मन की बात में गूंजी मल्हार की विरासत और जशपुर के युवा की उड़ान, वैश्विक भारत के केंद्र में दिखा छत्तीसगढ़
न्यूज डेस्क 01 जून 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात के 134वें एपिसोड में इस बार सिर्फ देश की उपलब्धियों की चर्चा नहीं हुई, बल्कि दुनिया के सामने उभरते भारत की तस्वीर भी दिखाई दी। खास बात यह रही कि इस राष्ट्रीय और वैश्विक दृष्टिकोण के केंद्र में छत्तीसगढ़ भी मजबूती से मौजूद रहा।
प्रधानमंत्री ने नीदरलैंड्स यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां चोल काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गईं। यह केवल सांस्कृतिक धरोहर की वापसी नहीं, बल्कि विश्व मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रतीक था। इसी संदर्भ में उन्होंने ज्ञान भारतम् अभियान का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक नगर मल्हार में मिली तीन दुर्लभ ताम्र पट्टिकाओं का जिक्र किया।
यह उल्लेख इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मल्हार की यह खोज पांडुवंशी शासनकाल और महर्षि बालार्जुन के दौर की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी हुई है। एक तरफ भारत अपनी खोई हुई धरोहरों को विदेशों से वापस ला रहा है, तो दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की धरती अपने भीतर छिपे इतिहास के नए अध्याय दुनिया के सामने खोल रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने केवल अतीत की विरासत की बात नहीं की, बल्कि भविष्य की संभावनाओं को भी रेखांकित किया। जशपुर जिले के छोटे से गांव घुइटांगर से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाले युवा धावक अनिमेष कुजूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। सीमित परिस्थितियों से निकलकर वैश्विक पहचान बनाने की यह कहानी आज के युवा भारत की नई तस्वीर प्रस्तुत करती है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जब देश का सर्वोच्च नेतृत्व किसी राज्य की प्रतिभा और सांस्कृतिक धरोहर का उल्लेख करता है, तब वह केवल व्यक्तियों या स्थलों का सम्मान नहीं होता, बल्कि पूरे प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय गौरव से जोड़ने का अवसर बन जाता है।
दरअसल, इस बार की मन की बात ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है—छत्तीसगढ़ अब केवल खनिज संपदा या वनांचल की पहचान तक सीमित नहीं है। यह प्रदेश इतिहास, संस्कृति, खेल प्रतिभा और नई संभावनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक विमर्श में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
मल्हार की मिट्टी से निकली धरोहर हो या जशपुर के युवा की दौड़, दोनों यह संकेत दे रहे हैं कि छत्तीसगढ़ की कहानी अब स्थानीय सीमाओं से निकलकर विश्व पटल तक पहुंच रही है।


