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ड्रग्स एक्शन: ड्रग्स तस्करी में 31 केस वाला मुकेश बनिया गिरफ्तार 42 लाख की संपत्ति SAFEMA में जब्त

रायपुर 1 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे हैं महा अभियान में रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने मंगलवार सुबह एक हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन में कुख्यात ड्रग माफिया मुकेश बनिया को धर दबोचा। पुलिस ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

आपराधिक रिकॉर्ड:
मुकेश बनिया का नाम रायपुर के सबसे खतरनाक अपराधियों की लिस्ट में था। उस पर हत्या, दंगा, आर्म्स एक्ट, मारपीट, धमकी और मादक पदार्थों की तस्करी समेत 31 संगीन मामले दर्ज हैं। लंबे समय से पुलिस को इसकी तलाश थी।

SAFEMA के तहत बड़ी कार्रवाई:
गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस ने Smugglers and Foreign Exchange Manipulators Act (SAFEMA) के तहत मुकेश की 42 लाख रुपये की अवैध संपत्ति भी जब्त कर ली। इसमें मकान, गाड़ियां और बैंक खाते शामिल हैं।

आगे की जांच:
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी जांच चल रही है। आरोपी के मोबाइल, लैपटॉप और दूसरे डिजिटल उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस को शक है कि इसका नेटवर्क दूसरे राज्यों तक फैला हुआ है।

ईको-टूरिज्म का आकर्षण: भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ की पहचान

रायपुर/कबीरधाम 30 जून 2026

एक माह में 480 से अधिक पर्यटक पहुंचे सफारी में।छत्तीसगढ़ की भोरमदेव जंगल सफारी राज्य में इको-टूरिज्म का नया आकर्षण बनकर उभरी है। संचालन के पहले ही महीने में 480 से अधिक पर्यटकों ने यहां जंगल सफारी का आनंद लिया, जिससे स्थानीय युवाओं, वन प्रबंधन समिति और स्व-सहायता समूहों को रोजगार और आय के नए अवसर मिले हैं।
वन विभाग के अनुसार सफारी का शुभारंभ 3 मई को किया गया था।

मानसून के कारण 4 जून से इसका संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, जिसे बारिश के बाद नवंबर से फिर शुरू किया जाएगा। एक माह के दौरान सफारी से करीब पौने तीन लाख रुपये की आय हुई।

भोरमदेव जंगल सफारी से स्थानीय स्तर पर रोजगार को भी बढ़ावा मिला है। वाहन चालक, गाइड और गेटकीपर के रूप में कार्यरत 17 स्थानीय युवाओं ने 75 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की। वहीं वन प्रबंधन समिति को 92 हजार रुपये तथा वन विभाग को 26 हजार रुपये से अधिक की आय हुई।

सफारी परिसर में स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित कैंटीन से भी 20 हजार रुपये से अधिक का लाभ हुआ, जिससे महिलाओं की आमदनी बढ़ी है।

करीब 36 किलोमीटर लंबे सफारी मार्ग में पर्यटकों को भारतीय गौर, भालू, नीलगाय, सांभर, बार्किंग डियर, बाघ के पदचिह्न, जंगली मुर्गा, विभिन्न पक्षियों और रंग-बिरंगी तितलियों को देखने का अवसर मिला। घने जंगल और प्राकृतिक सौंदर्य ने पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।

इसके अलावा 1500 से अधिक पर्यटकों ने भोरमदेव के प्राकृतिक उद्यान का भी भ्रमण किया। वन विभाग का कहना है कि लगभग 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले भोरमदेव अभयारण्य की यह पहल प्रकृति संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय आर्थिक विकास का सफल मॉडल बनकर सामने आई है।

भारतीय सेना के नए प्रमुख, जनरल धीरज सेठ ने संभाला 31वें सेना प्रमुख का पद

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नई दिल्ली, 30 जून 2026/न्यूज आर्टिकल

जनरल धीरज सेठ के सेना प्रमुख बनने के साथ भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, तकनीकी क्षमता बढ़ाने और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप सैन्य तैयारियों को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला के पूर्व छात्र जनरल धीरज सेठ को दिसंबर 1986 में बख्तरबंद कोर में कमीशन मिला था।

