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25 वे स्थापना दिवस पर जुएल ओराम ने, एनएसटीएफडीसी को जनजातीय उद्यमिता का उत्प्रेरक बताया

बेमेतरा -17/04/2026

केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने एनएसटीएफडीसी के 25वें स्थापना दिवस पर नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इसे जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण में परिवर्तनकारी संस्था करार दिया। उन्होंने बिना जमानत के ऋण प्रदान करने वाले जन-केंद्रित दृष्टिकोण की सराहना की, जो अधिक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करता है।

प्रमुख उपलब्धियां
निगम ने अब तक 16.80 लाख से अधिक ऋण वितरित किए हैं, कुल राशि 4,400 करोड़ रुपये से अधिक।यह न केवल रोजगार सृजन बल्कि आत्मनिर्भरता और उद्यमिता को बढ़ावा देता है। मंत्री ने लाभार्थियों में विकसित वित्तीय अनुशासन और कम एनपीए दर की भी प्रशंसा की।

बेमेतरा के लाभार्थी सम्मानित
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से किशन ध्रुव (किराना व्यवसाय, ग्राम कुआं) और धनराज ठाकुर (फोटो स्टूडियो, ग्राम गातापार) को प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के प्रवीण कुमार लाटा का भी स्वागत हुआ। एनएसटीएफडीसी की सावधि ऋण योजना से ये लाभार्थी सफलतापूर्वक व्यवसाय चला रहे हैं।

कार्यक्रम की प्रमुख उपस्थिति
विश्व युवा केंद्र में आयोजित इस समारोह में मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा, संयुक्त सचिव अनंत प्रकाश पांडे, एनएसटीएफडीसी के अध्यक्ष टी. रौमुआन पाइते व राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। मध्य क्षेत्र प्रमुख विकास रंजन की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने जनजातीय विरासत को उजागर किया।

जनजातीय सशक्तिकरण की दिशा में अहम पहल
कार्यक्रम के अंत में यह बताया गया कि एनएसटीएफडीसी के माध्यम से जनजातीय समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। यह संस्था जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।







नासिक केस धर्मांतरण और उत्पीड़न : 9 FIR, SIT जांच तेज, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा केस

डिजिटल डेस्क /नासिक /17 अप्रैल 2026

महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक आईटी–बीपीओ यूनिट में कथित यौन उत्पीड़न, धार्मिक दबाव और धर्मांतरण के आरोपों ने राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बहस छेड़ दी है। ताजा जानकारी के अनुसार, इस मामले में अब तक कुल 9 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और जांच को तेज करने के लिए पुलिस ने 12 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि शिकायतों का सिलसिला मार्च के अंतिम सप्ताह से शुरू हुआ, लेकिन कई पीड़ितों के बयानों में आरोप है कि इस तरह की गतिविधियां करीब 2022 से 2026 तक पिछले चार वर्षों से चल रही थीं।

कैसे सामने आया मामला
मामला उस समय सुर्खियों में आया जब एक महिला कर्मचारी ने अपने सहकर्मी पर शादी का झांसा देकर शोषण करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद अन्य महिला कर्मचारियों ने भी सामने आकर उत्पीड़न, अभद्र व्यवहार और धार्मिक दबाव से जुड़े आरोप लगाए।

पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 7 कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि एक मुख्य आरोपी अब भी फरार बताई जा रही है।

मुख्य आरोपी और कार्रवाई
इस मामले में एचआर मैनेजर निदा खान का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। पुलिस के अनुसार वह फिलहाल फरार है और उसने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। वहीं, अन्य आरोपियों में कई टीम लीडर्स के नाम शामिल हैं, जिन पर यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव के आरोप लगाए गए हैं।

स्थानीय अदालत ने दो मुख्य आरोपियों को 18 अप्रैल 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेजा है।

