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Saturday, October 31, 2026
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बेमेतरा में 585 बोरी उर्वरक जब्त — अवैध भंडारण और कालाबाजारी क्यों नहीं करना चाहिए

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रायपुर- 15 जून 2026

— खरीफ सीजन में किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन बेमेतरा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देवकर तहसील के ग्राम गाड़ाडीह में अवैध रूप से भंडारित 585 बोरी उर्वरक जब्त कर गोदाम सील कर दिया, जिसमें बायो पोटाश और बायो ऑर्गेनिक फास्फेट शामिल हैं।

कलेक्टर के निर्देश पर जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल ने छापेमारी के दौरान करीब 29.25 मीट्रिक टन उर्वरक का अवैध भंडारण पकड़ा, और अधिकारियों ने बताया कि उर्वरकों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं जिनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

अवैध भंडारण और कालाबाजारी क्यों नहीं करना चाहिए: उर्वरक की कालाबाजारी और जमाखोरी किसानों की सबसे बड़ी समस्या होती है, क्योंकि इससे खरीफ सीजन में गुणवत्तायुक्त उर्वरक की उपलब्धता पर बाधा आती है और किसानों को अत्यधिक मूल्य पर उर्वरक खरीदना पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक भारी होती है।

अवैध भंडारण से अमानक उर्वरकों का कारोबार बढ़ता है जो खेतों में उपयोग करने पर फसल के उत्पादन को नुकसान पहुंचाते हैं और पर्यावरण को भी प्रभावित करते हैं। कालाबाजारी देश की खाद्य सुरक्षा को भी खतरे में डालती है, क्योंकि उर्वरक की अनियमित उपलब्धता फसल उत्पादन को प्रभावित करती है और किसानों की आय कम होती है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कालाबाजारी, जमाखोरी और अमानक उर्वरकों के कारोबार पर सख्त नजर रखी जा रही है और अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन ने किसानों और आम नागरिकों से ऐसी गतिविधियों की सूचना तत्काल प्रशासन को देने की अपील की है, ताकि दोषियों के विरूद्ध तत्परता से कार्यवाही की जा सके, और जिला प्रशासन ने सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने की बात कही है।

यह कार्रवाई बताती है कि प्रशासन किसानों के हितों की सुरक्षा और उर्वरक कारोबार में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सीधी बुवाई से धान क्रांति: नई किस्में पानी और लागत दोनों बचाएँगी

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डिजिटल डेस्क – 15 जून 2026

अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) ने दो नई धान किस्में — DRR Dhan 92 और CR Dhan 217 — विकसित की हैं, जो पारंपरिक ट्रांसप्लांटिंग के बजाय सीधी बुवाई में अच्छी उपज देते हुए खेतों को भरकर रखने की जरूरत को ख़त्म कर देंगी; नेशनल ट्रायल्स में DRR Dhan 92 ने 5.8 टन/हेक्टेयर और CR Dhan 217 ने औसतन 5.9 टन/हेक्टेयर उपज दिखाई, जिससे जल उपयोग, उत्पादन लागत और मीथेन उत्सर्जन में显है कमी आ सकती है।

जीनोमिक टूल्स से लगभग 19 लाभकारी जीनों के संयोजन ने इन किस्मों को कम ऑक्सीजन और कम पानी में भी तेजी से विकसित होने, बीमारियों व अनचाहे पर्यावरणीय तनाव सहने की क्षमता देने और खरपतवार नियंत्रण में मदद करने वाला बनाया है।

DRR Dhan 92 को उत्तर-पूर्वी भारत और CR Dhan 217 को पूर्वी-मध्य भारत के मानसूनी क्षेत्रों के लिए अनुकूल पाया गया है; CR Dhan 217 महज 118 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और अच्छी परिस्थितियों में इसकी उपज 8.7 टन/हेक्टेयर तक भी पहुंची।

