मन की बात- 30 अगस्त 2026
मन की बात में प्रधानमंत्री का संबोधन स्पष्ट संकेत देता है कि भारत की विकास यात्रा केवल सरकारी योजनाओं से तय नहीं होगी,इसमें जनभागीदारी, स्वदेशी अपनाने का संकल्प और युवाओं को सही दिशा में ले जाने की सामाजिक जिम्मेदारी सबसे अहम स्तंभ हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ केवल एक संबोधन मात्र नहीं, बल्कि देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक बदलावों की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है।
हालिया संबोधन में प्रधानमंत्री ने इतिहास की डिजिटल पहुँच से लेकर स्वास्थ्य, पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था तक—देश की प्रगति के विभिन्न आयामों को रेखांकित किया।इतिहास की नई डिजिटल दृष्टि और नशामुक्त युवा भारतइतिहास को रुचिपूर्ण बनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘bharatrajya.com’ जैसी पहलों का जिक्र किया, जो देशवासियों को यह समझने में मदद करती हैं कि अतीत में भारत के किस भू-भाग पर किसका शासन था।
सामाजिक सरोकार के तहत उन्होंने ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत‘ अभियान पर विशेष बल दिया। युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखना एक विकसित राष्ट्र की पहली शर्त है। यह अभियान तभी सफल हो सकता है जब संपूर्ण समाज एकजुट होकर इस दिशा में अपनी भूमिका निभाए।
महिला सशक्तिकरण और आस्था के साथ स्वच्छता’PM स्वनिधि योजना’ के आंकड़ों से सामाजिक समावेश की स्पष्ट झलक मिलती है, जहाँ लगभग 46 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ हैं। यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर आर्थिक आत्मनिर्भरता में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।
आस्था और पर्यावरण के संतुलन को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने अमरनाथ यात्रा का उल्लेख किया। जहाँ कठिन परिस्थितियों के बावजूद हजारों स्वच्छता कर्मियों ने 400 मीट्रिक टन से अधिक कचरे को इकट्ठा कर प्रोसेस किया। यह पहल साबित करती है कि स्वच्छता भी सेवा और आस्था का ही एक रूप है।
प्रकृति, नवाचार और महानायक को नमनपर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका के नए रास्ते तलाशने में मैथिली और देबरीगढ़ की बहनों का प्रयास एक अनुकरणीय उदाहरण बना है। वहीं कर्नाटक के चिक्कमगलुरु के किसानों ने कॉफी प्लांटेशन के बीच एवोकाडो उगाने का नवाचार कर अपनी आय बढ़ाने का नया मार्ग खोजा है।
संबोधन में कला और संस्कृति के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए महान अभिनेता उत्तम कुमार को श्रद्धांजलि दी गई। उनके सहज अभिनय और परोपकारी स्वभाव को याद करते हुए उनके योगदान को नमन किया गया।त्योहारों का मौसम और ‘वोकल फॉर लोकल’ का विजनआगामी पर्वों—जन्माष्टमी, विश्वकर्मा पूजा और दीपावली—की शुभकामनाएँ देते हुए प्रधानमंत्री ने समाज का निर्माण करने वाले कारीगरों और शिल्पकारों के सम्मान का आह्वान किया।