SIT और अन्य एजेंसियों की जांच
नासिक पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT का गठन किया है। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय जांच फिलहाल 9 एफआईआर तक सीमित है, जबकि अन्य संभावित पहलुओं—जैसे बाहरी नेटवर्क या फंडिंग—की जांच के लिए ATS, NIA और राज्य खुफिया विभाग को भी पत्र भेजा गया है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि पुलिस ने सबूत जुटाने के लिए महिला पुलिसकर्मियों को अंडरकवर स्टाफ के रूप में तैनात किया था, हालांकि इस पहलू पर आधिकारिक विस्तृत बयान अभी प्रतीक्षित है।

कंपनी का रुख
कंपनी ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है और कहा है कि कार्यस्थल पर उत्पीड़न या किसी भी प्रकार की जबरदस्ती के प्रति उसकी जीरो टॉलरेंस नीति है।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां कथित जबरन धर्मांतरण और कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़े व्यापक सवाल उठाए गए हैं।

गुजरात में भाजपा की ‘प्रचंड’ आंधी: वोटिंग से पहले ही 720 सीटों पर जीत का महा-रिकॉर्ड, विपक्ष के ‘मैदान’ छोड़ने से सन्नाटा

गांधीनगर | 17 अप्रैल, 2026
गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों के शंखनाद के साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने एक ऐसा ‘सियासी चक्रव्यूह’ रचा है, जिसने विपक्षी दलों के होश उड़ा दिए हैं। राज्य में मतदान की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही भाजपा ने 720 से अधिक सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज कर एक नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम कर दिया है। यह आंकड़ा गुजरात की चुनावी राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा ‘प्री-पोल स्वीप’ माना जा रहा है।

कैसे बना यह ‘विजय रिकॉर्ड’?

राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, नामांकन वापस लेने की समय सीमा समाप्त होने के बाद यह चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। कई जिलों में विपक्षी दलों—कांग्रेस और आम आदमी पार्टी—के उम्मीदवारों ने अंतिम समय पर अपने पर्चे वापस ले लिए, जबकि कई महत्वपूर्ण वार्डों और पंचायतों में विपक्ष को उम्मीदवार तक नहीं मिले।

प्रमुख क्षेत्र: गांधीनगर, जामनगर और मानसा तालुका पंचायत जैसे क्षेत्रों में भाजपा ने बड़ी बढ़त बनाई है।

विपक्ष का पलायन: अकेले मानसा में ही भाजपा ने मतदान से पहले कई सीटें अपनी झोली में डाल ली हैं।

विपक्षी खेमे में सन्नाटा, ‘मैदान’ खाली

खबर सूत्रों की नजर से 700 से ज्यादा सीटों पर भाजपा के निर्विरोध निर्वाचन ने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है। जहाँ भाजपा इसे ‘मोदी मैजिक’ और जनता का अटूट भरोसा बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे सत्ता का दुरुपयोग और डराने-धमकाने की राजनीति करार दिया है। हालाँकि, हकीकत यह है कि चुनावी रणभूमि सजने से पहले ही भाजपा ने मनोवैज्ञानिक रूप से बड़ी जीत हासिल कर ली है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का बड़ा बयान
गुजरात भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने इस जीत पर खुशी जताते हुए कहा, “यह केवल सीटों की जीत नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों पर जनता की मुहर है। गुजरात की जनता ने चुनाव से पहले ही अपना फैसला सुना दिया है। विपक्ष के पास न विजन है और न ही कार्यकर्ता, इसीलिए वे मैदान छोड़कर भाग रहे हैं।”

सियासी मायने: जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में सीटों का निर्विरोध जीतना यह दर्शाता है कि भाजपा का जमीनी संगठन इस कदर मजबूत हो चुका है कि विपक्ष उसके सामने टिकने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। मतदान वाले दिन अब केवल औपचारिकताओं की ही उम्मीद बची है।

बड़ी बात: 2022 के विधानसभा चुनाव में 156 सीटें जीतने वाली भाजपा ने 2026 के इन निकाय चुनावों में अपना ही रिकॉर्ड तोड़कर यह साबित कर दिया है कि गुजरात अभी भी ‘केसरिया गढ़’ बना हुआ है।