लगभग 40 वर्षों के सैन्य करियर में उन्होंने परिचालन, रणनीतिक योजना, क्षमता विकास और संस्थागत नेतृत्व जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम से सम्मानित जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार को भारतीय सेना के 31वें सेना प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लिया, जो चार दशक से अधिक समय तक देश की सेवा देने के बाद 30 जून को सेवानिवृत्त हुए।

अपने लंबे सैन्य कार्यकाल के दौरान जनरल सेठ ने रेगिस्तानी क्षेत्र में बख्तरबंद रेजिमेंट, पश्चिमी मोर्चे पर बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी बल का नेतृत्व किया।

सेना के आधुनिकीकरण और भविष्य की सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में उनके योगदान को विशेष रूप से सराहा जाता है।

लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में उन्होंने भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशन ‘सुदर्शन चक्र कोर’ की कमान संभाली। इसके अलावा दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग, दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के सेना कमांडर के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय तथा उच्च कमान पाठ्यक्रम के स्नातक हैं और उन्होंने फ्रांस के पेरिस में प्रतिष्ठित कमांड एंड स्टाफ कोर्स भी किया है।

सेना मुख्यालय में रणनीतिक योजना और क्षमता विकास से जुड़े अहम पदों पर रहते हुए उन्होंने सेना के आधुनिकीकरण, नई सैन्य तकनीकों को अपनाने और भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं के अनुरूप सैन्य ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।(समाचार स्त्रोत पीआईबी दिल्ली)


भाजपा ने नीतू कोठारी को केसीजी जिले का प्रभारी बनाया, संगठन का जताया आभार

छत्तीसगढ़/बेमेतरा – 30/06/2026

भारतीय जनता पार्टी ने बेमेतरा की सक्रिय नेता एवं जनप्रतिनिधि नीतू कोठारी को खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) जिले का प्रभारी नियुक्त किया है।

नई जिम्मेदारी मिलने पर सुश्री कोठारी ने पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे संगठन द्वारा उनकी निष्ठा, लगन और वर्षों की सक्रिय कार्यशैली पर जताए गए विश्वास का सम्मान बताया। उन्होंने महिला मोर्चा में विभिन्न दायित्व प्राप्त करने वाली सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भी शुभकामनाएं दीं।

नीतू कोठारी ने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की सहमति से उन्हें यह दायित्व सौंपा गया है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव, संगठन महामंत्री पवन साय तथा भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी के प्रति विशेष आभार प्रकट करते हुए कहा कि संगठन ने उन पर जो भरोसा जताया है, उस पर वह पूरी निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के साथ खरा उतरने का प्रयास करेंगी।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाना, संगठन को और अधिक मजबूत बनाना तथा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर पार्टी की गतिविधियों को गति देना उनकी प्राथमिकता होगी। यह दायित्व उनके लिए गौरव के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है।

नीतू कोठारी का राजनीतिक सफर बेमेतरा कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के रूप में पार्षद चुनाव लड़ते हुए सक्रिय राजनीति में अपनी पहचान बनाई और पिछले 15 वर्षों से नगर सेवा में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह अब तक 44 बार रक्तदान कर चुकी हैं। संगठन और समाज सेवा में उनके योगदान को जिले में व्यापक पहचान मिली है।

नई जिम्मेदारी मिलने पर उन्होंने क्षेत्र की जनता के प्रति भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता के विश्वास और स्नेह ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। उन्होंने अपने चर्चित संदेश “मेरे मुस्कुराने की वजह मेरे मतदाता हैं” का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा है।

विश्व सोशल मीडिया दिवस 2026: अभिव्यक्ति की आज़ादी से जिम्मेदारी तक, डिजिटल युग का सबसे प्रभावशाली माध्यम

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न्यूज डेस्क – 30 जून 2026

डिजिटल युग में सोशल मीडिया केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि परिवर्तन की शक्ति भी है।
आज सोशल मीडिया केवल संवाद का माध्यम नहीं रहा, बल्कि शासन-प्रशासन, पत्रकारिता, शिक्षा, व्यापार, जनआंदोलनों, सामाजिक अभियानों और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का सबसे प्रभावशाली मंच बन चुका है।

