पंपों में इथेनॉल वाला पेट्रोल : अनिवार्य E-20 पर बवाल क्यों, और सरकार का जवाब क्या है?
डिजिटल डेस्क/12 जुलाई 2026
अधिसूचना के मुताबिक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में BIS मानकों के तहत 20% इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल की ही सप्लाई होगी। सरकार का तर्क साफ है – तेल आयात घटाना, प्रदूषण कम करना और किसानों की आमदनी बढ़ाना। सरकार का अगला लक्ष्य इसे E85 और E100 तक ले जाना है ताकि गाड़ियां पेट्रोल के बिना भी दौड़ सकें।
पेट्रोल पंप पर अब आपके पास विकल्प नहीं बचा है। केंद्र सरकार ने 17 फरवरी 2026 की अधिसूचना के बाद 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में E20 पेट्रोल बेचना अनिवार्य कर दिया है। यानी अब सभी तेल कंपनियों को न्यूनतम 95 RON वाला, 20% इथेनॉल मिला पेट्रोल ही बेचना होगा।
फिर विवाद कहां से शुरू हुआ?
जैसे ही E20 अनिवार्य हुआ, सोशल मीडिया पर दो तरह की पोस्ट वायरल हो गईं:
लोगों की शिकायतें:
X, Facebook और Instagram पर हजारों यूजर्स ने दावा किया कि E20 डालने के बाद माइलेज 10-15% गिर गया, पुरानी बाइक-कार में स्टार्टिंग की समस्या, रबर पाइप और फ्यूल पंप खराब हो रहे हैं। कई मैकेनिकों के वीडियो में कहा गया कि 2015-2020 की गाड़ियां E10 के लिए बनी हैं, E20 के लिए नहीं।
बीमा को लेकर डर:
अफवाह उड़ी कि E20 से गाड़ी खराब हुई तो इंश्योरेंस कंपनी क्लेम रिजेक्ट कर देगी।
सरकार को इस पर दो स्तर पर सफाई देनी पड़ी।
PIB फैक्ट चेक ने आधिकारिक तौर पर कहा कि E20 से बीमा पॉलिसी पर कोई असर नहीं पड़ेगा, ये दावे पूरी तरह फर्जी हैं।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा कि E20 से वाहनों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता, विवाद बेबुनियाद है।
नितिन गडकरी की सीधी चुनौती – “गाड़ी लाकर दिखाओ”
सबसे तीखा बयान केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का रहा। SIAM के सालाना सम्मेलन में उन्होंने कहा कि E20 को लेकर कोई तकनीकी समस्या नहीं है।
खबर सूत्रों के कथन पर
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने आरोप लगाया कि उनके और सरकार के खिलाफ “पैसे देकर सोशल मीडिया कैंपेन चलाया जा रहा है, ये राजनीतिक रूप से प्रेरित है”।
उन्होंने दो टूक कहा कि एक “पेट्रोलियम लॉबी” जानबूझकर भ्रम फैला रही है कि E20 इंजन को नुकसान पहुंचाता है, जबकि भारत और दुनिया में इसका सफल प्रयोग हो चुका है।
प्राप्त खबर सूचना के आधार पर
एक अन्य कार्यक्रम में उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा – “अगर किसी की गाड़ी E20 से खराब हुई है, तो उसे सामने लाएं, सबके सामने टेस्ट कराएंगे।” यही बयान अब हेडलाइन बन गया है।
सरकार ने संसद में भी स्पष्ट किया था कि अप्रैल 2023 के बाद बनी सभी गाड़ियां E20 कम्पैटिबल हैं, और BIS और ऑटो इंडस्ट्री के टेस्ट में E20 से स्टार्टिंग या प्लास्टिक-मेटल पार्ट्स पर कोई बुरा असर नहीं मिला है।
जमीन पर लोगों की प्रतिक्रिया क्या कहती है?
समर्थन में तर्क: किसान संगठनों और पर्यावरण समर्थकों का कहना है कि गन्ना, मक्का से इथेनॉल बनने से उन्हें सीधा फायदा होगा और कार्बन उत्सर्जन घटेगा।
विरोध में 3 बड़े सवाल:
पुरानी गाड़ियों का क्या? भारत में 60% से ज्यादा दोपहिया 2020 से पहले के हैं।
माइलेज: इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी पेट्रोल से कम है, इसलिए थ्योरी में माइलेज 2-6% कम हो सकता है, कंपनियां इसे मानती भी हैं।
विकल्प खत्म: पहले E10 और E20 दोनों उपलब्ध थे, अब सिर्फ E20 अनिवार्य होने से उपभोक्ता के पास चॉइस नहीं बची।
फिलहाल स्थिति यह है कि सरकार पीछे हटने के मूड में नहीं है। पंपों पर अब E20 ही मिलेगा, और सरकार इसे किसान हित और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का बड़ा सुधार बता रही है, जबकि सोशल मीडिया पर #E20Failed और #EthanolPetrol ट्रेंड के जरिए बहस जारी है।
जन चौपाल 36 की बात
आपको पंप पर E20 मिला तो आपकी गाड़ी में कोई फर्क लगा क्या? माइलेज या स्टार्टिंग में बदलाव देखा आपने?
जो भी है,, ईरान अमेरिका तनाव के बीच जो भी निर्णय देशहित में लिया जायेगा उसे सबको स्वीकार करना है।
- Advertisement -
- Advertisement -