बिजली बिल में करंट – महंगाई की मार के बीच बिजली का एक और झटका
संपादकीय लेख 11 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ विद्युत पावर वितरण कंपनी ने छत्तीसगढ़ की जनता को झटका देते हुए जुलाई माह में ही बढ़ते बिल का भारीपन दिखा दिया।जुलाई माह का बिजली बिल हाथ में आते ही छत्तीसगढ़ के आम घरों में एक ही चर्चा है – बिल फिर बढ़ गया।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग का 15 जून का आदेश भले ही कागजों पर पुराना हो, लेकिन उसका असली दर्द अब 1 जुलाई से लागू होने के बाद जनता की जेब पर दिखने लगा है। औसतन 6.23 प्रतिशत की यह बढ़ोतरी, जिसे सरकार 24 प्रतिशत की मांग के मुकाबले राहत बता रही है, जमीनी हकीकत में राहत नहीं, बल्कि बोझ ही है।
आम जनता पहले से ही बढ़ती महंगाई से त्रस्त है। आटा, दाल, तेल, सब्जी से लेकर बच्चों की किताबों तक हर वस्तु के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे समय में जब सरकार से उम्मीद थी कि वह घर के बुनियादी खर्चों को नियंत्रित करेगी, बिजली जैसी मूलभूत आवश्यकता पर दाम बढ़ाकर सरकार ने घरों पर एक और बोझ लाद दिया है। औसत दर 6.71 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच जाना छोटे परिवारों, किसानों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए सीधा मासिक बजट बिगाड़ने वाला फैसला है।
सरकार का प्रयास बिजली बिल को रोकने या वैकल्पिक राहत देने की ओर कहीं दिखाई नहीं दे रहा। वितरण कंपनी की 24 प्रतिशत की मनमानी मांग को खारिज करना कोई उपलब्धि नहीं है, क्योंकि 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी तब अन्याय है जब आय नहीं बढ़ रही। अस्पतालों और आदिवासी अंचलों में रियायत की बात कहकर पूरे प्रदेश के मध्यम वर्ग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आज जरूरत इस बात की थी कि सरकार सौर ऊर्जा, बिजली चोरी पर रोक और प्रशासनिक खर्चों में कटौती कर उपभोक्ताओं को राहत देती। लेकिन आसान रास्ता अपनाते हुए सीधे जनता की जेब पर हाथ डाला गया। यदि हर महीने इसी तरह महंगाई का करंट लगता रहा, तो छत्तीसगढ़ का आम आदमी बचत क्या, अपना घर चलाएगा कैसे?
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