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Saturday, October 31, 2026
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छत्तीसगढ़ योग दिवस : स्वस्थ आयु के लिए योग” थीम के साथ 21 जून को राज्य भर में विशेष कार्यक्रम

रायपुर 17 जून 2026

छत्तीसगढ़ में इस बार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 का आयोजन “स्वस्थ आयु के लिए योग” थीम पर किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ शासन ने जिला मुख्यालयों से लेकर ग्राम‑पंचायत स्तर तक सामूहिक योगाभ्यास की पूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रत्येक जिले में आयोजित मुख्य कार्यक्रमों में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

राजधानी और मुख्य आयोजन

राजधानी रायपुर में राज्यपाल श्री रमेन डेका की मुख्य अतिथि उपस्थिति में सुबह सामूहिक योगाभ्यास आयोजित होगा। सरगुजा जिले में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे और सुबह 7 बजे वहां योगाभ्यास होगा; इसकी अध्यक्षता मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल करेंगे।

अन्य जिलों में प्रमुख अतिथि‑बैनर

सरकार के आदेशानुसार कई जिलों में केन्द्र एवं राज्य स्तर के नेताओं को मुख्य अतिथि नामित किया गया है। कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
– केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू — बिलासपुर।
– उपमुख्यमंत्री अरुण साव — दुर्ग।
– उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा — कबीरधाम।
– विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह — राजनांदगांव।
– कई जिलों में संबंधित मंत्री एवं सांसद तथा स्थानीय विधायक मुख्य कार्यक्रमों की अध्यक्षता/मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

जिलेवार आयोजकों की सूची और जिम्मेदारियाँ

कई केंद्रीय और राज्य नेता‑सांसदों को उनके निर्वाचन क्षेत्रों के जिला मुख्यालयों में आयोजित समारोहों के लिए मुख्य अतिथि बनाया गया है। उदाहरण के तौर पर, बेमेतरा सांसद विजय बघेल बलौदाबाजार‑भाटापारा, जशपुर, कोरबा, नारायणपुर आदि जिलों में सांसद और स्थानीय विधायक कार्यक्रमों की गरिमा बनाए रखने के लिए आमंत्रित हैं। सभी जिलों में जिला प्रशासन आयोजन, स्थान का प्रबंध और सामूहिक योगाभ्यास की व्यवस्था अंतिम चरण में देख रहा है।

लक्ष्य और संदेश

सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक नागरिकों को योग से जोड़कर स्वस्थ आयु और जीवन‑गुणवत्ता में सुधार लाना है। कार्यक्रम का फोकस सार्वभौमिक भागीदारी, योग के साधारण अभ्यास और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने पर है। अधिकारियों ने कहा है कि स्थानीय स्तर पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ — मंच, ध्वनि, सुरक्षा और कोविड/स्वास्थ्य‑सुरक्षा नियम (यदि लागू हों) — सुनिश्चित कर ली गई हैं।

नागरिकों के लिए सूचना

जिलेवार आयोजनों के समय और स्थान की सूचनाएँ जिला प्रशासन और स्थानीय मीडिया के माध्यम से साझा की जाएंगी। भाग लेने वाले नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे समय पर पहुंचें और आयोजन के निर्देशों का पालन करें।


राम मंदिर चढ़ावे मामले में SIT की जांच तेज, चंपत राय से हुई लंबी पूछताछ

अयोध्या – 17 जून 2026

अयोध्या में राम मंदिर बने ज्यादा दिन हुआ नहीं है और बड़ा विवाद सामने आ गया है। राम मंदिर के चढ़ावे और दान के प्रबंधन को लेकर चल रही जांच तेज हो गई है।
लगता है अभी देश में धर्म के नाम पर राजनीति और धर्म के नाम पर ही लूट मची रहेगी।

मामला ऐसा हो गया है कि उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई।गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने सोमवार को सबसे पहले मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से लंबी बंद कमरे की बातचीत की और उनसे पूरे मामले की जानकारी ली।

घंटों चली पूछताछ के बाद आज से मंदिर के कर्मचारियों और अन्य जुड़े लोगों से पूछताछ का क्रम शुरू कर दिया गया है।

