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Monday, November 2, 2026
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सत्यनारायण कथा:-पूजा से अधिक प्रसाद और सामाजिक समरसता का आयोजन है

परशुराम जयंती विशेष-19/04/2026

सत्यनारायण पूजा की कथा स्कंद पुराण के रेवाखंड से ली गई है, जिसमें पाँच अध्याय हैं। ये अध्याय मुख्य रूप से भक्ति, प्रसाद के महत्व और सत्यव्रत के पालन से मिलने वाले फलों की कथाओं पर आधारित हैं, जिनमें निम्न पात्रों की कहानियां हैं।लेकिन इस पूजा में बहुत महत्वपूर्ण है जो संकल्प कराया जाता है एक पुरोहित द्वारा यजमान से वह गहराई की समझ और चिंतन का विषय है।

पहला अध्याय (नारद-विष्णु संवाद): महर्षि सूत जी ऋषियों को बताते हैं कि कैसे देवर्षि नारद ने भूलोक के दुखी मनुष्यों को देखा और भगवान विष्णु ने उन्हें सत्यनारायण व्रत की विधि बताई।
दूसरा अध्याय (निर्धन ब्राह्मण और लकड़हारा): काशी के एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण और एक लकड़हारे की कहानी है, जो सत्यनारायण भगवान की पूजा कर सुखी होते हैं।
तीसरा अध्याय (उल्कामुख और साधु वैश्य): राजा उल्कामुख और साधु वैश्य की कहानी, जो भगवान की पूजा करके संतान और वैभव प्राप्त करते हैं।
चौथा अध्याय (साधु और कलावती का संकट): साधु वैश्य की बेटी कलावती और दामाद के साथ हुई घटना, जिसमें प्रसाद का अपमान करने के कारण वे विपत्ति में पड़ते हैं और फिर पूजा से सब ठीक होता है।
पांचवां अध्याय (राजा तुंगध्वज): राजा तुंगध्वज की कथा है, जिन्होंने प्रसाद का निरादर किया और परिणामस्वरुप सब कुछ नष्ट हो गया, बाद में पूजा कर उन्होंने पुनः सब प्राप्त किया।

हम देखें तो इन अध्यायों में यह सिखाया गया है कि सत्य का पालन करने जातीयता की भेदभाव से रहित ,सामाजिक समरसता और भगवान में विश्वास रखने से ही सच्चा सुख मिलता है।लेकिन यह प्राचीन पूजा पद्धति अब कम होते जा रही है।

कथा के सार तत्व सामूहिकता
प्रसाद का महत्व: चौथे और पांचवें अध्याय में विशेष रूप से प्रसाद का अपमान न करने की सीख दी गई है।
पूर्व जन्म की कथा: पांचवें अध्याय में ही बताया गया है कि पिछले जन्मों में ये सभी पात्र (ब्राह्मण, लकड़हारा, उल्कामुख, साधु, तुंगध्वज) पूर्व जन्म के कर्मों के कारण मोक्ष के अधिकारी बने।

एक नजर से देखे तो इसका गहरा और सटीक विश्लेषण है। सत्यनारायण कथा वास्तव में केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता का एक रूपक है।
॥ संकल्प मंत्र ॥

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः, श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य ब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्तैकदेशान्तर्गते…
(यहाँ स्थान और तिथि बोली जाती है, जैसे:).[अमुक] नगरे/ग्रामे, [अमुक] संवत्सरे, [अमुक] ऋतौ, [अमुक] मासे, [अमुक] पक्षे, [अमुक] तिथौ, [अमुक] वासरे, [अमुक] गोत्रोत्पन्नः [यजमान का नाम] अहम् श्रुति-स्मृति-पुराणोक्त फलप्राप्त्यर्थं श्री सत्यनारायण पूजनं करिष्ये।

इस मंत्र का अर्थ स्वयं की नजरिए से:
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः: ब्रह्मांड की चेतना का तीन बार स्मरण (भूत, भविष्य, वर्तमान)।

श्वेतवाराहकल्पे / वैवस्वतमन्वन्तरे: यह सृष्टि के ‘समय’ (Cosmic Time) की गणना है, जो बताती है कि हम कितने विशाल कालचक्र का हिस्सा हैं।

जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे: यह मंत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है जो राष्ट्रीय संप्रभुता को दर्शाता है। यह व्यक्ति को बताता है कि वह जिस भूमि पर पूजा कर रहा है, वह जम्बूद्वीप का ‘भारतखण्ड’ है। यह उसे अपनी मिट्टी के प्रति जिम्मेदार बनाता है।

कलिप्रथमचरणे: यह वर्तमान समय के यथार्थ को स्वीकार करना है।
गोत्रोत्पन्नः… करिष्ये: अंत में व्यक्ति अपना नाम लेकर संकल्प लेता है। यहाँ ‘अहम्’ (मैं) कहता है, जिसका अर्थ है कि वह व्यक्ति स्वयं उस कार्य की जिम्मेदारी ले रहा है।

यह मंत्र साबित करता है कि पूजा केवल निजी मोक्ष के लिए नहीं है, बल्कि यह देश, काल और स्थान के साथ स्वयं को जोड़ने का एक माध्यम है। जैसा कि आपने उल्लेख किया, यह एक राष्ट्रीय कसम की तरह है।

लेखन त्रुटियां सम्भव है जानकारी पर आधारित स्व-लेख है।






परशुराम जयंती विशेष-19/04/2026


हाइवे किनारे अनधिकृत ढाबों पर सख्ती, 60 दिन में हटाने का आदेश: सुप्रीम कोर्ट

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डिजिटल डेस्क-19/04/2024

देशभर में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे तेजी से बढ़ रहे अवैध ढाबों, अस्थायी दुकानों और अतिक्रमण पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 60 दिनों के भीतर ऐसे अवैध निर्माण हटाने के निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और आम नागरिकों की जान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और किसी भी तरह का अनधिकृत ढांचा इन उद्देश्यों के विपरीत है। कोर्ट ने राज्य सरकारों, स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग को समन्वय बनाकर अभियान चलाने को कहा है, ताकि तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि राजमार्गों के किनारे बिना अनुमति संचालित ढाबे और दुकानें न केवल सड़क की चौड़ाई को प्रभावित करती हैं, बल्कि वाहन चालकों के लिए अचानक रुकने, गलत पार्किंग और भीड़भाड़ जैसी समस्याएं पैदा करती हैं। इससे दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जहां आवश्यक हो, वहां वैकल्पिक स्थान चिन्हित कर वैध रूप से व्यवसाय करने की व्यवस्था भी की जा सकती है, लेकिन अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।

यह निर्देश देने के पीछे मुख्य कारण देश में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं और उनमें होने वाली मौतें हैं। कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि हाइवे किनारे अनियंत्रित ढाबों के कारण वाहन चालकों का ध्यान भटकता है, अचानक वाहन मोड़ने या रोकने की स्थिति बनती है और भारी वाहनों के साथ टकराव जैसी घटनाएं होती हैं। इसके अलावा, आपातकालीन सेवाओं—जैसे एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड—को भी अतिक्रमण के कारण रास्ता साफ नहीं मिल पाता, जिससे समय पर मदद पहुंचाने में बाधा आती है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि कई जगहों पर ये ढाबे बिना किसी सुरक्षा मानकों के संचालित होते हैं, जहां पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं होती और न ही यातायात नियमों का पालन किया जाता है। इससे सड़क पर अव्यवस्था और जोखिम दोनों बढ़ते हैं। अदालत ने राज्यों को निर्देश दिया है कि भविष्य में इस तरह के अतिक्रमण को रोकने के लिए नियमित निगरानी तंत्र विकसित किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

कुल मिलाकर, कोर्ट का यह आदेश सड़क सुरक्षा को मजबूत करने, दुर्घटनाओं में कमी लाने और राजमार्गों को व्यवस्थित व सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत में LPG और ईंधन की आपूर्ति सामान्य

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सरकार ने कहा—पैनिक बुकिंग की जरूरत नहीं, रोज़ 54 लाख घरेलू सिलेंडर की डिलीवरी जारी।

नई दिल्ली, 18 अप्रैल 2026

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि भारत में LPG और अन्य ईंधनों की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। ने 17–18 अप्रैल को स्पष्ट किया कि देश में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और नागरिकों को घबराकर अतिरिक्त बुकिंग करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 54 लाख घरेलू LPG सिलेंडरों की डिलीवरी की जा रही है, जिससे देशभर में आपूर्ति सुचारू रूप से बनी हुई है।