लाइफस्टाइल या ‘डेथ-स्टाइल’: नशे की गिरफ्त में भविष्य, खुद को आईना दिखाती सरकारें

डिजिटल डेस्क, 17 अप्रैल 2026

आज के दौर में जिसे हम ‘आधुनिक लाइफस्टाइल’ का नाम दे रहे हैं, वह धीरे-धीरे ‘विनाश-स्टाइल’ में बदलती जा रही है। समाज में आदतों पर अंकुश लगाने की शक्ति क्षीण होती जा रही है। हमारी आदतें केवल व्यवहार नहीं, बल्कि हमारे विचारों की पोषक होती हैं। लेकिन कड़वा सच यह है कि आज विकास की चकाचौंध में हम विनाश की जड़ों को सींच रहे हैं।

नशे की ‘नई पहचान’ बनती महिलाएं और युवाताजा आंकड़ों और सामाजिक सर्वेक्षणों की मानें तो देश में नशे का पैटर्न खतरनाक रूप से बदला है।

युवा शक्ति का क्षरण:रिपोर्टों के अनुसार, देश के लगभग 35% से 40% युवा किसी न किसी रूप में नशे (सिगरेट, शराब से लेकर सिंथेटिक ड्रग्स तक) के जाल में फंसे हैं। कॉलेज कैंपस से लेकर छोटे शहरों की गलियों तक ‘रेव पार्टी’ और ‘ड्रग कल्चर’ एक स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है।

महिलाओं में बढ़ता ग्राफ: सबसे चौंकाने वाली बात महिलाओं की नशे की ओर बढ़ती प्रवृत्ति है। पिछले पांच वर्षों में नशा करने वाली महिलाओं की संख्या में 15% से 18% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। आज शराब की दुकानों पर महिलाओं की कतारें और बीयर-बार में उनकी मौजूदगी को ‘आजादी’ का गलत पैमाना माना जा रहा है।

सरकार की आय बनाम समाज का स्वास्थ्य
एक तरफ सरकार ‘स्वस्थ समाज और सशक्त नारी’ का नारा बुलंद करती है, वहीं दूसरी ओर सरकार की आय का एक बड़ा हिस्सा शराब और नशीले पदार्थों के व्यापार से आता है।

आय का केंद्र: क्या समाज का स्तर इतना गिर गया है कि तंत्र चलाने के लिए हमें नशे के व्यापार पर निर्भर होना पड़ रहा है? गांजा, अफीम, प्रतिबंधित टैबलेट्स और सिंथेटिक ड्रग्स का बाजार पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे फल-फूल रहा है।

नशा मुक्ति केंद्र या सरकारी विफलता: जगह-जगह खुल रहे नशा मुक्ति केंद्र असल में सरकारों के लिए एक आईना हैं। इन केंद्रों की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि सरकारें नशे की आपूर्ति रोकने में विफल रही हैं और अब केवल उपचार का ढोंग कर अपना चेहरा छिपाने की कोशिश कर रही हैं।

जब ‘जननी’ ही नशे की गिरफ्त में हो…

समाज की केंद्र बिंदु महिला होती है, जो सृष्टि का आधार और संस्कारों की जननी है। आज जब महिला आरक्षण की पुरजोर वकालत हो रही है, तब यह सवाल पूछना लाजिमी है कि क्या नशे में लड़खड़ाती नारी शक्ति एक स्वस्थ भविष्य का निर्माण कर पाएगी? रेव पार्टियों का बढ़ता चलन और सार्वजनिक रूप से बढ़ता नशा इस बात का संकेत है कि समाज का ‘आधार’ ही अब डगमगा रहा है।

निष्कर्ष: आदतों पर अंकुश जरूरी

आदतें दो ही तरह की होती हैं—अच्छी या बुरी। अच्छी आदतें हमें उन्नति के मार्ग पर ले जाती हैं, जबकि बुरी आदतें (विशेषकर नशा) हमें अंधकार की ओर धकेलती हैं। यदि हमें एक स्वस्थ समाज बनाना है, तो केवल नारों से काम नहीं चलेगा। सरकारों को अपनी वित्तीय नीतियों और समाज को अपनी जीवनशैली (Lifestyle) पर पुनर्विचार करना होगा।