हर वर्ष 30 जून को मनाया जाने वाला विश्व सोशल मीडिया दिवस केवल डिजिटल प्लेटफॉर्मों के विस्तार का उत्सव नहीं, बल्कि उनके जिम्मेदार उपयोग का संदेश भी देता है।

ऐसे समय में जब अधिकांश काम ऑनलाइन माध्यमों से हो रहे हैं, सोशल मीडिया आधुनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है।

पिछले दो दशकों में सोशल मीडिया ने संचार की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। आज कोई भी व्यक्ति अपने विचार, प्रतिभा और जानकारी को कुछ ही क्षणों में दुनिया के किसी भी कोने तक पहुंचा सकता है।

सरकारी योजनाओं की जानकारी से लेकर आपदा प्रबंधन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यवसाय और जनसंपर्क तक सोशल मीडिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है। लोकतंत्र में भी यह नागरिकों और सरकार के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण सेतु बनकर उभरा है।

हालांकि, सोशल मीडिया जितना उपयोगी है, उतनी ही बड़ी चुनौतियां भी इसके साथ जुड़ी हुई हैं। फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाएं, ट्रोलिंग, साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी, निजता का हनन और एल्गोरिदम आधारित सूचना नियंत्रण जैसे मुद्दे समाज के सामने गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया की वास्तविक उपयोगिता उसके जिम्मेदार, तथ्यपरक और संतुलित उपयोग में निहित है।

सोशल मीडिया का इतिहास भी काफी रोचक रहा है। वर्ष 1997 में SixDegrees को दुनिया का पहला सोशल नेटवर्क माना गया। इसके बाद Friendster और MySpace जैसे प्लेटफॉर्म आए। वर्ष 2003 में LinkedIn ने पेशेवर नेटवर्किंग को नई दिशा दी, जबकि 2004 में शुरू हुए Facebook ने वैश्विक स्तर पर लोगों को जोड़ने का नया अध्याय लिखा।

2005 में YouTube, 2006 में Twitter (अब X) और बाद में WhatsApp, Instagram, Snapchat तथा शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्मों ने डिजिटल संचार की पूरी तस्वीर बदल दी।

आज सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति का लोकतंत्रीकरण कर दिया है। भारत के किसी गांव का कलाकार, किसान, शिक्षक, छात्र या उद्यमी भी अपनी प्रतिभा और विचारों को वैश्विक मंच तक पहुंचा सकता है।

एक स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन ने लाखों लोगों को नई पहचान और नए अवसर दिए हैं। डिजिटल क्रिएटर इकोनॉमी, ऑनलाइन व्यवसाय और कंटेंट निर्माण ने रोजगार के नए रास्ते भी खोले हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया आधुनिक युग का ऐसा डिजिटल मंच है, जो ज्ञान, सूचना और अवसरों का विशाल भंडार उपलब्ध कराता है।

लेकिन इसके सकारात्मक प्रभाव तभी सुनिश्चित किए जा सकते हैं, जब उपयोगकर्ता तथ्य जांचकर जानकारी साझा करें, साइबर सुरक्षा का ध्यान रखें और डिजिटल शिष्टाचार का पालन करें।

विश्व सोशल मीडिया दिवस हमें यह संदेश देता है कि तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग समाज, लोकतंत्र और मानवता के हित में जिम्मेदारी और विवेक के साथ किया जाए।

पराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को हराकर अंतिम-16 में बनाई जगह- फीफा विश्व कप 2026 में बड़ा उलटफेर

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न्यूज डेस्क – 30 जून 2026

अनुभवी गोलकीपर मैनुअल नोयर ने दो महत्वपूर्ण बचाव कर जर्मनी को मुकाबले में बनाए रखा, लेकिन अंततः जोसे कनाले ने निर्णायक पेनल्टी को गोल में बदलकर पराग्वे को ऐतिहासिक जीत दिला दी।

फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में पराग्वे ने चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से हराकर टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया। बोस्टन स्टेडियम में मंगलवार को खेले गए रोमांचक मुकाबले का निर्धारित समय 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ, जिसके बाद विजेता का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ। विश्व कप इतिहास में पहली बार जर्मनी पेनल्टी शूटआउट में हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गया।