भारत अपनी LPG आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में पश्चिम एशिया की स्थिति को देखते हुए सरकार ने दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार पर जोर दिया है।

इस दिशा में चार प्रमुख पाइपलाइन रूट चिन्हित किए गए हैं—

चेरलापल्ली – नागपुर पाइपलाइन

शिकारपुर – हुबली – गोवा पाइपलाइन

पारादीप – रायपुर पाइपलाइन

झांसी – सितारगंज पाइपलाइन

ये पाइपलाइनें सीधे रिफाइनरियों और इंपोर्ट टर्मिनलों को बॉटलिंग प्लांट से जोड़ेंगी, जिससे LPG के परिवहन की लागत कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। साथ ही, ये पाइपलाइनें जरूरत पड़ने पर स्टोरेज की सुविधा भी प्रदान करेंगी।

मंत्रालय का कहना है कि भविष्य में यदि वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में कोई बाधा आती है, तो यह नेटवर्क देश की ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अंत में, सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और LPG की बुकिंग सामान्य तरीके से ही करें।









डीआईजी रामकृष्ण साहू द्वारा देवरबीजा चौकी का आकस्मिक निरीक्षण:अनुशासन पर जोर, अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

बेमेतरा/छत्तीसगढ़ 18 अप्रैल 2026:

पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) रामकृष्ण साहू (भा.पु.से.) ने शुक्रवार देर शाम पुलिस चौकी देवरबीजा का आकस्मिक निरीक्षण कर कानून-व्यवस्था एवं पुलिसिंग की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण का उद्देश्य पुलिस की सतर्कता, अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता को परखना था।

निरीक्षण के दौरान डीआईजी ने चौकी में संधारित जनरल डायरी, ड्यूटी रजिस्टर सहित अन्य अभिलेखों का अवलोकन किया तथा उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बेहतर पुलिसिंग के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया। उन्होंने पुलिसकर्मियों की मुस्तैदी, सतर्कता एवं अनुशासन की जांच करते हुए बीट प्रणाली एवं अपराधियों की सूची की समीक्षा की।

डीआईजी ने निर्देशित किया कि रात्रि गश्त को और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। लंबित अपराध, मर्ग, गुमशुदगी एवं शिकायतों के शीघ्र निराकरण के साथ ही फरियादियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने पर विशेष जोर दिया गया।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि अनुशासन ही पुलिस व्यवस्था की बुनियाद है और किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही चौकी एवं थानों में आने वाले पीड़ितों की शिकायतों पर संवेदनशीलता एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि आमजन में पुलिस की सकारात्मक छवि बनी रहे।

डीआईजी साहू ने अवैध शराब, जुआ, सट्टा, गांजा, नशीली दवाओं एवं अन्य अवैध गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण, स्थायी एवं गिरफ्तारी वारंट की तामील तथा असामाजिक तत्वों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई बढ़ाने पर जोर दिया।

उन्होंने समयबद्ध मामलों में 60 से 90 दिनों के भीतर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए तलाशी एवं जब्ती की कार्यवाही के दौरान फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी को अनिवार्य करने की बात कही, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

डीआईजी ने नवीन आपराधिक कानून—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम—के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया। इसके साथ ही कम्यूनिटी पुलिसिंग को सुदृढ़ करने, मजबूत सूचना तंत्र विकसित करने तथा विजिबल पुलिसिंग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।

महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित अपराधों के निराकरण हेतु “ऑपरेशन मुस्कान” को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा संपत्ति संबंधी अपराधों में आदतन आरोपियों पर सतत निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए।

इसके अलावा रात्रि गश्त, पेट्रोलिंग, कॉम्बिंग ऑपरेशन को सुदृढ़ करने, सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम तथा गोवंश तस्करी पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साइबर प्रहरी अभियान एवं त्रिनयन ऐप के प्रभावी क्रियान्वयन तथा “सशक्त ऐप” के माध्यम से वाहन चेकिंग को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया।

निरीक्षण के दौरान पुलिस चौकी देवरबीजा प्रभारी उप निरीक्षक योगेश अग्रवाल, चौकी प्रभारी देवकर उप निरीक्षक अलील चंद, प्रधान आरक्षक नंदलाल चतुर्वेदी, आरक्षक रामगोपाल निषाद, पुरुषोत्तम पटेल, मुकेश सिंह राजपूत सहित अन्य स्टाफ उपस्थित रहे।