बड़ा सवाल: क्या हम वास्तव में विकास कर रहे हैं, या हम एक ऐसे समाज की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ नशा ही हमारी पहचान बन जाएगा? जब तक नशे की जड़ों पर प्रहार नहीं होगा, तब तक नशा मुक्ति केंद्रों में सरकारों को अपना डरावना चेहरा ही नजर आएगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट: दुनिया पर कर्ज का बोझ जीडीपी के 100 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली -17 अप्रैल, 2026

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा ‘फिस्कल मॉनिटर’ रिपोर्ट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया पर कर्ज का बोझ इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि साल 2029 तक यह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 100 प्रतिशत के स्तर को छू सकता है। यह एक ऐसी खतरनाक स्थिति है जो सामान्यतः युद्ध काल के बिना नहीं देखी जाती। आंकड़ों के लिहाज से कर्ज का यह स्तर आखिरी बार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दर्ज किया गया था।

वर्तमान में, साल 2025 तक वैश्विक ऋण जीडीपी के लगभग 94 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, और आने वाले वर्षों में इसमें लगातार बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। इसका सीधा अर्थ यह है कि दुनिया साल भर में जितना उत्पादन करेगी, उतना ही उस पर कर्ज का बकाया होगा।

इस संकट के पीछे प्रमुख कारण भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को माना जा रहा है। युद्ध की विभीषिका के कारण तेल और गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे दुनिया भर की सरकारों का वित्तीय गणित बिगड़ गया है। जनता को महंगाई की मार से बचाने के लिए सरकारों को अतिरिक्त सब्सिडी देनी पड़ रही है, जिसके लिए वे कर्ज लेने को मजबूर हैं।

इसके अलावा, महंगाई पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय बैंकों द्वारा बढ़ाई गई ब्याज दरों ने आग में घी डालने का काम किया है। ऊंची ब्याज दरों के कारण सरकारों के लिए पुराना कर्ज चुकाना और नया ऋण लेना, दोनों ही महंगा हो गया है। वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में ब्याज भुगतान का हिस्सा 2% से बढ़कर 3% हो गया है, जो विकास कार्यों के बजट में कटौती कर रहा है।

भारतीय परिप्रेक्ष्य में भी स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। केंद्रीय बजट 2026-27 के आंकड़ों के अनुसार, सरकार के कुल व्यय का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा केवल पुराने कर्ज के ब्याज भुगतान में खर्च हो रहा है। वहीं, घरेलू स्तर पर मध्यम वर्गीय परिवारों की बचत पिछले एक दशक के निचले स्तर पर पहुंच गई है। आय में स्थिरता और बढ़ती महंगाई के बीच अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड जैसे महंगे कर्ज के जाल में फंस रहे हैं।

पर्सनल लोन में 20.1 प्रतिशत की वृद्धि इस वित्तीय अस्थिरता का स्पष्ट संकेत है। यद्यपि 2025 के अंत में महंगाई दर में कुछ कमी देखी गई थी, लेकिन अप्रैल 2026 तक थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में उछाल और ऊर्जा आयात की बढ़ती लागत ने महंगाई के फिर से बेकाबू होने का डर पैदा कर दिया है। अर्थव्यवस्था के जानकारों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो दुनिया को एक बड़े वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है।(राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर आधारित)

रियल लाइफ का ‘रिकी बहल’ गिरफ्तार: दिल्ली पुलिस ने दबोचा महिलाओं को हनीट्रैप में फंसाने वाला शातिर ठग

बॉलीवुड में एक मशहूर फिल्म ‘लेडीज वर्सेज रिकी बहल’ तो आपको याद होगी, जिसमें नायक फर्जी पहचान बनाकर महिलाओं को प्यार के जाल में फंसाता और करोड़ों लूटकर चंपत हो जाता था। ठीक 15 साल बाद, दिल्ली में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसने रिकी बहल के फिल्मी किरदार को हकीकत में बदल दिया। दिल्ली पुलिस की साइबर विंग ने एक शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जो मेट्रोमोनियल साइट्स और डेटिंग ऐप्स के जरिए महिलाओं को अपनी ठगी का शिकार बनाता था।

