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Wednesday, September 2, 2026

करेंसी अब कागज से प्लास्टिक की ओर – RBI के ₹10 और ₹20 वाले नए नोट

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न्यूज डेस्क – 01/09/2026

सरकार ने भी RBI के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है कि शुरुआत में ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल किया जाए। ये अभी बाजार में नहीं आए हैं, अभी सिर्फ सैंपल और टेस्टिंग का दौर चल रहा है।

भारत में जल्द ही आपकी जेब में जो ₹10 और ₹20 का नोट होगा, वो कागज का नहीं बल्कि प्लास्टिक यानी पॉलीमर का हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस दिशा में सबसे बड़ा कदम उठा दिया है।

आखिर हुआ क्या है?
RBI छोटे नोटों को ज्यादा टिकाऊ बनाना चाहता है। इसके लिए उसकी अपनी कंपनी BRBNMPL (भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्रा. लि.) ने पॉलीमर शीट खरीदने के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है। f095

शुरुआत में करीब 68,000 रीम पॉलीमर शीट की जरूरत बताई गई है। एक रीम में 500 शीट होती हैं। इन शीट्स को भारत के अलग-अलग मौसम – गर्मी, सर्दी, नमी वाले इलाकों में परखा जाएगा।

RBI ने छोटे नोटों को ही क्यों चुना?
इसका सीधा गणित है:
₹10 और ₹20 के नोट सबसे ज्यादा हाथों में घूमते हैं।ये सबसे जल्दी गंदे, फटे और खराब होते हैं।RBI को इन्हें बार-बार छापना पड़ता है, जिससे खर्च बढ़ता है। अगर पॉलीमर नोट 5-6 गुना ज्यादा चल जाए तो छपाई का खर्च और बार-बार नोट बदलने का झंझट दोनों कम होंगे।

इस बार टेंडर की दो शर्तें सबसे अलग क्यों हैं?RBI ने इस बार दो सख्त शर्तें रखी हैं:

पहली – चीन-पाकिस्तान से दूरी: बोली लगाने वाली कंपनी को हलफनामा देना होगा कि भारत में उसका काम चीन और पाकिस्तान से पूरी तरह अलग है। ये राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम है।

दूसरी – जानवरों की चर्बी नहीं: कंपनी को साबित करना होगा कि पॉलीमर शीट में किसी जानवर की चर्बी या DNA नहीं है। दरअसल, ब्रिटेन में जब पॉलीमर नोट आए थे तो उनमें जानवरों की चर्बी होने पर विवाद हुआ था। RBI पहले से ही इस विवाद से बचना चाहता है।

दौड़ में कौन-कौन है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक तीन कंपनियों ने बोली लगाई है:
कॉस्मो फर्स्ट (भारत) + डी ला रू (ब्रिटेन): भारत की सबसे बड़ी BOPP एक्सपोर्टर कंपनी, तकनीक ब्रिटेन की मशहूर नोट छापने वाली कंपनी देगी।
CCL Secure (ऑस्ट्रेलिया): दुनिया के 40 से ज्यादा देशों को पॉलीमर नोट देती है, दावा है कि इनके नोट कागज से 6 गुना टिकाऊ होते हैं।
Q&T Hi-Tech Polymer (वियतनाम): दावा है कि इनकी तकनीक से नोट बनाने की लागत कॉटन वाले नोट से 78% तक कम होगी।

पॉलीमर नोट में खास क्या होगा? – आम भाषा में
टिकाऊ: आसानी से फटेगा नहीं, 15 साल तक चलने का अनुमान है।
पानी से बचाव: पानी, पसीना, नमी से खराब नहीं होगा। धोने पर भी चल सकता है।
नकली नोट पर रोक: इसमें बीच में पारदर्शी खिड़की (Window Transparency) जैसे फीचर होंगे, जिसे नकली बनाना बहुत मुश्किल है।
साफ-सुथरा: गंदगी कम चिपकेगी।

चुनौती क्या है?
महंगा शुरू में: पॉलीमर शीट बनाना शुरू में कागज से महंगा है।
आम आदमी की आदत: दुकानदार, ऑटो वाले क्या इसे आसानी से स्वीकार करेंगे? पहले जब प्लास्टिक के ₹10 के नोट का ट्रायल हुआ था तो कई जगह मशीनों ने इसे नहीं पकड़ा था।
गर्मी का असर: भारत में 45 डिग्री गर्मी में पॉकेट में रखा नोट सिकुड़ तो नहीं जाएगा, यही टेस्टिंग से पता चलेगा।

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