गुरु पूर्णिमा पर बेमेतरा में संत रविदास का स्मरण: ‘बेगमपुरा’ और सामाजिक समानता के संदेश पर हुई चर्चा
बेमेतरा- 29 जुलाई 2026
आज गुरु पूर्णिमा दिवस है।भारत में पूरे देश भर में गुरु पूर्णिमा को विशेष रूप से मनाया जा रहा है।गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बेमेतरा नगर पालिका की टीम द्वारा संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के मंदिर परिसर (चबूतरे) में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित नगर पालिका प्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने संत रविदास जी के चित्र पर नमन कर उनके विचारों और दर्शन को याद किया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि संत रविदास जी का अमर संदेश “मन चंगा तो कठौती में गंगा” आज के दौर में भी प्रासंगिक है। उनके विचार समाज को समरसता, समानता और भाईचारे का मार्ग दिखाते हैं।
संत रविदास के मुख्य विचार और ‘बेगमपुरा’ की परिकल्पना
कार्यक्रम के दौरान संत रविदास जी के प्रमुख सिद्धांतों पर प्रकाश डाला गया:
समरसता और पोषण: “ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न” — अर्थात एक ऐसा समाज जहाँ कोई भूखा न सोए और सभी को अधिकार मिले।
समानता: जाति-पाति और ऊँच-नीच के भेदभाव को मिटाकर केवल मानवता को प्राथमिकता देना।
श्रम और भक्ति: ईमानदारी की मेहनत और सच्चे मन से की गई भक्ति ही ईश्वर की सच्ची पूजा है।
वक्ताओं ने संत रविदास जी द्वारा रचित ‘बेगमपुरा’ (दुख-रहित शहर) के विचार को रेखांकित करते हुए कहा कि बेगमपुरा एक ऐसे आदर्श समाज का प्रतीक है, जो जातिगत भेदभाव, शोषण और पीड़ा से पूरी तरह मुक्त हो।
इस अवसर पर विकास तंबोली,नीतू कोठारी,निशा चौबे,लक्की साहू, आकिब मलकानी समेत वार्ड वासी शामिल रहे।
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समाज में गुरु और नैतिक शिक्षा की आवश्यकता
संगोष्ठी में वर्तमान समय में नैतिक शिक्षा के महत्व पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आज जब शिक्षा में व्यावसायिकता बढ़ रही है, ऐसे समय में संत रविदास जैसे महान गुरुओं के नैतिक और सामाजिक विचार ही समाज और युवा पीढ़ी को सही दिशा दिखा सकते हैं। गुरु का स्थान समाज में सर्वोपरि है, जो अज्ञानता का अंधकार मिटाकर समानता और न्याय का मार्ग प्रशस्त करता है।
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