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बेमेतरा में यातायात व्यवस्था सुधार हेतु टैक्सी स्टैंड चालकों की बैठक आयोजित

बेमेतरा, 02 अप्रैल 2026:

पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) रामकृष्ण साहू (IPS) के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश कुमार यादव तथा डीएसपी राजेश कुमार झा के मार्गदर्शन में जिले में सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों के पालन सुनिश्चित करने हेतु विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

इसी क्रम में 01 अप्रैल 2026 को बेमेतरा नगर पालिका अध्यक्ष विजय सिन्हा एवं यातायात प्रभारी रक्षित निरीक्षक प्रवीण खलखो द्वारा नगर पालिका परिसर में टैक्सी स्टैंड (पीकअप वाहन चालकों) से जुड़े वाहन मालिकों, ड्राइवरों एवं परिचालकों की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने एवं आम नागरिकों की असुविधा विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। उपस्थित लोगों ने अपने सुझाव दिए। निर्धारित स्थानों पर ही वाहन खड़ा करने, यात्रियों के साथ अच्छा व्यवहार बना यातायात नियमों का पालन करने की अपील की गई।

सिग्नल चौक में लगे ट्रैफिक सिग्नल का पालन, सिग्नल जंप न करने, शराब सेवन कर वाहन न चलाने, नो पार्किंग में वाहन न खड़ा करने, सड़क किनारे अनावश्यक पार्किंग से बचने, निर्धारित पार्किंग स्थल का उपयोग करने, संयमित गति तथा वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग न करने के संबंध में निर्देश दिए गए।

साथ ही वाहन संचालन पर—रजिस्ट्रेशन, बीमा एवं वैध ड्राइविंग लाइसेंस—अनिवार्य रूप से रखने की जानकारी दी गई। इनके अभाव में संभावित नुकसान के प्रति भी सचेत किया गया।इसके अतिरिक्त, किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को देने तथा पुलिस का सहयोग करने के निर्देश भी दिए गए।

जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता, सरपंच-सचिवों की समीक्षा बैठक आयोजित

मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान में निरंतरता पर जिला पंचायत में समीक्षा

बेमेतरा, 02 अप्रैल 2026:

जिले में जल संरक्षण कार्यों को गति देने के उद्देश्य से ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान के अंतर्गत साजा एवं बेमेतरा विकासखंड के सभी सरपंचों एवं सचिवों की समीक्षा बैठक जिला पंचायत सभा कक्ष में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती प्रेमलता पद्माकर ने की।

बैठक में “मोर तरिया आय के जरिया” थीम के तहत तालाब निर्माण को बढ़ावा देने तथा प्रत्येक घर में रिचार्ज पिट निर्माण के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि इन कार्यों से जल संरक्षण को मजबूती मिलेगी और भविष्य में जल संकट से प्रभावी रूप से निपटा जा सकेगा। मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिले में जल संरक्षण कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा सभी सरपंच एवं सचिव अपने-अपने क्षेत्रों में अभियान को गंभीरता से लागू करें, ताकि ग्रामीणों को पेयजल समस्या से राहत मिल सके।

बैठक में मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई। सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्य शीघ्र प्रारंभ करने तथा प्रधानमंत्री आवास के लंबित कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। साथ ही श्रमिकों के लंबित भुगतान खातों में जमा होने की प्रक्रिया प्रारंभ होने की जानकारी दी गई।

अधिकारियों ने योजनाओं के क्रियान्वयन को समय-सीमा के भीतर एवं गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित करने पर जोर दिया। प्रशासन ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही जल संरक्षण कार्यों को प्रभावी बनाया जा सकता है।

बैठक दो चरणों में आयोजित की गई, जिसमें प्रथम चरण में जनपद पंचायत साजा तथा द्वितीय चरण में जनपद पंचायत बेमेतरा के सरपंचों एवं सचिवों की समीक्षा की गई। इस दौरान संबंधित जनपदों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी उपस्थित रहे।

‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों से जिले में जल संसाधनों का संरक्षण होगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट की समस्या में कमी आएगी।

जल संरक्षण पर फोकस, ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान की समीक्षा।

महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्व-गणना पूरी की

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डिजीटल डेस्क 02/04/2026

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने SE पोर्टल (se.census.gov.in) पर राष्ट्रपति भवन में अपनी जानकारी दर्ज की है. इस दौरान गृह सचिव गोविंद मोहन, भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण और उप महानिदेशक (जनगणना योजना) बिस्वजीत दास भी मौजूद रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ऑनलाइन फॉर्म भरा है.  उन्होंने सोशल प्लेटफॉर्म `X` पर बताया, “मैंने अपनी जानकारी देने की प्रक्रिया पूरी कर ली है. आज जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत हुई है, जो घरों की सूची बनाने और कार्यों से संबंधित है. यह पहली बार है जब डेटा डिजिटल माध्यम से इकट्ठा किया जा रहा है.”