पश्चिम बंगाल से चलता था ठगी का खेल
एएनआई (ANI) की रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान आनंद कुमार के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। आनंद लंबे समय से रोमांस स्कैम, हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग जैसी वारदातों को अंजाम दे रहा था। वह न केवल महिलाओं की भावनाओं से खेलता था, बल्कि उनके बैंक खातों पर भी हाथ साफ कर देता था। कई मामलों में तो पीड़ितों के परिवारों की जीवन भर की जमापूंजी इस ठग ने लूट ली।

ठगी का ‘मॉडस ऑपेरंडी’: प्यार से लेकर ब्लैकमेल तक
साइबर ठगों का यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता है:
प्लेटफॉर्म: फेसबुक, इंस्टाग्राम, डेटिंग ऐप्स और फेक मेट्रोमोनियल वेबसाइट्स।
भरोसा जीतना: शुरुआत में मीठी बातों से महिलाओं का विश्वास जीता जाता है।

गिफ्ट का लालच– कीमती गिफ्ट भेजने के बहाने पीड़ित का पता और निजी जानकारी हासिल करना।

ब्लैकमेलिंग: एक बार निजी जानकारी या फोटो हाथ लगने के बाद शुरू होता है वसूली और ब्लैकमेलिंग का खेल।

कैसे पहचानें ‘डिजिटल रिकी बहल’ को?
रोमांस स्कैमर्स की पहचान करना कठिन हो सकता है, लेकिन इन संकेतों से आप सावधान रह सकते हैं:
अति-सुंदर प्रोफाइल– प्रोफाइल फोटो अक्सर किसी मॉडल या एक्टर जैसी ‘परफेक्ट’ लगती है। |
NRI का चोला-ठग अक्सर खुद को विदेश में रहने वाला डॉक्टर, इंजीनियर या बिजनेसमैन बताते हैं। |
जल्दबाजी :बातचीत के 2-3 दिनों के भीतर ही ‘आई लव यू’ कहना और गहरा इमोशनल कनेक्शन दिखाना।
पैसे की मांग किसी इमरजेंसी या कस्टम क्लीयरेंस के नाम पर अचानक पैसों की मांग करना। |

बचाव के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों और पुलिस ने महिलाओं को सचेत रहने की सलाह दी है:
वीडियो कॉल:पैसे देने से पहले हमेशा वीडियो कॉल करें और सामने वाले की असलियत जांचें।
गोपनीयता:किसी भी अनजान व्यक्ति को अपनी बैंक डिटेल्स या संवेदनशील फोटो न भेजें।
तुरंत एक्शन:शक होने पर व्यक्ति को ब्लॉक करें।

रिपोर्ट करें:साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (संचार साथी) पर शिकायत दर्ज कराएं।

याद रखें: इंटरनेट पर हर चमकती चीज सोना नहीं होती। आपका एक छोटा सा लालच या भावुकता आपको उम्र भर की आर्थिक चपत लगा सकती है।


महिला आरक्षण लागू:_राजनीति की बिसात पर ‘आधी आबादी’ अधिकार या सिर्फ एक और दांव?

डिजिटल डेस्क/नई दिल्ली -17/04/2026

कल रात जब देश सो रहा था, तब 16 अप्रैल 2026 की उस तारीख ने एक नया इतिहास लिख दिया—या शायद एक नया विवाद। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम‘ अब कागजों से निकलकर हकीकत बनने की राह पर है। लेकिन एक आम नागरिक होने के नाते, जब मैं टीवी पर चलती उन तीखी बहसों और संसद में एक-दूसरे पर कसे जा रहे तंज को देखता हूँ, तो मन में गर्व से ज्यादा संशय पैदा होता है।

