डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली/महेश्वर – 11 अप्रैल 2026
मध्य प्रदेश और केरल के बीच चर्चा का विषय बनी ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा भोंसले के निकाह मामले में एक सनसनीखेज मोड़ आया है।खबर आ रही है कि, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)की गहन जांच में यह साबित हो गया है कि निकाह के समय मोनालिसा नाबालिग थी। महेश्वर के सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड ने उस फर्जी जन्म प्रमाण पत्र की साजिश को बेनकाब कर दिया है, जिसके आधार पर उसे बालिग बताकर विवाह कराया गया था।
72 घंटे की जांच में खुला राज
NCST के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के नेतृत्व में गठित टीम ने मात्र 72 घंटे के भीतर केरल से लेकर मध्य प्रदेश के गांवों तक कड़ियां जोड़ीं।
जांच में पाया गया कि:
मोनालिसा का वास्तविक जन्म 30 दिसंबर 2009 को महेश्वर के सरकारी अस्पताल में हुआ था। केरल में 11 मार्च 2026 को हुए निकाह के समय उसकी आयु मात्र 16 वर्ष, 2 महीने और 12 दिन थी।विवाह के लिए नगरपालिका महेश्वर से एक फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया गया था, जिसमें जन्म तिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज की गई थी।
साजिश के पीछे बड़े संगठनों का हाथ?
आयोग के समक्ष अधिवक्ता प्रथम दुबे ने दलील दी कि यह केवल एक निजी विवाह नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीतिक साजिश थी। उन्होंने इस मामले में केरल के कुछ राजनीतिक नेताओं और कट्टरपंथी संगठनों की संलिप्तता की ओर इशारा करते हुए इसे “फॉल्स नैरेटिव” सेट करने की कोशिश करार दिया। आयोग ने पाया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर केरल के पुअर गांव की ग्राम पंचायत में विवाह का पंजीकरण कराया गया था।
कड़ी कानूनी कार्रवाई और पुलिस शिकंजा
जांच रिपोर्ट आने के बाद आरोपी फरमान खान के खिलाफ खरगोन जिले के महेश्वर थाने में पॉक्सो (POCSO) एक्ट, बीएनएस और एट्रोसिटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। चूंकि पीड़िता ‘पारधी’ जनजाति से संबंध रखती है, इसलिए मामला और भी संवेदनशील हो गया है।
आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए 22 अप्रैल 2026 को केरल और मध्य प्रदेश के डीजीपी को दिल्ली मुख्यालय में तलब किया है। साथ ही, तीन दिनों के भीतर इस मामले की प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी गई है। इस खुलासे ने केरल पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