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज स्व-गणना पूरी कर ली, जो वर्ष 2027 की जनगणना के पहले चरण की शुरुआत का प्रतीक है। इस चरण में घर-घर की सूची बनाना और आवास संबंधी कार्य शामिल हैं। श्री मोदी ने कहा कि यह जनगणना पहली बार डिजिटल माध्यम से डेटा संग्रह करने के लिए की जा रही है। इससे भारत के लोगों को अपने परिवार का विवरण स्वयं भरने की शक्ति मिलती है।

श्रीमोदी ने देश के लोगों से अपने परिवार का विवरण स्वयं भरने और जनगणना प्रक्रिया में भाग लेने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा;
“मैंने अपनी स्वयं जनगणना पूरी कर ली है।

नागरिकों से अपने परिवार का विवरण स्वयं भरने और जनगणना प्रक्रिया में भाग लेने की अपील की है

आज से वर्ष 2027 की जनगणना के पहले चरण की शुरुआत हो रही है, जिसमें घर-घर की सूची बनाना और आवास संबंधी कार्य शामिल हैं। यह जनगणना पहली बार डिजिटल माध्यम से डेटा संग्रह के लिए की जा रही है। इससे भारत के लोगों को अपने परिवार के विवरण स्वयं भरने की शक्ति मिलती है।
मैं देश के लोगों से अपने परिवार का विवरण स्वयं भरने और जनगणना प्रक्रिया में भाग लेने की अपील करता हूं।”

गैस किल्लत: एजेंसी के बाहर मच्छरदानी, आम आदमी थका घर से बेघर

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डिजिटल डेस्क | 02 अप्रैल 2026

हां हम इंसान हैं की समस्याओं का जीता जागता पुतला हमेशा समस्याओं से घिरे होते है कभी आर्थिक कभी शैक्षणिक कभी घरेलू तो कभी राष्ट्रीय।इस तरह की पैनिक बुकिंग के कारण कुल बुकिंग में करीब 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे सप्लाई नेटवर्क पर अचानक दबाव बढ़ गया है

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण भारत में रसोई गैस की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित है। राजस्थान, दिल्ली, मुंबई, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं; उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में रत्नाकर गैस एजेंसी के बाहर लोग रात 10 बजे से ही नंबर सुरक्षित करने लगते हैं, कई युवक और बुजुर्ग मच्छरदानी लगाकर फुटपाथ पर रात गुज़ार रहे हैं।

बस्ती में भीषण गैस किल्लत के कारण उपभोक्ता घर जाने की बजाय एजेंसी के बाहर डेरा डाले हुए हैं; लोग खाली हाथ लौटने के डर से धूप‑सूखा, मच्छरों और अन्य जोखिमों को नज़रअंदाज़ करके वहीं रहने को मजबूर हैं। वीडियो वायरल होने से गैस वितरण व्यवस्था की खामियां भी उजागर हुई हैं।

छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में भी स्थिति तनावपूर्ण है: रायपुर में घरेलू 14.2 kg सिलेंडर लगभग 984 रुपये के आसपास है, जबकि वाणिज्यिक सिलेंडरों की दरों में भारी वृद्धि ने छोटे दुकानदारों और होटल‑रेस्तरां संचालकों को झटका दिया है। राज्य सरकार ने वाणिज्यिक गैस आपूर्ति सीमित कर दी है और रिफिल बुकिंग के लिए नए निर्देश जारी किए हैं।

आम आदमी की जिंदगी पर असर
गैस की कीमत और किल्लत के चलते अनेक शहरी और ग्रामीण महिलाओं को फिर से लकड़ी या दूसरे ठोस ईंधन पर लौटना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर दबाव बढ़ा है।

