सेवाओं की गुणवत्ता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं। डायलिसिस, ट्रॉमा केयर, ब्लड बैंक, आईसीयू और सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 33 स्थानों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है और 25 नए डायलिसिस केंद्र प्रारंभ किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के साथ स्वास्थ्य संस्थानों के गुणवत्ता मानकों, ई-हॉस्पिटल तथा आभा जैसी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की और तकनीक का उपयोग मरीजों की सुविधा तथा सेवाओं की दक्षता बढ़ाने के लिए करने के निर्देश दिए।

हर प्रसव सुरक्षित हो, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री  साय ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में बताते हुए कहा कि गर्भवती माताओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक पोषण एवं चिकित्सा देखभाल और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जाए। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें और प्रसूता महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा तथा सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए।

उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि प्रत्येक प्रसव सुरक्षित हो और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में कमी आई है, लेकिन इस दिशा में और बेहतर परिणाम हासिल करने की आवश्यकता है। उन्होंने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत के करीब लाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए।

बैठक में संस्थागत प्रसव, पूर्ण टीकाकरण, विशेष पिछड़ी जनजातियों (पीवीटीजी) में टीकाकरण की स्थिति, मलेरिया की रोकथाम, कुष्ठ रोग निवारण और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जाए, जिससे बीमारियों की समय पर पहचान हो और मरीजों को प्रारंभिक स्तर पर ही उपचार मिल सके।

दुर्गम अंचलों के लिए विकसित हो वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था

मुख्यमंत्री श्री साय ने 108 संजीवनी एक्सप्रेस और 102 महतारी एक्सप्रेस की सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि आपात स्थिति में मरीज तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचना अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूरस्थ, वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को केवल भौगोलिक कठिनाइयों के कारण उपचार से वंचित नहीं होना चाहिए।

उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में सड़क अथवा भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एम्बुलेंस का पहुंचना संभव नहीं है, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जाए। मरीज को गांव से एम्बुलेंस प्वाइंट अथवा निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक सुरक्षित और समय पर पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 108 संजीवनी एक्सप्रेस के अंतर्गत 375 एम्बुलेंस तथा 102 महतारी एक्सप्रेस के अंतर्गत 380 वाहन उपलब्ध हैं। जनवरी से अगस्त 2026 तक महतारी एक्सप्रेस सेवा से 2 लाख 19 हजार से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने एम्बुलेंस सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

दुख की घड़ी में शव वाहन के लिए परेशान न हों परिजन

मुख्यमंत्री  साय ने शव वाहन सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी परिजन को खोना परिवार के लिए जीवन के सबसे कठिन और पीड़ादायक क्षणों में से एक होता है। ऐसे समय में परिवार को शव वाहन जैसी बुनियादी व्यवस्था के लिए परेशान होना उचित नहीं है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अस्पताल में मृत्यु होने की स्थिति में शव वाहन की सुविधा परिजनों को सहजता और समय पर उपलब्ध हो। स्वास्थ्य विभाग ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करे, जिनमें मरीज और उसके परिवार की गरिमा तथा संवेदनाओं का पूरा सम्मान हो।

सिकल सेल उन्मूलन के लिए जांच, परामर्श और जनजागरूकता का हो विस्तार

मुख्यमंत्री श्री साय ने सिकल सेल रोग की रोकथाम, जांच और उपचार के लिए संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सिकल सेल एक आनुवंशिक बीमारी है और इसके प्रति व्यापक जनजागरूकता अत्यंत आवश्यक है। जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाओं का विस्तार करने के साथ विवाह पूर्व स्वैच्छिक जांच एवं आनुवंशिक परामर्श के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जाए।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में योजनाबद्ध और प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। विशेषकर प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ करने पर उन्होंने जोर दिया।

मानसिक स्वास्थ्य भी समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा

मुख्यमंत्री श्री साय ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, परामर्श सेवाओं और उपचार व्यवस्थाओं की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाई जाए, जिससे जरूरतमंद व्यक्ति समय रहते सहायता प्राप्त कर सके।

बैठक में आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मोबाइल हेल्थ सेवाओं तथा मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत एक लाख लोगों को उपचार का लाभ मिला है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पात्र मरीजों को आयुष्मान भारत योजना का पूरा लाभ मिले। विशेष रूप से दूरस्थ अंचलों में योजनाओं की जानकारी और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और सुदृढ़ किया जाए।

चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ गुणवत्ता पर भी समान जोर

मुख्यमंत्री श्री साय ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा की सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, पर्याप्त फैकल्टी, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 15 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक एम्स और 6 निजी मेडिकल कॉलेज सहित कुल 22 चिकित्सा संस्थान हैं। इसके अतिरिक्त 6 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन शासकीय मेडिकल कॉलेजों की प्रगति, नए कॉलेजों की स्थापना तथा संचालित मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्यों तथा अन्य व्यवस्थाओं में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का समयबद्ध निराकरण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज केवल चिकित्सा शिक्षा के संस्थान नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा केंद्र भी हैं। इसलिए वहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर उपचार सुविधाएं विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी, आईपीडी और विभिन्न जांच सुविधाओं की स्थिति की भी समीक्षा की।