DBT, एशियन डेवलपमेंट बैंक और फिनलैंड के वित्तीय सहयोग व ICAR व IRRI के परीक्षणों के बाद जब सरकारी मंजूरी मिल जाएगी तो ये बीज किसानों तक तेजी से पहुँचकर पानी की बचत, लागत में कटौती और सतत् उत्पादन में योगदान देंगे — खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ भूजल स्तर गिर रहा है और श्रम संकट है।

आज के दौर में जब जमीन का पानी लगातार नीचे जा रहा है, मौसम का कोई भरोसा नहीं रहा और मजदूरों की किल्लत बढ़ गई है, ऐसे में यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है. सरकार की तरफ से अंतिम मुहर  लगते ही यह बीज देश के कोने-कोने में किसानों तक पहुँचने के लिए तैयार हो जाएंगे, जिससे आने वाले वक्त में धान की खेती मे कम पानी कम लागत में बंपर पैदावार मिलेगी।


अपराध पर लगाम : अवैध रेत उत्खनन और दोपहिया वाहन से अवैध शराब जब्त

रायपुर /छत्तीसगढ़ -15 जून 2026

— राजनांदगांव जिले में अपराध पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने दो अलग-अलग कार्रवाईएं की हैं। खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा लगातार गश्त और निगरानी की जा रही है, जिसके तहत डोंगरगढ़ क्षेत्र में रेत का अवैध परिवहन करते पाए जाने पर राजस्व एवं खनिज विभाग की टीम ने हाईवा क्रमांक सीजी 08 बीसी 9633 को जब्त कर थाना डोंगरगढ़ के सुपुर्द कर दिया गया है।

कलेक्टर जितेंद्र यादव के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, भंडारण और परिवहन पर रोक लगाने के लिए लगातार कार्रवाई जारी रहेगी, जैसा कि कलेक्टर ने स्पष्ट किया।

इसी तरह अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए राजनांदगांव जिले में आबकारी विभाग द्वारा भी लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिसके तहत जिला स्तरीय उड़नदस्ता और आबकारी वृत्त चिचोला की संयुक्त टीम ने ककोड़ी-बंजारी मार्ग पर कार्रवाई करते हुए दोपहिया वाहन सीजी 08 एबी 9020 से 5.4 बल्क लीटर (30 नग) महाराष्ट्र निर्मित देशी शराब ‘संत्री नंबर-01’ जब्त की।

आबकारी अधिकारियों के अनुसार बाइक से शराब परिवहन कर रहे ग्राम कोलिहा लमटी निवासी मुकेश्वर साहू को पकड़ा गया है, जिसके खिलाफ आबकारी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई है और जब्त शराब व वाहन की कुल अनुमानित कीमत करीब 40 हजार रुपये बताई गई है।

नदी स्वच्छता महा_अभियान : यमुना को स्वच्छ बनाने सीएम रेखा गुप्ता की अगुवाई में आज 28 घाटों पर जुटेगा ‘जन-सैलाब’

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नई दिल्ली: 14 जून 2026

देश की राजधानी दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी के संरक्षण और कायाकल्प को लेकर आज (रविवार) एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार आज सुबह 6:00 बजे से 10:00 बजे तक एक मेगा स्वच्छता अभियान आयोजित करने जा रही है।

‘जन-आंदोलन’ का रूप ले चुके इस अभियान के तहत यमुना के सभी 28 प्रमुख घाटों पर एक साथ सघन सफाई अभियान चलाया जाएगा। इस महा-मुहिम में दिल्ली सरकार के तमाम मंत्री, सांसद, विधायक, नगर निगम के अधिकारी, 500 से अधिक सामाजिक संगठन और हजारों की संख्या में पर्यावरण-प्रेमी व स्वयंसेवक (वॉलिंटियर्स) एक साथ श्रमदान करने के लिए जमीन पर उतर रहे हैं।

वीआईपी कमांड: किस घाट पर कौन संभालेगा मोर्चा?
यमुना की सफाई को सुचारू और प्रभावी बनाने के लिए पूरी दिल्ली में प्रशासनिक व राजनैतिक अमले को तैनात किया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता स्वयं गीता कॉलोनी घाट (ठोकर नंबर-14) से इस अभियान की शुरुआत कर इसका नेतृत्व करेंगी।