सरकारे दावा करती है कि देश के पास लगभग 60–70 दिन के लिए LPG भंडार हैं, लेकिन वितरण व्यवस्था और भीड़ के कारण जमीन पर “किल्लत” का अहसास बना हुआ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव शांत होता है और नई आयात राहें खुलती हैं, तो अगले 12–24 महीने में गैस सप्लाई और कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर हो सकती हैं; लेकिन जब तक यह नहीं होता, आम उपभोक्ता के लिए यह संकट बना रह सकता है।

“चुनावी काउंटडाउन शुरू: 8.85 लाख EVM तैयार, देश में वोटिंग का माहौल गरमाया”

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली, 1 अप्रैल 2026

देश में 2026 के विधानसभा चुनाव और उपचुनाव को लेकर चुनावी सरगर्मी अब तेज हो गई है। तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है और मतदान की उलटी गिनती भी शुरू हो चुकी है।(ईसीआई) द्वारा घोषित कार्यक्रम के तहत असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के साथ-साथ छह राज्यों में उपचुनाव कराए जाने हैं। इस बीच चुनाव की सबसे अहम कड़ी—EVM की तैयारी—अब लगभग पूरी हो चुकी है।

चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए EVM प्रबंधन प्रणाली (EMS) के जरिए दो चरणों में मशीनों का आवंटन किया गया। पहले चरण में जिला स्तरीय गोदामों से विधानसभा क्षेत्रों तक EVM भेजी गईं, जबकि दूसरे चरण में इन्हें मतदान केंद्रों तक पहुंचाया गया।

पहले चरण की प्रक्रिया में करीब 8.85 लाख EVM (बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और VVPAT) चुनाव के लिए निर्धारित की गई हैं। यह प्रक्रिया राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूरी की गई, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

दूसरे चरण की प्रक्रिया भी कई राज्यों में पूरी कर ली गई है। असम, केरल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों तथा गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा में 9 अप्रैल को होने वाले उपचुनावों के लिए EVM का अंतिम आवंटन उम्मीदवारों की मौजूदगी में किया गया है।

अब अगला कदम उन राज्यों में उठाया जाएगा जहां नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद EVM की दूसरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

चुनावी मशीनरी के इस बड़े और तकनीकी संचालन के साथ अब साफ संकेत मिल रहे हैं कि देश में चुनावी माहौल पूरी तरह बन चुका है। आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी और मतदाता भी इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी के लिए तैयार नजर आएंगे।

“महंगाई का नया वार: अब बाहर खाना पड़ेगा भारी, गैस सिलेंडर ने बढ़ाई टेंशन”

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एक महीने में 310 रुपये महंगा कमर्शियल LPG, होटल-रेस्टोरेंट पर सीधा असर।

डिजिटल डेस्क | 1 अप्रैल 2026

नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही आम लोगों को महंगाई का बड़ा झटका लगा है। इस बार असर सीधे आपकी थाली पर पड़ने वाला है। कमर्शियल LPG सिलेंडर के दामों में हुई तेज बढ़ोतरी के बाद होटल और रेस्टोरेंट में खाना महंगा होना लगभग तय माना जा रहा है।

सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने 1 अप्रैल से 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 195.50 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत अब 2078.50 रुपये पहुंच गई है, जो मार्च की शुरुआत में 1768.50 रुपये थी। यानी सिर्फ एक महीने में ही 310 रुपये का उछाल दर्ज हुआ है।

महंगाई की यह आग सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। कोलकाता में कमर्शियल सिलेंडर 2208 रुपये, मुंबई में 2031 रुपये और चेन्नई में 2246.50 रुपये तक पहुंच चुका है।हालांकि राहत की बात यह है कि 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

दिल्ली में इसकी कीमत 913 रुपये पर स्थिर बनी हुई है।
लेकिन असली असर बाजार में दिखेगा। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए लागत बढ़ना तय है, और इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों की जेब पर ही आएगा। यानी आने वाले दिनों में बाहर खाना आपकी जेब पर पहले से ज्यादा भारी पड़ सकता है।

इस बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय हालात भी बड़ी वजह हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव—खासकर ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच टकराव—ने ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम रूट प्रभावित होने से कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर वैश्विक कीमतों पर साफ दिख रहा है।

भारत में भी इस वैश्विक संकट की आंच पहुंच चुकी है। हालात ऐसे बने हुए हैं कि गैस के दामों में लगातार बढ़ोतरी से महंगाई का दबाव और गहरा सकता है।

