रायपुर, 07 मई 2026
छत्तीसगढ़ की बेटियां अब सपने देखना ही नहीं, उन्हें पूरा करना भी सीख रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में “संकल्प से सिद्धि” की भावना के साथ चलाई जा रही सरस्वती साइकिल योजना ने प्रदेश की बेटियों की शिक्षा की दिशा ही बदल दी है।
राज्य में उच्च माध्यमिक स्तर पर छात्राओं का नामांकन अब 73.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो राष्ट्रीय औसत 58.2 प्रतिशत से कहीं आगे है। यह महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन हजारों बेटियों के हौसले की कहानी है जो कभी दूरी और संसाधनों की कमी के कारण स्कूल का रास्ता छोड़ देती थीं।
ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में स्कूल की दूरी बालिका शिक्षा की सबसे बड़ी बाधा रही है। कक्षा 9वीं में प्रवेश के साथ ही मुफ्त साइकिल मिलने से यह भौगोलिक रुकावट दूर हो गई। अब दूरदराज के गांवों की छात्राएं भी आत्मविश्वास के साथ उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक पहुंच रही हैं। ड्रॉप-आउट दर में भारी कमी और उपस्थिति में उल्लेखनीय सुधार इसका प्रमाण है।
शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 1.5 लाख साइकिलों के वितरण का लक्ष्य लगभग पूर्ण हो चुका है।
वर्ष 2010-11 में जहां उच्च माध्यमिक स्तर पर छात्राओं का नामांकन मात्र 33.5 प्रतिशत था, वह 2021-22 तक 68.1 प्रतिशत और अब 73.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 2004-05 में शुरू हुई यह योजना दिसंबर 2023 में साय सरकार के आते ही नई ऊर्जा के साथ पुनः लागू की गई।
मुख्यमंत्री का संकल्प स्पष्ट है — “छत्तीसगढ़ की बेटियां, विशेषकर आदिवासी अंचलों की छात्राएं, शिक्षा में देश के किसी भी राज्य से पीछे न रहें।”
छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि यह साबित करती है कि संवेदनशील नीति और दृढ़ नेतृत्व मिलें, तो एक साइकिल भी सामाजिक बदलाव की धुरी बन सकती है।
छत्तीसगढ़ की बेटियों की शिक्षा में ऊंची उड़ान: साइकिल ने बदली तस्वीर