इसके अलावा सरकार और विपक्ष के अन्य दिग्गज नेता भी अलग-अलग घाटों पर मौजूद रहकर जनता का हौसला बढ़ाएंगे:

केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा:यमुना बैंक घाट
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता:पुराना लोहे का पुल घाट
जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह: आईटीओ स्थित हाथी घाट
सांसद मनोज तिवारी: सूरघाट (वजीराबाद क्षेत्र)
राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल: कालिंदी कुंज घाट
इसके अतिरिक्त वजीराबाद, निगम बोध घाट, सिग्नेचर ब्रिज और सराय काले खां जैसे संवेदनशील और बड़े घाटों पर विशेष टीमों को तैनात किया गया है।

राजनीतिक प्रतिबद्धता और पर्यावरण की बड़ी चुनौती

केंद्र की पैनी नजर:
यमुना नदी में बढ़ता प्रदूषण और अमोनिया का स्तर लंबे समय से केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट और पर्यावरणविदों की चिंता का विषय रहा है। राजनीति के केंद्र में रहने वाले इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार के लिए यह मेगा ड्राइव अपनी प्रशासनिक सक्रियता और पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को साबित करने का एक बड़ा और निर्णायक अवसर है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अभियान की पूर्व संध्या पर स्पष्ट संदेश दिया कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर है। उन्होंने कहा, “यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाना सिर्फ सरकारी फाइलों या बजट से संभव नहीं है, जब तक कि दिल्ली का एक-एक नागरिक इसे अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी न मान ले।” इसी सोच के साथ इस बार अभियान को केवल कचरा उठाने तक सीमित न रखकर, जन-जागरूकता के एक बड़े मंच के रूप में तब्दील किया गया है।

500 संगठनों की भागीदारी और ‘नो-प्लास्टिक’ का संकल्प
इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत इसका सामाजिक ताना-बाना है। दिल्ली के लगभग 500 सामाजिक, धार्मिक, गैर-सरकारी (NGOs) और शैक्षणिक संस्थानों ने इस मुहिम को अपना समर्थन दिया है।

घाटों पर सफाई के साथ-साथ आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को जागरूक करने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे। स्वयंसेवकों द्वारा लोगों को यह कड़ा संकल्प भी दिलाया जाएगा कि वे भविष्य में पूजा सामग्री, त्योहारों के अवशेष, सिंगल-यूज प्लास्टिक और घरेलू कचरा सीधे यमुना नदी में विसर्जित न करें। प्रशासन को उम्मीद है कि सुबह के चार घंटों का यह श्रमदान आने वाले दिनों में यमुना की तस्वीर और दिल्लीवासियों की तकदीर बदलने में मील का पत्थर साबित होगा।

विश्व रक्तदाता दिवस 14 जून: मानवता का महादान और जीवन का प्रवाह

डिजिटल डेस्क 14 जून 2026

अमूल्य मानव जीवन के लिए रक्त अनमोल है। इसे मानव शरीर के अलावा और किसी माध्यम से बनाया नहीं जा सकता। रोबोट युग में दुनिया आ गई है लेकिन रक्त के लिए आज भी विज्ञान रक्तदाता पर निर्भर है।

मानव सभ्यता में परोपकार को सदैव श्रेष्ठ स्थान दिया गया है, लेकिन ‘रक्तदान’ एक ऐसा अनुपम योगदान है जो सीधे किसी मरते हुए इंसान को नया जीवन प्रदान करता है। चिकित्सा विज्ञान ने आज अभूतपूर्व तरक्की कर ली है, परंतु रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प प्रयोगशाला में तैयार नहीं किया जा सका है।

दुर्घटनाओं, जटिल ऑपरेशनों, प्रसवकालीन समस्याओं, कैंसर और थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों में जीवन और मृत्यु के बीच रक्त ही निर्णायक भूमिका निभाता है। इसी सामाजिक उत्तरदायित्व को जगाने और निस्वार्थ रक्तदाताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए हर साल 14 जून को ‘विश्व रक्तदाता दिवस’ मनाया जाता है।