“लाल साए से रोशनी की ओर: बदलते बस्तर के साथ नए छत्तीसगढ़ में विकास की शोर

अब डर नहीं, विकास बोलेगा” – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय।

रायपुर, 31 मार्च 2026।

कभीबंदूकों की गूंज से पहचाने जाने वाले बस्तर की तस्वीर अब बदल रही है। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कमजोर पड़ते प्रभाव के बीच मुख्यमंत्री के निवास पर आज एक सकारात्मक और ऐतिहासिक माहौल देखने को मिला, जब उपमुख्यमंत्री ने उनसे मुलाकात कर इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई दी।

यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि उस बदलाव का प्रतीक थी, जिसकी उम्मीद वर्षों से प्रदेश कर रहा था।

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट कहा—अब छत्तीसगढ़ की पहचान भय नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और अवसरों से होगी। उन्होंने याद दिलाया कि नक्सलवाद ने दशकों तक प्रदेश, खासकर बस्तर, की गति को थामे रखा। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं और दूर-दराज के इलाकों तक विकास की रौशनी पहुंच रही है।

उन्होंने इस बदलाव का श्रेय प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री की नीतियों और सख्त रणनीति को देते हुए कहा कि आज छत्तीसगढ़ सुरक्षित और आत्मविश्वासी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने उन शहीद जवानों को नमन किया, जिनकी कुर्बानी ने इस बदलाव की नींव रखी। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों के साहस और समर्पण के बिना यह संभव नहीं था।

अब जब हालात सामान्य हो रहे हैं, मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि छत्तीसगढ़ विकास की दौड़ में नई रफ्तार पकड़ेगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।

हनुमान जयंती विशेष: शून्य से शिखर तक — सुंदरकांड के जीवन सूत्र

अध्यात्म डेस्क,31/03/2026

श्रीहनुमान जी का व्यक्तित्व अकल्पनीय है। वह अद्वितीय शक्ति के स्वामी होकर भी परम शांत हैं और असीमित साहस के प्रतीक होकर भी परम विनम्र। हनुमान जयंती के इस अवसर पर, आइए उनके जीवन के उन अनछुए पहलुओं पर विचार करें जो हमें हमारे लक्ष्यों (Goals) की प्राप्ति और चुनौतियों के सामना करने की कला सिखाते हैं।

विस्मृति से आत्मबोध तक: मौन की शक्ति
सुंदरकांड के प्रारंभ में हनुमान जी शांत और गंभीर मुद्रा में बैठे हैं। उन्हें स्वयं की शक्तियों का भान नहीं है। दार्शनिक दृष्टि से देखें तो, शक्तियों को भूल जाना अहंकार को शून्य करने की प्रक्रिया है। जब व्यक्ति अपनी ‘कर्त्ता’ वाली शक्ति को भूलकर साक्षी भाव में आता है, तभी वह ईश्वरीय कार्य के लिए तैयार होता है। जामवंत जी द्वारा उन्हें जागृत करना इस बात का प्रतीक है कि हर व्यक्ति के भीतर असीमित संभावनाएं हैं, बस उसे एक सही ‘मेंटर’ या ‘प्रेरणा’ की आवश्यकता होती है।

जब पैरों तले जमीन खिसक जाए: साहस की परीक्षा
एक बहुत सटीक अवलोकन किया कि हनुमान जी जिस पर्वत पर चढ़कर छलांग लगाते हैं, वह उनके वेग से पाताल में धंस जाता है— “चलेउ सो गा पाताल तुरंता”।
जीवन का पाठ: जब हम किसी महान लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाते हैं, तो अक्सर हमारे पुराने आधार, सुख-सुविधाएं और सुरक्षा (Comfort Zone) छिन जाती है। ऐसा लगता है जैसे पैरों तले जमीन खिसक गई हो। लेकिन हनुमान जी घबराते नहीं; वह आधार गिरने पर ‘आकाश’ को अपना मार्ग बना लेते हैं। यदि लक्ष्य बड़ा है, तो जमीन का सहारा छोड़कर उड़ने का साहस जुटाना ही होगा।

