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Thursday, July 9, 2026

किरंदुल वार्ड-05 में कथित अतिक्रमण: नागरिकों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की

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न्यूज़ डेस्क/09/07/2026 — रिपोर्ट: रवि सरकार

किरंदुल नगर के वार्ड क्रमांक 05 में मुख्य मार्ग पर कथित अवैध कब्जा और निर्माण को लेकर स्थानीय नागरिकों और प्रभावित परिवारों में तीखी नाराजगी फैल गई है।

यहां के लोगों का कहना है कि गौरव पथ के निर्माण के दौरान जिन परिवारों के घर, दुकान और रोजगार प्रभावित हुए थे, वे पिछले 5–6 वर्षों से नगर पालिका परिषद व प्रशासन से सहायता और पुनर्वास की प्रतीक्षा में हैं। इसी पेंडिंग शिकायत के बीच अब वार्ड-05 में विवादित निर्माण की खबरें सामने आने से असंतोष और भी गहरा गया है।

जनता की मुख्य चिंताएँ
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उक्त स्थल पहले से आवागमन के रास्ते के रूप में उपयोग में आता था। यदि यह सत्य पाया जाता है तो निजी निर्माण से आम जनता की सुविधा प्रभावित हो सकती है।

सरकारी सुविधाओं पर प्रभाव:
लोगों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में आंगनबाड़ी, सरकारी राशन दुकान और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े निर्माणों के समय भी विवाद उठ चुके हैं।

गौरव पथ पीड़ितों की व्यथा:
जिन परिवारों ने भू-संपत्ति और आजीविका खोई, उन्हें अभी तक समुचित सहायता नहीं मिली है; इसी वजह से कोई भी नया निर्माण उनकी भावनाओं को और ठेस पहुंचाता है।

प्रशासनिक पारदर्शिता की मांग:
नागरिकों ने जमीन की वास्तविक स्थिति, दस्तावेजों की वैधता और दी गयी अनुमति से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है।

पार्षद के बयान का सन्दर्भ
वार्ड पार्षद यशोदा चुन्नम के कथन को कुछ लोगों ने इस विवाद का संकेत माना है। पार्षद के बयान के अनुसार संबंधित भूमि को लेकर पहले भी मतभेद रहे हैं, जिसके कारण क्षेत्र में जनभावना और असंतोष प्रकट हो रहा है। नागरिकों का कहना है कि भूमि से जुड़े दावों की सत्यता का निर्णय राजस्व अभिलेख, नगर पालिका रेकॉर्ड और प्रशासनिक जांच के बाद ही किया जाना चाहिए।

स्थानीय नागरिकों की मांगें
विवादित भूमि की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराना। निर्माण अनुमति संबंधी दस्तावेजों और उनकी वैधता का सार्वजनिक परीक्षण।
यदि भूमि सरकारी या सार्वजनिक उपयोग की निकली तो नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई।
गौरव पथ परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और राहत के लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण।

प्रभाव और आगे की राह
स्थानीय लोग इस मामले को केवल भूमि-निर्माण विवाद के रूप में नहीं देख रहे; वे इसे प्रशासनिक पारदर्शिता, न्याय और जनविश्वास से जुड़ा मामला मानते हैं। फिलहाल नगर पालिका परिषद या संबंधित प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय या बयान सार्वजनिक नहीं हुआ है। क्षेत्र की जनता और प्रभावित परिवार निष्पक्ष प्रशासनिक जांच व तथ्यात्मक स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


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