जहाँ कभी गूँजती थीं गोलियाँ, वहाँ अब गूँज रहा है प्रगति का जयघोष।”
राज्योत्सव/36 गढ़/23/10/2025
छत्तीसगढ़ स्थापना महोत्सव इस वर्ष दिवाली की तरह पाँच दिनों तक जगमगाएगा — यह सिर्फ उत्सव नहीं, राज्य की आत्मा का उत्सव है। 1 नवंबर को जब छत्तीसगढ़ अपने 25वें स्थापना दिवस की दहलीज़ पर कदम रखेगा, तब पूरा देश इस नवोदित राज्य की चमक को नमन करेगा। प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति का इस महोत्सव में उपस्थित होना, इस धरती की बढ़ती राष्ट्रीय पहचान का प्रमाण है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में पहली बार राज्योत्सव पर भव्य एयर शो का आयोजन होगा, जो भारतीय वायुसेना की वीरता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बनेगा।
वह छत्तीसगढ़, जो कभी नक्सल छाया में सिमटा ‘बीमारू’ राज्य कहा जाता था, आज विकास और स्थिरता के मार्ग पर दृढ़ता से आगे है। यहां की सरकार ने जनकल्याण योजनाओं का ऐसा तंत्र तैयार किया है, जिसका सीधा लाभ गांवों से लेकर शहरों तक लोगों को मिल रहा है। यह परिवर्तनभरा दौर है जहाँ छत्तीसगढ़ अब करवट नहीं बदल रहा, बल्कि अपने पैरों पर खड़ा होकर देश के सामने विकास की मिसाल बन रहा है। इस जनशक्ति और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का संगम ही नए युग का छत्तीसगढ़ रच रहा है।
कभी ‘अन्न के लिए तरसने वाला’ यह प्रदेश आज अन्नदाता के नाम से पहचाना जा रहा है। खेतों में लहलहाती हरियाली और घर-घर तक पहुँचता मुफ्त राशन राज्य की समृद्धि का प्रतिबिंब है। अब छत्तीसगढ़ किसी और की पहचान पर नहीं टिका, उसने अपनी पहचान स्वयं गढ़ ली है। यही कारण है कि जब भी राज्य ने सहयोग माँगा, प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक सबने छत्तीसगढ़ की पुकार को प्राथमिकता दी — क्योंकि यह राज्य सिर्फ भूगोल नहीं, एक जीवंत विकास यात्रा है।
आज छत्तीसगढ़ संभावनाओं का गढ़ है — जहाँ युवाओं के हाथों में रोजगार की ताकत है, महिलाओं में आत्मनिर्भरता का उजाला है, और समाज में शांति की नई चेतना प्रस्फुटित हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व में राज्य नक्सल उन्मूलन की दिशा में निर्णायक कदम उठा चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का यह संकल्प कि “2026 की शुरुआत तक छत्तीसगढ़ पूरी तरह नक्सल-मुक्त होगा” अब साकार रूप लेने जा रहा है। वाकई, जब प्रशासन चुस्त हो, संकल्प स्पष्ट हो और जनता एकजुट हो — तो फिर कोई ताकत छत्तीसगढ़ को ‘विकास का गढ़’ बनने से नहीं रोक सकती।


