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आम जनता को राहत: राशन कार्ड धारकों को फिर मिलेगा मिट्टी का तेल

रायपुर, 8 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ में ऊर्जा संकट और गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच आम जनता को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने राशन कार्ड धारकों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत फिर से मिट्टी का तेल (केरोसिन) उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यह विशेष व्यवस्था अप्रैल 2026 से लागू की गई है, जिसे प्रारंभिक रूप से 60 दिनों के लिए मंजूरी दी गई है।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अनुसार केंद्र सरकार से प्राप्त प्रथम तिमाही (अप्रैल-जून) के कोटे में से कुल 528 किलोलीटर केरोसिन राशन कार्ड धारकों के लिए आवंटित किया गया है। सरकार ने सभी कलेक्टरों को समय पर वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

जिलेवार आवंटन में बिलासपुर जिले को सर्वाधिक 36 किलोलीटर केरोसिन दिया गया है। वहीं बस्तर, कांकेर, जांजगीर-चांपा, कोरबा, दुर्ग, बलौदाबाजार-भाटापारा, महासमुंद, रायपुर और जशपुर जिलों को 24-24 किलोलीटर आवंटित किया गया है। इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों को 12-12 किलोलीटर केरोसिन उपलब्ध कराया गया है।

वितरण व्यवस्था के तहत शहरी क्षेत्रों में प्रति राशन कार्ड 1 लीटर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम 2 लीटर केरोसिन दिया जाएगा। यह कदम विशेष रूप से उन परिवारों के लिए राहतकारी साबित होगा, जो गैस सिलेंडर की कमी के कारण दैनिक उपयोग में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

सरकार का यह निर्णय आम नागरिकों को तात्कालिक राहत देने के साथ-साथ आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

कृषि विभाग की कार्रवाई खाद गोदाम सील-“खाद विक्रय केंद्र में गंभीर अनियमितता पाई गई

बेमेतरा:_दिनांक: 07 अप्रैल 2026

कृषि विभाग बेमेतरा की सक्रियता और कार्रवाई। जिले में कृषि आदान सामग्रियों की सुचारू उपलब्धता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित कराने कृषि विभाग द्वारा सतत निगरानी एवं निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। उप संचालक कृषि मोरध्वज डडसेना ने बताया कि जिले में उड़नदस्ता दल का गठन किया गया है अतः ही शिकायतों एवं त्वरित कार्रवाई के लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। सहकारी समितियों एवं निजी खाद विक्रय केंद्रों का नियमित निरीक्षण कर स्टॉक की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

इसी अभियान के तहत 06 अप्रैल 2026 को सहायक संचालक कृषि डॉ. श्याम लाल साहू द्वारा विकासखंड बेमेतरा अंतर्गत ग्राम कुसमी स्थित मां शक्ति कृषि केंद्र का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पीओएस (POS) मशीन में दर्ज खाद स्टॉक एवं भौतिक रूप से उपलब्ध खाद की मात्रा का मिलान किया गया, जिसमें दोनों के बीच स्पष्ट अंतर पाया गया।

यह अनियमितता गंभीर प्रकृति की पाई गई, जिससे कृषि आदान वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है। मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से संबंधित खाद गोदाम को सील कर दिया गया तथा विक्रय केंद्र की गतिविधियों को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है, ताकि आगे किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो सके।

कृषि विभाग द्वारा इस प्रकरण की विस्तृत जांच प्रारंभ कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि जांच उपरांत दोषी पाए जाने पर संबंधित संचालक के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश एवं प्रचलित नियमों के तहत कठोर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा इस प्रकार की अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।


सेहत ही असली संपदा: विश्व स्वास्थ्य दिवस पर CM साय का जागरूकता संदेश

रायपुर, 07 अप्रैल 2026

विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य दिवस हमें यह याद दिलाता है कि जीवन की असली पूंजी धन नहीं, बल्कि अच्छा स्वास्थ्य है। यह दिन सिर्फ जागरूकता का नहीं, बल्कि अपनी आदतों को सुधारने का भी अवसर है।

उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए किसी बड़े बदलाव की नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी अच्छी आदतों की जरूरत होती है। संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और मानसिक संतुलन—ये तीन स्तंभ व्यक्ति को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखते हैं। यदि हर व्यक्ति इन पर ध्यान दे, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः दिखाई देगा।

मुख्यमंत्री श्रीसाय ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार हर नागरिक तक बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए लगातार काम कर रही है, ताकि कोई भी व्यक्ति इलाज और सुविधाओं से वंचित न रहे।

उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे केवल खुद के स्वास्थ्य तक सीमित न रहें, बल्कि अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी जागरूक करें। सामूहिक प्रयासों से ही एक स्वस्थ, सक्षम और खुशहाल छत्तीसगढ़ का निर्माण संभव है।

चलती कार में भी ‘ऑफिस ऑन’: अब डैशबोर्ड से जुड़ेगी आपकी मीटिंग

नई दिल्ली, 07 अप्रैल 2026

तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी अब काम और सफर के बीच की दूरी को लगभग खत्म करती नजर आ रही है। अब कार चलाते हुए भी आप मीटिंग का हिस्सा बन सकते हैं। दरअसल, यूजर्स के लिए को सीधे कार की स्क्रीन पर इस्तेमाल करने की सुविधा शुरू की गई है।

इस नए अपडेट के साथ यूजर्स अपने iPhone को कार से कनेक्ट करके सीधे डैशबोर्ड से मीटिंग जॉइन कर सकते हैं। खास बात यह है कि अब यात्रा के दौरान भी जरूरी ऑफिस कॉल्स मिस नहीं होंगी। मोबाइल से कार में स्विच करना भी बेहद आसान बनाया गया है, जिससे कामकाज और सफर के बीच तालमेल बेहतर हो सके।

हालांकि, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस फीचर में केवल ऑडियो मोड ही उपलब्ध होगा। यानी ड्राइविंग करते समय वीडियो कॉलिंग की सुविधा नहीं दी गई है, ताकि ड्राइवर का ध्यान सड़क से न भटके। इसके अलावा, कई इंटरएक्टिव फीचर्स जैसे हैंड रेज, पोल्स, Q&A या नई मीटिंग क्रिएट करने का विकल्प भी इसमें शामिल नहीं किया गया है।

दिलचस्प बात यह है कि ने यह सुविधा पहले iOS प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई है, जबकि जल्द ही इसे एंड्रॉयड ऑटो के लिए भी लाने की तैयारी है। हालांकि इसकी टाइमलाइन फिलहाल स्पष्ट नहीं की गई है।

यह फीचर उन यूजर्स के लिए खास तौर पर फायदेमंद साबित हो सकता है, जो लगातार ट्रैवल करते हुए मीटिंग्स अटेंड करते हैं। कार की स्क्रीन पर आने वाली मीटिंग्स की लिस्ट भी दिखाई देगी, जिससे शेड्यूल मैनेज करना आसान हो जाएगा।

कुल मिलाकर, अब कार सिर्फ यात्रा का साधन नहीं रह गई है, बल्कि धीरे-धीरे एक “मोबाइल ऑफिस” का रूप ले रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सुविधाओं का इस्तेमाल करते समय सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है, क्योंकि जरा-सी लापरवाही भी हादसे का कारण बन सकती है।खबर सूत्र आधारित।

विनाश के मुहाने पर मानवता: मिसाइल के युग में शांति की खोज

पश्चिम एशिया संकट/ईरान/इजरायल/अमेरिका
07/04/2026

पीपल के पुराने पेड़ से छनकर आती धूप मुंडेर पर बैठी इन दो शख्सियतों के चेहरों पर गहरी लकीरें उकेर रही थी। ज्योति पति अपनी धवल धोती संवार रहे थे, तो ज्वाला की नजरें सामने पसरे खाली मैदान पर जमी थीं, जैसे वह वहां भविष्य का कोई नक्शा पढ़ रहे हों।

ज्वाला: (एक लंबी आह भरकर) ज्योति पति जी, आज की हवा में वो ताज़गी नहीं रही। ऐसा लगता है जैसे हर झोंके के साथ बारूद की गंध और बेचैनी घुली हुई है। हम चाँद-मंगल की बातें तो कर रहे हैं, पर इंसान के भीतर का विवेक मरता जा रहा है। ये कैसा विकास है जहाँ हम एक बटन दबाकर शहर के शहर राख करने की ताकत तो रखते हैं, पर एक रोते हुए बच्चे के आंसू पोंछने का धीरज नहीं बचा?