अवैध बोर उत्खनन पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई: वाहन जब्त, थाना साजा को सौंपा गया

बिना अनुमति कार्य करते वाहन जब्त, थाना साजा को सौंपा गया

बेमेतरा, 18 अप्रैल 2026:

जिले के अंतर्गत तहसील साजा के ग्राम बगलेडी में प्रशासन ने अवैध गतिविधियों के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बगलेडी में बिना अनुमति के अवैध रूप से बोर उत्खनन किया जा रहा था।

सूचना मिलते ही संबंधित विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जहां एक वाहन के माध्यम से अवैध उत्खनन कार्य किया जाना पाया गया। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित व्यक्तियों द्वारा आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना ही बोर उत्खनन किया जा रहा था, जो नियमों का उल्लंघन है।

प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर ही उक्त वाहन को जब्त कर लिया। जब्त वाहन को विधिसम्मत कार्रवाई हेतु थाना साजा के सुपुर्द कर दिया गया है।

प्रशासन द्वारा मामले की विस्तृत जांच जारी है तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध उत्खनन जैसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में निरंतर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।


वैश्विक हलचल और गांव की चौपाल: होर्मुज स्ट्रेट का खुलना और भारत पर असर

चौपाल चर्चा/18/04/2026

(दृश्य: गांव की एक पुरानी लेकिन व्यवस्थित चौपाल, बरगद का पेड़। ज्योतिपति एक अखबार पढ़ रहे हैं और ज्वाला पास ही बैठे हैं।)

ज्योतिपति:(अखबार की ओर इशारा करते हुए) ज्वाला भाई, दुनिया के नक्शे पर एक बहुत बड़ी गांठ खुली है। 49 दिनों के बाद ‘होर्मुज स्ट्रेट’ का रास्ता फिर से खुल गया है।

ज्वाला: (हैरानी से) ये ‘होर्मुज स्ट्रेट’ का बला क्या है दादा? और ये हमारे गांव से कैसे जुड़ा है?

ज्योतिपति: यही तो समझने वाली बात है। देख, ईरान और अमेरिका-इजरायल की लड़ाई में जो रास्ता बंद हुआ था, वो दुनिया का ‘रसोईघर’ है। सारी गैस, सारा तेल इसी रास्ते से आता है। 28 फरवरी से जो रास्ता बंद था, उसने हमारे देश की कमर तोड़ दी थी।

ज्वाला: अच्छा! तभी कहूं कि आजकल गैस सिलेंडर और तेल के दाम आसमान क्यों छू रहे थे? गांव में चर्चा तो हो रही थी, लेकिन किसी को ये नहीं पता था कि ये सब इतने दूर बैठे ईरान की वजह से हो रहा है।

ज्योतिपति: बिल्कुल! ट्रंप साहब ने भी कह दिया है कि रास्ता खुल गया है। लेकिन याद रखना ज्वाला, ये शांति अभी ‘शर्तों’ वाली है। ईरान ने सिर्फ संघर्ष-विराम तक के लिए इसे खोला है। अगर डील पूरी नहीं हुई, तो खतरा फिर मंडरा सकता है।

ज्वाला:मतलब दादा, आज के ज़माने में शहर के लोग या देश के बड़े नेता क्या कर रहे हैं, इसका सीधा असर हमारी रसोई और खेत की सिंचाई पर पड़ता है?

ज्योतिपति: सटीक पकड़ा! भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदने वाला देश है। हम अपनी जरूरत का 85% तेल बाहर से लाते हैं, और उसका 60% हिस्सा इसी होर्मुज के रास्ते आता है। ये जो रास्ता खुला है, इसका मतलब है कि अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा को थोड़ी राहत मिलेगी। महंगाई का जो दौर था, वो शायद अब थोड़ा थम जाए।

ज्वाला: (गहराई से सोचते हुए) दादा, ये तकनीक और इंटरनेट का जमाना है। पहले हम अपने गांव की खबरों में मस्त रहते थे, अब ये ‘ग्लोबल खबरें’ सीधे हमारी चौपाल पर आ गई हैं। हमें सचेत रहना होगा।

