पैलेट गन के इस्तेमाल पर लगे बैन: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, मुआवजे की भी मांग
नई दिल्ली:नई दिल्ली – 28 जुलाई 2026
याचिका में कहा गया है कि पैलेट गन (.12 बोर की पंप-एक्शन गन) से छूटने वाले 250 से 400 धातु के छर्रों का कोई निश्चित रास्ता नहीं होता। फायर होने के बाद ये एक बड़े इलाके में फैल जाते हैं, जिससे प्रदर्शनकारियों की आँखों और महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचता है।
देश में नागरिक प्रदर्शनों और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पैलेट गन (छर्रे वाली बंदूक) के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर देशभर में कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा पैलेट गन के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने या इसे सेवा से बाहर करने की मांग की गई है।
अनिश्चित गति और घातक रास्ता:
यह याचिका इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर और पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद और हाल ही में दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन की चपेट में आकर घायल हुए दो पीड़ितों (प्रशांत कुमार और शेख इर्शाद मंसूरी) द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई है।
याचिका में क्या दी गई हैं दलीलें?
वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर के माध्यम से दायर इस याचिका में पैलेट गन के इस्तेमाल को असंवैधानिक, मनमाना और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन बताया गया है। याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क है:
न्यूनतम बल के सिद्धांत के खिलाफ: यह हथियार कानून के तहत तय किए गए ‘जरूरी बल के न्यूनतम इस्तेमाल’ (Least amount of necessary force) के पैमाने पर पूरी तरह गलत साबित होता है।
अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस का उल्लंघन: याचिका में संयुक्त राष्ट्र (UN) की 2020 की गाइडलाइंस का भी हवाला दिया गया है, जो नागरिक भीड़ के खिलाफ इस तरह के ‘कम घातक हथियारों’ (Less-lethal weapons) के इस्तेमाल को अनुचित मानती हैं।
20 जुलाई के दिल्ली प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
यह कानूनी कदम दिल्ली में 20 जुलाई को नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसक झड़प के बाद उठाया गया है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि दिल्ली के कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर के पास जब प्रदर्शनकारी पीछे हट रहे थे, तब रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों ने बिना किसी पूर्व चेतावनी या वाटर कैनन के इस्तेमाल के सीधे पैलेट गन से फायरिंग कर दी।
याचिका में 20 जुलाई की घटना में घायल हुए सभी पीड़ितों को सम्मानजनक मुआवजा, मुफ्त और दीर्घकालिक इलाज तथा पुनर्वास की सुविधा देने की मांग भी की गई है।
सुरक्षा एजेंसियों का रुख और अब तक की कार्रवाई
इस पूरे मामले पर सुरक्षा बलों और पुलिस का मिला-जुला रुख देखने को मिला है:
दिल्ली पुलिस का इनकार: India Today की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने शुरू से ही इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि उनके पास पैलेट गन हैं ही नहीं और ये दावे पूरी तरह भ्रामक हैं।
RAF का बड़ा कदम:
हालांकि, भारी विवाद और मेडिकल रिपोर्ट्स में प्रदर्शनकारियों को छर्रे लगने की पुष्टि होने के बाद, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की महानिरीक्षक (IG) सीमा धुंधिया ने सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान पैलेट गन और इलेक्ट्रिक शॉक बैटन के इस्तेमाल पर अस्थायी रोक लगा दी है और सुरक्षाबलों को ‘सेंसिटिव पुलिसिंग’ का पालन करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर आने वाले दिनों में सुनवाई कर सकता है, जिसके बाद ही देश में नागरिक प्रदर्शनों के दौरान भीड़ नियंत्रण के नियमों में कोई स्थायी बदलाव या गाइडलाइंस साफ हो पाएंगी।
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