ईको-टूरिज्म का आकर्षण: भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ की पहचान
रायपुर/कबीरधाम 30 जून 2026
एक माह में 480 से अधिक पर्यटक पहुंचे सफारी में।छत्तीसगढ़ की भोरमदेव जंगल सफारी राज्य में इको-टूरिज्म का नया आकर्षण बनकर उभरी है। संचालन के पहले ही महीने में 480 से अधिक पर्यटकों ने यहां जंगल सफारी का आनंद लिया, जिससे स्थानीय युवाओं, वन प्रबंधन समिति और स्व-सहायता समूहों को रोजगार और आय के नए अवसर मिले हैं।
वन विभाग के अनुसार सफारी का शुभारंभ 3 मई को किया गया था।
मानसून के कारण 4 जून से इसका संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, जिसे बारिश के बाद नवंबर से फिर शुरू किया जाएगा। एक माह के दौरान सफारी से करीब पौने तीन लाख रुपये की आय हुई।
भोरमदेव जंगल सफारी से स्थानीय स्तर पर रोजगार को भी बढ़ावा मिला है। वाहन चालक, गाइड और गेटकीपर के रूप में कार्यरत 17 स्थानीय युवाओं ने 75 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की। वहीं वन प्रबंधन समिति को 92 हजार रुपये तथा वन विभाग को 26 हजार रुपये से अधिक की आय हुई।
सफारी परिसर में स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित कैंटीन से भी 20 हजार रुपये से अधिक का लाभ हुआ, जिससे महिलाओं की आमदनी बढ़ी है।
करीब 36 किलोमीटर लंबे सफारी मार्ग में पर्यटकों को भारतीय गौर, भालू, नीलगाय, सांभर, बार्किंग डियर, बाघ के पदचिह्न, जंगली मुर्गा, विभिन्न पक्षियों और रंग-बिरंगी तितलियों को देखने का अवसर मिला। घने जंगल और प्राकृतिक सौंदर्य ने पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।
इसके अलावा 1500 से अधिक पर्यटकों ने भोरमदेव के प्राकृतिक उद्यान का भी भ्रमण किया। वन विभाग का कहना है कि लगभग 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले भोरमदेव अभयारण्य की यह पहल प्रकृति संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय आर्थिक विकास का सफल मॉडल बनकर सामने आई है।
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