सुरसा और सूक्ष्म रूप: अहंकार का त्याग
रास्ते में सुरसा रूपी समस्या आती है जो अपना मुख बढ़ाती ही जाती है। हनुमान जी ने यहाँ ‘प्रतियोगिता’ के बजाय ‘बुद्धिमानी’ चुनी।
जीवन का पाठ: समस्याओं से लड़ने के लिए हमेशा बल की नहीं, कभी-कभी ‘लघु’ (छोटा) बनने की आवश्यकता होती है। जब हम अपनी समस्याओं के सामने बहुत बड़े बनकर खड़े होते हैं, तो समस्या और विकराल हो जाती है। हनुमान जी का “अति लघु रूप” धारण करना सिखाता है कि विनम्रता और चपलता से बड़ी से बड़ी बाधा के ‘मुंह’ से सुरक्षित निकला जा सकता है।

अदृश्य शत्रु और मनोबल की रक्षा
सिंहिका जैसी ‘परछाईं पकड़ने वाली’ आसुरी शक्तियों का सामना करना पड़ता है, जो हमें दिखाई नहीं देतीं लेकिन हमारे मनोबल और प्रसिद्धि को खींचकर नीचे गिराना चाहती हैं।
जीवन का पाठ: समाज में ऐसे कई लोग और परिस्थितियां होंगी जो सीधे सामने नहीं आएंगी, लेकिन आपकी तरक्की को देखकर पीछे से आपकी छवि या आपके उत्साह को नुकसान पहुंचाएंगी। हनुमान जी ने उसे पहचान कर उसका संहार किया। सजगता ही ऐसे अदृश्य शत्रुओं से बचने का एकमात्र उपाय है।

दुर्गम राह और मशक रूप: सूक्ष्म दृष्टि
लंका जैसी अभेद्य नगरी, जहाँ प्रवेश के मार्ग बंद थे, वहाँ हनुमान जी “मशक समान रूप” (मच्छर के समान छोटा रूप) धारण कर प्रवेश करते हैं।
जीवन का पाठ: जटिल परिस्थितियों में बड़े-बड़े प्रयास कभी-कभी विफल हो जाते हैं। वहाँ सूक्ष्म निरीक्षण और एक छोटी सी शुरुआत (Micro-steps) काम आती है। यदि दीवार ऊंची है और दरवाजा बंद है, तो अपनी रणनीति को इतना सूक्ष्म और सटीक बनाएं कि बाधाओं को पता ही न चले कि आप कब सफल हो गए।

देह और आत्मा का एकाकार: विज्ञान की पराकाष्ठा
हनुमान जी ‘अष्ट सिद्धि और नवनिधि’ के दाता हैं। वे शरीर को विचार के वेग से चलाने की क्षमता रखते हैं। आज का विज्ञान जिस ‘आत्मा और शरीर के संबंध’ की खोज कर रहा है, हनुमान जी उसके जीवंत उदाहरण हैं। उनकी भक्ति ही उनकी शक्ति है, जहाँ देह का अस्तित्व केवल राम-काज (लक्ष्य) के लिए है।

निष्कर्ष
हनुमान जयंती हमें सिखाती है कि लक्ष्य की प्राप्ति के लिए शारीरिक बल से अधिक मानसिक दृढ़ता, अहंकार का विसर्जन और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की कला (Adaptability) अनिवार्य है। हनुमान जी की तरह शांत रहकर अपनी ऊर्जा को संचित करें और सही समय आने पर अपने पैरों तले जमीन खिसकने की परवाह किए बिना ‘लक्ष्य’ की उड़ान भरें।



1 अप्रैल से शुरू होगी 16 वीं राष्ट्रीय जनगणना, अब आपकी “डिजिटल कुंडली” भी तैयार करेगा सरकार का सर्वे

डिजिटल डेस्क | 31 मार्च 2026

देश में 16वीं राष्ट्रीय जनगणना की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रही है, जो इस बार पहले से कहीं ज्यादा व्यापक और डिजिटल रूप में होगी। यह जनगणना अब सिर्फ जनसंख्या गिनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आम नागरिकों के जीवनस्तर, सुविधाओं और सामाजिक ढांचे की विस्तृत तस्वीर भी पेश करेगी।

सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन और FAQ के अनुसार, इस बार पहले चरण (हाउस लिस्टिंग) में नागरिकों से करीब 33–34 सवाल पूछे जाएंगे। इसमें मकान की स्थिति, निर्माण सामग्री, पानी-बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं, परिवार के सदस्यों की संख्या, उपयोग में आने वाले अनाज, इंटरनेट सुविधा और वाहन जैसी जानकारियां शामिल होंगी।

दो चरणों में होगी पूरी प्रक्रिया
जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसमें घरों और परिसंपत्तियों का विवरण जुटाया जाएगा। इसके बाद दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें वास्तविक जनसंख्या की गणना की जाएगी।

