जमीनी कार्यकताओं की उपेक्षा : दंतेवाड़ा बीजेपी में कार्यकर्ताओं का फूटा आक्रोश
दंतेवाड़ा 16 जून 2026(रिपोर्ट : रवि सरकार)
भारतीय जनता पार्टी के दंतेवाड़ा जिले में इन दिनों भीतरी असंतोष की आग सुलग रही है। वर्षों तक पार्टी की नींव रखने वाले जमीनी कार्यकर्ता आज खुद को उपेक्षित और अपमानित महसूस कर रहे हैं। जिन्होंने 28-28 साल तक बिना किसी स्वार्थ के गांव-गांव संगठन खड़ा किया, बूथ स्तर तक काम किया और सत्ता से दूर रहने के कठिन दौर में भी पार्टी का हाथ थामे रखा — आज वही कार्यकर्ता संगठन में खुद को अकेला पाने लगे हैं।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संगठन में अनुभव और समर्पण की जगह अब गुटबाजी और व्यक्तिगत पसंद-नापसंद ने ले ली है। संघर्ष करने वाले पीछे धकेले जा रहे हैं, जबकि चहेते चेहरों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सामूहिक नेतृत्व की भावना कमजोर पड़ रही है और जो कार्यकर्ता अपनी बात रखना चाहते हैं, उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।
आने वाले एल्डरमेन चयन को लेकर भी पार्टी के भीतर नाराजगी चरम पर है। पुराने कार्यकर्ताओं को आशंका है कि इस प्रक्रिया में भी पारदर्शिता नहीं रहेगी और फिर से कुछ खास चेहरों को ही अवसर मिलेगा।
नाराज कार्यकर्ताओं का एक ही कहना है — “आत्मसम्मान एक कार्यकर्ता का सबसे बड़ा धन होता है।” यदि बार-बार उसी सम्मान को ठेस पहुंचाई गई, तो इसका असर पूरे संगठन पर पड़ना तय है। राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि जमीनी कार्यकर्ताओं की इस सुलगती नाराजगी को यदि समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले चुनावों में यही चुप्पी संगठन के लिए बड़ी टूट का कारण बन सकती है।
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