ज्योतिपति:सही कहा ज्वाला। पत्रकारिता का मतलब ही यही है कि ‘ईरान’ में क्या हो रहा है और उसका ‘इम्पैक्ट’ हमारे गांव की गरीब जनता पर क्या पड़ेगा, इसका हिसाब रखना। ‘जनचौपाल36’ इसीलिए है—ताकि लोग समझें कि हम एक-दूसरे से कितने जुड़े हैं।
(ज्योतिपति अखबार को मोड़ते हुए)
ज्वाला: चलो, अब अगली खबर की तैयारी करते हैं। दुनिया भाग रही है, हमें उसे समझना है, भागना नहीं है।




एशियाई अरबपतियों की सूची में बड़ा उलटफेर: गौतम अडानी फिर बने नंबर वन, अंबानी पिछड़े

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डिजीटल डेस्क/मुंबई -18 अप्रैल 2026

भारतीय और एशियाई कारोबारी जगत में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स की ताजा रैंकिंग में गौतम अडानी ने मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ते हुए एक बार फिर एशिया और भारत के सबसे अमीर व्यक्ति का ताज अपने नाम कर लिया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, अडानी की कुल नेटवर्थ बढ़कर 92.6 अरब डॉलर हो गई है, जिसके साथ ही वे विश्व के शीर्ष अमीरों की सूची में 19वें स्थान पर आ गए हैं। वहीं, लंबे समय तक इस पायदान पर काबिज रहे मुकेश अंबानी अब 90.8 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दूसरे स्थान पर खिसक गए हैं और वैश्विक रैंकिंग में 20वें स्थान पर हैं।

शेयर बाजार की चाल और बदलती किस्मत

इस उलटफेर का मुख्य कारण अडानी समूह की कंपनियों का शेयर बाजार में आक्रामक और शानदार प्रदर्शन है। केवल गुरुवार के कारोबारी सत्र में अडानी की संपत्ति में 3.56 अरब डॉलर का भारी उछाल आया। इसके विपरीत, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में लगातार सुस्ती और गिरावट के चलते मुकेश अंबानी की संपत्ति में इस साल अब तक 16.9 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई है। दोनों दिग्गजों के बीच संपत्ति का अंतर मात्र 1.8 अरब डॉलर का है, जो यह दर्शाता है कि बाजार के उतार-चढ़ाव में यह रैंकिंग कभी भी बदल सकती है।

वैश्विक परिदृश्य: क्या अमीर और अमीर हो रहे हैं?

यह बदलाव केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के अरबपतियों की सूची में उथल-पुथल मची है। जहाँ एलॉन मस्क 656 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ सूची में मजबूती से सबसे ऊपर बने हुए हैं, वहीं दुनिया के टॉप 20 अमीरों में से सात की संपत्ति में 2026 के दौरान गिरावट देखी गई है। बर्नार्ड अर्नोल्ट जैसे दिग्गजों को भी बड़ा झटका लगा है।

जनचौपाल36 का नजरिया

जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद जिस तरह से अडानी समूह को भारी गिरावट का सामना करना पड़ा था, वहां से वापस लौटकर नंबर वन बनना उनकी कारोबारी रणनीति की वापसी को दर्शाता है। हालांकि, यह खबर देश की आम जनता के लिए एक सोचने वाला विषय भी है। जिस रफ़्तार से इन अरबपतियों की संपत्ति में अरबों डॉलर का हेर-फेर हो रहा है, उस रफ़्तार और संपन्नता का कितना असर देश के उन गांवों तक पहुँच रहा है, जहाँ आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष जारी है? क्या यह केवल कागजों और इंडेक्स की लड़ाई है, या इसका वास्तविक अर्थव्यवस्था पर कोई ठोस प्रभाव है? यह वो बड़ा सवाल है जिस पर अब हमें गहराई से मंथन करना होगा।




संसद या ‘रणक्षेत्र’: क्या वाकई महिला आरक्षण महज़ एक राजनीतिक दांवपेंच है?

डिजिटल डेस्क/18/04/2026

संसद की सीढ़ियों पर टकराते दो विचारों के बीच, क्या वाकई लोकतंत्र की शुचिता दम तोड़ रही है? आइए जानते हैं ज्योति और ज्वाला के बीच की इस तीखी बहस के आईने में।

संसद का ‘विशेष सत्र’ या महज़ एक राजनीतिक बिसात?
ज्वाला: “ज्योति पति जी, आखिर तीन दिन का वह विशेष सत्र बुलाकर सरकार क्या साबित करना चाहती थी? क्या यह महिलाओं की सुरक्षा और आरक्षण के प्रति उनकी ‘पूर्ण प्रतिबद्धता’ का प्रमाण था, या फिर महज एक दिखावा?”

