डिजिटल-न्यूज-डेस्क/ 16 जुलाई 2026
ग्रामीण परिवेश की चौपाल। पेड़ के नीचे बिछी खाट पर गंभीर मुद्रा में ज्योतिपति बैठे हैं। तभी लाठी टेकते और कुर्ता-धोती संभाले ज्वाला सिंह राम-राम करते हुए चौपाल में प्रवेश करते हैं।
ज्वाला सिंह: (लाठी टिकाते हुए, ज़ोर से) राम-राम ज्योतिपति जी! कहो, आज का क्या विचार है? एक तरफ भारत आज भी अपने सेक्यूलर होने के करार को निभा रहा है, और दूसरी तरफ दुनिया को देखो—अमेरिका और ईरान न्यूक्लियर वॉर (परमाणु युद्ध) की कगार पर खड़े हैं!
ज्योतिपति: (आदर से हाथ जोड़कर) राम-राम ज्वाला भाई, आओ बैठो। तुमने बात तो बड़ी पते की उठाई है। सच कहें तो तमाशा देखो… दुनिया न्यूक्लियर वॉर की तरफ बढ़ रही है, सालों से विदेशी मुल्क आपस में लड़ रहे हैं, और हम? हम आज भी अपनी ही घरेलू समस्याओं को सुलझाने में उलझे हैं।
ज्वाला सिंह:(खाट के कोने पर बैठते हुए) यही तो कसक है ज्योतिपति जी। हम किताबों में पढ़ते आ रहे हैं कि भारत की एकता और अखंडता अक्षुण्ण है। लेकिन जब भी चुनाव आता है या धर्म की बात होती है, तो यह देश कई टुकड़ों में बंटा हुआ दिखने लगता है। हम कभी राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर एकमत क्यों नहीं हो पाए?
ज्योतिपति: (गंभीर होकर) इतिहास गवाह है ज्वाला। हमारा देश पहले भी राजाओं और राजवंशों के आपसी झगड़ों में बंटा हुआ था। इसी फूट का फायदा विदेशी आक्रमणकारियों ने भरपूर उठाया। एक-एक खंड को जीता, हमारी अखंडता को खंडित किया और करीब 800 सालों तक इस पूरे भू-भाग को अस्थिर करके रख दिया।
ज्वाला सिंह:(आंखों में चमक लाते हुए) सोने की चिड़िया! हां भाई, सोना तो यहां इतना था कि आज भी गिनने बैठो तो हज़ारों से ऊपर स्वर्ण मंदिर निकल आएंगे। लेकिन जब 1947 में आज़ादी मिली, तो बदले में क्या मिला? भयंकर त्रासदी! देश के दो टुकड़े हो गए, न पीने को साफ पानी था, न खाने को अनाज। आर्थिक रूप से हमें बेहद कमजोर कर दिया गया था।
ज्योतिपति:(सहमति में सिर हिलाते हुए) बात सही है, लेकिन हताश मत हो ज्वाला। आज हम जो भारत देख रहे हैं, वो भले ही हमारा वो पुराना भारत न हो, लेकिन यह एक नया, आधुनिक भारत है। इसमें उन अच्छे नेताओं का योगदान सर्वोपरि है जिन्होंने देश को आगे ले जाने में बहुत मेहनत की।
ज्वाला सिंह: (जेब से अखबार निकालते हुए) नेताओं की बात की तो सुनो, आज के अखबार में उत्तर प्रदेश की सियासी सरगर्मी छाई हुई है। ‘पंचायत आजतक’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष की सेक्युलर राजनीति पर सीधा हमला बोला है।
ज्योतिपति: (उत्सुकता से आगे झुकते हुए) अच्छा? महाराज जी ने क्या कह दिया ऐसा?
ज्वाला सिंह: (अखबार की पंक्तियों पर उंगली फेरते हुए) उन्होंने कहा कि अगर अयोध्या के हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ाने का काम किया गया था, तो फिर किसी मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ भी कराया जाना चाहिए था! उन्होंने याद दिलाया कि पहले उत्तर प्रदेश में पर्व और त्योहारों के दौरान अक्सर तनाव, पथराव और कर्फ्यू की स्थिति बन जाती थी।
ज्योतिपति: (गंभीरता से सुनते हुए) उफ! वो दिन तो वाकई चिंताजनक थे, त्योहार आते ही लोग सहम जाते थे।
ज्वाला सिंह: बिल्कुल! लेकिन सीएम योगी ने कहा कि अब माहौल पूरी तरह बदल चुका है। चाहे हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो या ईसाई—सब बिना किसी डर और व्यवधान के अपने त्योहार मना रहे हैं। लोग जब शांतिपूर्ण आयोजन के लिए उन्हें धन्यवाद देने जाते हैं, तो वो कहते हैं कि ‘9 साल बाद अब इसके लिए धन्यवाद देने की ज़रूरत नहीं, यह तो सरकार का दायित्व है कि हर नागरिक को सुरक्षित माहौल दे।’ उन्होंने साफ किया कि मुख्यमंत्री बनने के पहले दिन से ही उनका पहला एजेंडा यही था कि हर पर्व शांति से मने।
ज्योतिपति: (उत्सुकता से पूछते हुए) वैसे कांवड़ यात्रा भी तो शुरू होने वाली है न?
ज्वाला सिंह: (मुस्कुराते हुए) हां, उसी पर तो तंज कसा है उन्होंने! बिना नाम लिए अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए बोले कि पहले जो लोग पथराव रोकने के नाम पर कांवड़ यात्रा, रामनवमी की शोभायात्रा, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और दुर्गा पूजा पंडालों पर रोक लगाने की बात करते थे, आज वो खुद आस्था की बात कर रहे हैं। यह देखना बेहद हास्यास्पद लगता है।
ज्योतिपति: (गहरी सोच में डूबते हुए) तो बात घूम-फिरकर वहीं आ गई ज्वाला भाई… चाहे बात वैश्विक स्तर पर परमाणु युद्ध की हो या अपने देश के भीतर की राजनीति की, देश तभी मजबूत होगा जब आंतरिक सुरक्षा और समरसता बनी रहे। अब देखना यह है कि जनता इस बदलते नए भारत में देश को कहां ले जाती है!


