नकली दवाओं का ‘साइलेंट किलर’ नेटवर्क: 50% छूट, 90+ अस्पताल और जिंदगी पर सौदा!
न्यूज डेस्क 15 सितंबर 2026
गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाला यह रैकेट इशारा करता है कि नकली दवाओं का यह जाल अभी कई और राज्यों के बड़े अस्पतालों तक फैल सकता है।
कैंसर और आईसीयू की लाइफ-सेविंग (जीवनरक्षक) दवाओं के नाम पर चल रहे देश के संभवतः सबसे बड़े और खौफनाक रैकेट का खुलासा हुआ है। बेंगलुरु में एसआईटी (SIT) और ड्रग्स कंट्रोल विभाग की संयुक्त कार्रवाई ने जो परतें खोली हैं, वे सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका नेटवर्क पूरे देश के स्वास्थ्य तंत्र पर गहरा सवाल खड़ा करता है।
ऑपरेशन बिदादी से कृपा हेल्थकेयर तक: 18 अगस्त को बेंगलुरु के बिदादी और दोद्देरी स्थित एक फार्महाउस पर छापेमारी से इस रैकेट की पहली कड़ी जुड़ी। वहां से लगभग 5 करोड़ रुपये की संदिग्ध नकली दवाएं, फर्जी इनवॉइस, इंजेक्शन भरने के उपकरण और नामी कंपनियों के नकली लेबल जब्त किए गए। इसके बाद कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र के 10 ठिकानों पर की गई तलाशी ने जांच का दायरा मिनर्वा सर्कल स्थित ‘कृपा हेल्थकेयर’ तक पहुंचा दिया।
मोडस ऑपरेंडी: कम कीमत और एक्सपायर्ड दवाओं का ‘रीब्रांडिंग’ खेल:
फर्जीवाड़ा: गिरोह सस्ती या एक्सपायर हो चुकी दवाओं को खरीदकर उन पर महंगी लाइफ-सेविंग दवाओं के नकली लेबल चिपका देता था।
अस्पतालों की सांठगांठ: 50 फीसदी तक के भारी डिस्काउंट का लालच देकर यह नकली स्टॉक 90 से ज्यादा अस्पतालों, क्लीनिकों और मेडिकल स्टोर्स तक पहुंचाया गया।
नेटवर्क: इस पूरे काले कारोबार को चलाने के लिए 15 से ज्यादा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स (MRs) और बिचौलियों के इस्तेमाल का अंदेशा है।
जांच की मौजूदा स्थिति: मामले में कृपा हेल्थकेयर का संचालक वीरेश कुमार गिरफ्तार हो चुका है, जो पिछले 5 सालों से मुख्य मास्टरमाइंड प्रशांत (फिलहाल फरार) के साथ मिलकर यह धंधा चला रहा था।
एसआईटी प्रमुख के मुताबिक, बैंक लेनदेन और सप्लाई चेन के दस्तावेजों की जांच जारी है।
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