आधी रात का फैसला और ‘क्रोनोलॉजी’ का संशय
इस खबर पर जनता पूछ रही है कि जो बिल तीन साल से ठंडे बस्ते में था, जिसके तकनीकी पहलुओं और जनगणना-परिसीमन के पेच पर महीनों से चर्चा चल रही थी, उसे अचानक रात के सन्नाटे में अधिसूचित करने की जल्दी क्या थी? क्या यह वाकई महिलाओं को सशक्त बनाने की एक “सात्विक” इच्छा है, या फिर आने वाले चुनावों से पहले बिछाई गई कोई बड़ी बिसात? जब सदन में वोटिंग और संवाद की प्रक्रिया अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुई थी, तब इस तरह का कदम सरकार की ‘नियत’ पर विपक्ष को सवाल उठाने का खुला निमंत्रण देता है।

जाति, धर्म और आरक्षण की ‘सीलिंग’
संसद संवाद में जो कुछ हुआ, वह दुखद है। आरक्षण को एक ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। एक तरफ मांग है कि मुस्लिम और ओबीसी महिलाओं के बिना यह न्याय अधूरा है, तो दूसरी तरफ तर्क है कि संविधान धर्म आधारित आरक्षण की इजाजत नहीं देता।
नागरिक का सवाल: क्या हम कभी किसी कानून को सिर्फ “भारतीय” चश्मे से देख पाएंगे? क्या महिला की कोई जाति या धर्म उसकी पात्रता से बड़ा हो सकता है?

बहस करते सदन में जब अखिलेश यादव ‘सास-बहू’ वाले सीरियल का जिक्र कर तंज कसते हैं या प्रधानमंत्री ‘काले टीके’ की बात कर कटाक्ष करते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे देश की तकदीर नहीं, बल्कि किसी क्लब में महफिल जमी हो।

दक्षिण बनाम उत्तर: विकास की सजा या संतुलन?
अमित शाह जी ने आंकड़े देकर समझाने की कोशिश की कि दक्षिण भारत के राज्यों की शक्ति कम नहीं होगी। लेकिन स्टालिन का सड़क पर उतरकर बिल की कॉपियां जलाना यह बताता है कि विश्वास की खाई बहुत गहरी है। परिसीमन (Delimitation) एक ऐसी तलवार है जो अगर सही से न चली, तो देश के संघीय ढांचे को घायल कर सकती है। यदि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को उनकी कम आबादी के कारण संसद में कम सीटें मिलती हैं, तो क्या यह उनके ‘अच्छे काम की सजा’ नहीं होगी?

चाणक्य की ‘कुटिलता’ और लोकतंत्र की हंसी
प्रियंका गांधी का अमित शाह को ‘आज के चाणक्य’ से जोड़ना और उस पर सदन का ठहाके लगाना, भारतीय राजनीति के उस दौर को दिखाता है जहाँ गंभीर से गंभीर कानून भी मनोरंजन का हिस्सा बन जाते हैं। हंसी-मजाक बुरा नहीं है, लेकिन जब दांव पर करोड़ों महिलाओं का भविष्य हो, तो यह ‘कुटिलता’ शब्द डराता है।

खबर सार
एक आम नागरिक के तौर पर हमें इस बात की खुशी है कि महिलाओं को उनका हक मिल रहा है। लेकिन हम यह भी देख रहे हैं कि इस ‘हक’ की आड़ में क्षेत्रीय अस्मिता, जातीय जनगणना और वोट बैंक की जो खिचड़ी पक रही है, उसकी महक बहुत सुखद नहीं है।

महिला आरक्षण कोई ‘उपकार’ नहीं है, यह सुधार है। और सुधार तब सबसे अच्छा होता है जब वह पारदर्शी हो, न कि रात के अंधेरे में अधिसूचित किया गया कोई रहस्यमयी मास्टरस्ट्रोक। हमें विज्ञापन वाली ‘नारी शक्ति’ नहीं, बल्कि संसद में बैठी वह निर्भीक आवाज चाहिए जो बिना किसी ‘कोटे’ के डर के देश का नेतृत्व कर सके।

चुप्पी तोड़ना जरूरी: दुनिया भर में हर 6 में से 1 लड़का यौन शोषण का शिकार, भारत में भी स्थिति चिंताजनक