पहली बार मिलेगा सेल्फ-एन्युमरेशन का विकल्प
इस बार सरकार ने नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए ऑनलाइन सेल्फ-एन्युमरेशन (स्व-गणना) की सुविधा दी है। लोग खुद पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी भर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया ज्यादा तेज और पारदर्शी बनेगी।

लिव-इन रिलेशनशिप पर बड़ा बदलाव
इस जनगणना की सबसे चर्चित बात यह है कि लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई है। यदि कोई जोड़ा लंबे समय से साथ रह रहा है और अपने रिश्ते को स्थिर मानता है, तो उसे जनगणना में विवाहित जोड़े के रूप में दर्ज किया जाएगा।

सिर्फ आंकड़े नहीं, नीति निर्माण का आधार
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह जनगणना देश के सामाजिक-आर्थिक ढांचे का एक बड़ा डिजिटल डेटाबेस तैयार करेगी। इससे सरकार को योजनाएं बनाने, संसाधनों के बेहतर वितरण और नीतिगत फैसलों में काफी मदद मिलेगी।

👉 कुल मिलाकर, 2026 की जनगणना आम लोगों के जीवन के हर पहलू को छूने वाली “डिजिटल प्रोफाइलिंग” के रूप में सामने आ रही है, जो आने वाले वर्षों में देश की विकास दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

सपाद लक्षेश्वर धाम में चातुर्मास करेंगे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

बेमेतरा_31/03/2026

क्षेत्र के पावन धार्मिक स्थल शिव गंगा धाम सलधा में अध्यात्म और सेवा की नई धारा प्रवाहित होने वाली है। रविवार को धाम के आश्रम प्रांगण में दंडी स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती महाराज के नेतृत्व में सलधा व आसपास के ग्रामीणों एवं सनातन धर्मावलंबियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इसका मुख्य उद्देश्य संवत् 2083 में ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के पावन चातुर्मास व्रत अनुष्ठान को सपाद लक्षेश्वर धाम में संपन्न कराने की रणनीति तैयार करना था।

सामूहिक धार्मिक बैठक में बनी योजना
पूज्य दंडी स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती महाराज की गरिमामयी उपस्थिति में आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा साझा की गई। उपस्थित ग्रामीणों व धर्मप्रेमियों से आयोजन की अवधि, ग्रामीण परिवेश में व्यवस्थाओं, आवास एवं सुगम आवागमन पर सुझाव लिए गए। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि एक प्रतिनिधिमंडल बनारस (यू.पी.) जाकर पूज्य शंकराचार्य जी के समक्ष अनुरोध पत्र प्रस्तुत कर उनकी सहमति व आशीर्वाद प्राप्त करेगा।

विश्व विख्यात मंदिर विश्व प्रसिद्धि की ओर
निर्माण को गति
इस आयोजन का प्रमुख केंद्र बिंदु शिव गंगा धाम सलधा में निर्माणाधीन सवा लाख शिवलिंगों वाला ऐतिहासिक मंदिर है। अपनी अद्भुत शैली से यह भविष्य में विश्व पटल पर धूम मचाएगा। स्थानीयजनों का विश्वास है कि जगद्गुरु शंकराचार्य जी के सान्निध्य से न केवल क्षेत्र में आध्यात्मिक जागरण होगा, अपितु मंदिर निर्माण को नई गति व ऊर्जा मिलेगी।

महाशिवरात्रि पर विशेष संकल्प
बैठक में आगामी महाशिवरात्रि की तैयारियों व मंदिर के अधूरे कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने पर गहन चर्चा हुई। ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि शिव गंगा की पावन धरा पर इस भव्य मंदिर को तत्काल पूर्ण स्वरूप प्रदान करेंगे। प्रमुख गण उपस्थित रहे जिसमें गौतम जैन, नटराज पटेल, पुरुषोत्तम पटेल, भवानी मंडल, अंगद साहू, लेखमणी पांडेय, जितेंद्र शुक्ला, जय पांडेय, डी.के. तिवारी, संजीव तिवारी, सुदर्शन साहू, गजानंद शर्मा, प्रवीण दुबे, राजेंद्र तिवारी, घनश्याम आदिवासी, सुनील दत्त दुबे, जलेश्वर पटेल, बुलाक साहू सहित सैकड़ों धर्मानुरागी शामिल है।