धर्म अध्यात्म में पुरुषोत्तम मास 2026: जानिए क्यों इस अद्भुत महीने को कहते हैं “भगवान का अपना मास”
धर्म-आध्यात्म डेस्क – 16/06/2026
हिंदू धर्म अनुसार तिथि काल गणना बहुत सटीक है जिसे वर्तमान Ai युग में भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।हिंदू पंचांग में एक ऐसा दुर्लभ मास आता है जो न सूर्य का है, न चंद्रमा का — यह सीधे भगवान विष्णु को समर्पित है। इसे पुरुषोत्तम मास कहते हैं।
क्या होता है पुरुषोत्तम मास?
हिंदू पंचांग सौर और चंद्र गणना पर आधारित है। इन दोनों के बीच हर कुछ वर्षों में एक अतिरिक्त मास जुड़ जाता है, जिसे सामान्य भाषा में मलमास भी कहते हैं। पुराणों के अनुसार जब यह “अतिरिक्त महीना” भगवान विष्णु की शरण में गया और उन्होंने इसे अपना नाम दिया — तब से यह पुरुषोत्तम मास कहलाया।
माता पार्वती और भगवान शिव की कथा
शास्त्रों में वर्णित एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने स्वयं पुरुषोत्तम मास का व्रत किया। व्रत की समाप्ति पर उन्होंने भगवान शिव से पूछा कि इस व्रत का सम्पूर्ण फल पाने के लिए कौन-सा दान सर्वश्रेष्ठ है?
भगवान शिव ने गहन चिंतन के बाद उत्तर दिया —
“हे पार्वती! इस मास में ‘सम्पुट दान’ का विशेष महत्व है। काँसे के सम्पुट में 30 मालपुए रखकर, विधिपूर्वक पूजन कर, किसी योग्य ब्राह्मण को अर्पित करो। सामर्थ्य हो तो ऐसे 30 सम्पुटों का दान और भी उत्तम है।”
माता पार्वती ने श्रद्धापूर्वक यही किया और व्रत को पूर्ण किया। यह कथा इस बात का प्रमाण है कि स्वयं देवाधिदेव महादेव भी इस मास की महत्ता स्वीकार करते हैं।
नारद मुनि की जिज्ञासा और भगवान नारायण का उत्तर
जब देवर्षि नारद ने भगवान नारायण से इस मास के रहस्य के बारे में जानना चाहा, तो भगवान ने स्पष्ट कहा कि पुरुषोत्तम मास में किया गया हर पुण्य कार्य कई गुना फलदायी होता है। केवल इस मास की कथा का श्रवण मात्र ही मनुष्य के पापों का नाश करने में सक्षम है।
इस मास में क्या करें?
शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए —
-सत्य बोलें — वाणी की शुद्धता इस मास में सबसे बड़ा धर्म है
– दान करें — अन्न, वस्त्र और धन का दान विशेष फलदायी है
-भगवान श्रीकृष्ण का भजन करें — श्यामवर्ण, पीताम्बरधारी, मुरलीधर का स्मरण कष्टों को दूर करता है
-ब्राह्मणों का सत्कार करें — विद्वानों का आदर इस मास में पुण्य का मार्ग है
– धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें — माहात्म्य का श्रवण, पठन और लेखन तीनों फलदायक हैं
आध्यात्मिक संदेश
पुरुषोत्तम मास केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का एक दुर्लभ अवसर है। जीवन की भागदौड़ में जो समय हम भगवान को नहीं दे पाते, यह मास उसी कमी को पूरा करने का संयोग लेकर आता है।
शास्त्र कहते हैं — “जो इस भारतभूमि में जन्म लेकर भी इस पवित्र मास का लाभ नहीं उठाता, वह जीवनभर अभाव और दुःख के चक्र में भटकता रहता है।”
यह मास कल्पवृक्ष के समान है — जो भी श्रद्धा से इसकी शरण लेता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और वह अंततः गोलोक धाम को प्राप्त होता है।
- Advertisement -
- Advertisement -