ब्लू अम्ब्रेला डे’ के अवसर पर संस्था ‘बटरफ्लाइज’ ने लड़कों के साथ होने वाली यौन हिंसा के खिलाफ छेड़ी मुहिम; ‘मर्दानगी’ की गलत धारणाओं को बताया बड़ी बाधा।

नई दिल्ली | 16 अप्रैल, 2026

दुनिया भर में बाल यौन शोषण को लेकर अक्सर लड़कियों की सुरक्षा पर चर्चा होती है, लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि हर 6 में से 1 लड़का यौन शोषण का शिकार होता है। भारत में भी आंकड़े इसी भयावहता की ओर इशारा करते हैं। इस गंभीर लेकिन छिपे हुए मुद्दे को समाज के सामने लाने के लिए 16 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘ब्लू अम्ब्रेला डे’ (BUD) मनाया जा रहा है।

भारत में इस अभियान का नेतृत्व संस्था ‘बटरफ्लाइज” कर रही है, जो ‘फैमिली फॉर एवरी चाइल्ड’ (FFEC) नामक वैश्विक गठबंधन का हिस्सा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लड़कों के यौन शोषण से जुड़ी चुप्पी को तोड़ना और समाज को यह अहसास दिलाना है कि लड़कों को भी उतनी ही सुरक्षा और देखभाल की जरूरत है जितनी लड़कियों को।

अध्ययन के चौंकाने वाले खुलासे: ‘ब्रेकिंग द साइलेंस’
हाल ही में भारत, फिलीपींस, कंबोडिया और नेपाल में किए गए एक अनुभवजन्य अध्ययन (Empirical Study) में सामने आया है कि समाज में यह गलत धारणा व्याप्त है कि यौन हिंसा सिर्फ लड़कियों के साथ होती है। लड़कों के मामले में इसे अक्सर ‘विचलन’ मानकर अनदेखा कर दिया जाता है।
मर्दानगी का बोझ: समाज लड़कों को ‘मजबूत, बहादुर और अपनी रक्षा खुद करने वाला’ मानता है। इस कारण, जब किसी लड़के का शोषण होता है, तो उसे ‘कमजोर’ मानकर शर्मिंदा किया जाता है, जिससे वह चुप रहने पर मजबूर हो जाता है।
पहचान वाले ही अपराधी: बटरफ्लाइज के ‘ब्रेकिंग द साइलेंस’ अध्ययन के अनुसार, अधिकांश मामलों में अपराधी कोई अजनबी नहीं, बल्कि पीड़ित के करीबी रिश्तेदार, पड़ोसी या परिचित ही होते हैं।
मिथक बनाम हकीकत: यह धारणा भी गलत साबित हुई कि केवल पुरुष ही शोषण करते हैं; अध्ययन में पाया गया कि महिलाएं और बड़े लड़के भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

कानूनी स्थिति और चुनौती
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के 2007 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 53.22% बच्चों ने यौन शोषण का सामना किया, जिनमें लड़कों का प्रतिशत 52.94% था। इसी रिपोर्ट के आधार पर 2012 में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम लाया गया, जो लिंग-तटस्थ (Gender Neutral) है और लड़कों-लड़कियों दोनों को समान सुरक्षा देता है। हालांकि, सामाजिक शर्म और अविश्वास के कारण लड़कों के मामलों की रिपोर्टिंग अभी भी बहुत कम है।

विशेषज्ञ की राय
बटरफ्लाइज की निदेशक रीता पनिकर ने कहा:
“हमें बच्चों के यौन शोषण से संबंधित अपनी सोच बदलने की जरूरत है। यौन हिंसा का शिकार लड़के और लड़कियां दोनों होते हैं। ‘ब्लू अम्ब्रेला डे’ के माध्यम से हम इस चुप्पी को तोड़ना चाहते हैं ताकि लड़कों को भी वह सुरक्षा और मार्गदर्शन मिल सके जिसके वे हकदार हैं।”