ज्योतिपति: “ज्वाला, यह कोई प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘राजनीतिक खेल’ है। आजकल की राजनीति का मूलमंत्र है—सामने वाले को पस्त और परास्त करना। वोट बैंक की फसल काटने के लिए आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों को एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। यहाँ धर्म और नैतिकता भी सत्ता के दास बनकर खड़े नजर आते हैं।”
जब ‘संसद’ में मर्यादाएं तार-तार होती हैं।

ज्वाला: “बिल्कुल सही कहा। जिस संसद में देश का भविष्य तय होना चाहिए, वहां अक्सर नेताओं के आचरण पर सवाल उठते हैं। कभी पोर्न देखने की खबरें, तो कभी बहस के नाम पर अमर्यादित टिप्पणियां—क्या यही हमारे ‘लोकप्रहरी’ हैं? उन्हें लगता है कि वे भगवान हैं और जनता उनकी प्रजा, जिसे वे अपनी सुविधानुसार खुश करने का ढोंग करते हैं।”

ज्योतिपति: “हाँ, ज्वाला! जुबानी तीर छोड़कर एक-दूसरे को घायल करना ही आज की राजनीति है। सबसे दुखद यह है कि जनता भी अब मूकदर्शक बनी बैठी है। मुफ्त योजनाओं के जाल में फंसी जनता भीष्म, द्रोण और कर्ण की तरह उस दुर्योधन के सामने शरणागत है, जो लोकतंत्र को अपनी जागीर समझता है।”

जादूगरी का खेल और महिला अस्मिता
ज्वाला: “सच कहूं तो, वहां बहस कम और अपनी कमजोरी को ताकत बताने की होड़ ज्यादा है। कोई कहता है, ‘यहाँ कोई जादू नहीं चलने वाला’, तो कोई अपनी जीत को ‘जादू’ बताकर जनता को मंत्रमुग्ध करने का दावा करता है।

लेकिन कुछ भी हो, ज्योति पति जी, महिलाएं जननी हैं, गृहस्वामिनी हैं। इन्हें सुरक्षा और आरक्षण तो मिलना ही चाहिए, चाहे तरीका कोई भी हो। अफसोस कि बहसें तो बहुत हुईं, पर यह बुनियादी अधिकार आज भी कागजों में ही उलझा हुआ है। संसद केवल बहस या आरामगाह न बने, यहां लोकतंत्र के विकास की बातें होनी चाहिए।”

क्या चाणक्य का नाम लेना, चाणक्य का अपमान है?
ज्योति: “बिल्कुल! आज हर कोई खुद को ‘चाणक्य’ कहता है, लेकिन मुझे तो यह उस महान आचार्य का अपमान लगता है! वे दरबारी चारण हो सकते हैं, चाणक्य नहीं। चाणक्य वह शिक्षक था जिसने एक सम्राट को चुनौती दी थी, जो अर्थशास्त्र का प्रकांड विद्वान था।संसद को देश निर्माण की आधारशिला बनना था, न कि भड़ास निकालने का अड्डा।”

ज्वाला: “राजनीतिक शुचिता की बात पर मुझे फिर चाणक्य का ध्यान आता है। एक बार जब एक व्यक्ति उनसे मिलने आया, तो उन्होंने राजकार्य के लिए जल रहे दीपक को बुझा दिया और निजी खर्च से जलने वाला दूसरा दीपक जलाया। उन्होंने कहा—’अब मैं निजी काम कर रहा हूँ, अतः राजकीय कोष के दीपक का उपयोग पाप है।'”

ज्योतिपति “वही तो शुचिता है, ज्वाला! आज का नेता राजकोष तो क्या, पूरे देश की अस्मिता को अपने स्वार्थ की खातिर जलाने को तैयार है। हम उस युग में हैं जहाँ दीपक तो बहुत हैं, पर प्रकाश कहीं नहीं है।”