पहले हाफ के 42वें मिनट में जूलियो एन्सिसो ने शानदार गोल कर पराग्वे को बढ़त दिलाई। दूसरे हाफ में फ्लोरियन विर्ट्ज़ के सटीक क्रॉस पर काई हैवर्ट्ज़ ने हेडर के जरिए जर्मनी के लिए बराबरी का गोल दागा। इसके बाद जोनाथन टाह का हेडर गोल अमान्य घोषित कर दिया गया, जिससे निर्धारित समय तक स्कोर 1-1 ही रहा।

पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी की शुरुआत खराब रही जब काई हैवर्ट्ज़ का पहला प्रयास पराग्वे के गोलकीपर ने रोक दिया। इसके बाद दोनों टीमों के बीच रोमांचक मुकाबला चलता रहा।

इस जीत के साथ कोच गुस्तावो अल्फारो के मार्गदर्शन में पराग्वे ने फीफा विश्व कप 2026 के अंतिम-16 में प्रवेश कर लिया, जबकि चार बार की विश्व विजेता जर्मनी का अभियान राउंड ऑफ 32 में ही समाप्त हो गया। यह परिणाम टूर्नामेंट के सबसे बड़े उलटफेरों में से एक माना जा रहा है।

अद्भुत साहसिक अभियान द्वारा,तटरक्षक बल ने छह मछुआरों को सुरक्षित बचाया

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डिजिटल डेस्क -30/06/2026

तटरक्षक बल के मुताबिक 29 जून की शाम कर्नाटक के मंगलूरु तट के पास मछली पकड़ने वाली नौका ‘मंजू माथा’ संकट में फंस गई थी।

समुद्र में उठती तेज लहरों, काफी जोर से चल रह हवाओं और कम रोशनी के बीच भारतीय तटरक्षक बल ने अद्भुत साहस और तत्परता दिखाते हुए छह मछुआरों की जान बचाई है।

सुरथकल तट से करीब 33 समुद्री मील दूर मौजूद इस नौका में समुद्र की उग्र परिस्थितियों के कारण पानी भरने लगा। समुद्र में मौजूद इस नौका के ढांचे को भी नुकसान पहुंचा। इससे नौका में सवार छह मछुआरों के सामने जान का खतरा पैदा हो गया। शाम लगभग 4 बजे भारतीय तटरक्षक पोत ‘सचेत’ को रेडियो संदेश के माध्यम से मदद की गुहार मिली।

यह संदेश मंगलूरु के समीप सुरथकल तट से लगभग 33 समुद्री मील दूर स्थित भारतीय मछली पकड़ने वाली नौका मंजू माथा से भेजा गया था।

नौका में समुद्र की खराब परिस्थितियों के कारण पानी भरने लगा था। संदेश मिलते ही तटरक्षक बल ने बिना समय गंवाए अपने पोत का रुख संकटग्रस्त नौका की ओर मोड़ दिया। महज 90 मिनट के भीतर बचाव दल मौके पर पहुंच गया।

हालाँकि यह बचाव अभियान आसान नहीं था। ऊँची लहरें, तेज हवाएँ, कम दृश्यता और बढ़ता अंधेरा अभियान में लगातार बाधा डाल रहे थे। इसके बावजूद तटरक्षक बल के जवानों ने धैर्य और कुशलता का परिचय दिया।

उन्होंने विशेष व दूरस्थ नियंत्रित लाइफबॉय समुद्र में उतारे और एक-एक कर सभी मछुआरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। शाम 6 बजे तक सभी छह मछुआरे पूरी तरह सुरक्षित बचा लिए गए।

राहत की बात यह रही कि किसी भी मछुआरे को चोट नहीं पहुँची। इसके बाद तटरक्षक पोत उन्हें लेकर न्यू मंगलूरु बंदरगाह की ओर रवाना हो गया।

यह अभियान एक बार फिर साबित करता है कि भारतीय तटरक्षक बल केवल समुद्री सीमाओं की निगरानी ही नहीं करता, बल्कि संकट की घड़ी में लोगों के लिए जीवनरक्षक बनकर भी सामने आता है।

बल का कहना है कि अपने आदर्श वाक्य ‘वयम् रक्षामः’ यानी ‘हम रक्षा करते हैं’ के अनुरूप तटरक्षक बल समुद्र में हर चुनौती का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहता है।

भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्र में संकट में फंसे इन छह मछुआरों को एक चुनौतीपूर्ण खोज एवं बचाव अभियान के दौरान सुरक्षित बचाकर अपनी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, पेशेवर दक्षता और समुद्री सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

यहां मौजूद तमाम चुनौतियों के बावजूद तटरक्षक बल के जवानों ने अद्वितीय साहस, उत्कृष्ट समुद्री कौशल और सटीक समन्वय का प्रदर्शन किया।

सफल बचाव अभियान के बाद भारतीय तटरक्षक पोत सचेत बचाए गए मछुआरों को सुरक्षित उतारने तथा आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के लिए बंदरगाह की ओर रवाना हो गया।

ईट भट्ठे पर भड़का विवाद- मजाक बना जानलेवा — फावड़े से सिर पर वार, आरोपी गिरफ्तार

बेमेतरा/छत्तीसगढ़ – 29 जून 2026

मजाक में हुई कहासुनी जानलेवा हमले में बदल गई जब बेरा गांव में एक युवक ने अपने ही परिचित के सिर पर लोहे का फावड़ा दे मारा। खण्डसरा पुलिस चौकी ने त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी दीपक चन्द्राकर को 29 जून 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर न्यायालय में प्रस्तुत किया।

घटना 4 जून 2026 की शाम की है। बेरा निवासी कोमल चन्द्राकर को उनके गांव के ही विजय सेवैया का फोन आया कि उनके भतीजे देवा चन्द्राकर और गांव के दीपक चन्द्राकर ईट भट्ठा डीह तालाब रोड के पास आपस में मजाक कर रहे थे।

इसी दौरान बात बिगड़ी और दीपक चन्द्राकर ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी और पास में रखा लोहे का फावड़ा उठाकर देवा चन्द्राकर के सिर पर दे मारा। सिर से खून बहने लगा और घायल को तत्काल एसआरएस अस्पताल बेमेतरा ले जाया गया, जहाँ से प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत में रायपुर रेफर कर दिया गया।

सूचना मिलते ही कोमल चन्द्राकर अपने परिजनों के साथ बेमेतरा पहुँचे और रिपोर्ट दर्ज कराई। प्रारंभ में धारा 296, 115(2), 351(3) बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। विवेचना में हत्या की नियत स्पष्ट होने पर धारा 109(1) बीएनएस भी जोड़ी गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उप महानिरीक्षक रामकृष्ण साहू (भा.पु.से.) ने तत्काल सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश यादव एवं एसडीओपी बेमेतरा भूषण एक्का के मार्गदर्शन में चौकी प्रभारी खण्डसरा सहायक उप निरीक्षक कंवल नेताम के नेतृत्व में टीम गठित की गई। आरोपी दीपक चन्द्राकर (27 वर्ष) पुत्र दौवाराम चन्द्राकर, निवासी बेरा को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।

इस कार्यवाही में चौकी प्रभारी कंवल नेताम के साथ प्रधान आरक्षक खेमू वर्मा, आरक्षक ऐश्वर्य सिन्हा, चंद्र प्रकाश चंद्रवंशी, सुरेश कुमार नारंगे एवं शशांक शर्मा सहित चौकी के समस्त स्टाफ की सराहनीय भूमिका रही।

मिट्टी की सेहत, किसान का संकल्प — नैनो यूरिया अपनाकर बदली जिंदगी

बेमेतरा- 29 जून 2026

नैनो यूरिया से स्वस्थ मिट्टी और टिकाऊ खेती की ओर बढ़ रहे किसान

कृषि में आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में जिले के किसान लगातार आगे बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में ग्राम बावा घठोली के कृषक संपत दास मानिकपुरी ने नैनो यूरिया का उपयोग कर खेती में सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं।

ग्राम बावा मोहतरा के कृषक संपत दास मानिकपुरी ने साझा किए अपने अनुभव

कृषक संपत दास मानिकपुरी ने बताया कि स्वस्थ मिट्टी, संतुलित पोषण और टिकाऊ कृषि की दिशा में नैनो उर्वरक एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहे हैं। नैनो यूरिया के उपयोग से पोषक तत्वों का बेहतर प्रबंधन संभव हो रहा है, जिससे फसल को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है। साथ ही यह मिट्टी की जैविक सक्रियता को बनाए रखने तथा पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में भी सहायक है।

उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन में नैनो यूरिया का उपयोग करने से आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा मिला है। यह तकनीक किसानों के लिए एक उपयोगी विकल्प बनकर उभर रही है, जिससे खेती अधिक टिकाऊ और प्रभावी बन सकती है।

श्री मानिकपुरी ने जिले के अन्य किसानों से भी वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप नैनो उर्वरकों का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को भी लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

किसान का संदेश:
“नैनो उर्वरक अपनाएं, स्वस्थ मिट्टी और हरित भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं।”

विश्रामपुर में सहकारी सप्ताह का शुभारंभ: ध्वजारोहण के साथ गूंजा “सहकार से समृद्धि” का नारा

बिश्रामपुर – 29 जून 2026

सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के गठन के पाँच वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर आज बिश्रामपुर सहित पूरे प्रदेश में “सहकारी सप्ताह” का भव्य शुभारंभ हुआ। 29 जून से 6 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस सप्ताह के अंतर्गत राज्य एवं जिला स्तर पर सहकारी गतिविधियों, चिंतन गोष्ठियों एवं सहकारी मेलों की एक व्यापक श्रृंखला आयोजित की जाएगी।

यह आयोजन न केवल सहकारिता आंदोलन की उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक नई ऊर्जा का संचार भी है।

बिश्रामपुर में इस ऐतिहासिक अवसर पर प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित (पंजीयन क्रमांक 1406) के परिसर में समिति के प्राधिकृत अधिकारी एवं अध्यक्ष हेम सिंह चौहान ने विधिवत सहकारी ध्वजारोहण किया। जिले की 168 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स), 15 बैंक शाखाओं, जिला सहकारी संघ, लघु वनोपज सहकारी समिति, दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समिति, विपणन सहकारी समिति तथा कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) में एक साथ ध्वजारोहण कर इस सप्ताह का शुभारंभ किया गया, जिससे सहकारिता आंदोलन की व्यापकता और जनस्वीकृति का स्पष्ट संदेश मिला।

कार्यक्रम में सरपंच प्रतिनिधि ईश्वर साहू, मानसिंह साहू, दौवा राम साहू, फेकू राम, भुवनेश्वर सोनवानी, संजय शर्मा, बलराम, पुनीत राम, शांतिलाल वर्मा, विजय कुमार मांडले, पावल मसीह, फते राम चरण, आत्मा चैतू, नवीन मसीह सहित समिति प्रबंधक सुरेश साहू, अश्वनी यादव, राजू निषाद, विजय कुमार, जयंत यदु, सीताराम यादव एवं दाऊलाल सेन उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, कृषक सदस्य एवं ग्रामवासी भी इस अवसर पर एकत्रित हुए, जिससे कार्यक्रम एक जनोत्सव का रूप ले चुका था।

इस अवसर पर अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में अध्यक्ष हेम सिंह चौहान ने कहा कि सहकारिता आंदोलन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यह आंदोलन देश के करोड़ों किसानों, मजदूरों एवं वंचित वर्गों के जीवन में बदलाव लाने का सबसे सशक्त माध्यम रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को साकार करने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि समिति अपने प्रत्येक सदस्य के आर्थिक उत्थान के लिए निरंतर प्रयासरत है। अध्यक्ष चौहान ने सभी किसानों, युवाओं एवं ग्रामवासियों से इन कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने और सहकारिता आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।

उन्होंने उपस्थित कृषक सदस्यों को समिति के व्यवसाय, खाद-बीज वितरण प्रणाली एवं संस्था की उपविधि की विस्तृत जानकारी देते हुए उन्हें इन सुविधाओं का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

सहकारी सप्ताह के आगामी दिनों में समिति द्वारा कार्यक्रमों की एक समृद्ध श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इसमें कृषक संगोष्ठी, वृक्षारोपण अभियान, जैविक खेती एवं जैविक खाद पर व्यावहारिक प्रशिक्षण, खेत बचाओ अभियान, निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) एवं रुपे कार्ड वितरण, विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में निबंध व क्विज प्रतियोगिताएँ तथा “सहकार संकल्प दौड़” जैसे विविध एवं उपयोगी कार्यक्रम शामिल हैं।

कार्यक्रम का समापन अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में राष्ट्रगान एवं सहकारिता के प्रति सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।