ज्योति पति: (गंभीर स्वर में) ज्वाला, तुमने हवा की बेचैनी को सही पहचाना। दरअसल, यह ‘वैचारिक आंधी’ का दौर है। आज इंसान ने बाहर की दुनिया को तो जीत लिया, पर अपने भीतर के दानव से हार गया है। विनाश की तैयारी को ही लोग आज प्रगति का नाम दे रहे हैं। हम जिस धर्म की दुहाई देते हैं, वह तो जोड़ने के लिए था, पर आज उसी की आड़ में नफरत की दीवारें खड़ी की जा रही हैं।

ज्वाला: वही तो! लोग कहते हैं ‘स्वस्थ समाज’ चाहिए, पर समाज तो विचारों से बीमार हो चुका है। सत्ता का नशा, मज़हब की कट्टरता और हथियारों की होड़—क्या यही विरासत हम अपनी आने वाली पीढ़ी को देंगे? आज का युवा नशे की गिरफ्त में है, चाहे वो पदार्थों का नशा हो या सोशल मीडिया पर फैलती झूठी नफरत का। हमें तो एक ऐसा समाज चाहिए था जो ‘विचारक’ हो, जो सवाल पूछे, जो शांति की भाषा समझे।

ज्योति पति: (धैर्य से समझाते हुए) समाज विचारक तभी बनेगा ज्वाला, जब हम ‘स्व’ से ऊपर उठकर ‘सर्व’ की सोचेंगे। देखो, युद्ध कभी समाधान नहीं होता। वह तो सिर्फ विनाश का एक चक्र है। असली ‘राजधर्म’ तो वह है जो अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के चूल्हे की चिंता करे। आज जब दिल्ली में पढ़ रहा छात्र महंगे सिलेंडर और अनिश्चित भविष्य से जूझता है, तो समझो कि सत्ता अपने राजधर्म से भटक गई है।

ज्वाला: सच कहा आपने। हमें हथियारों की नहीं, एक ‘वैश्विक अदालत’ और ‘वैश्विक चेतना’ की ज़रूरत है। एक ऐसी व्यवस्था जहाँ व्यापार प्रतिद्वंद्विता तो हो, पर वह किसी देश को पाषाण युग में न धकेले। हमें मिसाइलों के नशे से मुक्त होकर मानवता के स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा।

ज्योति पति: (आसमान की ओर देखते हुए) रास्ता कठिन है, पर असंभव नहीं। इस वैचारिक आंधी को रोकने के लिए शांति की मशाल जलानी होगी। जब तक चौपालों पर बैठा इंसान सजग नहीं होगा, तब तक महलों में बैठे लोग युद्ध का खेल खेलते रहेंगे। हमें युवाओं को हथियार नहीं, ‘विचार’ देने होंगे। एक ऐसा स्वस्थ समाज बनाना होगा जहाँ नफरत की जगह न्याय और युद्ध की जगह योग (जुड़ाव) हो।

ज्वाला: (मुस्कुराते हुए) चलिए, आज इस चौपाल से कम से कम एक वैचारिक बीज तो बोया गया। शायद यही बीज कल एक विशाल वटवृक्ष बने, जिसकी छांव में पूरी दुनिया चैन की सांस ले सके।

चर्चा निष्कर्ष: दोनों मौन हो जाते हैं, पर वह मौन खाली नहीं था; उसमें एक नए समाज की संकल्पना और भविष्य की चिंता का गहरा दर्शन छिपा था।

निक्षय निरामय अभियान: बेमेतरा के गांवों में टीबी जांच, नशामुक्ति पर कार्यशाला

बेमेतरा/बेरला, 6 अप्रैल 2026

“टीबी हारेगा, देश जीतेगा” — इसी संकल्प के साथ 100 दिवसीय निक्षय निरामय प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत आज बेमेतरा जिले के खण्डसरा ब्लॉक में स्वास्थ्य अमले ने दस्तक दी।