इतिहास, उद्देश्य और रक्त विज्ञान की महत्ता
इस विशेष दिन की शुरुआत वर्ष 2004 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा की गई थी। 14 जून की तिथि महान वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर के सम्मान में चुनी गई, जिन्होंने ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम की खोज कर चिकित्सा जगत में क्रांति ला दी थी। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना और स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हमारा रक्त लाल-श्वेत कणिकाओं, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा का एक अनूठा संयोजन है, जो शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों का संचार करता है। रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है। 18 से 65 वर्ष का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति (पुरुष हर 90 दिन और महिलाएं हर 120 दिन में) आसानी से रक्तदान कर सकता है। इससे शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती, बल्कि नए रक्त का निर्माण तेजी से होता है।

वैश्विक थीम 2026 और सामाजिक संदेश
विश्व रक्तदाता दिवस 2026 की थीम:”One Drop of Humanity. Give Blood. Save Lives.” (मानवता की एक बूंद। रक्तदान करें, जीवन बचाएं) रखी गई है। यह थीम युवाओं को इस महाअभियान से जोड़ने पर बल देती है।

रक्तदान जाति, धर्म और संप्रदाय की सीमाओं को तोड़कर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को धरातल पर साकार करता है। जब किसी अनजान व्यक्ति की धड़कनें आपके रक्त से चलती हैं, तब मानवता अपने सर्वोच्च शिखर पर होती है। आइए, इस अवसर पर नियमित रक्तदान करने का संकल्प लें और समाज से रक्त की कमी के संकट को हमेशा के लिए समाप्त करें।

सोना तस्करी: DRI ने सोने के अंतरराष्ट्रीय तस्करी रैकेट का किया पर्दाफाश, ₹25 करोड़ का विदेशी सोना जब्त

नई दिल्ली/कोलकाता:14 जून 2026

कोलकाता और अगरतला में चलाए गए समन्वित अभियानों में अवैध सोने की आमद पर कड़ा प्रहार करते हुए राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में सक्रिय एक बड़े संगठित तस्करी गिरोह को नेस्तनाबूद कर दिया है। डीआरआई ने कोलकाता और अगरतला में बैक-टू-बैक समन्वित ऑपरेशंस को अंजाम देते हुए करीब 17 किलोग्राम विदेशी सोना बरामद किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत ₹25 करोड़ आंकी जा रही है।

इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई में अब तक एक महिला समेत 10 शातिर तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।हवाई मार्ग से लेकर सीमा पार तक फैला था जाल एजेंसी ने इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए दोतरफा रणनीति अपनाई:

कोलकाता एयरपोर्ट पर घेराबंदी
गिरोह का पहला सिंडिकेट थाईलैंड से वाया एयरलाइंस सोना भारत ला रहा था। डीआरआई ने मुस्तैदी दिखाते हुए कोलकाता हवाई अड्डे पर ही इन्हें दबोच लिया। इनके पास से ₹17 करोड़ मूल्य का 11.6 किलोग्राम सोना बरामद हुआ, और मौके से 7 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।

त्रिपुरा बॉर्डर पर आरपीएफ के साथ ज्वाइंट ऑपरेशन:

ठीक इसी वक्त, अगरतला में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के साथ मिलकर भारत-बांग्लादेश सीमा पर जाल बिछाया गया। यहाँ ट्रेन और सीमावर्ती रास्तों के जरिए लाया जा रहा 5.1 किलोग्राम विदेशी सोना (कीमत ₹8 करोड़) जब्त कर 3 अन्य तस्करों को गिरफ्तार किया गया।

अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी अंतरराष्ट्रीय सप्लायर्स और घरेलू खरीदारों के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में काम कर रहे थे। फिलहाल, इस सिंडिकेट के ‘मास्टरमाइंड’ और फंडिंग रूट का पता लगाने के लिए आगे की पूछताछ जारी है।