कर्मचारियों और गिनती की प्रक्रिया पर निगाह

सूत्रों के अनुसार SIT खासकर दानपेटियों से निकाले जाने वाले नोटों की गिनती और उन्हें गड्डियों में रखने की प्रक्रिया पर ध्यान दे रही है। जांच में अब तक लगभग 43 लोगों से जुड़ी बारीकियों की पड़ताल की जा रही है। टीम यह पता लगा रही है कि चढ़ावे की गिनती, रिकॉर्ड और भंडारण के दौरान कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई।

शिकायत और पॉलिग्राफ की मांग

अयोध्या निवासी संतोष दुबे ने राम जन्मभूमि थाना में तहरीर देकर मामले की एफआईआर दर्ज करने और पॉलिग्राफ (ल lie‑डिटेक्टर) टेस्ट कराने की मांग की है। उनकी तहरीर में चंपत राय समेत चार लोगों के नाम बताए गए हैं। पुलिस और SIT इस तहरीर पर भी कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर रहे हैं।

आरोप खारिज कर रहे सहयोगी

इसी बीच चंपत राय के सहकर्मी माने जाने वाले राम शंकर यादव उर्फ टीनू यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। एक टीवी चैनल से बात में उन्होंने कहा कि वे 1983 से संस्था से जुड़े हैं और उनकी सारी संपत्ति मंदिर निर्माण से पहले की है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ जो बातें कही जा रही हैं, वे मनगढ़ंत हैं और जलने‑जलाने वाले लोग अफवाह फैला रहे हैं। टीनू ने बताया कि उनकी जिम्मेदारी साफ‑सफाई और सामान्य व्यवस्थाओं तक सीमित रही है और अगर SIT बुलाएगी तो वे पूरा सहयोग करेंगे।

पूर्व घटनाओं का संदर्भ

मामले के सन्दर्भ में यह भी कहा जा रहा है कि देश के अन्य धार्मिक स्थलों पर भी चढ़ावे और दान राशि के दुरुपयोग को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। उदाहरण के तौर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भी पहले इसी तरह के आरोप लगे थे, जहाँ CCTV फुटेज और शिकायतों के आधार पर जांच हुई थी।

जांच जारी, रिपोर्ट की प्रतीक्षा

अभी SIT की जांच जारी है और एजेंसी पूरी प्रक्रिया की पड़ताल कर रही है। जांच के निष्कर्ष और रिपोर्ट आने पर यह स्पष्ट होगा कि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। स्थानीय प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट दोनों ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच में सहयोग का आश्वासन दिया है।




रेलवे सेवा की नीट परीक्षा पर कदम — 21 जून को कोई मेगा ब्लॉक नहीं रहेगा

मुंबई/नई दिल्ली, 21 जून 2026 —

।NEET UG -राष्ट्रीय पात्रता‑सह‑प्रवेश परीक्षा के मद्देनज़र वेस्टर्न रेलवे ने घोषणा की है कि 21 जून, रविवार को रेलवे नेटवर्क पर कोई ‘मेगा’ या ‘जंबो ब्लॉक’ नहीं होगा। रेलवे ने कहा है कि उपनगरीय सेवाएँ कार्य दिवस के अनुसार चलेंगी, जबकि एसी उपनगरीय ट्रेनें रविवार के समय सारिणी के अनुसार रहेगी, ताकि परीक्षा देने जाने वाले छात्र‑अभ्यर्थियों को यात्रा में असुविधा न हो।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रदेश में 21 जून को 59 जिलों में आयोजित होने वाली नीट परीक्षा में लगभग 3.5 लाख अभ्यर्थी शामिल होंगे। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि परीक्षा पहुंचे अभ्यर्थियों को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में प्रवेश पत्र दिखाने पर 50% छूट दी जाए। साथ ही जिन अभ्यर्थियों के पास ठहरने की व्यवस्था नहीं है, उनके लिए आवश्यक अस्थायी आवासीय सुविधाएँ उपलब्ध करायी जाएँगी।

मुख्यमंत्री ने एनटीए के निर्देशों के अनुरूप परीक्षा की शुचिता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता बनाए रखने के सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के आदेश दिए। उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैलने वाली अफवाहों या भ्रामक सूचनाओं पर कड़ी निगरानी रखने और त्वरित कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है।

