माताओं ने संतानों की सुख-समृद्धि के लिए रखा कमरछठ व्रत, हलषष्ठी पूजा में उमड़ी श्रद्धा
रायपुर – 03 सितंबर 2026
भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी, 2 सितंबर को मठपारा रायपुर में माताओं ने अपनी संतानों की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना से हलषष्ठी व्रत रखा। छत्तीसगढ़ में यह पर्व कमरछठ के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर श्री दूधाधारी मठ सत्संग भवन में विधि-विधान से हलषष्ठी महारानी की पूजा-अर्चना की गई।
हिंदू धर्म में हलषष्ठी व्रत को संतान के मंगल और उनकी लंबी आयु की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं तथा परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। माताएं संतान के प्रति अपने वात्सल्य और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना के प्रतीक के रूप में यह कठिन व्रत रखती हैं। इसी कारण इस पर्व में महिलाओं की विशेष भूमिका मानी गई है।
पूजन में भैंस के दूध, घी और दही सहित हल से न जोते गए स्थान से प्राप्त अनाज, साग-सब्जियों का उपयोग किया गया। पूजा-अर्चना पंडित राजीव लोचन त्रिपाठी, जय शुक्ला और अंकुश दुबे ने संपन्न कराई।
इस अवसर पर श्रीमती पांडे, सुधा ओझा, संध्या वैष्णव, पूजा, भावना, लक्की दुबे, सती साहू, रोशनी, बुटिया कर्ष सहित बड़ी संख्या में मोहल्ले की माताएं शामिल हुईं।
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