विकसित भारत @2047 का रास्ता खेतों और गांवों से होकर ही गुजरेगा: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

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नई दिल्ली: 13 जून 2026

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प की सफलता कृषि, ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार (इन्नोवेशन) के सशक्त तालमेल पर टिकी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की कृषि केवल हमारी अर्थव्यवस्था का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक चेतना, खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण समृद्धि और सामाजिक स्थिरता की आधारशिला भी है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला नई दिल्ली में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

इस सम्मेलन का मुख्य विषय “Sustainable Agriculture for Viksit Bharat@2047: Tradition, Technology and Tangible Outcomes” (विकसित भारत @2047 के लिए सतत कृषि: परंपरा, प्रौद्योगिकी और मूर्त परिणाम) रखा गया है।

परंपरा और आधुनिक विज्ञान का समन्वय जरूरी
वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, “आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, तब यह बेहद जरूरी हो गया है कि हम अपने पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, अत्याधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जलवायु-अनुकूल (Climate-Resilient) नवाचारों के साथ जोड़ें।”

केवल उत्पादन बढ़ाना लक्ष्य नहीं
श्री बिरला ने कहा कि कृषि का भविष्य अब केवल ज्यादा उत्पादन करने तक सीमित नहीं रह गया है।
इसका असली मकसद संसाधनों का सही उपयोग, पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना, किसानों की आय में वृद्धि करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित एवं समृद्ध कृषि व्यवस्था तैयार करना है।यही वजह है कि आज देश की कृषि यात्रा में कृषि शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और तकनीक आधारित समाधानों को प्रमुख आधार बनाया जा रहा है।


“विकसित भारत की यात्रा हमारे खेतों, खलिहानों और गांवों से होकर ही गुजरेगी। इस बड़े बदलाव के मुख्य वाहक हमारे किसान, वैज्ञानिक, शिक्षक, शोधकर्ता, नीति-निर्माता और युवा शक्ति होंगे।”
ओम बिरला, लोकसभा अध्यक्ष

सम्मेलन से निकलेगा आत्मनिर्भरता का रास्ता
संबोधन के अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन से जो भी विचार, नवाचार और संकल्प सामने आएंगे, वे देश के किसानों की समृद्धि, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को एक नई रफ्तार देंगे। साथ ही, ये निष्कर्ष कृषि को राष्ट्र की प्रगति, पर्यावरण संतुलन और जनकल्याण का एक बेहद मजबूत जरिया बनाएंगे।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बैठक – तय होगी जिम्मेदारी, सीएमएचओ ने दिए सख्त निर्देश

बेमेतरा 13 जून 2026

जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कवायद तेज कर दी है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. अमृत लाल रोहलेडर ने बीएमओ, बीपीएम और सेक्टर मेडिकल अधिकारियों की मासिक समीक्षा बैठक लेकर दो टूक शब्दों में कहा कि वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

उन्होंने सभी अधिकारियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की गाइडलाइन के अनुरूप वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) समय पर जमा करने के निर्देश दिए।

बैठक में मानव संसाधन प्रबंधन को दुरुस्त करने के लिए सभी कर्मचारियों का डेटा ‘स्पैरो’ (SPARROW) पोर्टल पर शत-प्रतिशत अपडेट करने तथा रिक्त पदों व स्थापना संबंधी जानकारी तीन दिनों के भीतर दर्ज करने के कड़े निर्देश दिए गए।

मातृ-शिशु स्वास्थ्य और संस्थागत प्रसव पर जोर
डॉ. रोहलेडर ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए ‘शून्य होम डिलीवरी’ (Zero Home Delivery) का लक्ष्य हासिल करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि:
जननी पोर्टल पर हर गर्भवती महिला का रियल-टाइम पंजीयन और चार अनिवार्य एएनसी जांच सुनिश्चित की जाए।

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) की पहचान कर उनका नियमित फॉलोअप किया जाए।
मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को कम करने के लिए हर मृत्यु प्रकरण की समयबद्ध समीक्षा और गैप एनालिसिस रिपोर्ट तैयार की जाए।