मध्य प्रदेश की तैयारियाँ और समीक्षा

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी 21 जून को होने वाली नीट परीक्षा के मद्देनज़र तैयारियों की समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा पारदर्शी, सुरक्षित और त्रुटि‑रहित रूप से आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा की विश्वसनीयता सटीक योजना और त्रुटिहीन क्रियान्वयन पर निर्भर करती है और किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

परीक्षा दिवस पर प्राथमिक संदेश

रेलवे और राज्य प्रशासन की इस समन्वित तैयारी का मकसद अभ्यर्थियों को बिना बाधा के परीक्षा केंद्र तक पहुंचाना और परीक्षा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करना है। अभ्यर्थियों से भी अनुरोध किया गया है कि वे आधिकारिक सूचना‑स्रोतों पर ही भरोसा करें और यात्रा/प्रवेश सम्बन्धी जरूरी दस्तावेज साथ रखें।


चाटुकार पत्रकारिता को चुनौती : श्रमजीवी पत्रकार संघ ने दी कड़ी चेतावनी

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बेमेतरा 16 जून 2026- दीपक पाण्डेय

छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ जिला बेमेतरा की एक महत्वपूर्ण बैठक जिलाध्यक्ष जितेंद्र शुक्ला की अध्यक्षता में स्थानीय विश्राम गृह में सोमवार दोपहर 3 बजे आयोजित की गई। बैठक में बेमेतरा जिले में पत्रकारिता की बिगड़ती दशा और राजनीतिक दलों द्वारा प्रेस वार्ताओं में बरती जा रही मनमानी पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में सदस्यों ने खुलकर कहा कि राजनीतिक दल पत्रकारिता को बेहद हल्केपन में ले रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण सामने भी आया — भाजपा द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में श्रमजीवी पत्रकार संघ के सदस्यों को आमंत्रित तक नहीं किया गया।

संघ ने इसे पत्रकारिता और पत्रकारों के प्रति घोर अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई।

सदस्यों ने कहा कि बेमेतरा जिले में चाटुकार पत्रकारिता की बुनियाद रखी जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए अत्यंत खतरनाक संकेत है। वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा —

“समाचार समाज, देश और राजनीति का आईना होता है। जब यह आईना धुंधला होता है, तब लोकतंत्र का वास्तविक चेहरा कभी उजागर नहीं हो पाता।”

खबरों को अपने पक्ष में परोसकर जनता को भ्रमित करने की प्रवृत्ति को सदस्यों ने पीत पत्रकारिता की संज्ञा दी और कहा कि श्रमजीवी पत्रकार संघ इस चुनौती का डटकर सामना करेगा।

बैठक में संगठन को और अधिक मजबूत करने, नए सदस्यों को जोड़ने तथा आगामी भोरमदेव भ्रमण कार्यक्रम की रूपरेखा और समय निर्धारण पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सभी उपस्थित पत्रकारों ने पत्रकार हितों की रक्षा और आपसी एकता के लिए संकल्प लिया।

बैठक के बाद मनाया जन्मदिन का उत्सव

बैठक के उपरांत संघ से जुड़े पत्रकार मनोज मिश्रा और सूरज सिन्हा का जन्मदिवस केक काटकर हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सभी सदस्यों ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की शुभकामनाएं दीं। वक्ताओं ने कहा कि यह संघ बेमेतरा जिले का सबसे पुराना पत्रकार संगठन है और इसकी एकता, सक्रियता तथा आपसी भाईचारा ही इसकी सबसे बड़ी पहचान और ताकत है।

बैठक में जिलाध्यक्ष जितेंद्र शुक्ला के साथ शरद बाजपेई, संजय दुबे, योगेश सिंह राजपूत, सुजीत शर्मा, कोमल सिंह राजपूत, मनोज मिश्रा, राहुल साहू, सूरज सिन्हा, सुफल दास मानिकपुरी, दीपक पांडे, अरुण पुरैना, भूपेंद्र साहू, ईश्वर सिंह राजपूत, योगिता साहू, युवराज मिश्रा एवं लोकेश साहू सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे। बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।