अभियान की गतिविधियाँ
इस वर्ष बटरफ्लाइज ने जन-जागरूकता फैलाने के लिए एक विशेष गीत तैयार किया है और सोशल मीडिया पर व्यापक अभियान शुरू किया है। संस्था का लक्ष्य एक ऐसी सार्वजनिक चर्चा शुरू करना है जो ‘मर्दानगी’ के पुराने मानदंडों को चुनौती दे सके और बच्चों के लिए एक सुरक्षित वातावरण बना सके।

430 प्रयोगशाला परिचारकों को नियुक्ति पत्र : युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध : सीएम साय

रायपुर, 16 अप्रैल 2026 —

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में उच्च शिक्षा विभाग के 430 चयनित प्रयोगशाला परिचारकों को नियुक्ति पत्र सौंपे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी नवनियुक्त अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए हैं। पूर्व के पीएससी घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। ‘सुशासन एवं अभिसरण विभाग’ का गठन और मंत्रालय कार्यों को ई-प्रणाली से जोड़ा गया है। ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल’ और ‘परीक्षा कैलेंडर’ लागू करने की दिशा में काम जारी है।

उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि पदस्थापना में पारदर्शिता के लिए काउंसलिंग प्रणाली अपनाई गई और यह नई पीढ़ी विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान देगी।मंत्री श्री वर्मा ने बताया कि पदस्थापना प्रक्रिया में भी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए काउंसलिंग प्रणाली अपनाई गई। यह व्यवस्था सुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह नई पीढ़ी छत्तीसगढ़ को प्रगति और समृद्धि के नए आयामों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हाल ही में लैब टेक्नीशियन और अब प्रयोगशाला परिचारकों की नियुक्तियाँ इस दिशा में सरकार की सक्रियता का स्पष्ट प्रमाण हैं।

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा सचिव  डॉ. एस. भारतीदासन ने चयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त डॉ. संतोष देवांगन सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

अक्षरों की अमानत — बेमेतरा में पाण्डुलिपि संरक्षण अभियान की हुई समीक्षा बैठक

बेमेतरा, 16 अप्रैल 2026:-
जिला कार्यालय बेमेतरा के एनआईसी कक्ष में आज ज्ञानभारतम् पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक जिला नोडल अधिकारी की उपस्थिति में संपन्न हुई, जिसमें विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

बैठक में मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद बेमेतरा, प्राचार्य शासकीय पंडित जवाहर लाल नेहरू कला एवं विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय बेमेतरा सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित रहे। इस अवसर पर संचालनालय पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय रायपुर के पुरातत्ववेत्ता प्रभात सिंह द्वारा पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से अभियान के उद्देश्य, कार्यप्रणाली एवं क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी गई।

उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत जिले की ग्राम पंचायतों में प्राचीन एवं महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियों की पहचान, संकलन एवं दस्तावेजीकरण का कार्य किया जाएगा। इसके लिए ग्राम पंचायत सचिवों को “GYAN BHARTAM MOBILE APP” के माध्यम से पंजीयन कर सर्वेक्षण कार्य करने हेतु निर्देशित किया गया है। यह मोबाइल एप गूगल प्ले स्टोर पर निःशुल्क उपलब्ध है, जिसके माध्यम से पाण्डुलिपियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में भी सर्वेक्षण कार्य संबंधित निकाय प्रमुखों के माध्यम से संचालित किया जाएगा। जिले के समस्त महाविद्यालयों में इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक एवं सहायक प्राध्यापकों के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं द्वारा सर्वेक्षण एवं मोबाइल एप पंजीयन की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी।

इसी प्रकार जिले के हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में कार्यरत इतिहास व्याख्याताओं को भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने हेतु निर्देशित किया गया है, ताकि निर्धारित समय-सीमा में सर्वेक्षण कार्य पूर्ण किया जा सके। बैठक के अंत में उपस्थित सभी सदस्यों को अभियान में सक्रिय सहयोग एवं सहभागिता के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा अभियान को सफल बनाने हेतु समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया गया।