गांव-गांव पहुंची जांच सेवा
आयुष्मान आरोग्य मंदिर चोरभट्टी के आश्रित ग्राम ताला और गुनरबोड में उच्च जोखिम वर्ग के लोगों का हैंड-ऑन एक्स-रे मशीन से परीक्षण किया गया। स्वास्थ्य टीम को गांव में आता देख ग्रामीणों में उत्साह का माहौल रहा।

ग्राम पंचायत सरपंच विवेक दिवान व पंचायत प्रतिनिधियों ने अभियान से जुड़कर लोगों से जांच कराने की अपील की। ग्राम ताला को टीबी मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प भी लिया गया।

अभियान में एक्स-रे टेक्निशियन जावेद खान, वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक गिरधर देवांगन, दिनेश जायसवाल, यशवंत भारद्वाज सहित ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक नीलिमा पाण्डेय, सुनील पात्रे और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अंजू मृचंडे व गौकरण साहू शामिल रहे।

बेरला में कार्यशाला — नशा और टीबी दोनों पर मंथन
बेरला में नशामुक्त भारत और टीबी मुक्त भारत विषय पर एक कार्यशाला आयोजित हुई, जिसमें मितानिन कार्यक्रम की स्वस्थ पंचायत समन्वयक सत्यभामा परगनिहा ने नशे के स्वास्थ्य, परिवार और समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की विस्तार से जानकारी दी।

राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के ब्लॉक वरिष्ठ पर्यवेक्षक दिनेश गंगबेर ने उपस्थित जनों को छत्तीसगढ़ को टीबी मुक्त करने की शपथ दिलाई और उच्च जोखिम समूह की पहचान कर एक्स-रे कराने की अपील की।

कार्यशाला में खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे. के. कुंजाम, एमटी प्रेमलता सिन्हा, शकुंतला देवांगन और ग्राम स्वच्छता समिति के सदस्य भी उपस्थित रहे।
100 दिवसीय यह अभियान टीबी के शीघ्र निदान और उपचार के साथ-साथ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पूरे देश में संचालित किया जा रहा है।


9 बायपास सड़कों के लिए 448 करोड़ की मंजूरी

रायपुर,06/04/2026

लोक निर्माण विभाग ने मंजूर किए 448 करोड़

रायगढ़ जिले में तीन, धमतरी और बलौदाबाजार में बनेंगे दो-दो बायपास

लोक निर्माण विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए 9 बायपास सड़कों हेतु ₹448 करोड़ 13 लाख से अधिक की राशि स्वीकृत की है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के निर्देश पर यह राशि प्राथमिकता से मंजूर की गई।

जिलेवार विवरण
जिला बायपास लंबाई स्वीकृत राशि रायगढ़ तमनार बायपास6 किमी₹152.17 करोड़।रायगढ़ रिंग रोड (बायपास)—₹70.47 करोड़।रायगढ़ खरसिया बायपास क्र.-3 (कबीर चौक–डभरा रोड)2 किमी₹7.22 करोड़।धमतरी भखारा बायपास4 किमी₹14.94 करोड़।धमतरी नारी बायपास1.50 किमी₹7.97 करोड़।बलौदाबाजार बलौदाबाजार बायपास (लटुवा-पनगांव होते हुए)15 किमी₹88.68 करोड़।बलौदाबाजार रिसदा बायपास7 किमी₹20.99 करोड़।बिलासपुर कोनी-मोपका फोरलेन बायपास13.40 किमी₹82.80 करोड़।बेमेतरा छिरहा बायपास (कांक्रीटीकृत)1.20 किमी₹2.89 करोड़ ।

मुख्य बातें
सर्वाधिक राशि रायगढ़ जिले को मिली — तीन बायपास परियोजनाओं के लिए।बलौदाबाजार और धमतरी में दो-दो बायपास स्वीकृत।
सबसे लंबा बायपास — बलौदाबाजार का 15 किमी मार्ग।
सबसे बड़ी एकल परियोजना — तमनार बायपास (₹152 करोड़)।