जमीनी कार्यकताओं की उपेक्षा : दंतेवाड़ा बीजेपी में कार्यकर्ताओं का फूटा आक्रोश

दंतेवाड़ा 16 जून 2026(रिपोर्ट : रवि सरकार)

भारतीय जनता पार्टी के दंतेवाड़ा जिले में इन दिनों भीतरी असंतोष की आग सुलग रही है। वर्षों तक पार्टी की नींव रखने वाले जमीनी कार्यकर्ता आज खुद को उपेक्षित और अपमानित महसूस कर रहे हैं। जिन्होंने 28-28 साल तक बिना किसी स्वार्थ के गांव-गांव संगठन खड़ा किया, बूथ स्तर तक काम किया और सत्ता से दूर रहने के कठिन दौर में भी पार्टी का हाथ थामे रखा — आज वही कार्यकर्ता संगठन में खुद को अकेला पाने लगे हैं।

कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संगठन में अनुभव और समर्पण की जगह अब गुटबाजी और व्यक्तिगत पसंद-नापसंद ने ले ली है। संघर्ष करने वाले पीछे धकेले जा रहे हैं, जबकि चहेते चेहरों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सामूहिक नेतृत्व की भावना कमजोर पड़ रही है और जो कार्यकर्ता अपनी बात रखना चाहते हैं, उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।

आने वाले एल्डरमेन चयन को लेकर भी पार्टी के भीतर नाराजगी चरम पर है। पुराने कार्यकर्ताओं को आशंका है कि इस प्रक्रिया में भी पारदर्शिता नहीं रहेगी और फिर से कुछ खास चेहरों को ही अवसर मिलेगा।

नाराज कार्यकर्ताओं का एक ही कहना है — “आत्मसम्मान एक कार्यकर्ता का सबसे बड़ा धन होता है।” यदि बार-बार उसी सम्मान को ठेस पहुंचाई गई, तो इसका असर पूरे संगठन पर पड़ना तय है। राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि जमीनी कार्यकर्ताओं की इस सुलगती नाराजगी को यदि समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले चुनावों में यही चुप्पी संगठन के लिए बड़ी टूट का कारण बन सकती है।

जब चारा ही दुश्मन बन जाए — महादेव की 70 भेड़ें, एक रात में सब खत्म

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महाराष्ट्र/अकोला -16 जून 2026

महाराष्ट्र के अकोला जिले के तांदली शिवार में चरवाहे महादेव शिंगाडे अपनी 150 भेड़ों को लेकर निकले थे — रोज की तरह, उसी जमीन पर, उसी उम्मीद के साथ।

लेकिन उस दिन खेत में उगे नए अंकुरों ने धोखा दे दिया। भेड़ों ने जो चारा खाया वो चारा नहीं, जहर था। देखते ही देखते एक-एक कर 70 भेड़ें तड़पकर मर गईं। बची हुई भेड़ों की हालत भी गंभीर है।

महादेव के हाथ में अब सिर्फ सरकार से मदद की गुहार बची है। 70 भेड़ें यानी 10 से 12 लाख रुपये — एक चरवाहे की पूरी जिंदगी की कमाई, एक दोपहर में राख।

एक खबर, एक सवाल

यह सिर्फ महादेव की त्रासदी नहीं है।

यह उस धरती की कहानी है जो बदल रही है — चुपचाप, अंदर से।

सदियों से चरवाहा उसी जमीन पर चला। उसी मिट्टी को पहचाना। उसी हरियाली को जाना। लेकिन आज वही धरती पहचान में नहीं आ रही।

क्योंकि हमने उसे बदल दिया।

रसायन उसकी मिट्टी में उतर गए। कीटनाशक उसकी जड़ों में घुल गए। जो अंकुर कभी जीवन का प्रतीक था — वही आज मौत का द्वार बन गया।

आदमी ने धरती की नैसर्गिकता छीन ली और उस पर प्लास्टिक का आवरण चढ़ा दिया। अब धरती माँ नहीं रही — एक अजनबी हो गई है।

और उस अजनबीपन की सबसे बड़ी कीमत चुका रहा है — वो इंसान जो आज भी उस पर भरोसा करके जीता है।

