त्यौहार विशेष: औरतों का ‘अदृश्य’ साम्राज्य और त्योहारों का ऑल-इन-वन रिचार्ज
न्यूज आर्टिकल 15 सितंबर 2026
दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों को अगर किसी बात का हल नहीं मिला, तो वो है भारतीय महिला का मन! भारतीय औरत समाज का मुख्य केंद्र बिंदु होती है, लेकिन उसे केंद्र में बैठकर हुकूमत चलाने का कोई खास शौक नहीं होता। वो राज्यों में बंटे भारत देश की तरह अपनी जिम्मेदारियों में बंटी रहना पसंद करती है।
थोड़ा ध्यान किचन में, थोड़ा बच्चों के करियर में, थोड़ा सास की सेहत में और थोड़ा मोहल्ले की गॉसिप में!
महिलाओं के इस ‘विकेंद्रित’ स्वभाव का सबसे बड़ा सबूत हैं हमारे देश के त्योहार। सच मानिए, अगर देश में महिलाएं न हों, तो सारे त्योहार कैलेंडर की तारीखों में ही सिमटकर रह जाएं। पुरुष तो त्योहार के नाम पर बस एक दिन की छुट्टी तलाशते हैं, लेकिन उसे जीवंत बनाती हैं महिलाएं।
हाल ही में गया तीजा और हरतालिका तीज। 24 घंटे बिना पानी पिए, बिना अन्न का एक दाना खाए महिलाएं उपवास रखती हैं। अब पुरुषों को लगता है कि ये सब उनके लंबे जीवन के लिए हो रहा है, लेकिन इसका असली हास्य-रस तो यह है कि यह 12 महीने का हिसाब-किताब बराबर करने का तरीका है! 24 घंटे की तपस्या करके वो सालभर की अपनी हर बात मनवाने का ‘कोटा’ बुक करा लेती हैं।
अब आगे करवा चौथ और दिवाली की कतार है। करवा चौथ पर पत्नियों की मांग सीधी और स्पष्ट होती है—पतिदेव का ‘दिवाली बोनस’! बोनस जेब में आते ही हर चौखट पर दीया जल उठता है और घर का अंधेरा गायब हो जाता है।
महिलाएं दिवाली इसलिए मनाती हैं ताकि घर में खुशहाली आए, रौनक आए और पूरा परिवार एक साथ झूम उठे। शास्त्रों में ठीक ही कहा गया है—’यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’। जहां नारियों का सम्मान होता है, वहां देवता भी नतमस्तक हो जाते हैं।
आखिर देवताओं को भी पता है कि अगर देवी जी रुठ गईं, तो घर का शांति-बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा!
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी से लेकर आज और कल यही गीत गुनगुनाते रहे तो जिंदगी में मजा ही मजा। तुम ही हो माता, पिता तुम ही हो। तुम ही हो बंधु, सखा तुम ही हो॥ तुम ही हो साथी, तुम ही सहारे…।”
- Advertisement -
- Advertisement -