नर्सिंग, फिजियोथेरेपी और एलाइड हेल्थ एजुकेशन का भी विस्तार

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 8 से बढ़कर 17 तथा फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या एक से बढ़कर 7 हो गई है। छत्तीसगढ़ में पहली बार एलाइड हेल्थ से जुड़े 11 पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत 10 मेडिकल कॉलेजों में 640 सीटों की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पहली बार रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में डीएम कार्डियोलॉजी की दो सीटें भी प्रारंभ की गई हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के विस्तार से प्रदेश में प्रशिक्षित चिकित्सकों, नर्सिंग कर्मियों, फिजियोथेरेपिस्ट तथा अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ेगी। इसका सीधा लाभ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा।

दवाइयों की उपलब्धता और उपकरणों के रखरखाव में लापरवाही नहीं

मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के कार्यों की समीक्षा करते हुए दवाइयों की खरीदी, आपूर्ति, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि दवाइयों की आपूर्ति ऐसी हो कि किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में आवश्यक दवाइयों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी न हो।

उन्होंने चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और समय पर मरम्मत के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संसाधनों के प्रबंधन में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने संचालनालय आयुष एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत संचालित संस्थाओं, मानव संसाधन, उपचार सुविधाओं और योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने आयुष चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के निर्देश दिए।

त्योहारी सीजन में मिलावट के विरुद्ध चलाएं सघन जांच अभियान

मुख्यमंत्री श्री साय ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की समीक्षा के दौरान आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन में मिठाई, दुग्ध उत्पाद एवं अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ती है। ऐसे समय में खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और विक्रय स्थलों की नियमित जांच की जाए। अमानक अथवा मिलावटी खाद्य पदार्थ पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारी पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी से कार्य करें।

अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचना ही योजनाओं की वास्तविक सफलता

मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और सेवाओं की वास्तविक सफलता का पैमाना यह है कि जरूरत के समय उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितनी सहजता और समयबद्धता से पहुंचता है। जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित समीक्षा हो और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कमियों की पहचान कर उनका त्वरित निराकरण किया जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, संवेदनशील और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक, चाहे वह बड़े शहर में रहता हो या सुदूर वनांचल में, आवश्यकता पड़ने पर उसे समय पर बेहतर उपचार मिले। चिकित्सा सुविधा के अभाव में किसी भी परिवार को कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसी लक्ष्य के साथ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत कर रही है।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, संचालक स्वास्थ्य श्री संजीव कुमार झा, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री रितेश अग्रवाल, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव श्री प्रभात मलिक सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट में फर्जी हस्ताक्षर का आरोप, तारीख और बारकोड में गड़बड़ी मिलने पर राव हॉस्पिटल संचालक के खिलाफ FIR

आरंग। अस्पतालों में आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए फायर सेफ्टी ऑडिट और सुरक्षा मानकों के पालन पर जोर दिया जा रहा है। इसी बीच आरंग स्थित राव हॉस्पिटल में फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। अग्निशमन विभाग के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन ने विभागीय अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर और लोगो का इस्तेमाल कर प्रमाण पत्र तैयार किया था। मामले में अग्निशमन विभाग की शिकायत पर अस्पताल संचालक के खिलाफ आरंग थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।

निरीक्षण के दौरान सामने आई गड़बड़ी

पुलिस के मुताबिक, राव हॉस्पिटल ने नगर सेना, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं तथा एसडीआरएफ मुख्यालय, छत्तीसगढ़ द्वारा पूर्व में जारी अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र का नवीनीकरण नहीं कराया था। इसके स्थान पर अस्पताल संचालक द्वारा कंप्यूटर ग्राफिक्स की मदद से कथित रूप से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर उपयोग किए जाने का आरोप है।
अग्निशमन विभाग की ओर से 2 जुलाई को अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया गया था। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट प्रस्तुत किया, जिसमें कई विसंगतियां पाई गईं। प्रमाण पत्र पर जारी करने की तारीख 16 अप्रैल 2026 अंकित थी, जबकि उससे जुड़े बारकोड में 16 अगस्त 2025 की तारीख दर्ज थी।

हस्ताक्षर और बारकोड की जांच में भी मिली विसंगति

प्रमाण पत्र में निरीक्षणकर्ता के रूप में पुरुषोत्तम सिंह का नाम दर्ज था, जबकि विभाग के अनुसार इस नाम का कोई अग्निशमन अधिकारी वहां पदस्थ नहीं था। दस्तावेज पर किए गए हस्ताक्षर और विभागीय लोगो को लेकर भी संदेह सामने आया। इसके अलावा प्रमाण पत्र पर अंकित आवेदन क्रमांक और बारकोड को स्कैन करने पर विभाग द्वारा जारी सत्यापित मूल दस्तावेज नहीं मिला।

नवीनीकरण के नोटिस से खुला मामला

अग्निशमन विभाग द्वारा फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के नवीनीकरण के संबंध में नोटिस जारी किए जाने के बाद दस्तावेज की जांच हुई, जिसमें कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद विभाग की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया है। मामले में आगे की जांच की जा रही है।