लेख-आलेख/रविवारीय-12/04/2026
हम मान लेते हैं कि जो मिल गया वही मुकद्दर है और जो छूट गया वही मलाल। लेकिन असल में, जिंदगी किसी ढर्रे पर चलने का नाम नहीं, बल्कि हर पल खुद को नए सांचे में ढालने का हुनर है। अगर आपकी कश्ती किनारे पर आकर डूबी है, तो याद रखिए कि किनारा करीब था—अगली बार लहरों को चीरने का जज्बा और भी बड़ा होना चाहिए।
बैसाखियों को छोड़िए, खुद के पैरों पर ऐतबार कीजिए।ज्ञान बिना तर्क के अपाहिज है,खुद से तर्क कीजिए केवल देखिए नहीं ! मूकदर्शक मत बनिए उसमें शरीक हो जाइए मैं तुझमें समा जाऊं तू मुझमें समा जाओ।हमने महसूस किया है कि “चांदनी चांद से होती है, सितारों से नहीं।” जब हम अपनी खुशी का रिमोट कंट्रोल दूसरों के हाथ में दे देते हैं, तो वह सहारा टूटते ही हमारी दुनिया अंधेरी हो जाती है।
स्वयं की चमक: सितारों की तरह केवल चमकिए मत, चांद की तरह खुद की शीतलता पैदा कीजिए।
आत्मनिर्भर जज्बात: अपनी शर्तों पर जीना मुश्किल जरूर है, लेकिन यही वह रास्ता है जहाँ आप ‘बेबस’ नहीं ‘बादशाह’ होते हैं।
उसूलों की बगिया और कांटों का सफर
फूलों भरी बगिया सबको पसंद है, लेकिन गुलाब की खुशबू वही महसूस कर पाता है जिसने कांटों की चुभन को सहा हो।
नजरिया बदलिए: खयाली उसूल उड़ जाएंगे खुशबू बनकर अगर जीवन ठहरा हुआ है, तो उसे एक ‘खूबसूरत मोड़’ देने की जिम्मेदारी आपकी है। पत्थर उठाकर उस शीशी को तोड़ना ही होगा जो पुराने विचारों और निराशाओं से भरी है,शीशी भरी गुलाब की पत्थर से तोड़ दूं।
परिवर्तन का साहस:जो है उसे स्वीकार करना समझौता है, लेकिन जो हो सकता है उसके लिए लड़ना ‘जीना’ है। मौजों के मजदूर बनिए, साहिल के तमाशबीन नहीं।
“तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार”—यह पंक्ति जीवन का सबसे बड़ा मैनेजमेंट मंत्र है।
चुनौतियों का आनंद: जो डूबने से डरते हैं, वे कभी समंदर की गहराई नहीं माप पाते। जिंदगी का असली लुत्फ लहरों से टकराने में है, न कि किनारे पर बैठकर उनके शांत होने का इंतजार करने में।वो लाशें होती है जो तैरती है जिंदगी का मजा तो डूबने में है।
जोश और जुनून: जब खोने के लिए कुछ न हो, तो पाने के लिए पूरा ब्रह्मांड खुला होता है। अपनी नाकामियों को ‘सीख’ का नाम दीजिए और फिर से मैदान में उतरिए।
लाइफस्टाइल में नयापन कैसे लाएं?
जिंदगी को नया मोड़ देने के लिए आपको अपनी रोजमर्रा की सोच में कुछ बदलाव करने होंगे ।स्थिति ,यह है कि पुराना ढर्रा (निराशा) पर बैठी है इसे नया मोड़ (जोश) दीजिए।
असफलता:- यह मेरा अंत है। यह एक नई शुरुआत का संकेत है।
अकेलापन– मैं तन्हा और उदास हूँ। | यह खुद को जानने का सुनहरा समय है।
मुश्किलें-मेरी किस्मत ही खराब है। | “आज सिंधु ने विष उगला है”, मैं इसे पीकर नीलकंठ बनूँगा। |
भविष्य– क्या होगा, पता नहीं। | मैं अपना रास्ता खुद बनाऊँगा। |
हौसला मंदों की ही होती है दुनिया ।चिड़िया आकाश में अपने हौसले से उड़ती है कोई विज्ञान से नहीं_
जिंदगी गुमसुम और गुमनाम तब तक है जब तक आप अंधेरे कमरे की खिड़की नहीं खोलते। उजाला बाहर खड़ा आपका इंतजार कर रहा है, बस आपको एक कदम बढ़ाने की हिम्मत जुटानी है।
याद रखिए, जिंदगी हौसलामंद और हुनरमंद इंसान को ही सलाम करती है। हारना तब नहीं होता जब आप गिर जाते हैं, हारना तब होता है जब आप उठने से इनकार कर देते हैं। तो उठिए, अपनी कश्ती को तूफानों की ओर मोड़िए और दिखा दीजिए इस कायनात को कि आप हारने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया को जीतने के लिए पैदा हुए हैं।
एक आखिरी विचार:होेंगे वो कोई और जो थक कर बैठ जाते हैं, हमें तो लहरों की सरकशी में ही घर बनाना आता है।