राज्य शासन शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में निर्बाध, तेज और सुरक्षित यातायात उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। ट्रैफिक का दबाव कम करने बायपास सड़कों, पुलों और ओवरब्रिजों का निर्माण प्राथमिकता से किया जा रहा है। इससे आवागमन और अधिक स्मूथ, तेज एवं व्यवस्थित होगा। हम प्रदेश के समग्र विकास के लिए आधुनिक और मजबूत सड़क अधोसंरचना लगातार विकसित कर रहे हैं।” – अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री

बस्तर को रेल का बड़ा तोहफा: विकास की नई उड़ान, CG अर्थव्यवस्था चमकेगी

गांव‑नगर कनेक्शन: रायपुर‑बिलासपुर से बस्तर जुड़ने से छोटे ट्रांसपोर्टर, ठेकेदार, छोटे‑मोटे दुकानदार सबको फायदा।

रायपुर,06/04/2026
रावघाट-जगदलपुर रेललाइन पर ₹3513 करोड़ का बजट मिलते ही बस्तर में खुशी की लहर। 70 साल पुरानी मांग पूरी होने से इलाके का कायापलट होने वाला है। माओवाद का साया हटने के बाद बस्तर विकास की रफ्तार पकड़ चुकी है—अब रेल इसे पंख देगी।

बस्तर के लोहे के भंडार जगजाहिर हैं। रेल बनेगी तो लाखों टन खनिज सस्ते में जगदलपुर-रायपुर पहुंचेगा। स्टील प्लांट्स चहक उठेंगे, हजारों नौकरियां पैदा होंगी। दूरस्थ गांवों तक डॉक्टर-टीचर आसानी से पहुंचेंगे। पर्यटन फलेगा—चित्रकोट झरना, कांगेर घाटी रेल से पर्यटकों की कतार बढ़ेगी। एक दर्जन नई परियोजनाओं के सर्वे से बस्तर का रेल जाल और मज़बूत बनेगा।

“रावघाट‑जगदलपुर रेललाइन सिर्फ नक्शे पर नया ट्रैक नहीं, बस्तर के गांव‑मोहल्ले की रोजमर्रा की जिंदगी बदलने वाली सड़क है। किसान की फसल बाजार तक पहुंचेगी, आदिवासी बच्चा ट्रेन से शहर का स्कूल देख पाएगा, और गांव की दुकानें नए ग्राहकों से भर जाएंगी

छत्तीसगढ़ की बात करें तो यह रेल राज्य को आर्थिक मजबूती देगी। खनन पर निर्भर अर्थव्यवस्था को सस्ता ढुलाई मिलेगा, सालाना हजारों करोड़ का फायदा। जीडीपी बढ़ेगी, राजस्व चढ़ेगा, उद्योग लगेंगे। पिछला बजट भी रेल पर खर्च दोगुना कर चुका—अब बस्तर वाला कदम CG को टॉप ग्रोथ वाले राज्यों में धकेल देगा। विकास की यह ट्रेन रुकेगी नहीं!


महिला आरक्षण का मास्टरप्लान: 2029 तक क्या‑क्या होगा?

डिजिटल डेस्क ,06/04/2026

नारी शक्ति वंदन (महिला आरक्षण) कानून के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण को असली रूप 2029 के आम चुनाव से देने की कोशिश चल रही है।

इसके लिए सरकार ने 16–18 अप्रैल के विशेष संसद सत्र में जरूरी कानून‑संशोधन और परिसीमन (सीट बांटने‑बढ़ाने) की तैयारी रखी है, ताकि 2029 के चुनाव में यह आरक्षण लागू हो सके।

समय‑सीमा और आम आदमी को क्या फायदा?
यह अधिनियम तो 2023 में बन चुका है, लेकिन लागू होने की तारीख अभी तय नहीं, सरकार अब इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से शुरू करना चाहती है।