भेड़ें मरीं जहर से — लेकिन जहर किसने बोया? यह सवाल महादेव से नहीं, हम सबसे पूछा जाना चाहिए।

यह खबर नहीं, एक चेतावनी है।
वही धरती जो सदियों से पालती आई, आज वही जान ले रही है। चरवाहा पीढ़ियों से उसी जमीन पर चलता रहा — लेकिन आज उसी जमीन का चारा जहर बन गया।

क्यों?
क्योंकि धरती बदल रही है। रसायन उसकी मिट्टी में उतर गए। कीटनाशक उसकी वनस्पति में घुल गए। जो अंकुर कभी जीवन देता था, आज वही मौत का कारण बन रहा है।


कॉकरोच प्रदर्शन के दौरान CJP चीफ अभिजीत दिपके को युवक ने मारा थप्पड़, दो हिरासत में

जयपुर -16 जून 2026

राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार को उस समय तनाव का माहौल बन गया जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को एक युवक ने सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान थप्पड़ मार दिया। यह घटना शहीद स्मारक पर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई।

दरअसल उस दिन जयपुर के शहीद स्मारक पर बड़ी संख्या में युवा NEET पेपर लीक, परीक्षाओं में गड़बड़ी और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए जुटे थे। युवाओं के हाथों में नारे लिखे प्लेकार्ड थे और वे सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जैसे ही अभिजीत दिपके प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे, उनके समर्थकों ने उत्साह में उन्हें कंधों पर उठा लिया। इसी भीड़भाड़ के बीच कुछ युवकों ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। अचानक हुई इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

घटना के बाद दिपके के समर्थकों ने आरोपी युवक को पकड़ लिया और पुलिस के पहुंचने से पहले उसके साथ मारपीट भी हुई। पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप किया, दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। इस मामले में पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि यह घटना अचानक आवेश में हुई या इसके पीछे कोई पूर्व योजना थी। मामले के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच जारी है।
गौरतलब है कि CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी ने हाल ही में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाखों की सदस्यता जुटाई है।

लेकिन इस घटना ने यह भी दिखाया कि जहां युवाओं का एक वर्ग उनका समर्थन करता है, वहीं दूसरा वर्ग उनसे सहमत नहीं है। पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों पर युवाओं का आक्रोश किस दिशा में जाएगा, यह आने वाले समय में साफ होगा।

धर्म अध्यात्म में पुरुषोत्तम मास 2026: जानिए क्यों इस अद्भुत महीने को कहते हैं “भगवान का अपना मास”

धर्म-आध्यात्म डेस्क – 16/06/2026

हिंदू धर्म अनुसार तिथि काल गणना बहुत सटीक है जिसे वर्तमान Ai युग में भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।हिंदू पंचांग में एक ऐसा दुर्लभ मास आता है जो न सूर्य का है, न चंद्रमा का — यह सीधे भगवान विष्णु को समर्पित है। इसे पुरुषोत्तम मास कहते हैं।

क्या होता है पुरुषोत्तम मास?
हिंदू पंचांग सौर और चंद्र गणना पर आधारित है। इन दोनों के बीच हर कुछ वर्षों में एक अतिरिक्त मास जुड़ जाता है, जिसे सामान्य भाषा में मलमास भी कहते हैं। पुराणों के अनुसार जब यह “अतिरिक्त महीना” भगवान विष्णु की शरण में गया और उन्होंने इसे अपना नाम दिया — तब से यह पुरुषोत्तम मास कहलाया।

माता पार्वती और भगवान शिव की कथा

शास्त्रों में वर्णित एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने स्वयं पुरुषोत्तम मास का व्रत किया। व्रत की समाप्ति पर उन्होंने भगवान शिव से पूछा कि इस व्रत का सम्पूर्ण फल पाने के लिए कौन-सा दान सर्वश्रेष्ठ है?