टीकाकरण और आगामी अभियान

टीकाकरण की समीक्षा करते हुए सीएमएचओ ने निर्देश दिए कि सभी बच्चों का ‘यू-विन’ (U-WIN) पोर्टल पर पंजीयन कर उसी दिन एंट्री की जाए। ड्रॉपआउट बच्चों के लिए विशेष सत्र चलाए जाएं। इसके अलावा, 15 जून से शुरू हो रहे सघन कुष्ठ खोज अभियान (LCDC)की माइक्रोप्लानिंग पूरी करने, टीबी नोटिफिकेशन दर 90% से ऊपर रखने, मरीजों को निक्षय पोषण योजना का लाभ देने और आगामी पल्स पोलियो अभियान के लिए हाई रिस्क क्षेत्रों पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए गए।

सीएमएचओ का संदेश:”स्वास्थ्य योजनाओं की सफलता डेटा की शुद्धता पर टिकी है। अधिकारी कागजी आंकड़ों के बजाय फील्ड विजिट बढ़ाएं, रेफरल सिस्टम मजबूत करें और पोर्टल्स पर सही व समयबद्ध जानकारी दर्ज करें।”

बैठक में जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम), जिला टीकाकरण अधिकारी, जिला कुष्ठ व क्षय अधिकारी सहित सभी विकासखंडों के बीएमओ और बीपीएम मुख्य रूप से उपस्थित थे।

NEET-UG री-एग्जाम पर केंद्र का कड़ा पहरा, गड़बड़ी करने वालों को ‘अंतिम चेतावनी’

डिजिटल डेस्क 13 जून 2026

छात्रों का भविष्य और देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर उपजा विवाद थमा नहीं था कि आगामी 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा (री-एग्जाम) के लिए केंद्र सरकार ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। 3 मई को हुई परीक्षा में पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी, जिसकी जांच अभी भी सीबीआई (CBI) कर रही है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती साख बचाने और परीक्षा को पूरी तरह ‘लीक-प्रूफ’ बनाने की है।

​शुक्रवार को कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सरकार का सख्त और निर्भीक रुख साफ देखने को मिला। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को ‘मेरा विचार, मेरा दर्शन’ की दृष्टि से समझने का प्रयास करते हैं।

​प्रशासनिक बिसात: अर्धसैनिक बलों का पहरा और सख्त कानून

​आगामी 21 जून की परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था का ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसे भेदना किसी भी शिक्षा माफिया के लिए नामुमकिन हो।

सख्त कानूनी कार्रवाई का अल्टीमेटम: कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन ने साफ चेतावनी दी है कि परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित या बाधित करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई होगी।

सुरक्षा का अभेद्य किला: गृह मंत्रालय ने परीक्षा पत्रों (एग्जाम पेपर्स) के ट्रांसपोर्टेशन और सुरक्षा के लिए CRPF और CISF जैसी केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को मैदान में उतार दिया है।

एजेंसियों का समन्वय: केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के मुख्य सचिव और जिला प्रशासन मिलकर इस परीक्षा के सफल आयोजन के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। इस समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह भी मौजूद थे।

​साख की बहाली और लाखों छात्रों का भविष्य

​एक पत्रकार और विचारक के रूप में, मेरा मानना है कि यह केवल एक परीक्षा का आयोजन नहीं है, बल्कि देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था और उसकी विश्वसनीयता की अग्निपरीक्षा है।

विचार का बिंदु:

3 मई को जो कुछ भी हुआ, उसने देश के लाखों होनहार और दिन-रात मेहनत करने वाले छात्रों के सपनों पर पानी फेर दिया था। आज जब दोबारा परीक्षा की तारीख नजदीक है, तो छात्रों के मन में डर के साथ-साथ एक उम्मीद भी है। सरकार का यह कड़ा रुख और अर्धसैनिक बलों की तैनाती यह दर्शाती है कि देर से ही सही, तंत्र जागा है। लेकिन असली जीत तब होगी जब 21 जून की शाम को देश का हर छात्र बिना किसी संशय के परीक्षा केंद्र से बाहर निकलेगा।