इसके लिए लोकसभा की सीटें बढ़ाकर,महिलाओं के लिए अतिरिक्त रिजर्व सीटें रखने का फॉर्मूला बन रहा है; दक्षिण भारत के राज्यों को यह भी यकीन दिया गया है कि उनकी मौजूदा लोकसभा सीटें कम नहीं होंगी, बस नई सीटों में महिला हिस्सा जुड़ेगा।


नारी शक्ति वंदन कानून के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण को असली रूप देने के लिए सरकार ने 2029 के लोकसभा चुनाव को लक्ष्य बनाया है।

इसके लिए जरूरी कानून संशोधन और परिसीमन तैयारी

16–18 अप्रैल के विशेष सत्र में पूरी की जाएगी, ताकि अगले चुनाव में लगभग एक‑तिहाई सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व दिखें। दक्षिण भारत के राज्यों को यह भी सुनिश्चित किया गया है कि उनकी बरसों से कम जनसंख्या के कारण लोकसभा सीटें घटेंगी नहीं, बल्कि नई बनने वाली सीटों में से ही महिला आरक्षण निकाला जाएगा। इस तरह यह कानून न सिर्फ राजनीति में महिलाओं की जगह मजबूत करेगा, बल्कि दक्षिण तक आम लोगों को यह भी दिखेगा कि उनकी आवाज़ भी अब सीधे विधायक‑सांसद के रूप में ऊपर तक पहुंचेगी।



“रक्त कणिकाओं सा हो समाज का आपसी सहयोग”: अनूठे जीवन दर्शन के साथ BJMTUC के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी नियुक्त हुए दीपक पांडे

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डिजिटल डेस्क/नई दिल्ली _सौरभ पाण्डेय

भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल (BJMTUC) ने अपने राष्ट्रीय सांगठनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए श्रम और समाज को देखने के नजरिए में एक नई वैचारिक चेतना को स्थान दिया है। संगठन की राष्ट्रीय समिति ने दीपक पांडे को ‘राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी’ के पद पर नियुक्त किया है, जिनका उद्देश्य संगठन के मूल सिद्धांतों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है।

राष्ट्र निर्माण में ‘अदृश्य श्रम’ की पहचान
संगठन का मानना है कि श्रम केवल कारखानों तक सीमित नहीं है। नवनियुक्त मीडिया प्रभारी दीपक पांडे के अनुसार, समाज का हर व्यक्ति जो अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभा रहा है, वह वास्तव में एक ‘मजदूर’ (श्रमसाधक) है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि ट्रेड यूनियन की सदस्यता से इतर, सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना ही सबसे बड़ा श्रम है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: समाज और मानव शरीर का अंतर्संबंध
विज्ञप्ति में दीपक पांडे के उस विशेष दृष्टिकोण को प्रमुखता दी गई है जहाँ वह समाज की तुलना मानव रक्त से करते हैं। उनका कहना है:
“जिस प्रकार रक्त में मौजूद श्वेत और लाल कणिकाएं बिना थके शरीर की सुरक्षा और पोषण सुनिश्चित करती हैं, ठीक वैसे ही समाज का हर घटक एक-दूसरे का पूरक है। कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता, वह केवल समाज रूपी शरीर को जीवंत रखने के लिए किया गया सहयोग है।”

संगठन का संकल्प
BJMTUC के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजेश शर्मा द्वारा की गई यह नियुक्ति इस बात का संकेत है कि संगठन अब संगठित और असंगठित क्षेत्रों के साथ-साथ बौद्धिक और वैचारिक स्तर पर भी ‘श्रम की गरिमा’ को स्थापित करेगा। इस नियुक्ति की सूचना प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय श्रम मंत्रालय को भी साझा की गई है।

इस नियुक्ति की प्रतिलिपि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, भाजपा के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया जी और मुख्य श्रम आयुक्त को प्रेषित की गई है।
संगठन को विश्वास है कि दीपक पांडे के इस व्यापक दृष्टिकोण और संचार कौशल से भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल न केवल श्रमिकों के हितों की रक्षा करेगी, बल्कि समाज के हर वर्ग को ‘श्रम की गरिमा’ (Dignity of Labour) के सूत्र में पिरोने का कार्य भी करेगी। उनकी नियुक्ति पर देशभर के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हर्ष व्यक्त किया है।