भगवान शिव ने गहन चिंतन के बाद उत्तर दिया —

“हे पार्वती! इस मास में ‘सम्पुट दान’ का विशेष महत्व है। काँसे के सम्पुट में 30 मालपुए रखकर, विधिपूर्वक पूजन कर, किसी योग्य ब्राह्मण को अर्पित करो। सामर्थ्य हो तो ऐसे 30 सम्पुटों का दान और भी उत्तम है।”

माता पार्वती ने श्रद्धापूर्वक यही किया और व्रत को पूर्ण किया। यह कथा इस बात का प्रमाण है कि स्वयं देवाधिदेव महादेव भी इस मास की महत्ता स्वीकार करते हैं।

नारद मुनि की जिज्ञासा और भगवान नारायण का उत्तर

जब देवर्षि नारद ने भगवान नारायण से इस मास के रहस्य के बारे में जानना चाहा, तो भगवान ने स्पष्ट कहा कि पुरुषोत्तम मास में किया गया हर पुण्य कार्य कई गुना फलदायी होता है। केवल इस मास की कथा का श्रवण मात्र ही मनुष्य के पापों का नाश करने में सक्षम है।

इस मास में क्या करें?

शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए —

-सत्य बोलें — वाणी की शुद्धता इस मास में सबसे बड़ा धर्म है
– दान करें — अन्न, वस्त्र और धन का दान विशेष फलदायी है
-भगवान श्रीकृष्ण का भजन करें — श्यामवर्ण, पीताम्बरधारी, मुरलीधर का स्मरण कष्टों को दूर करता है
-ब्राह्मणों का सत्कार करें — विद्वानों का आदर इस मास में पुण्य का मार्ग है
– धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें — माहात्म्य का श्रवण, पठन और लेखन तीनों फलदायक हैं

आध्यात्मिक संदेश
पुरुषोत्तम मास केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का एक दुर्लभ अवसर है। जीवन की भागदौड़ में जो समय हम भगवान को नहीं दे पाते, यह मास उसी कमी को पूरा करने का संयोग लेकर आता है।

शास्त्र कहते हैं — “जो इस भारतभूमि में जन्म लेकर भी इस पवित्र मास का लाभ नहीं उठाता, वह जीवनभर अभाव और दुःख के चक्र में भटकता रहता है।”

यह मास कल्पवृक्ष के समान है — जो भी श्रद्धा से इसकी शरण लेता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और वह अंततः गोलोक धाम को प्राप्त होता है।

असर बेअसर: मानसून की खबर –शुरूआती बारिश गायब!क्या आने वाले महीनों में होगा जल संकट?

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मौसम डेस्क – 16 जून 2026

मानसून इतना डरा क्यों रहा है और इतना कमजोर क्यों दिख रहा है इसे मौसम विभाग के अनुसार और मानसून का असर खबर पर देखें।जून का महीना आधा बीत चुका है, लेकिन इस बार मानसून का मिजाज कुछ अजीब है। जो बादल जून की शुरुआत में उम्मीद जगाकर आए थे, वे अचानक गायब हो गए। खेत सूखे पड़े हैं, किसान आसमान की तरफ ताक रहे हैं और मौसम वैज्ञानिक उन हवाओं का पीछा कर रहे हैं जो मानसून को “ब्रेक” लगा रही हैं।

आंकड़े जो डराते हैं

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 4 जून से 15 जून के बीच पूरे देश में केवल 19.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्यतः 53.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी।

यानी देश इस समय 64% के भारी बारिश घाटे का सामना कर रहा है।

IMD के रेनफॉल मैप में मध्य, दक्षिणी और पूर्वी भारत के विशाल हिस्से पीले और लाल रंगों में रंगे हैं — जो सूखे जैसे गंभीर हालात की चेतावनी देते हैं।

अंतरिक्ष से भी दिखा खतरा

15 जून को भारत के INSAT-3DS सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों ने स्थिति की गंभीरता को और उजागर कर दिया। आमतौर पर इस मौसम में भारत का नक्शा बादलों की घनी सफेद चादर से ढका रहता है, लेकिन इस बार प्रायद्वीपीय और मध्य भारत बिल्कुल साफ और सूखा नजर आ रहा है। बादलों का वह पारंपरिक रूप इस बार कहीं दिखाई नहीं दे रहा।

आखिर मानसून हांफ क्यों रहा है?

सबसे बड़ा सवाल यही है — जब मानसून ने कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में सही समय पर दस्तक दी थी, तो अचानक यह कमजोर कैसे पड़ गया?