ज्वाला और ज्योति यह विचार रख शांत हो जाते है संसद केवल एक ईमारत नहीं, राष्ट्र की आत्मा का प्रतिबिम्ब है। क्या हम एक ऐसे लोकतंत्र की कल्पना कर सकते हैं जहाँ ‘शुचिता’ सिर्फ एक शब्द न होकर एक व्यवहार हो?संसद को देश निर्माण की आधारशिला बनना चाहिए था, लेकिन वह केवल भड़ास निकालने का अड्डा बन गई है। चाणक्य ने तो वेश्यालयों जैसी संस्थाओं को भी राजकीय संरक्षण देकर टैक्स वसूला था ताकि समाज की बुराइयों को नियंत्रित किया जा सके, लेकिन आज की राजनीति में तो स्वयं संसद ही उन बुराइयों का केंद्र बनती दिख रही है।”

आपकी क्या राय है? क्या वाकई हम एक ऐसे ‘चाणक्य’ के बिना अंधेरे की ओर बढ़ रहे हैं?

“स्पेस ऑन व्हील्स: अंतरिक्ष विज्ञान की जागरूकता से ग्रामीण युवाओं को नई प्रेरणा”

रायपुर, 17 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में “स्पेस ऑन व्हील्स” कार्यक्रम बच्चों के लिए चलता-फिरता अंतरिक्ष विज्ञान विद्यालय बनकर उभरा है। की इस विशेष मोबाइल प्रदर्शनी बस के रणजीता स्टेडियम पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने इसका अवलोकन किया और विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उनकी वैज्ञानिक समझ और जिज्ञासा की सराहना की। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक आज के विकास की आधारशिला हैं और इस तरह की पहलें विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों में नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करती हैं।

कार्यक्रम के दौरान शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जशपुर की छात्राओं ने चंद्रयान और मंगलयान जैसे मिशनों की कार्यप्रणाली को सरल भाषा में प्रस्तुत किया, जिससे मुख्यमंत्री भी प्रभावित नजर आए। इस अवसर पर “स्पेस ऑन व्हील्स” के माध्यम से विज्ञान का प्रचार-प्रसार करने वाले 17 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया और “द मैजिक ऑफ नाइट स्काई” पुस्तिका का वितरण किया गया।

यह पहल “अन्वेषण” कार्यक्रम के तहत के सहयोग से संचालित की जा रही है, जिसमें 7 अप्रैल से शुरू हुआ 14 दिवसीय अभियान जिले के सभी विकासखंडों में पहुंचकर विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी दे रहा है। बस में पीएसएलवी, जीएसएलवी, चंद्रयान, मंगलयान, आरएलवी और विभिन्न सैटेलाइट तकनीकों के मॉडल प्रदर्शित किए गए हैं, जिन्हें ऑडियो-विजुअल और इंटरएक्टिव माध्यम से समझाया जा रहा है।

इस अभियान से जिले के 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। “स्पेस ऑन व्हील्स” न केवल अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ा रहा है, बल्कि ग्रामीण अंचलों के युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए भी प्रेरित कर रहा है।

छत्तीसगढ़ बॉयलर ब्लास्ट केस: कंपनी प्रबंधन के करीब 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

रायपुर/सक्ति, 17 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल 2026 को हुए भीषण बॉयलर विस्फोट मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस हादसे में करीब 20 मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू की, जिसमें लापरवाही के संकेत मिलने पर बड़ा कदम उठाया गया है।

मामले में सहित कंपनी प्रबंधन के करीब 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करते हुए कहा है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है और आगे और नाम भी जोड़े जा सकते हैं। यह एफआईआर प्लांट संचालन और सुरक्षा मानकों में कथित लापरवाही को लेकर दर्ज की गई है।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, बॉयलर के फर्नेस में अत्यधिक दबाव बनने और तकनीकी गड़बड़ी के कारण विस्फोट हुआ। बताया जा रहा है कि मेंटेनेंस और सेफ्टी प्रोटोकॉल में कमी इस हादसे की बड़ी वजह हो सकती है। फिलहाल तकनीकी विशेषज्ञों की टीम और प्रशासनिक अधिकारी पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं, ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके।

इस घटना के बाद वेदांता समूह की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं और श्रमिक सुरक्षा को लेकर भी बहस तेज हो गई है। हालांकि, हाल ही में अनिल अग्रवाल द्वारा अडानी समूह को लेकर किए गए ट्वीट की चर्चा जरूर रही थी, लेकिन इस हादसे और दर्ज एफआईआर का उस विवाद से कोई सीधा संबंध अब तक सामने नहीं आया है।