डीजल संकट के मुहाने पर खड़ा आम आदमी और सरकार की सीमा एक दिन में 200 लीटर

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डिजिटल डेस्क 13 जून 2026

मध्य एशिया से उत्पन्न संकट देश में बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की किल्लत अब सिर्फ अखबारों के आंकड़े नहीं रहे, बल्कि आम भारतीय के रसोईघर और जेब की कड़वी हकीकत बन चुके हैं। देश में महंगाई की रफ्तार सिर चढ़कर बोलने लगी है और लोग अब खुल कर अपनी बेबसी बयां करने लगे हैं।

मिडिल ईस्ट (मध्य एशिया) में गहराते संघर्ष और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच सरकार ने पेट्रोल-डीजल की बिक्री को लेकर जो नई ’90 दिनों की गाइडलाइन’ जारी की है, वह यह साफ करती है कि संकट गहरा है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ पाबंदियों से इस वैश्विक और घरेलू चक्रव्यूह को भेदा जा सकता है? आइए इसे ‘मेरा विचार, मेरा दर्शन’ की दृष्टि से समझने की कोशिश करते हैं।

नीतिगत बदलाव से सरकार के कदम और जमीनी हकीकत
सरकार ने पेट्रोल पंपों से औद्योगिक और वाणिज्यिक (इंडस्ट्रियल और कमर्शियल) ग्राहकों द्वारा थोक में ईंधन खरीदने पर रोक लगा दी है। अब कोई भी प्रति दिन 200 लीटर से ज्यादा डीजल या पेट्रोल रिटेल पंप से नहीं ले पाएगा।

इस फैसले के पीछे का तर्क:
बड़ी कंपनियां और इंडस्ट्रीज, रिटेल पंपों से सस्ता तेल खरीदकर जमाखोरी कर रही थीं, जिससे आम जनता के लिए तेल की किल्लत होने का डर था। सरकार का यह कदम स्थानीय स्तर पर सप्लाई बनाए रखने के लिए जरूरी था।

क्या यह केवल एक तात्कालिक मरहम है?
एक व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखें, तो सरकार का यह कदम एक बहते हुए घाव पर अस्थायी पट्टी बांधने जैसा है। खुदरा महंगाई दर का पांचवें महीने बढ़कर 3.93% (खाद्य महंगाई 4.78%) पर पहुंच जाना यह बताता है कि संकट की जड़ें बहुत गहरी हैं।

आम आदमी पर पड़ रही दोहरी मार:
जब ईंधन महंगा होता है, तो मालभाड़ा (परिवहन लागत) बढ़ता है। नतीजा यह होता है कि खेत से सब्जी मंडी तक आने वाली हर चीज महंगी हो जाती है। आम इंसान के लिए अब सिर्फ गाड़ी चलाना ही नहीं, बल्कि थाली सजाना भी दूभर हो रहा है।

खबर अनुसार रिजर्व बैंक द्वारा महंगाई के अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% करना इस बात का प्रमाण है कि आने वाले दिन और कठिन हो सकते हैं।अब इस वैश्विक संकट का स्थाई समाधान क्या है?

जब दुनिया के किसी एक कोने (मिडिल ईस्ट) में बारूद बरसता है, तो उसकी तपिश भारत के एक आम नागरिक के चूल्हे तक पहुंचती है। यह दिखाता है कि हम ऊर्जा के लिए कितने आत्मनिर्भर या मजबूर हैं। इस संकट का दीर्घकालिक समाधान केवल नियमों को सख्त करने में नहीं है बल्कि इन समस्या को और प्रबल करने वाले कारकों पर है।

परिस्थितियां कठिन हैं, और जनता की जुबां पर फैला असंतोष जायज है। सरकार की नई गाइडलाइन अस्थायी राहत दे सकती है, लेकिन यदि देश को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखना है, तो दूरगामी और कड़े फैसले लेने ही होंगे। संकट वैश्विक है, लेकिन समाधान हमें अपने भीतर ही खोजना होगा।