जवाब समुद्र में नहीं, आसमान में छुपा है।

हवाओं की आपसी जंग

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार ऊपरी वायुमंडल में दो हवाओं के बीच टकराव मानसून की रफ्तार को रोक रहा है —

ईस्टरली जेट स्ट्रीम(पूर्वी हवाएं) — यही मानसून का असली इंजन है। यह हवा भारत के ऊपर हवा को ऊपर खींचती है, जिससे घने बादल बनते हैं और देशभर में बारिश होती है।

वेस्टरली जेट स्ट्रीम (पश्चिमी हवाएं) — इस बार यह अपनी सामान्य जगह से बहुत अधिक दक्षिण की ओर खिसक आई है और ईस्टरली जेट के रास्ते में रुकावट बन गई है।

नतीजा यह है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में नमी से भरे बादल मौजूद हैं, लेकिन वे भारत की मुख्य भूमि पर बरस नहीं पा रहे।

क्या आगे होगा जल संकट?

यदि जुलाई में भी यही स्थिति रही, तो चिंताएं कई मोर्चों पर गहरा सकती हैं —

खरीफ फसलों की बुआई — धान, मक्का, सोयाबीन जैसी फसलों की बुआई का सही समय निकलता जा रहा है
जलाशयों का स्तर — देश के प्रमुख बांध और जलाशय अभी से कम भराव पर हैं
पीने के पानी का संकट — शहरों और गांवों में गर्मियों से पहले से चल रही पानी की किल्लत और बढ़ सकती है
बिजली उत्पादन— जलविद्युत परियोजनाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है

राहत की उम्मीद कब?

मौसम विभाग के अनुसार यह स्थिति स्थायी नहीं है। जैसे ही ऊपरी वायुमंडल में हवाओं का यह असंतुलन ठीक होगा, मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है। लेकिन जून में हुई देरी की भरपाई अगले महीनों में कितनी हो पाएगी — यह सबसे बड़ा सवाल है।

मौसम पर नजर रखें: IMD अगले 48-72 घंटों में मानसून की स्थिति को लेकर नया अपडेट जारी कर सकता है। किसान भाई अभी बुआई के निर्णय में जल्दबाजी न करें।

बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान को मिली सफलता

रायपुर-15 जून 2026

बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान को सुकमा जिले में प्रशासन की सक्रिय पहल से दो बड़ी सफलताएं मिली हैं, जहाँ महिला एवं बाल विकास विभाग और यूनिसेफ द्वारा चलाया जा रहा यह राज्यव्यापी जन-जागरूकता कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन ने कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन में दो नाबालिग बालिकाओं का बाल विवाह रुकवाकर उनके सुरक्षित और बेहतर भfuture की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

पहला मामला धुरगुड़ा-पोगाभेज्जी गांव का है, जहां स्थानीय परंपरा के अनुसार 17 वर्षीय बालिका का विवाह तय किया जा रहा था, लेकिन सूचना मिलने पर महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और अधिकारियों ने परिजनों को बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने पर समझाइश के बाद दोनों पक्ष विवाह स्थगित करने के लिए सहमत हो गए।
दूसरा मामला सिरसेट्टी के पांडुरूपारा का है, जहां 15 जून को एक बाल विवाह आयोजित होना था और विवाह की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं, लेकिन प्रशासनिक टीम ने परिजनों से संवाद कर बालिका के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी देने पर परिवार ने सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए विवाह को स्थगित करने का निर्णय लिया।

दोनों मामलों में संबंधित परिवारों से घोषणा-पत्र एवं पंचनामा तैयार कराया गया तथा उन्हें बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों से अवगत कराया गया, जिसमें अधिकारियों ने बताया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इससे बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा तथा विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

इन मामलों ने साबित किया है कि जनजागरूकता, संवेदनशील संवाद और प्रशासनिक प्रतिबद्धता के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है, और जिला प्रशासन के प्रयासों से दो बेटियों को अपने सपनों को पूरा करने, शिक्षा जारी रखने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है।

जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने में सहयोग करें तथा ऐसी किसी भी जानकारी की सूचना तत्काल संबंधित विभाग को दें, क्योंकि प्रशासन का उद्देश्य प्रत्येक बालिका को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है।